Saturday, 3 October 2026

थॉर्नटन वाइल्डर के प्रसिद्ध उपन्यास The Bridge of San Luis Rey का हिंदी अनुवाद (भाग चार: अंकल पियो)

 

भाग चार: अंकल पियो

By Louisa Starr Canziani

अपने एक पत्र (XXIX उनतीसवें पत्र) में मार्केसा दे मोंतेमायोर अंकल पियो, “हमारे बूढ़े हार्लेक्विन,” से अपने ऊपर पड़े प्रभाव का वर्णन करने की कोशिश करती है, “मैं सारी सुबह हरी बालकनी में बैठी तुम्हारे लिए एक जोड़ी चप्पल बुनती रही, मेरी बच्ची। सुनहरी तार का काम मेरा पूरा ध्यान नहीं खींच रहा था, इसलिए मैं अपने पास दीवार में रहने वाली चींटियों के एक दल की गतिविधियाँ भी देख पा रही थी। दीवार के उस पार कहीं वे बड़े धैर्य से मेरे घर को नष्ट कर रही थीं। हर तीन मिनट में एक छोटा-सा मजदूर दो तख्तों के बीच से बाहर आता और लकड़ी का एक छोटा-सा कण नीचे फर्श पर गिरा देता। फिर वह मेरी ओर अपनी स्पर्शिकाएँ हिलाता और फुर्ती से अपने रहस्यमय गलियारे में पीछे की ओर चला जाता। इस बीच उसके तरह-तरह के भाई-बहन एक निश्चित राजमार्ग पर आगे-पीछे दौड़ते रहते थे। वे रुककर एक-दूसरे के सिर की मालिश करते या अगर वे जो संदेश लेकर जा रहे होते, वह बहुत महत्वपूर्ण होता तो वे गुस्से से मालिश करने या करवाने से इनकार कर देते। और उसी क्षण मुझे अंकल पियो का खयाल आया। क्यों? उसके अलावा और कहाँ मैंने वह बिल्कुल वैसी ही हरकत देखी थी, जिससे वह गुजरते हुए किसी अबे[1] (abbé) या किसी दरबारी के नौकर को रोक लेता है और अपने होंठ उसके कान से लगाकर उसमें फुसफुसाने लगता है? और सचमुच, दोपहर होने से पहले मैंने उसे उन रहस्यमय कामों में से किसी एक के लिए जल्दी-जल्दी जाते हुए देख लिया। चूँकि मैं दुनिया की सबसे आलसी और मूर्ख स्त्रियों में से हूँ, इसलिए मैंने पेपिता को मेरे लिए नूगा[2] (nougat) का एक टुकड़ा लाने भेजा और उसे चींटियों के उस राजमार्ग पर रख दिया। उसी तरह मैंने कफ़े पिज़ारो (Café Pizarro) में भी संदेश भिजवाया कि यदि अंकल पियो सूर्यास्त से पहले वहाँ आए तो उसे मेरे पास भेज दें। मैं उसे वह पुराना, मुड़ा हुआ सलाद फोर्क दूँगी, जिसमें टरक्वॉइज़[3] जड़ा हुआ है और बदले में वह मेरे लिए उस नई गाथा की एक प्रति ले आना, जिसे इन दिनों हर कोई उस ओल—व—स के द—क—आ के बारे में गा रहा है। मेरी बच्ची, तुम्हें हर चीज़ सबसे अच्छी मिलेगी और सबसे पहले मिलेगी।”

और अगले पत्र में वह लिखती है, “मेरी प्यारी बच्ची, अंकल पियो दुनिया का सबसे मनमोहक आदमी है। तुम्हारे पति को छोड़कर। यानी वह दुनिया का दूसरा सबसे मनमोहक आदमी है। उसकी बातचीत अत्यंत मोहक है। अगर वह इतना बदनाम न होता तो मैं उसे अपना सचिव बना लेती। वह मेरे सारे पत्र लिख सकता था और आने वाली पीढ़ियाँ मुझे बुद्धिमती और हाज़िरजवाब कहकर पुकारतीं। लेकिन अफसोस, बीमारी और बुरी संगति ने उसे इतना घिस डाला है कि मुझे उसे उसके अँधेरे अधोलोक के हवाले ही छोड़ना पड़ेगा। वह केवल चींटी जैसा ही नहीं है, वह मैले-सने ताश के पत्तों की गड्डी जैसा भी है। और मुझे संदेह है कि पूरा प्रशांत महासागर भी उसे धोकर फिर से सुगंधित और स्वच्छ नहीं कर सकता। लेकिन वह कितनी दिव्य स्पैनिश बोलता है और उसमें कितनी अद्भुत बातें कहता है! यही तो मिलता है किसी थिएटर के आस-पास मंडराते रहने और काल्देरोन[4] के सिवा किसी और की बातचीत न सुनने से। अफसोस, मेरी बच्ची, इस दुनिया को क्या हो गया है कि वह ऐसे प्राणी के साथ इतना बुरा व्यवहार करती है! उसकी आँखें उस गाय की आँखों जितनी उदास हैं, जिसे उसके दसवें बछड़े से अलग कर दिया गया हो।”

सबसे पहले तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि यह अंकल पियो, कैमिला पेरिकोले की सेवक थे। वे उसके गायन-गुरु भी थे, उसका केश-सज्जाकार, मालिश करने वाला, पुस्तकें पढ़कर सुनाने वाला, छोटे-मोटे कामों के लिए दौड़-धूप करने वाला, बैंकर और अफवाहों में तो उसका पिता भी बताया जाता था। मिसाल के लिए, वह उसके संवाद और भूमिकाएँ उसे सिखाता था। शहर में यह फुसफुसाहट भी थी कि कैमिला पढ़-लिख सकती है। यह प्रशंसा निराधार थी। उसके लिए पढ़ने और लिखने का काम अंकल पियो ही करते थे। नाट्य-मौसम के चरम पर नाट्य-मंडली सप्ताह में दो या तीन नए नाटक प्रस्तुत करती थी और हर नाटक में पेरिकोले के लिए एक लंबा और अलंकृत संवाद-भाग होता था। इसलिए केवल उसे कंठस्थ करने का काम भी कोई मामूली काम नहीं था।

पिछले पचास वर्षों में पेरू एक सीमांत प्रदेश से निकलकर पुनर्जागरण की अवस्था में पहुँच चुका था। संगीत और रंगमंच के प्रति उसका आकर्षण अत्यंत प्रबल था। लीमा अपने पर्व-दिवसों को इस तरह मनाता था कि सुबह टॉमास लुइस दे विक्टोरिया[5] का मिस्सा[6] सुना जाता और शाम को काल्देरोन की चमकदार काव्य-रचनाएँ रंगमंच पर प्रस्तुत होतीं। यह सच है कि लीमा के निवासियों को अत्यंत सुंदर हास्य-नाटकों के बीच भी मामूली गीत घुसा देने और अत्यंत गंभीर संगीत में भी कुछ आँसू बहाने वाले प्रभाव जोड़ देने की आदत थी। लेकिन कम-से-कम वे किसी गलत जगह की श्रद्धा के कारण ऊब सहने को तैयार नहीं होते थे। यदि उन्हें हिरोइक कॉमेडी पसंद न आती तो वे बिना झिझक घर पर ही रह जाते और यदि वे पॉलीफोनी[7] संगीत के प्रति उदासीन होते तो उन्हें पहले की प्रार्थना-सभा में जाने से कोई नहीं रोक सकता था। जब आर्चबिशप स्पेन की एक छोटी-सी यात्रा से लौटे, तो पूरा लीमा पूछता रहा, “वे क्या लेकर आए हैं?” आखिरकार यह खबर फैल गई कि वे पालेस्त्रीना, मोरालेस प्रथम और विट्टोरिया की रची हुई मिस्सा और मोटेटों के बड़े-बड़े ग्रंथों के साथ-साथ तिर्सो दे मोलिना, रूइज़ दे अलार्कोन और मोरेतो के पैंतीस नाटक भी लेकर लौटे हैं। उनके सम्मान में नगर की ओर से एक उत्सव आयोजित किया गया। गायकों के विद्यालय और कोमेदिया के ग्रीन रूम में सब्जियों और गेहूँ की भेंटों का अंबार लग गया। हर कोई उन कलाकारों का पेट भरने के लिए उत्सुक था, जो इतनी सुंदर रचनाओं को प्रस्तुत करने वाले थे।

यह वही रंगमंच था, जहाँ कैमिला पेरिकोले ने धीरे-धीरे अपनी ख्याति बनाई। रंगमंच का नाट्य-संग्रह इतना समृद्ध था और प्रॉम्प्टर का बॉक्स इतना भरोसेमंद था कि एक मौसम में बहुत कम नाटक चार बार से अधिक खेले जाते थे। प्रबंधक के पास सत्रहवीं शताब्दी के स्पेनी नाटक-साहित्य का पूरा उत्कर्ष उपलब्ध था। इनमें से बहुत-से नाटक अब हमारे लिए लुप्त हो चुके हैं। अकेले लोपी दे वेगा के ही सौ नाटकों में पेरिकोले अभिनय कर चुकी थी।  उन वर्षों में लीमा में अनेक प्रशंसनीय अभिनेत्रियाँ थीं, लेकिन उनमें से कोई भी उससे बेहतर नहीं थी। नगरवासी स्पेन के रंगमंचों से इतने दूर थे कि उन्हें यह एहसास ही नहीं था कि वह पूरे स्पेनी संसार की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री थी। वे मैड्रिड के उन सितारों की एक झलक पाने के लिए आहें भरते रहते थे, जिन्हें उन्होंने कभी देखा ही नहीं था और जिनके बारे में वे अपनी कल्पना से तरह-तरह की अस्पष्ट श्रेष्ठताएँ गढ़ लेते थे। केवल एक व्यक्ति को निश्चित रूप से मालूम था कि पेरिकोले एक महान अभिनेत्री थी और वह था उसका गुरु, अंकल पियो।

अंकल पियो एक अच्छे कैस्टिलियन कुल में अवैध संतान के रूप में पैदा हुए थे। दस वर्ष की उम्र में वे अपने पिता की हसिएन्दा[8] से भागकर मैड्रिड चले गए और उसका पीछा भी बहुत गंभीरता से नहीं किया गया। इसके बाद वे जीवन भर अपनी बुद्धि और चतुराई के सहारे जीते रहे। उनमें साहसिक जीवन जीने वाले व्यक्ति के छह गुण थे— नाम और चेहरे याद रखने की अद्भुत क्षमता, साथ ही अपना रूप बदल लेने की योग्यता, अनेक भाषाएँ बोलने का हुनर, कभी समाप्त न होने वाली कल्पनाशक्ति, गोपनीयता बरतने की आदत, अजनबियों से बातचीत शुरू कर लेने की कला और उस अंतरात्मा की अनुपस्थिति जो उन सोए हुए अमीरों के प्रति उसकी घृणा से पैदा हुई थी, जिनका वह शिकार करते थे। दस से पंद्रह वर्ष की उम्र तक वह व्यापारियों के लिए पर्चे बाँटता रहे, घोड़ों को थामे खड़ा रहते और गुप्त संदेश पहुँचाने जैसे काम करते रहे। पंद्रह से बीस वर्ष की उम्र तक उन्होंने घूमने वाले सर्कसों के लिए भालुओं और साँपों को प्रशिक्षित किया, खाना पकाया और पंच के पेय तैयार किए, महँगे शराबखानों के प्रवेश-द्वारों के आस-पास मंडराता रहे और यात्रियों के कानों में फुसफुसाकर खबरें पहुँचाता रहे । कभी-कभी ऐसी खबरें भी जो किसी संदिग्ध षड्यंत्र से अधिक निर्दोष होती थीं, जैसे कि किसी अमीर कुलीन परिवार की हालत इतनी खराब हो गई है कि वे अपने चाँदी के बर्तन तक बेचने लगे और अब उसे किसी सुनार की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वे शहर के सभी रंगमंचों से जुड़े रहते और अकेले ही दस आदमियों जितनी जोर से तालियाँ बजा सकते थे। वे तय रकम लेकर बदनामी की बातें फैलाते थे। वे फसलों के बारे में अफवाहें बेचते थे और जमीन की कीमतों के बारे में खबरें भी। बीस से तीस वर्ष की उम्र के बीच ऊँचे-ऊँचे सरकारी और प्रभावशाली लोगों के बीच उनकी सेवाओं की पहचान होने लगी। सरकार उन्हें पहाड़ों में भेजती, जहाँ उनका काम आधे-अधूरे मन से किए जा रहे कुछ विद्रोहों को भड़काना होता ताकि उनके बाद सरकार वहाँ पहुँचकर पूरे जोश के साथ उन विद्रोहों को कुचल सके। उनकी गोपनीयता इतनी गहरी थी कि फ्रेंच पार्टी (French party) भी उसका उपयोग करती थी जबकि उन्हें मालूम था कि औस्ट्रियन पार्टी (Austrian party) भी उसी का उपयोग करती है। प्रिंसेस देज़ उर्सैं (Princesse des Ursins) के साथ उनकी लंबी-लंबी मुलाकातें होती थीं, लेकिन वह महल में मुख्य सीढ़ी से नहीं, पिछली सीढ़ियों से आते-जाते थे। इस दौर तक उसे अब सज्जनों के मनोरंजन की व्यवस्था करने या बदनामी की छोटी-छोटी फसलें बोने की आवश्यकता नहीं रह गई थी।

