Wednesday, 21 March 2018
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कर्म जो सद्गुण हैं, के बारे में - पत्र - 118
प्रिय लूसीलियस तुम्हारे पत्र में अनेक छोटे-छोटे प्रश्न उठाए गए थे पर अंततः वह एक ही प्रश्न पर आकर ठहर गया। तुमने मुझसे पूछा है कि हमारे मन...
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प्रिय लूसीलियस, जैसा तुम कर रहे हो, वैसा ही करते रहो—अपने हित के लिए स्वयं को मुक्त करो। अपने समय को इकट्ठा करो और बचाकर रखो क्योंकि अब तक...
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प्रिय लूसीलियस, तुमने अपने एक 'मित्र' के हाथ मेरे पास एक पत्र भेजा है जैसाकि तुम उसे कहते हो। लेकिन अगले ही वाक्य में तुम मुझे चेताव...
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प्रिय लूसीलियस मुझे विश्वास है लूसीलियस, कि तुम समझते हो कि दर्शन के बिना कोई भी व्यक्ति न तो वास्तव में सुखी जीवन जी सकता है और न ही ऐसा ...

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