Tuesday, 29 September 2026

थॉर्नटन वाइल्डर के प्रसिद्ध उपन्यास The Bridge of San Luis Rey का हिंदी अनुवाद (भाग तीन: एस्तेबान)

 

भाग तीन: एस्तेबान


एक सुबह सान्ता मारिया रोज़ा दे लास रोज़ास के कॉन्वेंट के दरवाज़े के सामने अनाथ बच्चों के लिए रखी टोकरी में दो जुड़वाँ लड़के पाए गए। दाई के आने से पहले ही उनके नाम रख दिए गए थे, लेकिन ये नाम उनके लिए उतने उपयोगी नहीं थे जितने हममें से अधिकांश लोगों के लिए हमारे नाम होते हैं क्योंकि कोई भी कभी यह नहीं बता सका कि दोनों लड़कों में से कौन, कौन है। यह जानने का कोई उपाय नहीं था कि उनके माता-पिता कौन थे। लेकिन लीमा के गपशप करने वाले लोग, जैसे-जैसे लड़के बड़े होते गए और उन्होंने देखा कि वे कितनी सीधी मुद्रा में रहते हैं और कितने शांत तथा गंभीर हैं, यह घोषणा करने लगे कि वे कास्तील के लोग हैं। वे बारी-बारी से उन्हें तरह-तरह के कुल-चिह्नों से सजे दरवाज़ों पर छोड़ आते। दुनिया में जो व्यक्ति उनका अभिभावक कहलाने के सबसे निकट था, वह कॉन्वेंट की मठाधीश थी। माद्रे मारिया देल पिलार को सभी पुरुषों से घृणा हो गई थी, लेकिन मैनुअल और एस्तेबान से उसे स्नेह हो गया। देर दोपहर वह उन्हें अपने कार्यालय में बुलाती, रसोई से कुछ केक मँगवाती और उन्हें सिड, यहूदा मैकाबियस और हार्लेक्विन के छत्तीस दुर्भाग्यों[1] की कहानियाँ सुनाती। वह उनसे इतना प्रेम करने लगी कि कभी-कभी स्वयं को उनकी काली और त्योरियाँ चढ़ी आँखों में बहुत गहराई तक झाँकते हुए पाती... यह देखने के लिए कि जब वे पुरुष बनेंगे तो उनके भीतर कौन-से गुण प्रकट होंगे। वह सारी कुरूपता, वह सारी आत्महीनता, जो उस संसार को विकृत और भयावह बनाती थी जिसमें वह काम करती थी। वे कॉन्वेंट के आस-पास ही बड़े होते रहे, तब तक जब तक उनकी उपस्थिति समर्पित ननों के लिए हल्का-सा व्यवधान बनने की उम्र से कुछ आगे नहीं निकल गई। इसके बाद वे शहर के लगभग सभी गिरजाघरों की पूजा-वस्तुओं और पवित्र स्थानों से किसी न किसी तरह जुड़े रहने लगे। वे मठों के बगीचों की सारी बाड़ों की छँटाई करते। जहाँ तक संभव होता, हर क्रूस को चमकाते और साल में एक बार अधिकांश गिरजाघरों की छतों पर लगे धार्मिक चित्रों और सजावट को भीगे कपड़े से साफ करते। पूरा लीमा उन्हें अच्छी तरह जानता था। जब कोई पादरी किसी बीमार व्यक्ति के कमरे तक पवित्र धार्मिक वस्तु लेकर तेजी से गलियों से गुजरता तो उसके पीछे धूपदान झुलाता हुआ एस्तेबान या मैनुअल अवश्य दिखाई देता। लेकिन जैसे-जैसे वे बड़े हुए, उनमें धर्मगुरु बनने की कोई इच्छा दिखाई नहीं दी। धीरे-धीरे उन्होंने लिपिक (नकलनवीस) का पेशा अपना लिया। नई दुनिया में छापाखाने बहुत कम थे और लड़कों ने जल्द ही रंगमंच के लिए हास्य नाटकों की प्रतिलिपियाँ तैयार करके, भीड़ के लिए गीतों और गाथाओं की नकल करके तथा व्यापारियों के लिए विज्ञापन लिखकर ठीक-ठाक कमाई करना शुरू कर दिया। सबसे बढ़कर, वे गायक-मंडली के संगीत-निर्देशकों के लिए नकल तैयार करते थे और मोरालेस तथा विट्टोरिया[2] के मोटेट्स[3] की अनगिनत संगीत-प्रतियाँ बनाते थे।

उनका कोई परिवार नहीं था, वे जुड़वाँ थे और उनका पालन-पोषण स्त्रियों ने किया था। इन सब कारणों से वे चुप रहने वाले बन गए थे। अपनी एक-दूसरे से समानता को लेकर उनके भीतर एक अजीब-सी झिझक थी। उन्हें ऐसी दुनिया में रहना पड़ता था जहाँ उनकी समानता हमेशा चर्चा और मज़ाक का विषय बनी रहती थी। उन्हें इसमें कभी कोई हास्य नहीं दिखाई देता था और वे उन अंतहीन मज़ाक को निर्विकार धैर्य के साथ सहते रहते थे। जब उन्होंने पहली बार बोलना सीखा, तभी से उन्होंने अपने लिए एक गुप्त भाषा बना ली थी। ऐसी भाषा जिसका शब्द-भंडार ही नहीं बल्कि व्याकरण भी स्पेनी भाषा पर बहुत कम निर्भर था। वे उस भाषा का प्रयोग केवल तब करते जब वे अकेले होते या फिर बहुत लंबे अंतराल के बाद, किसी अत्यधिक तनाव के क्षण में दूसरों की उपस्थिति में उसे फुसफुसाकर बोलते। लीमा के आर्कबिशप को भाषाविज्ञान में कुछ रुचि थी। वे विभिन्न बोलियों का थोड़ा-बहुत अध्ययन करते थे। उन्होंने लैटिन से स्पेनी और स्पेनी से भारतीय-स्पेनी में होने वाले स्वर तथा व्यंजन परिवर्तनों की एक अत्यंत रोचक सारणी तक तैयार कर रखी थी। वे विचित्र और मनोरंजक भाषाई जानकारियों से भरी नोटबुक जमा कर रहे थे। वे अपने बुढ़ापे के लिए इन्हें सँभालकर रख रहे थे। ऐसे बुढ़ापे की कल्पना करते हुए जब वे सेगोविया[4] के बाहर स्थित अपनी जायदाद पर लौटकर अपना शेष जीवन बिताएँगे। इसलिए जब एक दिन उन्हें जुड़वाँ भाइयों की गुप्त भाषा के बारे में पता चला तो उन्होंने कुछ कलमें तराशी और उन्हें अपने पास बुलवा भेजा। लड़के उनके अध्ययन-कक्ष के आलीशान कालीनों पर अपमानित-से खड़े रहे जबकि आर्कबिशप उनसे उनकी भाषा में ‘रोटी’ और ‘पेड़’, ‘मैं देखता हूँ’ और ‘मैंने देखा’ जैसे शब्दों के बारे में जानकारी निकालने की कोशिश करते रहे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि यह अनुभव उन्हें इतना भयानक क्यों लग रहा था। वे भीतर तक व्याकुल हो उठे। आर्कबिशप के हर प्रश्न के बाद लंबे, स्तब्ध मौन छा जाते और अंततः दोनों में से कोई एक धीरे से बुदबुदाकर उत्तर देता। पादरी को कुछ समय तक लगा कि वे केवल उनके पद और उनके आलीशान कक्ष की भव्यता के कारण भयभीत हैं। लेकिन अंततः, बहुत उलझन में पड़कर, उन्होंने किसी और गहरी अनिच्छा की मौजूदगी को भाँप लिया और उदास होकर उन्हें जाने दिया।

यह भाषा एक-दूसरे के साथ उनकी गहरी एकात्मता का प्रतीक थी। जिस तरह ‘त्याग’ शब्द उस आध्यात्मिक परिवर्तन का पूरा वर्णन नहीं कर सकता, जो क्लक्साम्बुकुआ के सराय में उस रात मार्केसा दे मोंतेमायोर के भीतर आई थी, उसी तरह ‘प्रेम’ भी इन दोनों भाइयों की उस मौन, लगभग लज्जित-सी एकता को व्यक्त करने के लिए अपर्याप्त शब्द है। आखिर वह कैसा संबंध है जिसमें बहुत कम शब्दों का आदान-प्रदान होता हो और वे भी केवल भोजन, कपड़े और काम-काज जैसी बातों के बारे में, जिसमें दोनों व्यक्तियों को एक-दूसरे की ओर देखने तक में एक अजीब-सी झिझक होती हो और जिसमें दोनों के बीच एक मौन समझौता हो कि वे शहर में कभी साथ दिखाई नहीं देंगे और एक ही काम से निकलना हो तो अलग-अलग गलियों से जाएँगे? और फिर भी, इसी के साथ एक-दूसरे की ऐसी भयंकर आवश्यकता मौजूद थी कि उससे चमत्कार उतनी ही सहजता से पैदा होते थे, जितनी सहजता से उमस भरे दिन की विद्युत-भरी हवा बिजली पैदा करती है। स्वयं भाइयों को भी इसका शायद ही एहसास था लेकिन उनके जीवन में टेलीपैथी एक आम घटना थी। जब उनमें से एक घर लौटता तो दूसरा उस समय भी उसके आने का आभास कर लेता, जब उसका भाई कई गलियाँ दूर होता।

अचानक उन्हें लगा कि वे लिखने-नकल करने के काम से ऊब गए हैं। वे समुद्र के किनारे चले गए और जहाज़ों पर सामान चढ़ाने-उतारने का काम करने लगे। उन्हें भारतीय मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने में कोई शर्म नहीं थी। वे प्रांतों के आर-पार बैलगाड़ियाँ हाँकते। फल तोड़ते। नाव खेते और हर समय चुप रहते। इन श्रमसाध्य कामों ने उनके गंभीर चेहरों पर पुरुषोचित और बंजारों-जैसा रूप ला दिया। उनके बाल शायद ही कभी कटते और बालों की उस काली जटाओं के नीचे से उनकी आँखें अचानक ऊपर उठतीं—कुछ चकित और कुछ रूखी-सी। अपने भाई के अलावा पूरी दुनिया उन्हें दूर, अजनबी और शत्रुतापूर्ण लगती थी।