वे कभी भी किसी एक काम को दो सप्ताह से अधिक नहीं करते थे चाहे उस काम से आगे चलकर कितना ही बड़ा लाभ मिलने की संभावना क्यों न हो। वे सर्कस मैनेजर बन सकते थे, थीऐट्रिकल डायरेक्टर बन सकते थे, पुरानी वस्तुओं का व्यापारी बन सकते थे, इटलिएन रेशम का आयातक बन सकते थे, पैलेस या कथीड्रल में सचिव बन सकते थे, सेना के लिए रसद बेचने वाला व्यापारी बन सकते थे, मकानों और खेतों में सट्टा लगाने वाला बन सकते थे या ऐशो-आराम और मनोरंजन की चीज़ों का व्यापारी बन सकते थे। लेकिन उनके व्यक्तित्व में, बचपन की किसी घटना या बचपन में मिली किसी आरंभिक प्रशंसा के कारण, ऐसा कुछ लिख दिया गया था कि वे किसी चीज़ का मालिक बनने, किसी बंधन में पड़ने या किसी लंबे संबंध के लिए प्रतिबद्ध होने से हिचकते थे। उदाहरण के लिए, यही बात उसे चोर बनने से रोकती थी। उन्होंने कई बार चोरी की थी, लेकिन चोरी से मिलने वाला लाभ इस डर की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं था कि कहीं उसे जेल में बंद न कर दिया जाए। उनमें इतनी चतुराई थी कि वे मौके पर ही दुनिया की किसी भी पुलिस से बच निकल सकते थे, लेकिन अपने दुश्मनों द्वारा उसके बारे में फैलाई जाने वाली चुगलियों से उसकी रक्षा करने वाली कोई चतुराई नहीं थी। इसी तरह, कुछ समय के लिए उसे इंक्विज़िशन के लिए जाँच-पड़ताल करने के काम में भी लगना पड़ा। लेकिन जब उसने अपने कई पीड़ितों को सिर पर हुड डाले ले जाते हुए देखा तो उन्हें लगा कि कहीं वे ऐसी संस्था में तो नहीं फँस रहे, जिसकी गतिविधियों का कोई निश्चित अनुमान ही नहीं लगाया जा सकता।

जब अंकल पियो बीस वर्ष की उम्र के करीब पहुँचे तो उन्हें यह बात काफी स्पष्ट दिखाई देने लगी कि उनके जीवन के तीन उद्देश्य हैं। सबसे पहला था स्वतंत्रता की उनकी आवश्यकता, जो एक विचित्र रूप में ढली हुई थी अर्थात वे विविध रूपों में रहना चाहते थे, गुप्त रहना चाहते थे और सर्वज्ञ होना चाहते थे। वे सार्वजनिक जीवन की प्रतिष्ठाओं और सम्मान को त्यागने के लिए तैयार थे, यदि गुप्त रूप से उन्हें यह अनुभव होता रहे कि वे बहुत दूर से लोगों को अपने से नीचे देखते हैं, उनके बारे में उतना जानते हैं जितना वे स्वयं अपने बारे में नहीं जानते और ऐसा ज्ञान उनके लिए कभी-कभी कर्म में भी बदल जाता, जिससे वे राज्यों और व्यक्तियों के मामलों में एक माध्यम या कर्ता की भूमिका निभाने लगते। दूसरे, वे हमेशा सुंदर स्त्रियों के निकट रहना चाहते थे। उनके प्रति वे हमेशा अच्छे और बुरे, दोनों अर्थों में एक उपासक की तरह रहते थे। उनके निकट रहना उनके लिए साँस लेने जितना ही आवश्यक था। सुंदरता और आकर्षण के प्रति उनकी श्रद्धा ऐसी थी जिसे कोई भी देख सकता था और जिस पर हँस सकता था। रंगमंच, दरबार तथा ऐय्याशी के अड्डों की स्त्रियाँ उनके इस रसिक ज्ञान और पारखी स्वभाव को बहुत पसंद करती थीं। वे उन्हें सताती थीं, उनका अपमान करती थीं, उनसे सलाह माँगती थीं और उनकी इस हास्यास्पद-सी भक्ति से उन्हें एक अजीब तरह का सुकून मिलता था। उनके क्रोध और उनकी क्षुद्रताओं तथा विश्वासपूर्वक बहाए गए आँसुओं को वे बहुत सहते थे। उनकी बस इतनी इच्छा थी कि उन्हें सहज भाव से स्वीकार किया जाए, उन पर विश्वास किया जाए और किसी मित्रवत, कुछ मूर्ख-से कुत्ते की तरह उन्हें उनके कमरों में आने-जाने दिया जाए और उनके लिए पत्र लिखने दिए जाएँ। उनके मन और हृदय को लेकर उनकी जिज्ञासा कभी शांत नहीं होती थी। उन्हें उनसे प्रेम किए जाने की कभी अपेक्षा नहीं रहती थी। कम-से-कम उस शब्द के एक दूसरे अर्थ में तो बिल्कुल नहीं। उस तरह के प्रेम के लिए वे शहर के उन अधिक अँधेरे और अनजान हिस्सों में अपना पैसा लेकर जाते थे। वे हमेशा बेहद अनाकर्षक दिखाई देते थे। मूँछों की एक पतली-सी लकीर, दाढ़ी की एक पतली-सी लकीर और बड़ी, हास्यास्पद-सी, उदास आँखें। वे स्त्रियाँ ही उनका ‘परगना’ थीं। उन्हीं से उन्हें ‘अंकल पियो’ नाम मिला था और जब वे किसी मुसीबत में पड़ती थीं, तभी वे अपने वास्तविक रूप में सबसे अधिक प्रकट होते थे। जब उनका प्रभाव और प्रतिष्ठा छिन जाती तो वे उन्हें पैसे उधार देते। जब वे बीमार पड़तीं तो उनके प्रेमियों की ढलती हुई भक्ति और उनकी नौकरानियों की झुँझलाहट, दोनों से अधिक समय तक उनके साथ बने रहते। जब समय या बीमारी उनकी सुंदरता छीन लेती, तब भी वे केवल उनकी सुंदरता की स्मृति के लिए उनकी सेवा करते रहते और जब वे मर जातीं तो उनका शोक वह सच्चा शोक होता था जो उनकी यात्रा में जहाँ तक संभव होता, उनके साथ चलता था।

तीसरे स्थान पर, वह उन लोगों के निकट रहना चाहता था जो स्पेनी साहित्य और उसकी महान कृतियों से प्रेम करते थे, विशेषकर रंगमंच की कृतियों से। उसने यह सारा खजाना स्वयं खोज निकाला था। अपने आश्रयदाताओं की पुस्तकों से वह किताबें उधार लेता या चुरा लेता और फिर उसे गुप्त रूप से आत्मसात करता, मानो उसके उन्मत्त जीवन के रंगमंच के पीछे, पर्दे के पीछे, यह सब चल रहा हो। वह उन बड़े लोगों को तुच्छ समझता था जो अपनी तमाम शिक्षा-दीक्षा और सुसंस्कृत व्यवहार के बावजूद काल्देरोन और सर्वांतेस की रचनाओं में शब्दों के अद्भुत क्रम-विन्यास के सामने न तो कोई संवेदना दिखाते थे, न ही विस्मय। उसकी स्वयं कविताएँ रचने की बड़ी लालसा थी। उसे कभी यह एहसास नहीं हुआ कि उसने जो अनेक व्यंग्यात्मक गीत वॉडविल[9] के लिए लिखे थे, वे आगे चलकर लोकगीतों का हिस्सा बन गए और राजमार्गों पर चलने वाले लोगों के साथ दूर-दूर तक फैलते चले गए।

ऐसे ही एक झगड़े के परिणामस्वरूप, जो वेश्यागृहों में बड़ी स्वाभाविकता से उठ खड़े होते हैं, उनका जीवन इतना उलझ गया कि वे पेरू चले गए। पेरू में अंकल पियो यूरोप वाले अंकल पियो से भी अधिक बहुमुखी हो गए। यहाँ भी उन्होंने ज़मीन-जायदाद, सर्कस, मनोरंजन, विद्रोहों और प्राचीन वस्तुओं, हर तरह के काम में हाथ डाला। एक चीनी जंक कैंटन से बहकर अमेरिका के तट तक आ गई थी। उन्होंने समुद्र-तट से गहरे लाल रंग के चीनी मिट्टी के बर्तनों की गठरियाँ खींच निकालीं और उन कटोरियों को दुर्लभ एवं कलात्मक वस्तुओं के संग्रहकर्ताओं को बेच दिया। उन्होंने इंका लोगों की अचूक औषधियों का पता लगाया और गोलियों का अच्छा-खासा व्यापार शुरू कर दिया। चार महीने के भीतर ही लीमा में वे लगभग हर व्यक्ति को जानने लगे। फिर शीघ्र ही उन्होंने समुद्र-तट के दर्जनों कस्बों, खनन-शिविरों और देश के भीतरी हिस्सों की बस्तियों के निवासियों से भी परिचय कर लिया। सर्वज्ञ होने के उनके दावे अब अधिकाधिक विश्वसनीय लगने लगे। वायसराय को अंकल पियो और उनके इस विशाल परिचय-भंडार का पता चला। उन्होंने अनेक मामलों में उनकी सेवाएँ लेना शुरू कर दिया। अपने विवेक के क्षीण हो जाने के बावजूद डॉन आंद्रेस ने एक प्रतिभा बचाए रखी थी। वे विश्वासपात्र सेवकों से काम लेने की कला में माहिर थे। वे अंकल पियो के साथ बड़े कौशल और कुछ आदर-भाव से पेश आते थे। वे समझते थे कि उनसे कौन-से काम नहीं करवाने चाहिए और यह भी समझते थे कि उन्हें तरह-तरह के कामों और बीच-बीच में विराम की कितनी आवश्यकता होती है। उधर अंकल पियो को इस बात पर हमेशा आश्चर्य होता था कि कोई राजकुमार अपनी स्थिति का इतना कम उपयोग कैसे कर सकता है। न सत्ता के लिए, न अपनी कल्पनाओं को पूरा करने के लिए, न ही केवल इस आनंद के लिए कि वह दूसरे लोगों की नियति के साथ जैसा चाहे वैसा खेल सके। फिर भी वे अपने स्वामी से प्रेम करते थे, क्योंकि वे सर्वांतेस[10] की किसी भी प्रस्तावना से उद्धरण दे सकते थे और उनकी ज़बान में अब भी कैस्टिलियन भाषा का थोड़ा-सा नमक बचा हुआ था। कई सुबह अंकल पियो महल के उन गलियारों से होकर भीतर जाते, जहाँ रास्ते में उन्हें किसी पाप-स्वीकारोक्ति सुनने वाले पादरी या किसी विश्वासपात्र दबंग व्यक्ति के अलावा शायद ही कोई मिलता और वे वायसराय के साथ बैठकर उनकी सुबह की चॉकलेट पीते।

