Tuesday, 10 September 2019

खिड़कियाँ


तहे दिल से उस लेखिका से माफ़ी मांगती हूँ. मैं उनका नाम भूल रही हूँ. मैं उस समय बहुत छोटी थी. लेखिका ने कहीं किसी इंटरव्यू में यह बात कही थी कि जब वह लिखने बैठती हैं तब घर के खिड़की दरवाज़े खोलकर लिखती हैं. ताकि बाहर के विचार अन्दर आ सकें और अन्दर के विचार बाहर.  


खिड़कियाँ क्यों होनी चाहिए घरों में
क्योंकि जो बहुत अरसे से क़ैद है और उसके भागने का रास्ता यही है
ताकि जो उड़ना चाहता है वह खिड़की से आसमान की थाह ले सके
ताकि फेरी वालों की आवाज़ें घरों में बिना पूछे घुस सकें
ताकि दो जोड़ी आँखें रसोई से बाहर देख सकें
ताकि छौंक और छाती की तीखी और तल्ख़ मैली हवा बाहर जा सके
ताकि आदान-प्रदान हो सके
ताकि चार जोड़ी मोहब्बत वाली आँखें एक दूसरे को कुछ पलों के लिए ही सही पर देख सकें
ताकि बारिश की बूँद अपना भी इस धरती पर एक घर तलाश सके
ताकि बारिश के ही कुछ छींटें जो धरती पर इंक़लाब करने आए हैं वे ज़बरन घर में घुस कर ठंडक पहुंचा सकें
ताकि किसान अपनी फ़सल के जन्म को पोषित होता हुआ देख सकें
ताकि कोई चिड़िया आकर कोई बात कह सके
ताकि गली की गूँज सुनी जा सके
ताकि ऑक्सीजन पीया जा सके
ताकि...



   

No comments:

Post a Comment

The War Against Sleep: The Philosophy of Gurdjieff का हिंदी अनुवाद (अध्याय सात: गुर्जिएफ़ बनाम उस्पेन्स्की?)

  7— गुर्जिएफ़ बनाम उस्पेन्स्की ? बीएलज़ेबब्स टेल्स टू हिज़ ग्रैंडसन ( Beelzebub’s Tales to His Grandson ) , जिसे गुर्जिएफ़ अपने शिक्षण ...