लेकिन अंततः इस एकता पर पहली छाया पड़ी और वह छाया स्त्रियों के प्रेम ने डाली। वे शहर लौट आए थे और फिर रंगमंच के लिए नाटकों की प्रतियाँ तैयार करने लगे थे। एक रात नाटक के प्रबंधक ने यह अनुमान लगाते हुए कि दर्शक कम होंगे, उन्हें मुफ्त प्रवेश दे दिया। भाइयों को वहाँ जो कुछ देखने को मिला, वह उन्हें पसंद नहीं आया। उनके लिए बोलना भी मौन का एक गिरा हुआ रूप था तो कविता, जो बोलने का ही एक और अधिक बिगड़ा हुआ रूप है, कितनी निरर्थक होगी! सम्मान, प्रतिष्ठा और प्रेम की ज्वाला के वे सारे उल्लेख, पक्षियों, अकिलीस और सीलोन के रत्नों से जुड़ी वे सारी उपमाएँ[5], सब उन्हें थका देने वाली लग रही थीं। साहित्य की उपस्थिति में उनकी आँखों के पीछे वही धुँधली-सी समझ दिखाई देती थी जो कुछ समय के लिए किसी कुत्ते की आँखों के पीछे जागती है। फिर भी वे धैर्य से बैठे रहे और चमकती मोमबत्तियों तथा शानदार कपड़ों को देखते रहे। हास्य-नाटक के दृश्यों के बीच पेरिकोले अपने अभिनय की भूमिका से बाहर आई, बारह घाघरे पहन लिए और पर्दे के सामने नाचने लगी। एस्तेबान को अभी कुछ नकल का काम पूरा करना था या उसने ऐसा होने का बहाना किया और वह जल्दी घर चला गया लेकिन मैनुअल वहीं रुका रहा। पेरिकोले के लाल मोज़ों और जूतों ने उस पर अपना प्रभाव डाल दिया था।

दोनों भाई मंच के पीछे की धूल भरी सीढ़ियों पर अपनी पांडुलिपियाँ ऊपर-नीचे लाते-ले जाते रहे थे। वहीं उन्होंने एक चिड़चिड़ी लड़की को देखा था, जो मैले चोलीनुमा वस्त्र में आईने के सामने अपने मोज़े रफ़ू कर रही थी जबकि उसका मंच-निर्देशक उसे याद करने के लिए उसकी पंक्तियाँ ऊँची आवाज़ में पढ़ रहा था। उसने एक क्षण के लिए अपनी अद्भुत आँखों की चमक उन लड़कों पर डाली, लेकिन तुरंत ही यह देखकर उसकी रुचि मनोरंजन में बदल गई कि वे जुड़वाँ हैं। वह उन्हें तुरंत कमरे में खींच लाई और दोनों को अगल-बगल खड़ा कर दिया। बहुत ध्यान से, मनोरंजन के साथ और बिना किसी दया के, उसने उनके चेहरों के एक-एक हिस्से को गौर से देखा। अंततः एस्तेबान के कंधे पर हाथ रखते हुए वह चिल्लाई, “यह वाला छोटा है!” यह बात कई वर्ष पहले की थी और उसके बाद दोनों भाइयों में से किसी ने उस घटना के बारे में फिर कभी नहीं सोचा था।

लेकिन अब से मैनुअल के सारे काम जैसे उसे थिएटर के पास से ही ले जाने लगे। देर रात वह पेरिकोले के मेकअप-कक्ष की खिड़की के नीचे पेड़ों के बीच यूँ ही मंडराता रहता। यह पहली बार नहीं था कि मैनुअल किसी स्त्री से मोहित हुआ था। (दोनों भाइयों के स्त्रियों के साथ संबंध रहे थे, अक्सर, विशेषकर समुद्र-तट के इलाकों में बिताए वर्षों के दौरान। लेकिन वे संबंध सरल थे, सहज थे, लैटिन ढंग के थे।) पहली बार ऐसा हुआ था कि उसकी इच्छा और कल्पना इस तरह अभिभूत हो गई थी। उसने सहज प्रकृति का वह विशेषाधिकार खो दिया था जिसमें प्रेम और सुख एक-दूसरे से अलग रहते हैं। सुख अब खाने की तरह सरल नहीं रह गया था। उसमें प्रेम की जटिलता घुलने लगी थी। अब स्वयं को खो देने की वह पागल प्रक्रिया शुरू हो रही थी। प्रिय व्यक्ति के बारे में अपने नाटकीय विचारों के अलावा हर चीज़ की उपेक्षा और वह उन्मत्त आंतरिक जीवन, जिसका केंद्र केवल पेरिकोले थी। यदि पेरिकोले को इस सबका थोड़ा भी आभास हो जाता तो वह कितनी चकित और घृणा से भर उठती! मैनुअल साहित्य की नकल करके प्रेम में नहीं पड़ा था। कम-से-कम उसके मामले में यह बात लागू नहीं होती कि फ्रांस की सबसे कटु जिह्वा वाले एक व्यक्ति ने पचास वर्ष पहले कहा था कि बहुत-से लोग प्रेम में कभी न पड़ते, यदि उन्होंने उसके बारे में सुना ही न होता। मैनुअल बहुत कम पढ़ता था। वह केवल एक बार थिएटर गया था (और थिएटर में, सबसे बढ़कर, यही धारणा प्रचलित रहती है कि प्रेम एक समर्पण है।) और पेरू के वे सराय-गीत, जिन्हें उसने शायद सुना था, स्पेन के गीतों के विपरीत, आदर्शीकृत स्त्री के रोमानी उपासना-भाव को बहुत कम व्यक्त करते थे। जब वह अपने मन में दोहराता कि वह सुंदर है, धनी है, थका देने वाली हद तक मज़ाकिया है और वायसराय की प्रेमिका है तो उसके ये सभी गुण, जो उसे और भी अप्राप्य बनाते थे, उसके भीतर उठने वाले उस विचित्र और कोमल उत्तेजना-भाव को बुझाने में असमर्थ थे। इसलिए वह अँधेरे में पेड़ों से टिककर खड़ा रहता, अपनी उँगलियों की पोरें दाँतों के बीच दबाए और अपने दिल की तेज़ धड़कनें सुनता रहता।

लेकिन एस्तेबान जो जीवन जी रहा था, वह उसके लिए पहले से ही पर्याप्त था। उसकी कल्पना में किसी नई निष्ठा के लिए कोई जगह नहीं थी। ऐसा इसलिए नहीं था कि उसका हृदय मैनुअल के हृदय से छोटा था बल्कि इसलिए कि उसकी प्रकृति अधिक सरल थी। अब उसने उस रहस्य को जान लिया, जिससे मनुष्य फिर कभी पूरी तरह उबर नहीं पाता कि सबसे पूर्ण प्रेम में भी एक व्यक्ति दूसरे की तुलना में कम गहराई से प्रेम करता है। दो लोग समान रूप से अच्छे, समान रूप से प्रतिभाशाली, समान रूप से सुंदर हो सकते हैं। लेकिन ऐसा कभी नहीं हो सकता कि वे एक-दूसरे से बिल्कुल समान रूप से प्रेम करें। इसलिए एस्तेबान उनके कमरे में टिमटिमाती मोमबत्ती के पास बैठा रहता, अपनी उँगलियों की पोरें दाँतों के बीच दबाए और सोचता रहता कि मैनुअल इतना बदल क्यों गया है और उनके जीवन का पूरा अर्थ ही कहाँ चला गया है।

एक शाम सड़क पर एक छोटा लड़का मैनुअल को रोककर बोला कि पेरिकोले चाहती है कि वह तुरंत उससे मिलने आए। मैनुअल अपने रास्ते से मुड़ गया और थिएटर चला गया। सीधा, गंभीर और निर्विकार भाव से वह अभिनेत्री के कमरे में दाखिल हुआ और खड़ा होकर प्रतीक्षा करने लगा। कैमिला को मैनुअल से एक काम करवाना था और उसे लगा कि इसके लिए पहले थोड़ी चापलूसी ज़रूरी होगी। लेकिन उसने मेज़ पर रखी हुई एक सुनहरे बालों वाली विग को सँवारने के काम से मुश्किल से अपना ध्यान हटाया।

“तुम लोगों के लिए पत्र लिखते हो, है न? मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे लिए एक पत्र लिखो, कृपया। अंदर आओ, कृपया।”

वह दो कदम आगे बढ़ा।

“तुम दोनों में से कोई भी कभी मुझसे मिलने नहीं आता। यह स्पेनी ढंग नहीं है तुम्हारा।” अर्थात, ‘शिष्टाचारपूर्ण’ नहीं है। “तुम कौन हो, मैनुअल या एस्तेबान?”

“मैनुअल।”

“इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम दोनों ही बड़े रूखे हो। तुम दोनों में से कोई भी कभी मुझसे मिलने नहीं आता। मैं यहाँ दिन-भर बैठकर बेवकूफी भरी पंक्तियाँ याद करती रहती हूँ और मेरे पास इन फेरीवालों के अलावा कोई नहीं आता। ऐसा इसलिए है कि मैं एक अभिनेत्री हूँ, है न?”

यह बात बहुत चतुराई से नहीं कही गई थी, लेकिन मैनुअल के लिए यह अकल्पनीय रूप से जटिल थी। वह बस अपने लंबे बालों की छाया से उसे घूरता रहा और उसे अपनी बात आगे बढ़ाने दी।

“मैं तुम्हें अपने लिए एक पत्र लिखने के काम पर रखने वाली हूँ, एक बहुत गुप्त पत्र। लेकिन अब मैं देख सकती हूँ कि तुम मुझे पसंद नहीं करते और तुमसे पत्र लिखवाना ऐसा ही होगा जैसे उसे सभी शराबखानों में ऊँची आवाज़ में पढ़ देना। उस नज़र का क्या मतलब है, मैनुअल? क्या तुम मेरे मित्र हो?”

“हाँ, सेन्योरा।”

“जाओ। एस्तेबान को भेजो। तुम ‘हाँ, सेन्योरा’ भी उस तरह नहीं कहते जैसे कोई मित्र कहता है।”

लंबा मौन। कुछ देर बाद उसने सिर उठाया। “क्या तुम अभी भी यहीं हो, रूखे आदमी?”