लेकिन अपनी तमाम गतिविधियों के बावजूद अंकल पियो कभी धनी नहीं हुए। ऐसा लगता था, मानो कोई भी कारोबार जब फलने-फूलने की स्थिति में पहुँचने लगता, वे उसे छोड़ देते हों। किसी को पता नहीं था कि उनके पास एक घर भी था। वह घर ऐसे कुत्तों से भरा हुआ था जो जोड़ और गुणा कर सकते थे और उसकी सबसे ऊपरी मंज़िल पक्षियों के लिए सुरक्षित थी। लेकिन इस छोटे-से साम्राज्य में भी वे अकेले थे और अपने अकेलेपन पर गर्व करते थे, मानो ऐसी एकांतता में कोई विशेष श्रेष्ठता निहित हो। अंततः उन्हें एक ऐसा साहसिक प्रसंग मिल गया, जो आकाश से मिले किसी विचित्र उपहार की तरह उनके जीवन में आया और जिसने उनके जीवन के तीन महान उद्देश्यों को एक साथ जोड़ दिया। दूसरों के जीवन को अपने निरीक्षण और नियंत्रण में रखने का उनका जुनून, सुंदर स्त्रियों के प्रति उनकी आराधना और स्पेनी साहित्य के खज़ानों के प्रति उनका गहरा अनुराग। उन्होंने कैमिला पेरिकोले को खोज निकाला। उसका वास्तविक नाम मीकेला विलेगास था। वह बारह वर्ष की उम्र में ही कैफ़े में गाने लगी थी और अंकल पियो तो हमेशा से कैफ़े की दुनिया की आत्मा रहे थे। अब जब वे गिटारवादकों के बीच बैठे इस अनगढ़ लड़की को गीत गाते देख रहे थे और वह उन अनुभवी गायकों के हर उतार-चढ़ाव की नकल कर रही थी जो उससे पहले वहाँ गा चुके थे, तभी उनके मन में पिग्मेलियन[11] बनने का निश्चय पैदा हुआ। उन्होंने उसे खरीद लिया। शराब के तहखाने में बंद करके सोने के बजाय अब उसे उनके घर में एक खाट मिली। उन्होंने उसके लिए गीत लिखे, उसे अपनी आवाज़ के सुर और स्वर-गुण को सुनना सिखाया और उसके लिए एक नई पोशाक खरीदी। शुरुआत में उसे बस इतना ही दिखाई दिया कि मार न खाना, गरम सूप मिलना और कोई उसे कुछ सिखाए। यह सब कितना अद्भुत था। लेकिन वास्तव में चमत्कृत तो अंकल पियो ही थे। उनका यह दुस्साहसी प्रयोग उनकी सारी कल्पनाओं से कहीं आगे सफल हुआ। वह छोटी-सी बारह वर्षीय, चुप रहने वाली और हमेशा थोड़ी-सी खिन्न रहने वाली लड़की काम को मानो निगल जाती थी। उन्होंने अभिनय और नकल की उसके लिए अंतहीन कसरतें तय कर दीं। गीत के वातावरण को अपनी आवाज़ में उतारने की समस्याएँ उसके सामने रखीं। वे उसे रंगमंचों पर ले जाते और किसी प्रदर्शन की बारीक-से-बारीक बात पर उसका ध्यान दिलाते। लेकिन सबसे बड़ा आघात उन्हें कैमिला के स्त्री बनने पर लगना था। उसकी लंबी बाँहें और लंबी टाँगें अंततः एक ऐसी देह में सामंजस्य पा गईं, जिसमें विलक्षण सौष्ठव था। उसका लगभग विकृत और भूखा-सा चेहरा सुंदर हो गया। उसका पूरा स्वभाव कोमल, रहस्यमय और एक विचित्र ढंग से बुद्धिमान हो गया और यह सब उनके प्रति समर्पित हो गया। वह उनमें कोई दोष नहीं खोज पाती थी और उनके प्रति दृढ़तापूर्वक वफ़ादार थी। वे एक-दूसरे से गहरा प्रेम करते थे, लेकिन उसमें कोई वासना नहीं थी। जब वे उसके बहुत निकट आते तो उसके चेहरे पर से गुज़र जाने वाली उस हल्की-सी घबराहट की छाया का वे सम्मान करते थे। लेकिन इसी आत्म-संयम और इस वंचना में से एक कोमलता की सुगंध पैदा हुई। वह प्रेमोन्माद की एक ऐसी छाया, जो सबसे अप्रत्याशित संबंध में भी पूरे जीवन को उस बोझिल कर्तव्य में समर्पित रहने के बावजूद एक सुंदर स्वप्न की तरह बीत जाने का एहसास दे सकती है।

वे दोनों बहुत घूमते-फिरते रहे और नए-नए शराबखाने तलाशते रहे क्योंकि कैफ़े की गायिका का सबसे बड़ा गुण हमेशा उसकी नवीनता ही होता है। वे मेक्सिको गए, अपने विचित्र कपड़ों को उसी एक शॉल में लपेटे हुए। वे समुद्र-तटों पर सोए, पनामा में उन्हें कोड़े मारे गए और प्रशांत महासागर के कुछ छोटे-छोटे द्वीपों पर उनका जहाज़ टूट गया। ऐसे द्वीप, जो पक्षियों की बीट से पटे हुए थे। वे साँपों और भृंगों के बीच सावधानी से रास्ता बनाते हुए जंगलों में पैदल भटकते रहे। कठिन मौसम में उन्होंने फसल काटने वाले मज़दूरों के रूप में अपना श्रम बेच दिया। दुनिया में ऐसी कोई चीज़ नहीं थी जो उन्हें बहुत आश्चर्यचकित कर सके।

इसके बाद उस लड़की के प्रशिक्षण का एक और भी कठिन दौर शुरू हुआ। ऐसी कठोर दिनचर्या, जो किसी कलाबाज़ की तैयारी से अधिक मिलती-जुलती थी। उसके प्रसिद्ध होने की गति इतनी तेज़ थी कि प्रशिक्षण कुछ और कठिन हो गया। इस बात का भी खतरा था कि उसे मिलने वाली तालियाँ उसे बहुत जल्दी अपने काम से संतुष्ट कर देंगी। अंकल पियो ने उसे कभी ठीक-ठीक मारा नहीं, लेकिन वे ऐसे व्यंग्य का सहारा लेते थे, जिसमें अपने आप में ही कम भय नहीं था।

प्रदर्शन समाप्त होने पर जब कैमिला अपने श्रृंगार-कक्ष में लौटती तो अंकल पियो को एक कोने में बेपरवाही से सीटी बजाते हुए पातीं। वे उनके हाव-भाव को तुरंत भाँप जातीं और गुस्से से पुकार उठतीं—

“अब क्या बात है? हे भगवान, हे भगवान, अब क्या बात है?”

“कुछ नहीं, मेरी नन्ही मोती। मेरी कैमिलाओं की कैमिला, कुछ भी नहीं।”

“ऐसी कोई बात थी जो आपको पसंद नहीं आई। आप भी न, हर बात में नुक्स निकालने वाले! चलिए, अब बताइए, क्या था? देखिए, मैं तैयार हूँ।”

“नहीं, मेरी नन्ही मछली। प्यारी-सी भोर की तारा, मेरा खयाल है कि तुमने जितना कर सकती थीं, उतना अच्छा ही किया।”

यह संकेत कि वह एक सीमित प्रतिभा वाली कलाकार है और कुछ विशेष प्रकार की कलात्मक उपलब्धियाँ उसके लिए हमेशा के लिए असंभव रहेंगी। कैमिला को हर बार बेकाबू कर देता था। वह फूट-फूटकर रोने लगती, “काश, मैं तुम्हें कभी जानती ही नहीं! तुमने मेरी पूरी ज़िंदगी ज़हर कर दी है। तुम्हें तो बस यही लगता है कि मैंने बहुत खराब किया। तुम्हें यह जताने में ही खुशी मिलती है कि मेरा प्रदर्शन खराब था। अच्छा… तो फिर चुप रहो।”

अंकल पियो सीटी बजाते रहे।

“सच तो यह है कि मुझे मालूम है कि आज रात मेरा अभिनय कुछ कमज़ोर था और मुझे यह बताने के लिए तुम्हारी ज़रूरत नहीं है। बस, अब बहुत हुआ। अब चले जाओ। मैं तुम्हें अपने आस-पास नहीं देखना चाहती। उस भूमिका को निभाना ही इतना कठिन है और फिर लौटकर तुम्हें इस तरह देखना तो और भी मुश्किल है।”

अचानक अंकल पियो आगे की ओर झुकते और गुस्से से तीव्र स्वर में पूछते, “तुमने कैदी के पास वह संवाद इतनी जल्दी क्यों पहुँचा दिया?”

पेरिकोले की आँखों से और आँसू बह निकले। “हे भगवान, मुझे शांति से मरने दो! एक दिन आप कहते हैं कि मैं जल्दी बोलूँ और दूसरे दिन कहते हैं कि धीरे बोलूँ। खैर, एक-दो साल में मैं पागल हो जाऊँगी और फिर इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”

फिर सीटी बजने लगी।

“और फिर, दर्शकों ने आज जितनी तालियाँ बजाईं, उतनी पहले कभी नहीं बजाईं। क्या आप सुन रहे हैं? पहले कभी नहीं! लो, अब सुन लिया? मेरे तेज़ या धीमे बोलने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। वे रो पड़े थे। मैं तो आज दिव्य लग रही थी। मेरे लिए बस यही मायने रखता है। अब चुप रहिए। चुप रहिए।”

वे बिल्कुल चुप हो गए।

“आप मेरे बाल सँवार सकते हैं, लेकिन अगर आपने एक शब्द भी और कहा तो मैं फिर कभी अभिनय नहीं करूँगी। आप कोई दूसरी लड़की ढूँढ़ लीजिए, बस।”

इसके बाद वे दस मिनट तक बड़े सुकून से उसके बाल सँवारते रहते, मानो उसके थके हुए शरीर को हिला देने वाली सिसकियों पर उनका ध्यान ही न हो। अंत में वह अचानक उनकी ओर मुड़ती और उनका एक हाथ पकड़कर उसे बेताबी से चूम लेती, “अंकल पियो, क्या मैं इतनी बुरी थी? क्या मैंने आपको शर्मिंदा कर दिया? क्या यह इतना भयानक था कि आप थिएटर छोड़कर चले गए?”

एक लंबी चुप्पी के बाद अंकल पियो बड़ी सोच-समझकर स्वीकार करते, “जहाज़ वाले दृश्य में तुम अच्छी थीं।”

            “लेकिन अंकल पियो, मैं इससे बेहतर कर चुकी हूँ। आपको वह रात याद है, जब आप कुस्को से लौटे थे?”

“अंत में तुमने काफ़ी अच्छा किया था।”

“सच?”

“लेकिन मेरी फूल-सी बच्ची, मेरी मोती, कैदी के साथ वाले संवाद में आखिर दिक्कत क्या थी?”

यह सुनते ही पेरिकोले अपना चेहरा और बाँहें मेज़ पर, इत्र और प्रसाधनों के बीच, पटक देती और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगती। उनके लिए केवल पूर्णता ही पर्याप्त थी, केवल पूर्णता। और वह कभी हासिल नहीं हुई थी।

फिर अंकल पियो धीमे स्वर में बोलना शुरू करते और पूरे एक घंटे तक नाटक का विश्लेषण करते रहते। आवाज़, हाव-भाव और संवाद की गति की बारीकियों की ऐसी सूक्ष्म दुनिया में प्रवेश करते हुए, जहाँ हर छोटी-से-छोटी बात का अपना महत्व था। और अक्सर भोर होने तक वे दोनों वहीं बैठे रहते और एक-दूसरे के सामने काल्देरोन के भव्य संवादों का सस्वर पाठ करते रहते।

ये दोनों किसे प्रसन्न करने का प्रयास कर रहे थे? लीमा के दर्शकों को तो बिल्कुल नहीं। वे दर्शक तो बहुत पहले ही संतुष्ट हो चुके थे। हम एक ऐसी दुनिया से आते हैं जहाँ हमने उत्कृष्टता के अविश्वसनीय मानदंड देखे हैं और उन सुंदरताओं को धुंधली-सी स्मृति में याद करते हैं जिन्हें हम फिर कभी पूरी तरह प्राप्त नहीं कर सके। हम उसी दुनिया की ओर लौट जाते हैं। अंकल पियो और कैमिला पेरिकोले स्वयं को इस प्रयास में यातना दे रहे थे कि पेरू में उन रंगमंचों के मानदंड स्थापित कर सकें, जो किसी ऐसे स्वर्ग में थे जहाँ काल्देरोन उनसे पहले पहुँच चुके थे। जिन लोगों के लिए महान कृतियाँ रची जाती हैं, वे इस धरती पर नहीं हैं।

