Subscribe to:
Post Comments (Atom)
जीवन-दर्शन के संदर्भ में -- पत्र - 19
प्रिय लूसीलियस जब भी तुम्हारा कोई पत्र मुझे प्राप्त होता है, मैं अत्यन्त प्रसन्न हो उठता हूँ क्योंकि वे मुझे बड़ी आशा से भर देते हैं। अब व...
-
प्रिय लूसीलियस, जैसा तुम कर रहे हो, वैसा ही करते रहो—अपने हित के लिए स्वयं को मुक्त करो। अपने समय को इकट्ठा करो और बचाकर रखो क्योंकि अब तक...
-
प्रिय लूसीलियस, तुमने अपने एक 'मित्र' के हाथ मेरे पास एक पत्र भेजा है जैसाकि तुम उसे कहते हो। लेकिन अगले ही वाक्य में तुम मुझे चेताव...
-
प्रिय लूसीलियस मुझे विश्वास है लूसीलियस, कि तुम समझते हो कि दर्शन के बिना कोई भी व्यक्ति न तो वास्तव में सुखी जीवन जी सकता है और न ही ऐसा ...


No comments:
Post a Comment