“हाँ, सेन्योरा... तुम मुझ पर भरोसा कर सकती हो कि मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करूँगा... तुम भरोसा कर सकती हो...”

“अगर मैं तुमसे अपने लिए एक पत्र या दो पत्र लिखने को कहूँ तो क्या तुम वादा करते हो कि उनमें क्या लिखा है, यह किसी भी इंसान को कभी नहीं बताओगे। यहाँ तक कि यह भी नहीं कि तुमने उन्हें लिखा है?”

“हाँ, सेन्योरा।”

“किसकी कसम खाकर? वर्जिन मैरी की?”

“हाँ, सेन्योरा।”

“और लीमा की संत रोज़ा के हृदय की?”

“हाँ, सेन्योरा।”

“ईश्वर की कसम, मैनुअल, कोई भी तुम्हें देखकर समझेगा कि तुम बैल जितने मूर्ख हो। मैनुअल, मैं तुमसे बहुत नाराज़ हूँ। तुम मूर्ख नहीं हो। देखने में भी मूर्ख नहीं लगते। कृपया हर बार केवल ‘हाँ, सेन्योरा’ मत कहा करो। मूर्ख मत बनो नहीं तो मैं एस्तेबान को बुला भेजूँगी। तुम्हें क्या हुआ है?”

यह सुनकर मैनुअल ने स्पेनी भाषा का सहारा लिया और अनावश्यक जोश के साथ बोल उठा, “मैं वर्जिन मैरी और लीमा की संत रोज़ा के हृदय की कसम खाता हूँ कि पत्र से संबंधित हर बात गुप्त रहेगी।”

“एस्तेबान से भी?” पेरिकोले ने याद दिलाया।

“एस्तेबान से भी।”

“अच्छा, अब बात कुछ बेहतर है।” उसने उसे उस मेज़ पर बैठने का संकेत किया, जिस पर लिखने का सामान पहले से रखा हुआ था। वह पत्र बोल-बोलकर लिखवाती रही और कमरे में इधर-उधर टहलती रही, भौंहें सिकोड़कर, कमर मटकाती हुई। उसने दोनों हाथ कमर पर रखे हुए थे और चुनौती भरे ढंग से अपना शॉल कंधों के चारों ओर कसकर लपेट रखा था।

“कैमिला पेरिकोले महामहिम के हाथ चूमती है और कहती है। नहीं, कागज़ का दूसरा टुकड़ा लो और फिर से शुरू करो। ‘सेन्योरा मिकाएला विलेगास, कलाकार, महामहिम के हाथ चूमती हैं और कहती हैं कि महामहिम की कृपा जिन ईर्ष्यालु और झूठे मित्रों को अपने आस-पास रहने देती है, उनकी शिकार होकर वह अब महामहिम के संदेह और ईर्ष्या को और सहन नहीं कर सकतीं। महामहिम की सेविका ने सदैव महामहिम की मित्रता को महत्व दिया है और न तो कभी उसके विरुद्ध कोई अपराध किया है, न ऐसा करने का विचार ही किया है। लेकिन अब वह उन बदनाम करने वाली बातों का सामना नहीं कर सकतीं, जिन पर महामहिम इतनी आसानी से विश्वास कर लेते हैं। इसलिए सेन्योरा विलेगास, जिन्हें पेरिकोले के नाम से जाना जाता है, महामहिम के वे उपहार, जिन्हें अब वापस नहीं किया जा सकता, छोड़कर बाकी सभी उपहार इसके साथ लौटा रही हैं क्योंकि महामहिम का विश्वास न होने पर महामहिम की सेविका उनमें कोई आनंद नहीं पा सकती।’”

कैमिला कई मिनट तक कमरे में इधर-उधर घूमती रही, अपने विचारों में डूबी हुई। फिर बिना अपने सचिव की ओर देखे उसने आदेश दिया, “दूसरा कागज़ लो। क्या तुम पागल हो गए हो? मेरे लिए फिर कभी किसी बैल को खाने के बारे में सोचने की भी मत कहना। उसने भयानक युद्ध खड़ा कर दिया है। भगवान तुम्हारी रक्षा करे, मेरे बछड़े। शुक्रवार की रात, वही जगह, वही समय। मुझे थोड़ी देर हो सकती है, क्योंकि लोमड़ी पूरी तरह जाग चुकी है। बस, इतना ही।”

मैनुअल उठ खड़ा हुआ।

“तुम कसम खाते हो कि तुमने कोई गलती नहीं की?”

“हाँ, मैं कसम खाता हूँ।”

“यह लो, तुम्हारे पैसे।”

मैनुअल ने पैसे ले लिए।

“समय-समय पर मुझे तुमसे और पत्र लिखवाने होंगे। मेरे चाचा पिओ आम तौर पर मेरे पत्र लिखते हैं। लेकिन इन पत्रों के बारे में मैं नहीं चाहती कि उन्हें पता चले। शुभ रात्रि। ईश्वर तुम्हारे साथ हो।”

“ईश्वर तुम्हारे साथ हो।”

मैनुअल सीढ़ियों से नीचे उतरा और बहुत देर तक पेड़ों के बीच खड़ा रहा... न कुछ सोचते हुए, न हिलते हुए।

एस्तेबान जानता था कि उसका भाई लगातार पेरिकोले के बारे में सोचता रहता है, लेकिन उसे जरा भी संदेह नहीं था कि वह उससे मिलता भी है। अगले दो महीनों में समय-समय पर एक छोटा लड़का बहुत जल्दी में उसके पास आता और पूछता कि वह मैनुअल है या एस्तेबान। जब उसे बताया जाता कि वह केवल एस्तेबान है तो वह कहता कि मैनुअल को थिएटर में बुलाया गया है। एस्तेबान यह मान लेता कि उसे नकल का कोई काम मिला होगा और इसलिए एक रात उनके कमरे में हुई उस मुलाकात के लिए वह बिल्कुल तैयार नहीं था।

लगभग आधी रात हो चुकी थी। एस्तेबान बिस्तर पर जा चुका था और कंबल के भीतर से उस मोमबत्ती को देख रहा था, जिसके पास उसका भाई काम कर रहा था। दरवाज़े पर हल्की-सी दस्तक हुई और मैनुअल ने दरवाज़ा खोलकर एक ऐसी स्त्री को अंदर आने दिया, जिसने अपने चेहरे पर घना घूँघट डाल रखा था। उसकी साँस फूल रही थी और वह घबराई हुई थी। उसने चेहरे से स्कार्फ पीछे हटाया और जल्दी-जल्दी बोली—

“जल्दी, स्याही और कागज़। तुम मैनुअल हो, है न? तुम्हें मेरे लिए अभी एक पत्र लिखना होगा।”

एक क्षण के लिए उसकी नज़र खाट के किनारे से उसे घूरती हुई उन दो चमकीली आँखों पर पड़ी। वह बुदबुदाई, “अम... तुम्हें मुझे माफ़ करना होगा। मुझे मालूम है कि बहुत देर हो गई है। लेकिन आना ज़रूरी था... मुझे आना ही पड़ा।” फिर मैनुअल की ओर मुड़कर उसने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, “यह लिखो, ‘मैं, पेरिकोले, किसी मुलाक़ात की जगह पर किसी का इंतज़ार करने की आदी नहीं हूँ। यह लिख लिया? तुम तो केवल एक चोलो[6] हो और तुमसे अच्छे साँड़ लड़ाने वाले लीमा में भी हैं। मैं आधी कास्तील[7] की हूँ और दुनिया में मुझसे अच्छी अभिनेत्रियाँ नहीं हैं। तुम्हें फिर मुझे इंतज़ार करवाने का अवसर... यह लिख लिया?... नहीं मिलेगा, चोलो। और अंत में हँसूँगी मैं, क्योंकि एक अभिनेत्री भी उतनी जल्दी बूढ़ी नहीं होती जितनी जल्दी एक साँड़ लड़ाने वाला बूढ़ा हो जाता है।’”

छाया में पड़े एस्तेबान के लिए अपने भाई के हाथ पर झुकी हुई कैमिला की तस्वीर और उसके कान में फुसफुसाते हुए उसका दृश्य इस बात का पूरा प्रमाण था कि उनके बीच एक नई आत्मीयता बन चुकी थी। ऐसी आत्मीयता का अनुभव वह स्वयं कभी नहीं कर पाएगा। उसे लगा जैसे वह सिकुड़कर अंतरिक्ष में कहीं खो गया हो... असीम रूप से छोटा, असीम रूप से अनचाहा। उसने प्रेम के उस दृश्य की ओर एक बार और देखा। उस पूरे स्वर्ग की ओर, जिससे वह बाहर कर दिया गया था और फिर अपना चेहरा दीवार की ओर फेर लिया।

कैमिला ने पत्र पूरा होते ही उसे झपटकर उठा लिया, मेज़ पर एक सिक्का सरका दिया और काले फीते, लाल मनकों और उत्तेजित फुसफुसाहटों की आख़िरी सरसराहट के साथ कमरे से चली गई। मैनुअल मोमबत्ती लेकर दरवाज़े से मुड़ा। वह बैठ गया और अपने कानों पर हाथ रखकर, कोहनियाँ घुटनों पर टिकाए रहा। वह उसकी पूजा करता था। वह बार-बार अपने आप से बुदबुदाता रहा कि वह उसकी पूजा करता है। वह इन शब्दों को बार-बार दोहराते हुए उन्हें किसी मंत्र की तरह बना रहा था। ऐसा मंत्र जो उसके विचारों को रोक सके।