समय बीतने के साथ कैमिला का अपनी कला में वह गहरा डूबाव कुछ कम हो गया। अभिनय के प्रति बीच-बीच में उपजने वाली एक तरह की अवमानना ने उसे लापरवाह बना दिया। इसका कारण स्पेनी शास्त्रीय नाटक में स्त्री की भूमिकाओं के प्रति बहुत कम रुचि थी। उस समय, जब इंग्लैंड और फ्रांस के राजदरबारों के आस-पास एकत्र होने वाले नाटककार (और कुछ समय बाद वेनिस के नाटककार भी) स्त्री पात्रों की भूमिकाओं को बुद्धि-विनोद, आकर्षण, आवेग और उन्माद के अध्ययन से समृद्ध कर रहे थे, स्पेन के नाटककारों की निगाहें अपने नायकों पर ही टिकी थीं। उन सज्जनों पर, जो सम्मान की परस्पर विरोधी माँगों के बीच फटे हुए थे या उन पापियों पर, जो अंतिम क्षण में क्रूस की ओर लौट आते थे। कई वर्षों तक अंकल पियो ने अपने आपको इस बात में पूरी तरह लगा दिया कि पेरिकोले को मिलने वाली भूमिकाओं में उसकी रुचि जगाने के उपाय खोजें। एक अवसर पर वे कैमिला को यह समाचार देने में सफल हुए कि वीको दे बरेरा की एक पोती पेरू आ पहुँची है। अंकल पियो बहुत पहले ही कैमिला के मन में महान कवियों के प्रति अपनी श्रद्धा स्थापित कर चुके थे और कैमिला ने कभी इस विचार पर प्रश्न नहीं उठाया कि महान कवि राजाओं से कुछ ऊपर और संतों से किसी भी तरह कम नहीं होते। इसलिए दोनों ने बड़े उत्साह के साथ उस महान कवि के एक नाटक को चुना, जिसे वे उसकी पोती के सामने प्रस्तुत करने वाले थे। उन्होंने उस काव्य-नाटक का सौ बार अभ्यास किया। कभी सृजन की महान प्रसन्नता में डूबकर तो कभी निराशा में टूटकर। प्रदर्शन की रात, कैमिला पर्दे की तहों के बीच से बाहर झाँक रही थी। अंकल पियो ने उसे वीको दे बरेरा की उस छोटी, अधेड़ उम्र की स्त्री की ओर संकेत करके दिखाया, जिसका शरीर अभावों और एक बड़े परिवार की चिंताओं से थक चुका था, लेकिन कैमिला को ऐसा लगा, मानो वह संसार की सारी सुंदरता और गरिमा को देख रही हो। अपने प्रवेश से पहले बोले जाने वाले संवादों की प्रतीक्षा करते हुए वह श्रद्धा से मौन अंकल पियो से चिपकी रही। उसका हृदय ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। अंकों के बीच वह उस गोदाम के एक धूल-भरे कोने में चली गई, जहाँ कोई उसे खोज न सके और वहाँ बैठकर कोनों में एकटक देखती रही। प्रदर्शन समाप्त होने पर अंकल पियो वीको दे बरेरा की पोती को कैमिला के कमरे में ले आए। कैमिला दीवार पर लटके कपड़ों के बीच खड़ी थी और खुशी तथा लज्जा से रो रही थी। अंततः वह घुटनों के बल उस वृद्धा के सामने जा गिरी और उसके हाथों को चूम लिया। वृद्धा ने भी उसके हाथ चूमे और जब दर्शक अपने-अपने घर लौटकर सोने जा चुके थे, तब वह अतिथि वहीं रुकी रही और कैमिला को वीको के लेखन और उनके स्वभाव से जुड़ी वे छोटी-छोटी कहानियाँ सुनाती रही, जो अब तक परिवार में सुरक्षित रह गई थीं।

जब भी किसी नई अभिनेत्री का दल में प्रवेश होता, अंकल पियो सबसे अधिक प्रसन्न होते क्योंकि उसके साथ किसी नई प्रतिभा का आ जाना पेरिकोले को अपने भीतर की पूरी शक्ति जगा देने के लिए कभी विफल नहीं होता था। अंकल पियो को, जो सभागार के पीछे खड़े, आनंद और शरारत से दोहरे हुए जा रहे होते, ऐसा लगता मानो पेरिकोले का शरीर संगमरमर की उस दीप-कलशिका में बदल गया हो, जिसके भीतर एक प्रखर प्रकाश रख दिया गया हो। बिना किसी चाल या बनावटी ज़ोर के, वह नई अभिनेत्री को अपनी चमक से पीछे छोड़ देने में जुट जाती। यदि नाटक हास्य हो तो वह स्वयं चतुराई और विनोद की साक्षात् मूर्ति बन जाती और यदि (जैसा कि अधिकतर होता था) वह उन स्त्रियों का नाटक होता जिनके साथ अन्याय हुआ हो और जिनके भीतर अडिग घृणा धधक रही हो तो मंच मानो उसकी भावनाओं से सुलग उठता। उसका व्यक्तित्व इतना विद्युतमय हो जाता कि यदि वह केवल किसी सह-अभिनेता के हाथ पर अपना हाथ रख देती, तो दर्शकों के बीच भी उसकी प्रतिध्वनि-सी एक सिहरन दौड़ जाती। लेकिन ऐसी उत्कृष्टता के अवसर धीरे-धीरे कम होते गए। जैसे-जैसे उसकी अभिनय-कला की तकनीक अधिक पक्की होती गई, कैमिला की आत्मीयता और सच्चे भाव की आवश्यकता कम होती गई। यहाँ तक कि जब उसका ध्यान कहीं और होता, तब भी दर्शक इस अंतर को महसूस नहीं कर पाते थे और केवल अंकल पियो ही इस बात से दुखी होते थे।

कैमिला का चेहरा बहुत सुंदर था या यूँ कहें कि शांत अवस्था को छोड़कर वह चेहरा सुंदर था। जब उसका चेहरा शांत होता तो यह देखकर आश्चर्य होता कि उसकी नाक लंबी और पतली थी, होंठ थके हुए और कुछ बाल-सुलभ थे और आँखों में एक असंतोष था। एक कुछ सिकुड़ी-सिमटी किसान लड़की का-सा चेहरा, जिसे कैफ़े-शाँताँ से खींचकर बाहर निकाल लिया गया हो और जो अपनी कला की माँगों, अपनी इच्छाओं, अपने स्वप्नों और अपनी भागदौड़ भरी रोज़मर्रा की दिनचर्या। इन सबके बीच किसी प्रकार का सामंजस्य स्थापित करने में बिल्कुल असमर्थ हो। इनमें से हर एक अपने आप में एक पूरी दुनिया था और इनके बीच चलने वाला संघर्ष किसी कम दृढ़ शरीर वाले व्यक्ति को बहुत पहले ही मूर्खता (या तुच्छता) की अवस्था में पहुँचा देता। हम देख चुके हैं कि अपनी भूमिकाओं से असंतुष्ट होने के बावजूद पेरिकोले यह बहुत अच्छी तरह जानती थी कि अभिनय में कितना आनंद निहित हो सकता है और समय-समय पर उस लौ की गरमी से स्वयं को गरमाती रहती थी। लेकिन प्रेम की लौ उसे अधिक बार आकर्षित करती थी। हालाँकि उससे सुख मिलने की कोई अधिक निश्चितता नहीं थी और तभी स्वयं ज्यूपिटर[12] ने उसके लिए कुछ मोती भेज दिए।

पेरू के वायसराय डॉन आंद्रेस दे रिबेरा एक समय के उस मनोहर व्यक्ति के बचे-खुचे अवशेष थे, जिसे मेज़, शयन-कक्ष, कुलीन पद और दस वर्षों के निर्वासन ने तोड़ दिया था। युवावस्था में वे वर्साय और रोम जाने वाले राजनयिक दूतमंडलों के साथ गए थे; उन्होंने ऑस्ट्रिया के युद्धों में लड़ाई लड़ी थी। वे यरूशलम भी जा चुके थे। वे एक बहुत धनी और अत्यंत मोटी स्त्री के विधुर थे और उनकी कोई संतान नहीं थी। उन्होंने थोड़ा-बहुत सिक्के, मदिराएँ, अभिनेत्रियाँ, सम्मान-पदक और नक्शे इकट्ठे किए थे। मेज़ से उन्हें गठिया मिला था। शयन-कक्ष से मिर्गी-जैसे दौरों की प्रवृत्ति, अपने कुलीन पद से इतना विशाल और बचकाना गर्व मिला था कि वे शायद ही कभी सुनते कि उनसे क्या कहा जा रहा है और लगातार एकालाप करते हुए छत से बातें करते रहते थे और निर्वासन से उन्हें ऊब के महासागर मिले थे। ऐसी सम्मोहक ऊब, जो पीड़ा जैसी लगती थी। वे उसी के साथ जागते और पूरा दिन उसी के साथ बिताते और रात भर वह उनके बिस्तर के पास बैठकर उनकी नींद देखती रहती। कैमिला रंगमंच की कठोर परिश्रम वाली दिनचर्या में अपने वर्ष बिता रही थी, जिसे बीच-बीच में कुछ अस्त-व्यस्त प्रेम-प्रसंगों का स्वाद मिल जाता था, तभी यह ओलिंपस[13] का-सा व्यक्तित्व क्योंकि उनका चेहरा और उनका पहनावा ऐसा था कि वे मंच पर देवताओं और नायकों की भूमिका निभाने के लिए बने हुए लगते थे, अचानक उन्हें महल में होने वाली सबसे स्वादिष्ट आधी रात की दावतों की दुनिया में ले गया। रंगमंच और राजदरबार की तमाम परंपराओं के विपरीत, वह अपने इस वृद्ध प्रशंसक पर मुग्ध हो गई। उसे लगा कि अब वह हमेशा के लिए सुखी रहने वाली है। डॉन आंद्रेस ने पेरिकोले को बहुत-सी बातें सिखाईं और उसके उज्ज्वल, जिज्ञासु मन के लिए यह प्रेम के सबसे मधुर तत्वों में से एक था। उन्होंने उसे थोड़ी-सी फ़्रांसीसी भाषा सिखाई। साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहना सिखाया। लोगों को संबोधित करने के तौर-तरीके सिखाए। अंकल पियो ने उसे सिखाया था कि बड़ी स्त्रियाँ बड़े अवसरों पर अपने को किस तरह सँभालकर रखती हैं। उन्होंने उसे यह भी सिखाया था कि वे किस तरह सहज होती हैं। अंकल पियो और काल्देरोन ने उसे सुंदर स्पेनी भाषा का संस्कार दिया था। डॉन आंद्रेस ने उसे एल ब्वेन रेतिरो[14] (El Buen Retiro) की सुरुचिपूर्ण दुनिया का चटपटा बोलचाल का अंदाज़ दे दिया।

महल से कैमिला को मिलने वाले निमंत्रणों ने अंकल पियो को चिंतित कर दिया था। वे कहीं अधिक पसंद करते कि वह रंगमंच के गोदाम में अपने उन छोटे-मोटे, भद्दे प्रेम-प्रसंगों में ही लगी रहती। लेकिन जब उन्होंने देखा कि उसकी कला में एक नई निखार आ रहा है तो वे संतुष्ट हो गए। वे थिएटर के पीछे बैठते और केवल आनंद और मनोरंजन के मारे अपनी सीट पर इधर-उधर लोटते हुए पेरिकोले को देखते रहते। वह दर्शकों को यह संकेत दे रही होती कि वह उस बड़े संसार में उठती-बैठती है, जिसके बारे में नाटककार लिखा करते थे। अब उसके पास शराब के गिलास को उँगलियों में थामने का एक नया ढंग था, विदा कहने का एक नया ढंग था, दरवाज़े से भीतर आने का एक नया ढंग था और इन छोटी-छोटी बातों से सब कुछ प्रकट हो जाता था। अंकल पियो के लिए और किसी बात का कोई महत्व नहीं था। संसार में इससे अधिक सुंदर और क्या हो सकता था कि एक सुंदर स्त्री किसी महान स्पेनी कृति के साथ पूरा न्याय करते हुए उसका अभिनय करे? ऐसा अभिनय, वे मानो आपसे पूछ रहे हों, जो सूक्ष्म निरीक्षण से परिपूर्ण हो, जिसमें शब्दों के बीच का अंतराल तक जीवन और उस रचना पर एक टिप्पणी प्रकट करता हो, जिसे एक सुंदर आवाज़ में प्रस्तुत किया गया हो और जिसे निर्दोष देह-भंगिमा, पर्याप्त व्यक्तिगत सौंदर्य और अप्रतिरोध्य आकर्षण का सहारा मिला हो। “हम इस अद्भुत चमत्कार को लेकर लगभग स्पेन जाने के लिए तैयार हैं,” वे अपने-आप से बुदबुदाते। प्रदर्शन के बाद वे उसके श्रृंगार-कक्ष में जाते और कहते, “बहुत अच्छा!” लेकिन विदा लेने से पहले वे किसी न किसी तरह उससे यह पूछ ही लेते कि कोलोन की ग्यारह हज़ार कुँवारियों के नाम पर, उसने एक्ससेलेन्शिया[15] (Excelencia) कहने का वह इतना बनावटी ढंग कहाँ से सीखा था।

कुछ समय बाद वायसराय ने पेरिकोले से पूछा कि क्या उसे अच्छा लगेगा यदि वे अपनी आधी रात की दावतों में कुछ चुनिंदा और विश्वासपात्र अतिथियों को आमंत्रित करें। उन्होंने उससे यह भी पूछा कि क्या वह आर्चबिशप से मिलना चाहेगी। कैमिला बहुत प्रसन्न हुई। आर्चबिशप भी बहुत प्रसन्न हुए। उनकी पहली मुलाकात की पूर्वसंध्या पर उन्होंने उस अभिनेत्री को ताश के एक पत्ते जितना बड़ा पन्ने का एक लॉकेट भेजा।

लीमा में एक ऐसी चीज़ थी जो गजों-गज बैंगनी साटन में लिपटी हुई थी, जिसमें से एक बहुत बड़ा, जलोदर से सूजा हुआ सिर और दो मोटे, मोती-जैसे हाथ बाहर निकले रहते थे और वह चीज़ थी वहाँ का आर्चबिशप। मांस की उन तहों के बीच से, जो उनके चारों ओर लिपटी हुई थीं, दो काली आँखें झाँकती थीं, जिनमें असहजता, दयालुता और विनोद-बुद्धि एक साथ बोलती थी। इस सारे चरबी के ढेर के भीतर एक जिज्ञासु और उत्सुक आत्मा कैद थी। लेकिन तीतर, हंस या प्रतिदिन मिलने वाली रोमन मदिराओं की अपनी दावत से वे कभी अपने को रोकते ही नहीं थे और इस तरह वे स्वयं ही अपने कटु जेलर बने हुए थे। उन्हें अपना गिरजाघर प्रिय था। अपने कर्तव्य प्रिय थे। वे अत्यंत धर्मनिष्ठ थे। कुछ दिनों में वे अपने विशाल शरीर को देखकर उदास भी होते, लेकिन पश्चात्ताप की पीड़ा, उपवास की पीड़ा जितनी तीखी नहीं थी। थोड़ी ही देर में वे इस बात पर गंभीर विचार करते हुए पाए जाते कि किसी खास भुने हुए मांस का टुकड़ा उस खास सलाद को क्या गुप्त संदेश भेज रहा है जो उसके बाद आने वाला था। और स्वयं को दंडित करने के लिए वे बाकी हर मामले में एक आदर्श जीवन जीते थे।

उन्होंने प्राचीन काल का समस्त साहित्य पढ़ डाला था और अब उसके बारे में लगभग सब कुछ भूल चुके थे, सिवाय उसके आकर्षण और मोहभंग की एक सामान्य-सी सुगंध के। उन्होंने चर्च के प्राचीन धर्मपिताओं और धर्मसभाओं का भी गहरा अध्ययन किया था, लेकिन उनके बारे में भी सब कुछ भूल चुके थे, सिवाय मतभेदों की एक तैरती हुई-सी स्मृति के, जिनका पेरू से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने इटली और फ्रांस की कामुक साहित्यिक कृतियों की सारी महान रचनाएँ पढ़ी थीं और हर वर्ष उन्हें फिर से पढ़ते थे। यहाँ तक कि पथरी की भयंकर पीड़ा के बीच भी (जो सौभाग्य से सांता मारिया दे क्लुक्साम्बुक्वा के सोतों का पानी पीने से घुल गई थी) उन्हें ब्रांतॉम[16] और उस दिव्य अरेतिनो[17] के किस्सों से अधिक पौष्टिक और कुछ भी नहीं लगता था।

आर्चबिशप जानते थे कि पेरू के अधिकांश पादरी बदमाश हैं। उनके भीतर कुछ कर गुजरने से स्वयं को रोकने के लिए उनकी उस सूक्ष्म एपिक्यूरियन शिक्षा[18] की पूरी ताकत लगती थी। उन्हें अपने प्रिय सिद्धांत बार-बार स्वयं को दोहराने पड़ते थे: कि संसार में अन्याय और दुख एक स्थिर मात्रा हैं, कि प्रगति का सिद्धांत एक भ्रम है, कि गरीबों ने कभी सुख जाना ही नहीं, इसलिए वे दुर्भाग्य के प्रति असंवेदनशील हैं। सभी धनी लोगों की तरह वे भी यह विश्वास नहीं कर पाते थे कि गरीब सचमुच पीड़ित हो सकते हैं। (उनके घर देखो, उनके कपड़े देखो) और सभी शिक्षित लोगों की तरह वे मानते थे कि केवल वही लोग यह जान सकते हैं कि वे दुखी हैं, जिन्होंने बहुत कुछ पढ़ रखा हो। एक अवसर पर, जब उनके धर्मप्रांत में हो रहे अनाचारों की ओर उनका ध्यान दिलाया गया तो वे लगभग कुछ कर ही डालते। उन्होंने अभी-अभी सुना था कि पेरू में पादरियों के बीच यह प्रथा चल निकली थी कि एक अच्छी-खासी मुक्ति-क्षमा के लिए अनाज की दो माप और वास्तव में प्रभावशाली मुक्ति-क्षमा के लिए पाँच माप वसूल की जाती हैं। वे आक्रोश से काँप उठे। उन्होंने अपने सचिव पर गरजते हुए कहा कि लिखने का सामान लाया जाए और घोषणा की कि वे अपने चरवाहों अर्थात पादरियों के नाम एक ऐसा संदेश लिखवाने जा रहे हैं जो उन्हें हिला कर रख देगा। लेकिन दवात में स्याही ही नहीं बची थी। अगले कमरे में भी स्याही नहीं थी और पूरे महल में कहीं भी स्याही नहीं मिल रही थी। अपने घर-गृहस्थी में इस तरह की अव्यवस्था ने उस भले आदमी को इतना विचलित कर दिया कि वे तरह-तरह के क्रोधों के सम्मिलित प्रकोप से बीमार पड़ गए और फिर उन्होंने अपने को आक्रोश से बचाकर रखने की कला सीख ली। 

महाधर्माध्यक्ष को इन रात्रिभोजों में शामिल करने का प्रयोग इतना सफल रहा कि डॉन आंद्रेस नए-नए नामों के बारे में सोचने लगे। वे अंकल पियो पर लगातार अधिकाधिक निर्भर होते जा रहे थे, लेकिन तब तक प्रतीक्षा करते रहे जब तक कि कैमिला स्वयं अपनी ओर से उसे बुलाने का सुझाव न दे। उचित समय आने पर अंकल पियो अपने साथ समुद्रों के उस घुड़सवार कैप्टन अल्वाराडो को भी ले आए। आमतौर पर महफ़िल को शुरू हुए कई घंटे बीत चुके होते, तभी कैमिला थिएटर में अपना अभिनय समाप्त करके उनके बीच आ पाती। वह लगभग एक बजे आती, चेहरा दमकता हुआ, आभूषणों से लदी हुई और बेहद थकी हुई। चारों पुरुष उसका स्वागत ऐसे करते जैसे वह कोई महान रानी हो। लगभग एक घंटे तक बातचीत की बागडोर उसी के हाथ में रहती, लेकिन धीरे-धीरे वह डॉन आंद्रेस के कंधे से और अधिक टिकती जाती और एक चेहरे से दूसरे चेहरे पर उड़ती हुई बातचीत को सुनती रहती। वे सभी चेहरे हास्य की महीन रेखाओं से अंकित थे। वे पूरी रात बातें करते रहते। अपने उन हृदयों को, जो सदा स्पेन के लिए तरसते रहते थे, चुपचाप सांत्वना देते हुए वे स्वयं को समझाते कि ऐसी संगति उस उच्च स्पेनी आत्मा के अनुरूप ही थी। वे भूतों और परलोक-दृष्टि की बातें करते। उस धरती की चर्चा करते जिस पर मनुष्य के प्रकट होने से पहले कुछ और ही जीवन रहा होगा और इस संभावना पर विचार करते कि कहीं ग्रह एक-दूसरे से टकरा तो नहीं सकते। वे यह भी सोचते कि क्या मृत्यु के क्षण आत्मा को देखा जा सकता है। क्या वह कबूतर की तरह फड़फड़ाती हुई शरीर से उड़ जाती है? वे विचार करते कि जब मसीह दूसरी बार यरूशलम आएँगे, तब क्या पेरू को उस समाचार के मिलने में बहुत देर लगेगी। सूर्योदय तक वे युद्धों और राजाओं, कवियों और विद्वानों तथा दूर-दराज़ के विचित्र देशों के बारे में बातें करते रहते। उनमें से प्रत्येक अपने भीतर संचित बुद्धिमत्तापूर्ण, उदास किस्सों और मनुष्य की जाति के प्रति अपनी सूखी-सी खिन्नता को बातचीत में उड़ेल देता। सुनहरी रोशनी की बाढ़ एंडीज़ पर्वतों के पार से आती हुई उस विशाल खिड़की से भीतर प्रवेश करती और मेज़ पर रखे फलों के ढेरों, मेज़ पर बिछे दाग़दार ब्रोकेड[19] तथा अपने संरक्षक की बाँह पर सोई हुई पेरिकोल की मधुर, विचारमग्न ललाट पर फैल जाती। इसके बाद एक लंबा मौन छा जाता। किसी का भी मन सबसे पहले उठकर जाने का नहीं होता। उन सबकी निगाहें उस अजीब, सुंदर पक्षी पर टिक जातीं, जो उनके बीच रहता था। लेकिन अंकल पियो की निगाह तो पूरी रात उसी पर लगी रहती थी। उनकी काली आँखों से निकलती हुई एक तीव्र, क्षणिक निगाह, जिसमें कोमलता और चिंता भरी होती और वह उनके जीवन के उस महान रहस्य और उसके मूल कारण पर टिकी रहती थी।

लेकिन अंकल पियो ने कैमिला पर नज़र रखना कभी बंद नहीं किया। उन्होंने इस संसार के निवासियों को दो वर्गों में बाँट रखा था। वे जिन्होंने प्रेम किया था और वे जिन्होंने प्रेम नहीं किया था। ऊपर से देखने पर यह एक भयानक अभिजात वर्ग था क्योंकि जिन लोगों में प्रेम करने की क्षमता नहीं थी। (या अधिक सही कहें, प्रेम में दुख सहने की क्षमता नहीं थी) उन्हें सचमुच जीवित नहीं कहा जा सकता था और निश्चय ही उनकी मृत्यु के बाद वे फिर कभी जीवित नहीं होते। वे एक तरह की भूसे से बनी आबादी थे, जो अपने निरर्थक ठहाकों, आँसुओं और बकबक से संसार को भरते रहते और फिर भी प्रिय और व्यर्थ बने हुए हवा में विलीन हो जाते। इस भेद के आधार पर उन्होंने प्रेम की अपनी एक अलग ही परिभाषा गढ़ रखी थी। ऐसी परिभाषा जैसी और किसी की नहीं थी और जिसमें उनके विचित्र जीवन की सारी कड़वाहट और गर्व आकर जमा हो गए थे। उनके लिए प्रेम एक प्रकार की क्रूर बीमारी था, जिससे चुने हुए लोगों को अपनी युवावस्था के अंतिम वर्षों में होकर गुजरना पड़ता है और जिससे वे पीले, निचुड़े हुए, लेकिन जीवन के वास्तविक कारोबार के लिए तैयार होकर बाहर निकलते हैं। (उनका विश्वास था कि) ऐसी भूलों का एक विशाल भंडार है, जिनसे इस बीमारी से स्वस्थ हो चुके मनुष्य, सौभाग्य से, अब कभी नहीं गुजर सकते। दुर्भाग्य से, उनके भीतर अनेक दूसरी कमियाँ फिर भी बनी रहती हैं। (लेकिन कम-से-कम, असंख्य उदाहरणों में से दो बातें तो निश्चित थीं) वे फिर कभी लंबे समय तक चलने वाली शिष्ट-मित्रता को पूरे जीवन का आचरण नहीं समझते थे और वे फिर कभी किसी भी मनुष्य को राजकुमार से लेकर नौकर तक एक यांत्रिक वस्तु नहीं समझते थे। अंकल पियो कैमिला पर नज़र रखना कभी बंद नहीं करते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि उसने अभी तक इस दीक्षा से होकर नहीं गुज़री थी। वाइसराय से उसके परिचय के बाद के महीनों में वे साँस रोके प्रतीक्षा करते रहे। वे वर्षों तक साँस रोके प्रतीक्षा करते रहे। कैमिला ने वाइसराय के तीन बच्चों को जन्म दिया, फिर भी वह वैसी ही बनी रही। अंकल पियो जानते थे कि संसार पर वास्तविक अधिकार प्राप्त करने की उसकी यात्रा का पहला संकेत उसके अभिनय में कुछ विशेष प्रभावों पर अधिकार पा लेना होगा। नाटकों में कुछ ऐसे अंश थे जिन्हें एक दिन वह केवल सहजता से, सरलता से और भीतर छिपे आनंद के साथ निभा पाएगी क्योंकि उनमें उसके हृदय की नई और समृद्ध बुद्धि की ओर संकेत होता था। लेकिन ऐसे अंशों के साथ उसका व्यवहार उलटे अधिकाधिक जल्दबाज़ी भरा बल्कि कहें तो झेंपा हुआ होता जा रहा था। कुछ ही समय में उन्होंने देख लिया कि वह डॉन आंद्रेस से ऊब चुकी थी और नगर के अभिनेताओं, साँड़-योद्धाओं और व्यापारियों के साथ छिपे-छिपे प्रेम-संबंधों की एक श्रृंखला में लौट गई थी।