उसने अपने मन को एक नीरस-सी लय के अलावा हर चीज़ से खाली कर दिया। और इसी रिक्तता के कारण उसे एस्तेबान की मनःस्थिति का आभास होने लगा। उसे लगा जैसे छाया में से कोई आवाज़ आ रही हो, “जाओ और उसके पीछे जाओ, मैनुअल। यहाँ मत रुको। तुम खुश रहोगे। इस दुनिया में हम सबके लिए जगह है।” फिर यह अनुभूति और भी तीव्र हो गई और उसे एस्तेबान की एक मानसिक छवि दिखाई दी। एस्तेबान बहुत दूर जा रहा था और जाते-जाते बार-बार विदा कह रहा था। मैनुअल भय से भर गया। उस अनुभूति की रोशनी में उसे दिखाई दिया कि दुनिया के बाकी सभी लगाव केवल छायाएँ हैं या बुखार में दिखाई देने वाले भ्रम। यहाँ तक कि माद्रे मारिया देल पिलार भी और पेरिकोले भी। वह यह समझ नहीं पा रहा था कि एस्तेबान का दुख उसके सामने अपने और पेरिकोले में से किसी एक को चुनने की माँग जैसा क्यों प्रकट हो रहा था। लेकिन वह एस्तेबान के दुख को सिर्फ़ दुख के रूप में समझ सकता था। और उसी क्षण उसने सब कुछ उस दुख के लिए त्याग दिया। हालाँकि, यह भी कहा जा सकता है कि हम वास्तव में किसी चीज़ का त्याग तभी करते हैं जब हम जानते हों कि उसे कभी पा नहीं सकते या जब हमारे भीतर की कोई गुप्त बुद्धि हमें बता देती है कि उसे पा लेना हमारे लिए असुविधाजनक या दुखदायी होगा। निश्चय ही एस्तेबान के पास शिकायत करने का कोई ठोस आधार नहीं था। यह ईर्ष्या नहीं थी क्योंकि उनके पहले के स्त्री-संबंधों के दौरान कभी भी उनमें से किसी को यह विचार नहीं आया था कि इससे एक-दूसरे के प्रति उनकी निष्ठा कम हो गई है। बस इतना था कि उनमें से एक के हृदय में किसी नए, विस्तृत और कल्पनाशील लगाव के लिए जगह बची थी जबकि दूसरे के हृदय में ऐसी कोई जगह नहीं थी। मैनुअल इसे पूरी तरह समझ नहीं पा रहा था और जैसा कि हम आगे देखेंगे, उसके भीतर धुँधला-सा यह भाव बना रहा कि उस पर अन्यायपूर्ण रूप से दोष लगाया जा रहा है। लेकिन वह इतना अवश्य समझ गया था कि एस्तेबान पीड़ित है। अपने भीतर उठे आवेग में वह उस भाई को थामे रखने का कोई उपाय खोजने लगा, जो उसे धीरे-धीरे दूर जाता हुआ दिखाई दे रहा था। और तभी, अपनी इच्छा-शक्ति के एक ही निःसंकोच निर्णय से, उसने पेरिकोले को अपने हृदय से निकाल दिया।

उसने मोमबत्ती बुझा दी और अपने बिस्तर पर लेट गया। वह काँप रहा था। उसने ज़ोर देकर सहज भाव से कहा, “बस, अब उस औरत के लिए आख़िरी पत्र लिख दिया। अब वह किसी और दलाल को ढूँढ़ ले। अगर वह कभी यहाँ आए या मेरे बाहर होने पर मुझे बुलाए तो उसे यही बता देना। अच्छी तरह साफ़-साफ़ कह देना। अब मेरा उससे कोई लेना-देना नहीं है।” और यह कहकर वह ऊँची आवाज़ में अपनी शाम की प्रार्थना पढ़ने लगा। लेकिन अभी वह “ए सगिता वॉलअंते इन डाई...” (A sagitta volante in die...)[8] तक ही पहुँचा था कि उसे पता चला कि एस्तेबान उठ चुका है और मोमबत्ती जला रहा है।

“क्या बात है?” उसने पूछा।

“मैं टहलने जा रहा हूँ,” एस्तेबान ने गंभीर स्वर में उत्तर दिया और अपनी कमर का पट्टा कसने लगा।

एक क्षण बाद वह गुस्सा होने का अभिनय करते हुए बोल पड़ा, “तुम्हें... जो अभी कहा, वह मेरे लिए कहने की ज़रूरत नहीं है। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम उसके पत्र लिखते हो या नहीं। तुम्हें मेरी वजह से बदलने की ज़रूरत नहीं है। मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं।”

“सो जाओ, मूर्ख। भगवान, तुम कितने मूर्ख हो, एस्तेबान। तुम्हें क्यों लगा कि मैंने वह बात तुम्हारे लिए कही थी? क्या तुम्हें विश्वास नहीं होता कि जब मैं कहता हूँ कि मेरा उससे कोई संबंध नहीं रहा तो मैं सच कह रहा हूँ? क्या तुम समझते हो कि मैं उसके घटिया पत्र लिखता रहना और उसके बदले पैसे लेना चाहता हूँ?”

“कोई बात नहीं। तुम उससे प्रेम करते हो। तुम्हें मेरी वजह से बदलने की ज़रूरत नहीं है।”

“‘प्रेम करता हूँ उससे?’ प्रेम? तुम पागल हो, एस्तेबान। मैं उससे कैसे प्रेम कर सकता हूँ? मेरे लिए कोई संभावना भी है? क्या तुम्हें लगता है कि अगर कोई संभावना होती तो वह मुझे ये पत्र लिखने को देती? क्या तुम्हें लगता है कि वह हर बार मेज़ पर पैसे सरका देती अगर... तुम पागल हो, एस्तेबान, बस।”

लंबा मौन छा गया। एस्तेबान बिस्तर पर जाने को तैयार नहीं था। वह कमरे के बीचोंबीच मोमबत्ती के पास बैठा मेज़ के किनारे पर हाथ से थपकी देता रहा।

“सो जाओ, मूर्ख!” मैनुअल कंबल के भीतर एक कोहनी के बल उठकर चिल्लाया। वह उनकी गुप्त भाषा में बोल रहा था और उसके हृदय में उठे नए दर्द ने उसके गुस्से के अभिनय को और भी वास्तविक बना दिया था। “मैं ठीक हूँ।”

“मैं नहीं सोऊँगा। मैं टहलने जा रहा हूँ,” एस्तेबान ने अपना कोट उठाते हुए कहा।

“तुम टहलने नहीं जा सकते। दो बज चुके हैं। बारिश हो रही है। तुम इस तरह घंटों बाहर घूमते नहीं रह सकते। देखो, एस्तेबान, मैं तुम्हें कसम खाकर कहता हूँ कि अब उस सब में कुछ भी नहीं बचा। मैं उससे प्रेम नहीं करता। केवल कुछ समय के लिए करता था।”

अब एस्तेबान खुले दरवाज़े की अँधेरी चौखट में खड़ा था। उस अस्वाभाविक आवाज़ में, जिसमें हम अपने जीवन की सबसे बड़ी घोषणाएँ करते हैं, उसने बुदबुदाकर कहा, “मैं तुम्हारे रास्ते में आ रहा हूँ।” और वह जाने के लिए मुड़ा।

मैनुअल अपने बिस्तर से उछल पड़ा। उसका सिर जैसे एक भयंकर शोर से भर गया था। एक ऐसी आवाज़ जो चीख रही थी कि एस्तेबान हमेशा के लिए जा रहा है, उसे हमेशा के लिए अकेला छोड़कर जा रहा है। “भगवान के नाम पर, भगवान के नाम पर, एस्तेबान, यहाँ वापस आओ!”

एस्तेबान वापस आया, बिस्तर पर जाकर लेट गया और कई सप्ताह तक उस बात का फिर कोई उल्लेख नहीं हुआ। अगली ही शाम मैनुअल को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिल गया। पेरिकोले की ओर से एक संदेशवाहक आया और उसे कड़े शब्दों में यह कहकर वापस भेज दिया गया कि मैनुअल अब उसके लिए और कोई पत्र नहीं लिखेगा।

..... .....

एक शाम मैनुअल का घुटना धातु के एक टुकड़े से बुरी तरह कट गया और उसकी चमड़ी फट गई।

दोनों भाइयों में से कोई भी अपने जीवन में कभी एक दिन तक भी बीमार नहीं पड़ा था। और अब मैनुअल पूरी तरह हतप्रभ होकर अपनी टाँग को सूजते हुए देख रहा था और महसूस कर रहा था कि दर्द की लहरें उसके शरीर में उठती और गिरती जा रही हैं। एस्तेबान पास बैठा उसके चेहरे को देखता रहा और यह समझने की कोशिश करता रहा कि भयंकर पीड़ा होती क्या है। आखिर एक आधी रात को मैनुअल को याद आया कि शहर में एक नाई की दुकान के एक बोर्ड पर लिखा था कि उसका मालिक अनुभवी नाई और शल्य-चिकित्सक है। एस्तेबान उसे बुलाने के लिए गलियों में दौड़ पड़ा। उसने दरवाज़ा पीटा। कुछ देर बाद एक स्त्री खिड़की से झुकी और बोली कि उसका पति सुबह वापस आएगा। इसके बाद आने वाले भयावह घंटों में दोनों एक-दूसरे को यह समझाते रहे कि जब डॉक्टर टाँग को देख लेगा, तब सब ठीक हो जाएगा। वह कुछ न कुछ करेगा और मैनुअल एक-दो दिन में, शायद एक दिन में ही, शायद उससे भी कम समय में, फिर शहर में घूमता दिखाई देगा।

नाई आया और उसने कई तरह की औषधियाँ और मरहम लिखे। एस्तेबान को निर्देश दिया गया कि हर घंटे अपने भाई की टाँग पर ठंडे पानी में भिगोए हुए कपड़े रखे। नाई चला गया और दोनों भाई दर्द के कम होने की प्रतीक्षा में बैठ गए। लेकिन जब वे विज्ञान के चमत्कार की प्रतीक्षा करते हुए एक-दूसरे के चेहरे को देखते रहे, दर्द और बढ़ता गया। घंटे-दर-घंटे एस्तेबान अपना टपकता हुआ तौलिया लेकर आता और उन्हें पता चला कि तौलिया रखते ही दर्द सबसे अधिक बढ़ जाता था। दुनिया भर का धैर्य रखने के बावजूद मैनुअल अपने आपको चीखने और बिस्तर पर तड़पकर इधर-उधर फेंकने से रोक नहीं पाता था। रात हो गई और फिर भी एस्तेबान उसी दृढ़ता से प्रतीक्षा करता, देखता और अपना काम करता रहा। नौ बजे, दस बजे, ग्यारह बजे। अब जब तौलिया रखने का समय निकट आता और हर घंटे का समय उन तमाम मीनारों से निकलने वाली मधुर घंटियों से घोषित होता तो मैनुअल एस्तेबान से विनती करने लगता कि वह अपना काम न करे। वह चालाकी का सहारा लेता और कहता कि उसे तो लगभग दर्द महसूस ही नहीं हो रहा। लेकिन एस्तेबान, जिसका हृदय पीड़ा से फटा जा रहा था और जिसके होंठ लोहे की एक रेखा की तरह कस गए थे, कंबल पीछे हटाता और तौलिया ज़ोर से उसकी टाँग पर बाँध देता। धीरे-धीरे मैनुअल प्रलाप करने लगा और इस अवस्था में उसके मुँह से वे सारे विचार निकलने लगे जिन्हें वह सामान्य चेतना में अपने भीतर दबाकर रखता था और वे विचार बढ़े-चढ़े रूप में बाहर आ रहे थे।