वह अभिनय से अधिकाधिक अधीर और विरक्त होती गई और उसके मन में एक और परजीवी विचार ने जगह बना ली। वह एक कुलीन महिला बनना चाहती थी। धीरे-धीरे उसके भीतर प्रतिष्ठित और सम्माननीय माने जाने की लालसा पैदा हुई और वह अपने अभिनय को केवल एक शौक कहकर संबोधित करने लगी। उसने एक ड्यूएना[20] रख ली। एक ऐसी महिला जो कुलीन स्त्रियों की निगरानी और संगति के लिए रहती थी। कुछ पैदल सेवक भी रख लिए। वह समाज के फैशनेबल समय पर चर्च जाने लगी। विश्वविद्यालय में पुरस्कार-वितरण के दिनों में उपस्थित होती और बड़े-बड़े परोपकारी संस्थानों के दानदाताओं के बीच दिखाई देने लगी। उसने थोड़ा-बहुत पढ़ना-लिखना भी सीख लिया। समाज में एक बोहेमियन स्त्री के रूप में उसके प्रति की गई किसी भी मामूली उपेक्षा या भेदभाव का वह क्रोधपूर्वक विरोध करती। अपनी रियायतों की माँग और विशेषाधिकारों पर धीरे-धीरे कब्ज़ा जमाने की प्रवृत्ति के कारण उसने वाइसराय का जीवन नारकीय बना दिया। एक दोष की जगह अब दूसरा दोष आ गया और वह शोर मचाकर सदाचार का प्रदर्शन करने लगी। उसने काल्पनिक माता-पिता गढ़ लिए और कुछ काल्पनिक चचेरे भाई-बहन भी प्रस्तुत कर दिए। उसने अपने बच्चों के लिए बिना किसी प्रमाण-दस्तावेज़ के वैधता का दर्जा भी हासिल कर लिया। समाज में वह एक बड़ी कुलीन महिला की तरह नाज़ुक और शिथिल-सी मैग्डलीन[21] सदृश धार्मिकता का प्रदर्शन करने लगी और प्रायश्चित्त के जुलूसों में हाथ में मोमबत्ती लेकर उन महिलाओं के साथ-साथ चलती, जिन्हें अपने स्वभाव के किसी आकस्मिक क्रोध और देकार्त[22] की ओर किसी चोरी-छिपे डाले गए दृष्टिपात के अलावा किसी बात का पछतावा नहीं था। उसका पाप अभिनय करना था और हर कोई जानता है कि ऐसे संत भी हुए हैं जो अभिनेता थे जैसे, संत गेलासियस, संत गेनेसियस, संत मार्गरेट ऑफ एंटिऑक और संत पेलाजिया।

सांता मारिया दे क्लुक्साम्बुक्वा से कुछ ही दूर पहाड़ियों में एक फैशनेबल जल-चिकित्सा स्थल था। डॉन आंद्रेस फ्रांस की यात्रा कर चुके थे और उन्होंने सोचा था कि यहाँ अपने लिए एक छोटा-सा नकली वीशी[23] बना लिया जाए। वहाँ एक पगोडा[24] था, कुछ बैठक-कक्ष, एक थिएटर, साँड़ की लड़ाइयों के लिए एक छोटा-सा अखाड़ा और कुछ फ्रांसीसी ढंग के बगीचे थे। कैमिला के स्वास्थ्य ने कभी किसी बीमारी की छाया तक नहीं देखी थी, फिर भी उसने उसके आस-पास एक विलासपूर्ण घर बनवा लिया और ग्यारह बजे उन अप्रिय जलों को चुस्कियाँ लेकर पीती थी। मार्केसा दे मोंतेमायोर ने इस ओपेरा-बूफ़ शैली के स्वर्ग का एक शानदार चित्र छोड़ा है, जहाँ वहाँ की अधिष्ठात्री देवी की तरह कैमिला, कुटे हुए सीपों से बनी पगडंडियों पर अपनी तीखी संवेदनशीलता का प्रदर्शन करती हुई घूमती थी और उन सभी लोगों की श्रद्धांजलि स्वीकार करती थी जो वाइसराय को नाराज़ करने का ख़र्च नहीं उठा सकते थे। डोना मारिया ने इस शासक का भी चित्र खींचा है। शानदार, गरिमामय, लेकिन थका हुआ। वह पूरी-पूरी रात इतनी बड़ी रकमों पर जुआ खेलता रहता था, जितनी से एक और एस्क्योरियल[25] बनवाया जा सकता था। और उसके बगल में उन्होंने उसके पुत्र, कैमिला के छोटे डॉन जैमे का चित्र रखा है। सात वर्ष की उम्र में डॉन जैमे सूखा-पतला, अल्पविकसित-सा बालक था। लगता था, उसे अपनी माँ का माथा और आँखें ही नहीं बल्कि अपने पिता को होने वाले दौरे पड़ने की प्रवृत्ति भी विरासत में मिली थी। वह अपने दर्द को एक पशु की तरह मौन विस्मय के साथ सहता था और जब सार्वजनिक रूप से उसके दर्द का कोई लक्षण प्रकट हो जाता तो एक पशु की ही तरह उसे लेकर घोर लज्जित हो जाता। वह इतना सुंदर था कि उसके सामने दया के उन हल्के और सतही रूपों की भी आवाज़ दब जाती थी और अपनी कठिनाइयों के बारे में उसके लंबे-लंबे विचारों ने उसके चेहरे पर एक धैर्यपूर्ण और चौंका देने वाली गरिमा अंकित कर दी थी। उसकी माँ उसे गहरे लाल मणि-रंग के मखमल में पहनाती थी और जब वह चलने में सक्षम होता तो उससे कई गज़ की दूरी बनाए हुए उसके पीछे-पीछे चलता रहता। जो महिलाएँ उससे बातचीत करने के लिए उसे रोकने की कोशिश करतीं, उनसे वह गंभीरता से अपने को छुड़ा लेता। कैमिला डॉन जैमे पर कभी झुँझलाती नहीं थी और न ही उसके प्रति कभी भावुक प्रदर्शन करती थी। जब सूरज चमक रहा होता तो उन कृत्रिम सीढ़ीनुमा छतों पर वे दोनों चुपचाप चलते दिखाई देते। कैमिला यह सोचती हुई कि वह सुख-समृद्धि आखिर कब शुरू होगी जिसे उसने हमेशा सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा था और डॉन जैमे केवल धूप का आनंद लेते हुए, किसी बादल के आ जाने की आशंका को चिंतित होकर आँकता रहता। वे ऐसे लगते थे मानो किसी दूर देश से या किसी पुरानी लोकगाथा से भटककर वहाँ आ पहुँचे हों। ऐसी जगह, जहाँ की नई भाषा उन्होंने अभी सीखी न थी और जहाँ उन्हें अभी तक कोई मित्र नहीं मिला था।

कैमिला जब रंगमंच छोड़कर गई, तब उसकी उम्र लगभग तीस वर्ष थी और समाज में अपना स्थान बनाने में उसे पाँच वर्ष लग गए। धीरे-धीरे उसका शरीर कुछ भारी, लगभग स्थूल हो गया, हालाँकि उसका सिर हर वर्ष मानो और अधिक सुंदर होता जाता था। उसे जरूरत से अधिक सजने-सँवरने की आदत हो गई थी और बैठक-कक्षों के फर्श पर गहनों, स्कार्फ़ों और पंखों का मानो कोई पूरा मीनार-सा प्रतिबिंब दिखाई देता था। उसके चेहरे और हाथ नीली-सी पाउडर की परत से ढँके रहते, जिसके ऊपर वह चटक लाल और नारंगी रंग से एक तनी हुई, चिड़चिड़ी-सी मुखाकृति बना लेती। उसके स्वभाव का लगभग उन्मत्त क्रोध, समाज की वृद्ध कुलीन महिलाओं के बीच उसके बोलने के अप्राकृतिक मधुर ढंग से बारी-बारी प्रकट होता रहता था। ऊपर उठने की उसकी यात्रा के शुरुआती दिनों में ही उसने अंकल पियो को संकेत दे दिया था कि सार्वजनिक रूप से उसके साथ दिखाई न दें। लेकिन अंततः वह उनकी उन मुलाकातों से भी अधीर हो गई जो अपेक्षाकृत अधिक गोपनीय थीं। वह उनसे औपचारिकता और टालमटोल के साथ मिलती। उसकी आँखें कभी उनकी आँखों से नहीं मिलतीं और वह उनसे झगड़ा करने के बहाने खोजती रहती। फिर भी वे महीने में एक बार उसके धैर्य की परीक्षा लेने निकल ही पड़ते। और जब उनके लिए उसके पास बैठना भी असंभव हो जाता तो वे सीढ़ियाँ चढ़कर उसके बच्चों के बीच शेष एक घंटा बिता लेते।

एक दिन वे पहाड़ियों में स्थित उसके घर पहुँचे और उसकी नौकरानी के माध्यम से उससे मिलने का अनुरोध किया। उन्हें बताया गया कि वह सूर्यास्त से कुछ पहले फ्रांसीसी बगीचों में उनसे मिलेगी। वे एक विचित्र भावुक आवेग में लीमा से ऊपर आए थे। सभी अकेले रहने वाले लोगों की तरह उन्होंने भी मित्रता को एक दिव्य आभा से घेर रखा था। उन्हें कल्पना होती थी कि सड़क पर जिन लोगों को वे एक-दूसरे के साथ हँसते और विदा होते समय गले मिलते देखते हैं, जो इतने सारे मुस्कानों के साथ साथ बैठकर भोजन करते हैं। आप शायद ही मेरी बात पर विश्वास करेंगे। वे इस आत्मीयता से अपार संतोष अर्जित कर रहे होंगे। और इसलिए अचानक उन्हें कैमिला को फिर से देखने, फिर से “अंकल पियो” कहलाने और उनके लंबे खानाबदोश जीवन के दिनों के उस विश्वास और हास्य को कुछ क्षणों के लिए फिर से जीवित करने की तीव्र उत्तेजना से भर दिया गया।

फ्रांसीसी बगीचे नगर के दक्षिणी छोर पर थे। उनके पीछे ऊँचे एंडीज़ पर्वत उठे हुए थे और सामने एक ऐसी मुंडेर थी जिसके पार एक गहरी घाटी दिखाई देती थी। उसके आगे पहाड़ियों की लहर पर लहर प्रशांत महासागर की ओर दूर तक फैली हुई थी। वह वह घड़ी थी जब चमगादड़ नीचे-नीचे उड़ते हैं और छोटे-छोटे जीव अपने पैरों के नीचे बेपरवाही से खेलते-कूदते हैं। बगीचे में कुछ अकेले लोग अभी ठहरे हुए थे। कोई उस आकाश में स्वप्निल दृष्टि से देख रहा था जिसका रंग धीरे-धीरे मिटता जा रहा था तो कोई कठघरे पर झुका हुआ नीचे घाटी में देख रहा था और यह पहचानने की कोशिश कर रहा था कि किस गाँव में कुत्ता भौंक रहा है। वह वही समय था जब पिता खेतों से घर लौटता है और आँगन में एक पल उस कुत्ते के साथ खेलता है जो उस पर उछल पड़ता है। कभी अपना थूथन उसके हाथों में बंद करवा देता है, कभी उसे पीठ के बल गिरा देता है। युवतियाँ पहली तारे को खोजती हुई इधर-उधर देखती हैं ताकि उस पर कोई इच्छा माँग सकें और लड़के भोजन के इंतज़ार में बेचैन होने लगते हैं। यहाँ तक कि सबसे व्यस्त माँ भी एक क्षण के लिए अपने हाथों का काम रोककर खड़ी हो जाती है और अपने प्यारे, किंतु परेशान करने वाले परिवार को देखकर मुस्करा देती है।

अंकल पियो संगमरमर की टूटी-फूटी बेंचों में से एक के पास खड़े थे और कैमिला को अपनी ओर आते हुए देख रहे थे। “मुझे देर हो गई,” उसने कहा। “मुझे अफ़सोस है। आप मुझसे क्या कहना चाहते हैं?”

“कैमिला,” उन्होंने कहना शुरू किया।

“मेरा नाम डोना मिकाएला है।”

“मैं तुम्हें नाराज़ नहीं करना चाहता, डोना मिकाएला, लेकिन जब तुमने बीस वर्षों तक मुझे तुम्हें कैमिला कहने दिया है, तो मुझे लगता है...”