अंततः दो बजे, क्रोध और पीड़ा से अपना आपा खोकर और बिस्तर से आधा बाहर लटकते हुए, यहाँ तक कि उसका सिर फर्श से जा टकराया। मैनुअल चिल्लाया, “ईश्वर तुम्हारी आत्मा को सबसे तपते हुए नरक में भेजे! हज़ारों शैतान तुम्हें हमेशा यातना देते रहें, एस्तेबान! ईश्वर तुम्हारी आत्मा को शाप दे... सुन रहे हो?” पहले तो एस्तेबान के शरीर से जैसे सारी हवा निकल गई। वह कमरे से बाहर गलियारे में चला गया और दरवाज़े से टिककर खड़ा हो गया, उसका मुँह और आँखें आश्चर्य से पूरी तरह खुले हुए थे। फिर भी भीतर से उसकी आवाज़ सुनाई देती रही, “हाँ, एस्तेबान, ईश्वर तुम्हारी उस पशु जैसी आत्मा को हमेशा के लिए शाप दे... सुन रहे हो? क्योंकि तुम मेरे और उस चीज़ के बीच आ गए जो अधिकार से मेरी थी। वह मेरी थी, सुन रहे हो? और तुम्हें क्या अधिकार था...” इसके बाद वह पेरिकोले का लंबा और विस्तृत वर्णन करने लगता।

ऐसे उद्गार हर घंटे दोहराए जाते रहे। एस्तेबान को यह समझने में कुछ समय लगा कि उस समय उसके भाई का मन स्पष्ट नहीं था। कुछ क्षणों तक भय से जड़ हो जाने के बाद और इस भय में उसका धर्मपरायण होना भी एक कारण था। वह फिर कमरे में लौट आता और सिर झुकाए अपने कर्तव्य करता रहता।

भोर के करीब उसके भाई का मन कुछ शांत हुआ। (आखिर ऐसी कौन-सी मानवीय पीड़ा है जिसे भोर कुछ कम होती हुई न लगती हो?) ऐसे ही एक शांत अंतराल में मैनुअल ने बिल्कुल शांत स्वर में कहा—

“हे भगवान! अब मुझे बेहतर लग रहा है, एस्तेबान। लगता है ये कपड़े सचमुच अच्छे हैं। तुम देखना। कल मैं उठकर घूम रहा होऊँगा। तुम कई दिनों से सोए नहीं हो। तुम देखना, अब मैं तुम्हें और परेशान नहीं करूँगा, एस्तेबान।”

“इसमें कोई परेशानी नहीं है, मूर्ख।”

“जब मैं तुम्हें वे पुराने कपड़े फिर से रखने से रोकने की कोशिश करूँ तो तुम मेरी बात को गंभीरता से मत लेना, एस्तेबान।”

लंबा मौन। अंततः एस्तेबान ने लगभग सुनाई न देने वाली आवाज़ में कहा—

“मैं सोच रहा था... क्या तुम्हें नहीं लगता कि यह अच्छा होगा अगर मैं पेरिकोले को बुला भेजूँ? वह बस कुछ मिनटों के लिए आकर तुम्हें देख जाए, मेरा मतलब...”

“वह? तुम अभी भी उसके बारे में सोच रहे हो? मैं उसे यहाँ किसी भी हालत में नहीं बुलाना चाहता। नहीं।”

लेकिन एस्तेबान अभी संतुष्ट नहीं हुआ था। उसने अपने अस्तित्व की गहराई से कुछ और शब्द खींचकर बाहर निकाले—

“मैनुअल, तुम्हें अब भी लगता है, है न कि मैं तुम्हारे और पेरिकोले के बीच आ गया था? और तुम्हें याद नहीं कि मैंने तुमसे कहा था कि मुझे कोई आपत्ति नहीं थी। मैं तुम्हें कसम खाकर कहता हूँ कि अगर तुम उसके साथ चले गए होते या कुछ भी ऐसा किया होता तो मुझे खुशी ही होती।”

“तुम उस बात को फिर क्यों उठा रहे हो, एस्तेबान? मैं तुमसे कहता हूँ, भगवान की कसम, मैं उसके बारे में कभी सोचता ही नहीं। वह मेरे लिए कुछ भी नहीं है। तुम यह बात कब भूलोगे, एस्तेबान? मैं तुमसे कहता हूँ, मुझे खुशी है कि चीज़ें जैसी हैं वैसी ही हैं। देखो, जब तुम बार-बार उस बात को उठाते हो तो मुझे गुस्सा आने लगता है।”

“मैनुअल, मैं फिर कभी इसका ज़िक्र नहीं करूँगा। लेकिन जब तुम उन कपड़ों को लेकर मुझ पर गुस्सा होते हो... तुम इस बात पर भी मुझसे नाराज़ हो जाते हो। और तुम उसके बारे में बोलते हो और तुम...”

“देखो, मैं जो कुछ कहता हूँ उसके लिए मैं ज़िम्मेदार नहीं हूँ। उस समय मेरी यह बूढ़ी टाँग बहुत दुखती है, समझे?”

“तो तुम मुझे नरक में जाने का शाप इसलिए नहीं देते कि... तुम्हें ऐसा लगता है कि मैं तुम्हारे और पेरिकोले के बीच आ गया था?”

“मैं तुम्हें शाप दूँ? ... तुम ऐसा क्यों कह रहे हो? तुम पागल हो रहे हो, एस्तेबान। तुम ऐसी बातें सोच रहे हो जो हैं ही नहीं। तुमने कई रातों से नींद नहीं ली है, एस्तेबान। मैं तुम्हारे लिए अभिशाप बन गया हूँ और मेरी वजह से तुम्हारा स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। लेकिन तुम देखोगे, अब मैं तुम्हें ज़्यादा परेशान नहीं करूँगा। मैं तुम्हारी आत्मा को नरक में कैसे भेजने की कामना कर सकता हूँ, एस्तेबान, जब मेरे पास तुम्हारे सिवा है ही कौन? समझो, देखो, जब ये ठंडी पट्टियाँ लगती हैं तो मैं अपने होश खो बैठता हूँ, समझे। तुम जानते हो। उस बात को दो बार मत सोचना। अब इन्हें लगाने का समय हो गया है। मैं एक शब्द भी नहीं कहूँगा।”

“नहीं, मैनुअल, इस बार मैं छोड़ देता हूँ। तुम्हें इससे कोई नुकसान नहीं होगा, मैं बस इस बार नहीं लगाऊँगा।”

“मुझे ठीक होना ही है, एस्तेबान। मुझे जल्दी ही उठकर चलना-फिरना है, जानते हो। इन्हें लगाओ। लेकिन एक मिनट—मुझे क्रूस दे दो। मैं मसीह के रक्त और शरीर की शपथ लेकर कहता हूँ कि अगर मैं एस्तेबान के विरुद्ध कुछ कहूँ तो उसका मेरा कोई मतलब नहीं है। वे बस मूर्खतापूर्ण शब्द हैं, जो मेरे पैर के दर्द के कारण सपने-जैसी हालत में मुँह से निकलते हैं। हे ईश्वर, मुझे फिर से जल्दी स्वस्थ कर दे, आमेन। अब इसे वापस रख दो। हाँ, बस। अब मैं तैयार हूँ।”

“देखो, मैनुअल, सिर्फ इस एक बार अगर मैं इन्हें न लगाऊँ तो तुम्हें कोई नुकसान नहीं होगा, समझे। तुम्हारे लिए अच्छा ही होगा कि इस बार बस इसे छोड़ दें और सब कुछ फिर से न भड़काएँ।”

“नहीं, मुझे ठीक होना ही है। डॉक्टर ने कहा है कि यह करना ज़रूरी है। मैं एक शब्द भी नहीं कहूँगा, एस्तेबान।”

और फिर वही सब दोबारा शुरू हो जाता।

दूसरी रात बगल के कमरे में एक वेश्या ऐसी भाषा सुनकर क्रोध में दीवार पीटने लगी। दूसरी ओर के कमरे में रहने वाला एक पादरी बाहर गलियारे में आकर दरवाज़ा पीटने लगा। पूरी मंज़िल के लोग झुँझलाकर उनके कमरे के सामने जमा हो जाते। सराय का मालिक सीढ़ियाँ चढ़कर आता और ऊँची आवाज़ में अपने मेहमानों से वादा करता कि अगली ही सुबह वह इन दोनों भाइयों को सड़क पर फेंक देगा। एस्तेबान हाथ में मोमबत्ती लिए गलियारे में चला जाता और जितनी देर वे चाहें, उन्हें उस पर अपना गुस्सा उतारने देता। लेकिन इसके बाद वह अपने भाई के सबसे अधिक बेचैनी वाले क्षणों में उसका मुँह अपने हाथ से कसकर दबा देता। इससे मैनुअल का व्यक्तिगत क्रोध एस्तेबान के प्रति और बढ़ जाता और वह पूरी रात बड़बड़ाता रहता।

तीसरी रात एस्तेबान ने पादरी को बुलवाया और विशाल-विशाल परछाइयों के बीच मैनुअल ने अंतिम धार्मिक संस्कार ग्रहण किया और मर गया।

इसके बाद एस्तेबान उस इमारत के पास आने से भी इनकार करने लगा। वह लंबी-लंबी सैर पर निकल जाता, लेकिन कुछ देर बाद भटकता हुआ फिर लौट आता और उस जगह से दो गलियाँ दूर राह चलते लोगों को घूरते हुए खड़ा रहता, जहाँ उसका भाई पड़ा था। सराय का मालिक जब उस पर कोई प्रभाव डाल पाने में असफल रहा और उसे याद आया कि इन लड़कों का पालन-पोषण सान्ता मारिया रोज़ा दे लास रोज़ास के कॉन्वेंट में हुआ था तो उसने माद्रे मारिया देल पिलार को बुलवाया। उन्होंने शांत और दृढ़ता के साथ जो कुछ करना था, सब निर्देश दिया। अंत में वे स्वयं सड़क के मोड़ तक गईं और एस्तेबान से बात की। वह उन्हें अपनी ओर आते देखता रहा। उसकी आँखों में वही लालसा और अविश्वास मिला हुआ था। लेकिन जब वे उसके पास आकर खड़ी हुईं तो वह एक ओर मुड़ गया और दूसरी तरफ देखने लगा।

“मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी मदद करो। क्या तुम अंदर आकर अपने भाई को नहीं देखोगे? क्या तुम अंदर आकर मेरी मदद नहीं करोगे?”

“नहीं।”

“तुम मेरी मदद नहीं करोगे!” उन्होंने कहा। एक लंबा मौन छा गया। अचानक, जब वे अपनी असहायता के साथ वहाँ खड़ी थीं तो कई वर्ष पहले की एक घटना उनके मन में कौंध उठी। दोनों जुड़वाँ भाई, लगभग पंद्रह वर्ष के, उनके घुटनों के पास बैठे थे और वे उन्हें सूली पर चढ़ाए जाने की कथा सुना रही थीं। उनकी बड़ी, गंभीर आँखें उनके होंठों पर टिकी हुई थीं। अचानक मैनुअल ज़ोर से बोल उठा था, “अगर एस्तेबान और मैं वहाँ होते तो हम इसे होने ही नहीं देते।”

“अच्छा, तो अगर तुम मेरी मदद नहीं करोगे, क्या तुम मुझे बता सकते हो कि तुम दोनों में से कौन हो?”

“मैनुअल,” एस्तेबान ने कहा।

“मैनुअल, क्या तुम थोड़ी देर के लिए ऊपर आकर मेरे साथ नहीं बैठोगे?”

लंबे मौन के बाद उसने कहा, “नहीं।”

“लेकिन मैनुअल, प्यारे मैनुअल, क्या तुम्हें बचपन की वह बात याद नहीं, जब तुम मेरे लिए कितने काम किया करते थे? मैं कोई छोटा-सा काम कहती तो तुम शहर के उस पार तक जाने के लिए भी तैयार हो जाते थे। जब मैं बीमार थी तो तुमने रसोइए से कहकर अपना सूप मेरे पास लाने की अनुमति ली थी।” कोई दूसरी स्त्री शायद कहती, “क्या तुम्हें याद है कि मैंने तुम्हारे लिए कितना कुछ किया था?”

“हाँ।”

“मैनुअल, मैंने भी खोया है। मैंने भी... कभी। हम जानते हैं कि ईश्वर ने उन्हें अपने हाथों में ले लिया है....” लेकिन इसका भी कोई असर नहीं हुआ। एस्तेबान अस्पष्ट-सा उसकी ओर मुड़ा और फिर उससे दूर चल पड़ा। लगभग बीस कदम चलने के बाद वह रुक गया और बगल की गली में देखने लगा, बिल्कुल उस कुत्ते की तरह जो दूर जाना तो चाहता है, लेकिन उस मालिक को नाराज़ करने से हिचकता है जो उसे वापस बुला रहा हो।

वे उससे बस इतना ही हासिल कर सके। जब वह भयावह जुलूस शहर से होकर गुजरता, काले हुड और नकाब पहने लोग, दिन के उजाले में जलती मोमबत्तियाँ, ऊँचे-ऊँचे ढेरों में रखी खोपड़ियों का प्रदर्शन और भय पैदा करने वाले भजन तो एस्तेबान समानांतर गलियों से उसका पीछा करता, दूर से उसकी झलकियाँ देखता हुआ, मानो कोई जंगली मनुष्य उसे देख रहा हो।

पूरे लीमा शहर की रुचि भाइयों के इस अलगाव में थी। गृहिणियाँ अपने बालकनियों से कालीन खोलते हुए सहानुभूति से आपस में उसके बारे में फुसफुसातीं। शराबखानों में बैठे पुरुष जब इस विषय का उल्लेख करते तो कुछ देर सिर हिलाते और चुपचाप धूम्रपान करते रहते। अंदरूनी इलाकों से आने वाले यात्री बताते कि उन्होंने एस्तेबान को सूखी पड़ी नदी की तलहटियों के किनारे या प्राचीन जाति के विशाल खंडहरों के बीच भटकते देखा है, उसकी आँखें अंगारों जैसी थीं। एक लामा चराने वाले को वह एक पहाड़ी की चोटी पर खड़ा मिला था। तारों के नीचे ओस से भीगा हुआ, सोया हुआ या मानो सुध-बुध खोए हुए। कुछ मछुआरों ने उसे समुद्र-तट से बहुत दूर पानी में तैरते हुए अचानक देख लिया था। समय-समय पर उसे कोई काम मिल जाता। कभी वह चरवाहा बन जाता, कभी गाड़ीवान। लेकिन कुछ महीनों बाद वह गायब हो जाता और एक प्रांत से दूसरे प्रांत की ओर पैदल निकल पड़ता। फिर भी वह हमेशा लीमा लौट आता। एक दिन वह पेरिकोले के श्रृंगार-कक्ष के दरवाज़े पर दिखाई दिया। ऐसा लगा जैसे वह कुछ कहने वाला है, उसने उसे गंभीरता से देखा और फिर गायब हो गया। एक दिन एक सिस्टर दौड़ती हुई माद्रे मारिया देल पिलार के कार्यालय में पहुँची और खबर दी कि एस्तेबान, जिसे दुनिया मैनुअल समझती थी, कॉन्वेंट के दरवाज़े के आस-पास मंडरा रहा है। माद्रे मारिया देल पिलार जल्दी से सड़क पर निकल आईं। कई महीनों से वे स्वयं से यह पूछती रही थीं कि इस आधे-पागल हो चुके लड़के को फिर से उनके बीच रहने के लिए कैसे तैयार किया जाए। उन्होंने जितना संभव था उतना गंभीर और शांत भाव धारण किया और सड़क वाले दरवाज़े पर आकर धीमे से कहा, “मेरे मित्र,” और उसकी ओर देखा। उसने भी उसी लालसा और अविश्वास भरी दृष्टि से उनकी ओर देखा, जो पहले भी उनके सामने प्रकट हुई थी और काँपता हुआ खड़ा रहा। उन्होंने फिर फुसफुसाकर कहा, “मेरे मित्र,” और एक कदम उसकी ओर बढ़ीं। अचानक एस्तेबान मुड़ा और दौड़ता हुआ वहाँ से गायब हो गया।

माद्रे मारिया देल पिलार लड़खड़ाती हुई अपने मेज़ तक वापस दौड़ीं और घुटनों के बल गिर पड़ीं। क्रोध में उन्होंने कहा, “मैंने बुद्धि के लिए प्रार्थना की और तुमने मुझे कुछ भी नहीं दिया। तुमने मुझे तनिक-सी भी कृपा देना उचित नहीं समझा। मैं तो केवल फर्श साफ करने वाली एक मामूली स्त्री हूँ....” लेकिन अपनी इस धृष्टता के लिए स्वयं को जो प्रायश्चित उन्होंने दिया, उसी दौरान उनके मन में विचार आया कि कैप्टन अल्वाराडो को बुलाया जाए। तीन सप्ताह बाद उन्होंने उससे दस मिनट तक बातचीत की। और अगले ही दिन वह कुस्को के लिए रवाना हो गया, जहाँ कहा जाता था कि एस्तेबान विश्वविद्यालय के लिए कुछ नकल-लेखन का काम कर रहा था।

इन वर्षों में पेरू में एक विचित्र और उदात्त व्यक्तित्व था। यात्री कैप्टन अल्वाराडो। हर तरह के मौसम ने उसके चेहरे और शरीर को झुलसा और सख्त कर दिया था। वह चौक में इस तरह पैर फैलाकर खड़ा रहता, मानो किसी हिलते-डुलते जहाज़ के डेक पर उसके पैर गड़े हों। उसकी आँखें भी विचित्र थीं। वे छोटी दूरी देखने की आदी नहीं थीं। वे बादल से बादल के बीच किसी नक्षत्र की झलक पकड़ने और बारिश में किसी भू-शिरा की रूपरेखा पहचानने की अभ्यस्त थीं। उसका कम बोलना हममें से अधिकांश लोगों को उसकी यात्राओं से पर्याप्त रूप से समझ में आता था, लेकिन मार्केसा दे मोंतेमायोर को इस बारे में कुछ और भी पता था। उसने अपनी बेटी को लिखा था, “कैप्टन अल्वाराडो यह पत्र तुम्हारे पास स्वयं लेकर जा रहा है। मेरी बच्ची, उसे अपने कुछ भूगोलवेत्ताओं से मिलवाना, भले ही इससे वे थोड़े असहज हो जाएँ क्योंकि वह सच्चाई का नायाब हीरा है। उन्होंने जितनी दूर तक यात्राएँ की हैं, उतनी दूर तक यात्रा करने वाला उन्हें फिर कभी नहीं मिलेगा। कल रात उसने मुझे अपनी कुछ यात्राओं के बारे में बताया। कल्पना करो, वह समुद्री घास से भरे समुद्र को चीरता हुआ आगे बढ़ रहा है और जून के महीने में टिड्डियों के झुंड की तरह मछलियों का एक बादल उछालता जा रहा है या फिर बर्फ के द्वीपों के बीच से जहाज़ चला रहा है। ओह, वह चीन जा चुका है और अफ्रीका की नदियों में बहुत ऊपर तक गया है। लेकिन वह केवल साहसिक यात्राएँ करने वाला व्यक्ति नहीं है और न ही उसे नए स्थानों की खोज करने पर कोई विशेष गर्व होता है और न ही वह महज़ व्यापारी है। एक दिन मैंने उससे सीधे-सीधे पूछा कि वह इस तरह का जीवन क्यों जीता है, लेकिन उसने मेरे प्रश्न को टाल दिया। फिर मुझे अपनी धोबिन से वह बात पता चली, जिसे मैं उसके भटकते रहने का कारण समझती हूँ। मेरी बच्ची, उसकी एक संतान थी। मेरी बेटी, उसकी एक बेटी थी। वह इतनी बड़ी थी कि छुट्टी के दिन का खाना पका सके और उसके लिए थोड़ी-बहुत सिलाई कर सके। उन दिनों वह केवल मेक्सिको और पेरू के बीच जहाज़ चलाता था और सैकड़ों बार वह उसे विदा करते या उसके लौटने पर उसका स्वागत करते हुए हाथ हिलाती थी। हम यह जानने का कोई उपाय नहीं कर सकते कि वह उसके आस-पास रहने वाली उन हजारों लड़कियों से अधिक सुंदर या बुद्धिमान थी या नहीं लेकिन वह उसकी थी। मुझे लगता है, तुम्हें यह बात बहुत साधारण और शायद नीच भी लगेगी कि इतने विशाल कद-काठी का कोई महान पुरुष केवल इसलिए दुनिया भर में एक अंधे आदमी की तरह किसी खाली घर में भटकता फिरे कि एक छोटी-सी लड़की उससे छीन ली गई है। नहीं, नहीं, मेरी प्यारी बच्ची, तुम इसे समझ नहीं सकतीं लेकिन मैं समझती हूँ और यह सोचकर मेरा चेहरा पीला पड़ जाता है। कल रात वह मेरे पास बैठा और उसके बारे में बात करता रहा। उसने अपना गाल हाथ पर टिका रखा था और आग में देखते हुए बोला, ‘कभी-कभी मुझे ऐसा लगता है कि वह किसी यात्रा पर गई हुई है और मैं उसे फिर देखूँगा। मुझे ऐसा लगता है कि वह इंग्लैंड में है।’ तुम मुझ पर हँसोगी, लेकिन मुझे लगता है कि वह दोनों गोलार्धों में घूमता रहता है, केवल इस समय को काटने के लिए, जब तक कि उसकी वृद्धावस्था नहीं आ जाती।”