“ओह, जैसा तुम्हें ठीक लगे। जैसा तुम्हें ठीक लगे।”

“कैमिला, मुझसे वादा करो कि तुम मेरी बात सुनोगी। वादा करो कि मेरी पहली ही बात पर वहाँ से चली नहीं जाओगी।”

अचानक वह अप्रत्याशित आवेश के साथ बोल पड़ी, “अंकल पियो, मेरी बात सुनिए। अगर आपको लगता है कि आप मुझे फिर रंगमंच पर लौटने के लिए राज़ी कर सकते हैं तो आप पागल हैं। मैं रंगमंच की ओर पीछे मुड़कर देखती हूँ तो मुझे भय लगता है। यह बात समझ लीजिए। रंगमंच! भला रंगमंच भी कोई जगह है! उस गंदी जगह में रोज़-रोज़ अपमान सहना। समझ लीजिए कि आप अपना समय व्यर्थ गँवा रहे हैं।”

उन्होंने कोमलता से उत्तर दिया, “अगर तुम इन नए दोस्तों के साथ खुश हो तो मैं नहीं चाहता कि तुम वापस लौटो।”

“तो तुम्हें मेरे नए दोस्त पसंद नहीं हैं?” उसने तुरंत उत्तर दिया। “फिर उनकी जगह तुम मुझे किससे मिलाना चाहते हो?”

“कैमिला, मुझे केवल इतना याद है कि…”

“मैं अपनी आलोचना नहीं सुनूँगी। मुझे कोई सलाह नहीं चाहिए। थोड़ी ही देर में ठंड हो जाएगी। मुझे अपने घर लौटना है। बस मुझे छोड़ दो और कुछ नहीं। बस अपने मन से मेरा ख़याल निकाल दो।”

“प्रिय कैमिला, नाराज़ मत हो। मुझे तुमसे बात करने दो। बस दस मिनट मेरी बात सह लो।”

उन्हें समझ नहीं आया कि वह क्यों रो रही थी। उन्हें यह भी नहीं सूझ रहा था कि क्या कहें। वे यूँ ही इधर-उधर की बातें करने लगे, “तुम अब थिएटर देखने भी नहीं आतीं और वहाँ सब लोग इस बात पर ध्यान देते हैं। अब दर्शक भी कम होते जा रहे हैं। वे पुराने नाटक अब सप्ताह में केवल दो बार करते हैं। बाकी सारी रातों में गद्य में लिखे ये नए प्रहसन खेले जाते हैं। सब कुछ नीरस, बचकाना और अश्लील है। अब कोई ठीक से स्पेनी भाषा बोल भी नहीं सकता। अब कोई ठीक से चल भी नहीं सकता। कॉर्पस क्रिस्टी के दिन उन्होंने ‘बेलशज़ार का भोज[26]’ खेला था, जिसमें तुम कितनी अद्भुत थीं। अब तो वही नाटक भी शर्मनाक ढंग से प्रस्तुत किया गया।”

कुछ देर मौन रहा। बादलों की एक सुंदर कतार, भेड़ों के झुंड जैसी, समुद्र की ओर से धीरे-धीरे ऊपर उठ रही थी और पहाड़ियों के बीच की घाटियों में सरकती चली आ रही थी। अचानक कैमिला ने उनके घुटने को छुआ। उसका चेहरा बीस वर्ष पहले वाले उसके चेहरे जैसा हो गया था। “मुझे माफ़ कर दो, अंकल पियो,.. मैं इतनी बुरी हो गई। आज दोपहर जैमे बीमार था। कोई कुछ कर ही नहीं सकता। वह वहाँ पड़ा रहता है। इतना सफ़ेद और… इतना विस्मित-सा। बस, आदमी को दूसरी चीज़ों के बारे में सोचना पड़ता है। अंकल पियो, अगर मैं रंगमंच पर लौट भी जाऊँ तो कोई फ़ायदा नहीं होगा। दर्शक तो गद्य के इन प्रहसनों को देखने आते हैं। पुराने नाटकों को जीवित रखने की कोशिश करना हमारी मूर्खता थी। जिसे मन हो, वह पुराने नाटक किताबों में पढ़ ले। भीड़ से लड़ने का कोई लाभ नहीं।”

“अद्भुत कैमिला, जब तुम रंगमंच पर थीं तब मैंने तुम्हारे साथ न्याय नहीं किया। वह मेरे भीतर का कोई मूर्खतापूर्ण अहंकार था। तुम्हें जो प्रशंसा मिलनी चाहिए थी, मैं उससे भी तुम्हें वंचित रखना चाहता था। मुझे माफ़ कर दो। तुम हमेशा से बहुत बड़ी कलाकार रही हो। अगर तुम्हें कभी यह महसूस होने लगे कि इन लोगों के बीच तुम खुश नहीं हो तो तुम्हें मैड्रिड जाने के बारे में सोचना चाहिए। वहाँ तुम्हारी बहुत बड़ी सफलता होगी। तुम अभी भी जवान और सुंदर हो। डोना मिकाएला कहलाने के लिए बाद में भी बहुत समय पड़ा है। हम जल्द ही बूढ़े हो जाएँगे। हम जल्द ही मर जाएँगे।”

“नहीं, मैं स्पेन को कभी नहीं देखूँगी। सारी दुनिया एक जैसी है, मैड्रिड हो या लीमा।”

“ओह, काश हम किसी ऐसे द्वीप पर चले जाते जहाँ लोग तुम्हें उस रूप में पहचानते जो तुम वास्तव में हो। और तुमसे प्रेम करते।”

“तुम पचास वर्ष के हो चुके हो और अब भी ऐसे द्वीपों के सपने देखते हो, अंकल पियो।”

उन्होंने सिर झुका लिया और बुदबुदाए, “बेशक मैं तुमसे प्रेम करता हूँ, कैमिला, जैसे हमेशा करता आया हूँ और जितना कह सकता हूँ उससे कहीं अधिक। तुम्हें जान पाना ही मेरे पूरे जीवन के लिए पर्याप्त है। अब तुम एक बड़ी कुलीन महिला हो। और तुम धनी भी हो। अब ऐसा कोई रास्ता नहीं बचा जिससे मैं तुम्हारी सहायता कर सकूँ। लेकिन मैं हमेशा तैयार हूँ।”

“तुम कितने बेतुके हो,” उसने मुस्कराते हुए कहा। “तुमने यह बात बिल्कुल लड़कों की तरह कही है। उम्र बढ़ने के साथ भी तुम कुछ सीखते हुए नहीं लगते, अंकल पियो। उस तरह का प्रेम और उस तरह का कोई द्वीप होता ही नहीं। ऐसी चीज़ें तो रंगमंच में ही मिलती हैं।”

वे लज्जित-से दिखाई दिए, लेकिन अपनी बात से आश्वस्त थे।

आख़िरकार वह उठ खड़ी हुई और उदास स्वर में बोली, “हम आखिर किस बारे में बातें कर रहे हैं! ठंड बढ़ती जा रही है। मुझे भीतर जाना होगा। तुम्हें इसे स्वीकार कर लेना चाहिए। मेरा मन रंगमंच में नहीं लगता।” कुछ देर मौन रहा। “और बाकी बातों के बारे में?... ओह, मैं खुद नहीं समझती। यह सब परिस्थितियों का खेल है। मुझे वही होना है जो मुझे होना है। तुम भी इसे समझने की कोशिश मत करो। मेरे बारे में मत सोचा करो, अंकल पियो। बस मुझे माफ़ कर दो और कुछ नहीं। बस मुझे माफ़ करने की कोशिश करो।”

वह एक क्षण वहीं खड़ी रही, मानो अपने भीतर गहराई से महसूस की हुई कोई बात खोज रही हो जो वह उनसे कह सके। पहला बादल छत, जैसे उस खुले स्थान तक पहुँच गया था। अँधेरा छा रहा था और बगीचे में ठहरे आख़िरी लोग भी वहाँ से जा रहे थे। वह डॉन जैमे, डॉन आंद्रेस और स्वयं अंकल पियो के बारे में सोच रही थी। लेकिन उसे कहने के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे। अचानक वह झुक गई, उनके हाथ की उँगलियों को चूमा और तेज़ी से वहाँ से चली गई। लेकिन वे बहुत देर तक घिरते हुए बादलों के बीच बैठे रहे। खुशी से काँपते हुए और इन घटनाओं के अर्थ को समझने की कोशिश करते हुए।

अचानक पूरे लीमा में यह खबर फैल गई। डोना मिकाएला विलेगास... वही महिला जो कभी कैमिला द पेरिकोल हुआ करती थी, को चेचक हो गया था। सैकड़ों अन्य लोगों को भी चेचक हुआ था, लेकिन लोगों की दिलचस्पी और दुर्भावना का सारा ध्यान उसी अभिनेत्री पर केंद्रित था। पूरे शहर में एक उन्मत्त-सी आशा फैल गई कि अब उसका वह सौंदर्य नष्ट हो जाएगा, जिसके बल पर वह उस वर्ग को तुच्छ समझती थी जिससे स्वयं ऊपर उठकर आई थी। बीमार-कक्ष से यह खबर बाहर निकल आई कि कैमिला का चेहरा अब इतना कुरूप हो गया है कि वह उपहास का पात्र लगती है और ईर्ष्यालु लोगों के आनंद का प्याला छलक उठा। जैसे ही वह चलने-फिरने लायक हुई, उसने स्वयं को शहर से पहाड़ियों में स्थित अपने घर ले जाने का प्रबंध किया। उसने अपने सुंदर छोटे-से महल को बेचने का आदेश दे दिया। उसने अपने आभूषण उन लोगों को लौटा दिए जिन्होंने उन्हें भेंट किया था और अपने सुंदर वस्त्र बेच डाले। वायसराय, महाधर्माध्यक्ष और दरबार के वे थोड़े-से पुरुष, जो उसके सबसे सच्चे प्रशंसक रहे थे, अब भी उसके द्वार पर संदेशों और उपहारों के साथ पहुँचते रहे। लेकिन संदेशों की उसने कोई परवाह नहीं की और उपहार बिना किसी टिप्पणी के लौटा दिए। बीमारी शुरू होने के बाद से उसने अपनी परिचारिका और नौकरानियों के अतिरिक्त किसी को भी अपने पास आने की अनुमति नहीं दी थी। डॉन आंद्रेस के बार-बार किए गए प्रयासों के उत्तर में कैमिला ने उसे एक बड़ी धनराशि के साथ एक पत्र भेजा, जिसमें जितनी कड़वाहट और गर्व संभव था, सब कुछ मिला हुआ था।

उन सभी सुंदर स्त्रियों की तरह जिन्हें बचपन से अपने सौंदर्य के लिए लगातार प्रशंसा मिलती रही हो, उसने बिना किसी बनावटी निंदा के यह मान लिया था कि उसके प्रति किसी भी व्यक्ति के आकर्षण का आधार अनिवार्य रूप से उसका सौंदर्य ही होना चाहिए। अब से उसके प्रति दिखाई जाने वाली हर दिलचस्पी उसे केवल ऐसी दया लगती, जिसमें सामने वाले की श्रेष्ठता का भाव मिला हो और जिसके भीतर उसकी इस पूर्ण पराजय से मिलने वाली एक हल्की, संतुष्ट खुशी की गंध भी हो। यह धारणा कि अब, जब उसका सौंदर्य जा चुका है, उसे किसी और समर्पण की आशा नहीं करनी चाहिए। इस तथ्य से पैदा हुई थी कि उसने प्रेम को कभी जुनून के अतिरिक्त किसी और रूप में जाना ही नहीं था। ऐसा प्रेम, यद्यपि उदारता और विचारशीलता में स्वयं को खर्च कर देता है, यद्यपि उससे कल्पनाएँ और महान कविता जन्म लेती है, फिर भी स्वार्थ की सबसे तीखी अभिव्यक्तियों में से एक बना रहता है। जब तक वह लंबे दासत्व से, अपने ही आत्म-घृणा से, उपहास से और बड़े-बड़े संदेहों से होकर नहीं गुजरता, तब तक वह निष्ठाओं के संसार में अपना स्थान नहीं बना सकता। जिन लोगों ने अपना पूरा जीवन ऐसे प्रेम में बिताया है, वे हमें प्रेम के बारे में उस बच्चे से भी कम बता सकते हैं जिसने कल ही अपना कुत्ता खोया है। जब उसके मित्र लगातार उसे फिर से समाज में लौटाने की कोशिश करते रहे तो वह और अधिक क्रोधित होती गई और शहर में अपमानजनक संदेश भेजती रही। कुछ समय तक यह कहा गया कि वह धर्म की ओर मुड़कर एकांत जीवन बिताने जा रही है। लेकिन बाद में यह नई अफ़वाह फैलने लगी कि उस छोटे-से खेत पर सब कुछ क्रोध और निराशा में डूबा हुआ है और इसने पुरानी बातों का खंडन कर दिया। जो लोग उसके निकट थे, उनके लिए उसकी निराशा देखना भयावह था। उसे विश्वास हो गया था कि उसका जीवन समाप्त हो चुका है। उसका और उसके बच्चों का जीवन। अपने उन्मादी गर्व में उसने जितना लौटाना आवश्यक था, उससे कहीं अधिक लौटा दिया था। अब गरीबी के निकट आने का भय उसके अकेलेपन और भविष्य के अँधेरे में जुड़ गया था। अब उसके पास इसके अलावा कुछ करने को नहीं बचा था कि उस छोटे-से खेत के बीच, जो धीरे-धीरे उजड़ता जा रहा था, ईर्ष्यापूर्ण एकांत में अपने दिन काटती रहे। वह घंटों अपने शत्रुओं की खुशी के बारे में सोचती रहती और उसे अपने कमरे में अजीब-अजीब चीखें निकालते हुए इधर-उधर चहलकदमी करते सुना जा सकता था।