दोनों भाई कैप्टन अल्वाराडो का हमेशा बहुत सम्मान करते थे। उन्होंने थोड़े समय तक उसके लिए काम किया था और उन तीनों का मौन, शेखी बघारने, अपने कर्मों का बहाना बनाने और खोखली भाषणबाज़ी से भरी दुनिया में, अर्थ की एक छोटी-सी गाँठ जैसा था। इसलिए अब जब वह महान यात्री उस अँधेरी रसोई में आया, जहाँ एस्तेबान खाना खा रहा था तो वह अपनी कुर्सी को और पीछे, छाया में खिसका ले गया। फिर भी, दूर से ही, उसे देखकर वह प्रसन्न हुआ। कैप्टन ने खाना खत्म करने तक इस बात का कोई संकेत नहीं दिया कि उसने एस्तेबान को पहचाना भी है या उसे देखा भी है। एस्तेबान बहुत पहले खाना खत्म कर चुका था, लेकिन वह नहीं चाहता था कि उससे कोई बात करे, इसलिए तब तक इंतज़ार करता रहा जब तक कैप्टन उस गुफानुमा कमरे से बाहर न चला जाए। अंत में कैप्टन उसके पास आया और बोला,

“तुम एस्तेबान हो या मैनुअल। तुमने एक बार जहाज़ से कुछ सामान उतारने में मेरी मदद की थी। मैं कैप्टन अल्वाराडो हूँ।”

“हाँ,” एस्तेबान ने कहा।

“कैसे हो?”

एस्तेबान ने कुछ बुदबुदाया।

“मैं अपनी अगली यात्रा पर अपने साथ ले जाने के लिए कुछ मजबूत आदमियों की तलाश कर रहा हूँ।”

एक विराम। “क्या तुम मेरे साथ चलना चाहोगे?” एक और, लंबा विराम। “इंग्लैंड। और रूस.... कड़ी मेहनत। अच्छी मज़दूरी.... पेरू से बहुत दूर।” “तो?”

ऐसा लगता था कि एस्तेबान उसकी बातें सुन ही नहीं रहा था। वह मेज़ पर आँखें टिकाए बैठा रहा। अंत में कैप्टन ने किसी बहरे आदमी से बात करने की तरह अपनी आवाज़ ऊँची की:

“मैंने कहा, क्या तुम मेरी अगली यात्रा पर मेरे साथ चलना चाहते हो....”

“हाँ, मैं चलूँगा,” एस्तेबान ने अचानक उत्तर दिया।

“बहुत अच्छा। बहुत अच्छा। मैं तुम्हारे भाई को भी साथ लेना चाहता हूँ, ज़ाहिर है।”

“नहीं।”

“क्या बात है? क्या वह साथ नहीं आना चाहेगा?”

एस्तेबान ने मुँह फेरते हुए कुछ बुदबुदाया। फिर आधा उठकर बोला, “मुझे अब जाना है। मुझे किसी से किसी काम के बारे में मिलना है।”

“मैं स्वयं तुम्हारे भाई से मिल लेता हूँ। वह कहाँ है?”

“...मर गया,” एस्तेबान ने कहा।

“ओह, मुझे पता नहीं था। मुझे पता नहीं था। मुझे बहुत दुख है।”

“हाँ,” एस्तेबान ने कहा। “मुझे जाना है।”

“हूँ.... तुम दोनों में से कौन हो? तुम्हारा नाम क्या है?”

“एस्तेबान।”

“मैनुअल की मृत्यु कब हुई?”

“ओह, बस... बस कुछ सप्ताह हुए। उसने अपना घुटना किसी चीज़ से टकरा लिया था और... बस कुछ ही सप्ताह पहले।”

दोनों अपनी आँखें फर्श पर टिकाए रहे।

“तुम्हारी उम्र कितनी है, एस्तेबान?”

“बाईस।”

“अच्छा, तो फिर यह तय रहा। तुम मेरे साथ चल रहे हो?”

“हाँ।”

“हो सकता है तुम्हें ठंड की आदत न हो।”

“हाँ, मुझे इसकी आदत है। मुझे अब जाना है। मुझे शहर में किसी से किसी काम के बारे में मिलना है।”

“अच्छा, एस्तेबान। रात के खाने के लिए वापस आ जाना और हम यात्रा के बारे में बात करेंगे। वापस आओ और मेरे साथ थोड़ी शराब पीना, ठीक है? आओगे?”

“हाँ, आऊँगा।”

“ईश्वर तुम्हारे साथ हो।”

“ईश्वर तुम्हारे साथ हो।”

उन्होंने साथ में रात का खाना खाया और तय हुआ कि अगली सुबह वे लीमा के लिए रवाना होंगे। कैप्टन ने उसे खूब शराब पिलाई। शुरू में वे चुपचाप शराब भरते और पीते रहे। फिर कैप्टन जहाज़ों और उनके मार्गों के बारे में बातें करने लगा। उसने एस्तेबान से जहाज़ के सामान और रस्सियों की व्यवस्था तथा मार्गदर्शक तारों के बारे में प्रश्न पूछे। फिर एस्तेबान दूसरी बातों के बारे में बोलने लगा और बहुत ऊँची आवाज़ में बोलता गया:

“जहाज़ पर तुम्हें मुझे हर समय कोई-न-कोई काम देना होगा। मैं कुछ भी करूँगा, कुछ भी। मैं बहुत ऊपर चढ़कर रस्सियाँ ठीक करूँगा और सारी रात पहरा दूँगा क्योंकि जानते हो, वैसे भी मुझे अच्छी नींद नहीं आती। और कैप्टन अल्वाराडो, जहाज़ पर तुम्हें ऐसा दिखाना होगा जैसे तुम मुझे जानते ही नहीं। ऐसा दिखाना जैसे तुम मुझसे सबसे ज़्यादा नफ़रत करते हो। ताकि तुम मुझे हमेशा काम देते रहो। अब मैं मेज़ पर बैठकर लिखता हुआ चुपचाप नहीं रह सकता। और बाकी लोगों को मेरे बारे में... मेरा मतलब है, उसके बारे में... मत बताना...”

“मैंने सुना है, एस्तेबान, कि तुम एक जलते हुए घर में घुस गए थे और वहाँ से किसी को बाहर निकाल लाए थे।”

“हाँ। मुझे कोई जलन-वगैरह नहीं हुई। जानते हो,” एस्तेबान मेज़ पर झुककर बोला, “तुम्हें अपनी जान लेने की इजाज़त नहीं है। जानते हो, तुम्हें इसकी इजाज़त नहीं है। यह बात हर कोई जानता है। लेकिन अगर तुम किसी को बचाने के लिए जलते हुए घर में कूद पड़ो तो वह अपनी जान लेना नहीं होगा। और अगर तुम मटाडोर[9] बन जाओ और साँड़ तुम्हें मार डाले तो वह भी अपनी जान लेना नहीं होगा। बस, तुम्हें जान-बूझकर अपने आपको साँड़ के सामने नहीं डालना चाहिए। क्या तुमने कभी ध्यान दिया है कि जानवर कभी अपनी जान नहीं लेते, यहाँ तक कि जब उन्हें पूरा यक़ीन हो कि वे हारने वाले हैं? वे कभी नदी में नहीं कूदते या ऐसा कुछ नहीं करते, यहाँ तक कि जब उन्हें अपनी हार निश्चित दिखाई देती हो। कुछ लोग कहते हैं कि घोड़े जलती हुई आग में कूद पड़ते हैं। क्या यह सच है?”

“नहीं, मुझे नहीं लगता कि यह सच है।”

“मुझे भी नहीं लगता कि यह सच है। हमारे पास एक बार एक कुत्ता था। अच्छा, मुझे उसके बारे में नहीं सोचना चाहिए। कैप्टन अल्वाराडो, क्या तुम माद्रे मारिया देल पिलार को जानते हो?”

“हाँ।”

“मैं जाने से पहले उन्हें एक उपहार देना चाहता हूँ। कैप्टन अल्वाराडो, मैं चाहता हूँ कि रवाना होने से पहले तुम मुझे मेरी सारी मज़दूरी दे दो। मुझे कहीं भी पैसे की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और मैं अभी उनके लिए एक उपहार खरीदना चाहता हूँ। यह उपहार केवल मेरी ओर से नहीं है। वह... वह...” यहाँ एस्तेबान अपने भाई का नाम लेना चाहता था, लेकिन उसके मुँह से वह नाम निकल नहीं सका। इसके बजाय उसने धीमी आवाज़ में कहा, “उन्हें एक तरह का... उन्हें कभी एक बहुत बड़ा दुख झेलना पड़ा था। उन्होंने ऐसा कहा था। मुझे नहीं मालूम वह कौन था और मैं उन्हें एक उपहार देना चाहता हूँ। औरतें इस तरह की चीज़ को हमारी तरह सह नहीं पातीं।”

कैप्टन ने उससे वादा किया कि वे सुबह कोई चीज़ चुन लेंगे। एस्तेबान देर तक उसी के बारे में बातें करता रहा। अंत में कैप्टन ने देखा कि एस्तेबान मेज़ के नीचे खिसक गया है। वह स्वयं उठकर सराय के सामने वाले चौक में चला गया। उसने एंडीज़ पर्वतमाला की रेखा को देखा और आकाश में हमेशा उमड़ती रहती तारों की धाराओं को देखा। और वहाँ हवा में एक धुँधली-सी आकृति झूल रही थी और उसे मुस्कराकर देख रही थी—वही आकृति, जिसकी चाँदी जैसी आवाज़ हज़ारवीं बार कह रही थी, “ज़्यादा देर के लिए मत जाना। लेकिन जब तुम लौटोगे, तब तक मैं बड़ी लड़की हो जाऊँगी।” फिर वह भीतर गया और एस्तेबान को उठाकर उसके कमरे में ले आया और काफी देर तक बैठकर उसे देखता रहा।

अगली सुबह जब एस्तेबान सीढ़ियों से नीचे आया तो कैप्टन सीढ़ियों के नीचे उसका इंतज़ार कर रहा था।

जब तुम तैयार हो जाओ, हम चल देंगे,” कैप्टन ने कहा।

लड़के की आँखों में वह अजीब चमक फिर लौट आई थी। वह अचानक बोल पड़ा, “नहीं, मैं नहीं आ रहा। आखिरकार मैं नहीं आ रहा।”

“अई! एस्तेबान! लेकिन तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम आओगे।”

“यह असंभव है। मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकता।” और वह सीढ़ियों पर वापस ऊपर जाने लगा।

“एक क्षण यहाँ आओ, एस्तेबान, बस एक क्षण।”

“मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकता। मैं पेरू छोड़ नहीं सकता।”

“मैं तुम्हें एक बात बताना चाहता हूँ।”

एस्तेबान सीढ़ियों के नीचे वापस आ गया।

“माद्रे मारिया देल पिलार के उस उपहार का क्या हुआ?” कैप्टन ने धीमी आवाज़ में पूछा। एस्तेबान चुप रहा और पहाड़ों की ओर देखता रहा। “तुम वह उपहार उनसे वापस तो नहीं ले लोगे? वह उनके लिए बहुत मायने रख सकता है... तुम जानते हो।”

“ठीक है,” एस्तेबान ने ऐसे बुदबुदाते हुए कहा, मानो इस बात का उस पर गहरा प्रभाव पड़ा हो।

“हाँ। इसके अलावा, समुद्र पेरू से बेहतर है। तुम लीमा और कुस्को और उनके बीच की राह को जान चुके हो। अब तुम्हें इनके बारे में और कुछ जानना बाकी नहीं है। तुम देख रहे हो, तुम्हें समुद्र ही चाहिए। और फिर, नाव पर हर मिनट तुम्हारे पास करने के लिए कोई-न-कोई काम होगा। मैं इसका ध्यान रखूँगा। जाओ, अपना सामान ले आओ और हम चलेंगे।”

एस्तेबान कोई निर्णय लेने की कोशिश कर रहा था। हमेशा मैनुअल ही फैसले किया करता था और स्वयं मैनुअल को भी कभी इससे बड़ा निर्णय लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ा था। एस्तेबान धीरे-धीरे ऊपर की सीढ़ियाँ चढ़ गया। कैप्टन उसके लिए इंतज़ार करता रहा और इतना लंबा इंतज़ार किया कि अंततः वह आधी सीढ़ियाँ चढ़ गया और सुनने लगा। पहले तो शांति थी। फिर कई तरह की आवाज़ें सुनाई दीं, जिन्हें उसकी कल्पना ने तुरंत पहचान लिया। एस्तेबान ने एक बीम के आस-पास का पलस्तर खुरचकर हटा दिया था और उसके चारों ओर एक रस्सी कस रहा था। कैप्टन सीढ़ियों पर काँपता हुआ खड़ा रहा। “शायद यही बेहतर है,” उसने स्वयं से कहा। “शायद मुझे उसे अकेला छोड़ देना चाहिए। शायद उसके लिए यही एकमात्र संभव रास्ता है।” तभी एक और आवाज़ सुनाई दी तो वह दरवाज़े पर झपटा, उसे धक्का देकर कमरे में जा गिरा और लड़के को पकड़ लिया। “चले जाओ,” एस्तेबान चिल्लाया। “मुझे अकेला छोड़ दो। अभी अंदर मत आओ।”

एस्तेबान मुँह के बल फर्श पर गिर पड़ा। “मैं अकेला हूँ, अकेला, अकेला,” वह चिल्लाया। कैप्टन उसके ऊपर खड़ा था। उसका बड़ा, सादा चेहरा पीड़ा से धूसर धारियों से भर गया था। वह अपने जीवन के उन्हीं पुराने घंटों को फिर से जी रहा था। समुद्र के ज्ञान को छोड़ दें तो वह दुनिया का सबसे अनाड़ी वक्ता था, लेकिन कुछ ऐसे क्षण होते हैं जब साधारण-सी बात कहने के लिए भी बहुत साहस चाहिए होता है। उसे विश्वास नहीं था कि फर्श पर पड़ा हुआ वह व्यक्ति उसकी बात सुन भी रहा है या नहीं, फिर भी उसने कहा, “हम जितना कर सकते हैं, उतना करते हैं। हम आगे बढ़ते रहते हैं, एस्तेबान, जितना हमसे हो सके उतना। यह हमेशा नहीं रहेगा, जानते हो। समय बीतता रहता है। तुम्हें यह देखकर आश्चर्य होगा कि समय किस तरह बीत जाता है।”

वे लीमा के लिए रवाना हो गए। जब वे सैन लुइस रे के पुल तक पहुँचे तो कुछ माल को पुल से पार कराने की देख-रेख करने के लिए कैप्टन नीचे बहती धारा के पास उतर गया। लेकिन एस्तेबान पुल पर चला गया और पुल के साथ ही गिर पड़ा।

 



[1] Cid (सिड) — स्पेन के मध्ययुगीन वीर योद्धा रोद्रिगो दीआस दे वीवार (Rodrigo Díaz de Vivar) का प्रसिद्ध उपनाम, एल सिड (El Cid)। स्पेनी साहित्य में वह एक महान वीर और योद्धा के रूप में प्रसिद्ध है। उपन्यास में इसका संदर्भ स्पेनिश वीरता/नायकत्व से जुड़ा है।

 Judas Maccabeus (जूडस मैकाबी) — दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का यहूदी योद्धा और नेता। उसने सेल्यूसिड साम्राज्य के विरुद्ध यहूदी विद्रोह का नेतृत्व किया और यरूशलम के मंदिर को पुनः प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मैकाबी (Maccabeus) का अर्थ लगभग “हथौड़ा” माना जाता है। वह यहूदी इतिहास में वीर योद्धा के रूप में प्रसिद्ध है।

The thirty-six misfortunes of Harlequin — “हार्लेक्विन के छत्तीस दुर्भाग्य।” हार्लेक्विन यूरोपीय, विशेषकर इटालवी कोम्मेदिया देल्ल'आर्ते (Commedia dell’arte) का एक प्रसिद्ध हास्य पात्र है, जो अक्सर चतुर, शरारती और विपत्तियों में फँसने वाले व्यक्ति के रूप में दिखाई देता है। “छत्तीस दुर्भाग्य” उसके साथ होने वाली लगातार मुसीबतों की हास्यपूर्ण अतिशयोक्ति है।

[2]पुनर्जागरण काल के प्रसिद्ध स्पेनी संगीतकार, जिन्होंने अनेक धार्मिक संगीत-रचनाएँ लिखीं

[3] चर्च में गाए जाने वाले बहुध्वनिक (polyphonic) धार्मिक भजन/गायन-रचनाएँ

[4] स्पेन का एक ऐतिहासिक शहर है, जो मैड्रिड के उत्तर-पश्चिम में स्थित है

[5] अकिलीस की वीरगाथाओं और सीलोन के बहुमूल्य रत्नों जैसी चीज़ों का वर्णन/चर्चा अब उबाऊ और थकाऊ लगने लगी थी

[6] स्पेनिश/लैटिन अमेरिकी संदर्भ का शब्द है। ऐतिहासिक रूप से इसका प्रयोग मिश्रित या स्वदेशी (Indigenous) मूल के व्यक्ति के लिए किया जाता रहा है, और कई संदर्भों में यह अपमानजनक या तिरस्कारपूर्ण भी हो सकता है

[7] स्पेन के Castile (कैस्टिल) क्षेत्र से संबंधित व्यक्ति है

[8] “उस तीर से जो दिन के समय उड़ता है।” यह बाइबल के साम 91 (भजन संहिता 91) से संबंधित है। लैटिन वल्गेट में वाक्य है 

[9] वह व्यक्ति जो बुल फाइटिंग में बैल के साथ अंतिम चरण में लड़ता है

थॉर्नटन वाइल्डर के प्रसिद्ध उपन्यास The Bridge of San Luis Rey का हिंदी अनुवाद (भाग तीन: एस्तेबान)

  भाग तीन : एस्तेबान एक सुबह सान्ता मारिया रोज़ा दे लास रोज़ास के कॉन्वेंट के दरवाज़े के सामने अनाथ बच्चों के लिए रखी टोकरी में दो जुड़वा...