अंकल पियो ने स्वयं को निराश नहीं होने दिया। बच्चों के लिए उपयोगी बनने की कोशिश करके, खेत के प्रबंध में हाथ बँटाकर और चुपचाप उसे कुछ पैसे उधार देकर उन्होंने उस घर में प्रवेश पा लिया। यहाँ तक कि उसके घूँघट में छिपी स्वामिनी के सामने उपस्थित होने का अवसर भी प्राप्त कर लिया। लेकिन तब भी कैमिला, अपने गर्व में इस विश्वास से आश्वस्त कि उन्हें उस पर दया आती है, अपनी ज़ुबान की धार से उन पर प्रहार करती और व्यंग्य-बाणों से उन्हें घायल करके एक विचित्र प्रकार की सांत्वना पाती। वे उससे और भी अधिक प्रेम करने लगे क्योंकि वे उसके अपमानित मन की स्वस्थ होने की प्रक्रिया के प्रत्येक चरण को उससे कहीं बेहतर समझते थे। लेकिन एक दिन एक ऐसी दुर्घटना हो गई जिसने उसके भीतर कैमिला की इस सुधार-यात्रा में उनकी भागीदारी समाप्त कर दी। उन्होंने एक दरवाज़ा धक्का देकर खोल दिया।

कैमिला को लगा था कि उसने उसे भीतर से बंद कर दिया है। सिर्फ़ एक घंटे के लिए उसके भीतर एक मूर्खतापूर्ण, गुप्त आशा जागी थी। वह सोच रही थी कि क्या वह चॉक और क्रीम का कोई ऐसा लेप बना सकती है जिसे चेहरे पर लगाया जा सके। वही कैमिला, जिसने दरबार की फूलों जैसी सजधज वाली बूढ़ी स्त्रियों का कितनी बार मज़ाक उड़ाया था, कुछ क्षणों के लिए सोच रही थी कि क्या उसने रंगमंच पर ऐसा कुछ सीखा है जो अब उसके काम आ सके। उसे विश्वास था कि उसने दरवाज़ा बंद कर दिया है। जल्दी-जल्दी, धड़कते हुए हृदय के साथ उसने वह लेप अपने चेहरे पर लगाया। उस पर वह भद्दी, कृत्रिम पीली-सफ़ेदी चढ़ाई और जब उसने आईने में देखा और अपनी कोशिश की निरर्थकता को पहचान लिया, तभी उसे आईने में दरवाज़े पर खड़े, विस्मय से देखते हुए अंकल पियो की छवि दिखाई दी। वह चीखती हुई कुर्सी से उठी और अपने चेहरे को दोनों हाथों से ढँक लिया।

“चले जाओ! मेरे घर से हमेशा के लिए चले जाओ!” वह चीख उठी। “मैं तुम्हें फिर कभी नहीं देखना चाहती।” अपनी लज्जा में उसने गालियों और घृणा के साथ उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। वह गलियारे में उनके पीछे-पीछे गई और सीढ़ियों से नीचे उनकी ओर वस्तुएँ फेंकती रही। उसने खेत के प्रबंधक को आदेश दे दिया कि अंकल पियो को अब इस परिसर में प्रवेश करने की अनुमति न दी जाए। लेकिन वे एक सप्ताह तक उससे फिर मिलने की कोशिश करते रहे। अंततः वे लीमा लौट गए। उन्होंने वहाँ अपना समय किसी तरह काटा, लेकिन उसके पास रहने के लिए उसी तरह तरसते रहे जैसे अठारह वर्ष का कोई लड़का तरसता है। आख़िरकार उन्होंने एक तरकीब सोची और उसे अमल में लाने के लिए फिर पहाड़ियों की ओर लौट आए।

एक सुबह, सूर्योदय से पहले, वे उठे और उसके कमरे की खिड़की के नीचे ज़मीन पर लेट गए। अँधेरे में उन्होंने रोने की आवाज़ की नकल की। जहाँ तक संभव था, किसी कम उम्र की लड़की के रोने की आवाज़ की। वे पूरे पंद्रह मिनट तक ऐसा करते रहे। उन्होंने अपनी आवाज़ को उतना ही धीमा रखा जितनी धीमी ध्वनि को इतालवी संगीतकार “पियानो” के संकेत से व्यक्त करते हैं। लेकिन बीच-बीच में वे उस आवाज़ को रोक भी देते, इस आशा से कि यदि वह सो रही हो तो उसकी लंबी अवधि उतनी ही प्रभावी ढंग से उसके मन में उतर जाएगी जितनी उसकी धीमी तीव्रता। हवा ठंडी और सुहावनी थी। पर्वत-शिखरों के पीछे नीलम जैसी हल्की-सी पहली आभा दिखाई देने लगी थी और पूरब में भोर का तारा हर क्षण और अधिक कोमल भाव से चमक रहा था। खेत की सभी इमारतों को एक गहन निस्तब्धता ने घेर रखा था। केवल कभी-कभार चलने वाली हवा घास के पूरे विस्तार को सिसकने-सा स्वर दे देती थी। अचानक उसके कमरे में एक दीपक जल उठा और उसके कुछ ही क्षण बाद खिड़की का पट पीछे की ओर खुला और घूँघटों में लिपटा हुआ एक सिर बहुत दूर तक बाहर की ओर झुक आया।

“कौन है?” उस सुंदर आवाज़ ने पूछा।

अंकल पियो चुप रहा।

कैमिला ने फिर कुछ अधीरता भरे स्वर में कहा, “कौन है? कौन है जो रो रहा है?”

“डोना मिकाएला, मेरी मालकिन, मैं आपसे विनती करता हूँ, यहाँ मेरे पास आइए।”

“तुम कौन हो और क्या चाहते हो?”

“मैं एक गरीब लड़की हूँ। मैं एस्ट्रेल्या हूँ। मैं आपसे विनती करती हूँ कि आकर मेरी मदद करें। अपनी नौकरानी को मत बुलाइए। डोना मिकाएला, मैं आपसे प्रार्थना करती हूँ, आप स्वयं आइए।”

कैमिला कुछ क्षण चुप रही, फिर अचानक बोली, “बहुत अच्छा,” और खिड़की का पट बंद कर दिया। कुछ ही देर बाद वह मकान के कोने से निकलकर दिखाई दी। उसने एक मोटी चादर ओढ़ रखी थी, जिसका सिरा ओस में घिसट रहा था। वह कुछ दूरी पर खड़ी हुई और बोली, “जहाँ मैं खड़ी हूँ, वहीं आओ, तुम कौन हो?”

अंकल पियो उठ खड़ा हुए। “कैमिला, मैं हूँ... अंकल पियो। मुझे माफ़ कर दो, लेकिन मुझे तुमसे कुछ कहना ज़रूरी है।”

“हे भगवान की माता, आखिर मैं इस भयानक आदमी से कब छुटकारा पाऊँगी! समझ लो... मैं किसी से नहीं मिलना चाहती। मैं किसी से बात नहीं करना चाहती। मेरा जीवन समाप्त हो चुका है। बस, यही बात है।”

“कैमिला, हमारे इतने लंबे साथ के नाम पर मैं तुमसे केवल एक बात की विनती करता हूँ। मैं चला जाऊँगा और फिर कभी तुम्हें परेशान नहीं करूँगा।”

“मैं तुम्हें कुछ नहीं दूँगी, कुछ भी नहीं। मुझसे दूर रहो।”

“मैं वादा करता हूँ कि अगर तुम इस बार मेरी बात सुन लो तो मैं फिर कभी तुम्हें परेशान नहीं करूँगा।” वह मकान के दूसरी ओर बने दरवाज़े की ओर तेज़ी से बढ़ रही थी और अंकल पियो को उसके साथ-साथ दौड़ना पड़ा ताकि यह सुनिश्चित कर सके कि उसकी बात उसके कानों तक पहुँच रही है। वह रुक गई।

“तो बात क्या है? जल्दी कहो। ठंड है। मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मुझे अपने कमरे में वापस जाना है।”

“कैमिला, मुझे एक साल के लिए डोन जैमे को अपने साथ लीमा ले जाने दो। मैं उसका शिक्षक बनूँगा। मैं उसे कैस्टिलियन भाषा पढ़ाऊँगा। यहाँ वह नौकरों के बीच पड़ा रहता है। वह कुछ नहीं सीख रहा है।”

“नहीं।”

“कैमिला, उसका क्या होगा? वह बुद्धिमान है और सीखना चाहता है।”

“वह बीमार है। नाज़ुक है। तुम्हारा घर तो सूअरबाड़ा है। उसके लिए केवल देहात ही अच्छा है।”

“लेकिन पिछले कुछ महीनों में उसकी तबीयत बहुत बेहतर हुई है। मैं तुमसे वादा करता हूँ कि अपना घर साफ़-सुथरा कर दूँगा। मैं मद्रे मारिया देल पिलार से एक गृह-व्यवस्थापक की व्यवस्था करने के लिए कहूँगा। यहाँ तो वह सारा दिन तुम्हारे अस्तबलों में पड़ा रहता है। मैं उसे वह सब सिखाऊँगा जो एक सज्जन व्यक्ति को जानना चाहिए। तलवारबाज़ी, लैटिन और संगीत। हम सब कुछ पढ़ेंगे....”

“किसी माँ को इस तरह उसके बच्चे से अलग नहीं किया जा सकता। यह असंभव है। तुमने ऐसा सोच भी कैसे लिया? तुम पागल हो। मेरे बारे में और मेरे जीवन से जुड़ी हर चीज़ के बारे में सोचना छोड़ दो। अब मेरा कोई अस्तित्व नहीं है। मैं और मेरे बच्चे जैसे-तैसे अपना जीवन चला लेंगे। फिर मुझे परेशान करने की कोशिश मत करना। मैं किसी भी इंसान को देखना नहीं चाहती।”

अब अंकल पियो को कठोर उपाय अपनाने के लिए विवश होना पड़ा। “तो फिर वह पैसा चुका दो जो तुम्हें मुझे देना है,” उसने कहा।

कैमिला वहीं खड़ी रह गई, स्तब्ध। उसने मन-ही-मन कहा, “जीवन इतना भयावह है कि इसे सह पाना कठिन है। मैं कब मर सकती हूँ?” कुछ क्षण बाद उसने भर्राई हुई आवाज़ में उसे उत्तर दिया, “मेरे पास बहुत कम पैसे हैं। जितना मैं दे सकती हूँ, उतना तुम्हें चुका दूँगी। अभी चुका दूँगी। मेरे पास यहाँ कुछ गहने हैं। उसके बाद हमें फिर कभी एक-दूसरे को देखने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।” उसे अपनी गरीबी पर शर्म आ रही थी। वह कुछ कदम आगे बढ़ी, फिर मुड़कर बोली, “अब मुझे समझ में आया कि तुम बहुत कठोर आदमी हो। लेकिन यह उचित ही है कि मैं तुम्हारा जो कर्ज़ है, वह चुका दूँ।”

“नहीं, कैमिला, मैंने यह केवल अपनी बात मनवाने के लिए कहा था। मैं तुमसे कोई पैसा नहीं लूँगा। लेकिन एक साल के लिए डोन जैमे को मुझे दे दो। मैं उससे प्रेम करूँगा और उसकी पूरी देखभाल करूँगा। क्या मैंने तुम्हें कभी कोई नुकसान पहुँचाया? उन बीते वर्षों में क्या मैं तुम्हारा बुरा शिक्षक था?”

“बार-बार कृतज्ञता, कृतज्ञता, कृतज्ञता की याद दिलाते रहना तुम्हारी क्रूरता है। मैं कृतज्ञ थी। हाँ, बहुत कृतज्ञ थी! लेकिन अब, जब मैं वह स्त्री ही नहीं रही जो पहले थी तो कृतज्ञ होने के लिए मेरे पास कुछ भी शेष नहीं है।” कुछ देर मौन छाया रहा। उसकी आँखें उस तारे पर टिकी थीं, जो मानो अपने अद्भुत प्रकाश से पूरे आकाश को आगे ले जा रहा हो। उसके हृदय में एक गहरी पीड़ा थी। उस संसार की पीड़ा, जिसका कोई अर्थ नहीं रह गया था। फिर उसने कहा, “अगर जैमे तुम्हारे साथ जाना चाहता है तो ठीक है। मैं सुबह उससे बात करूँगी। अगर वह तुम्हारे साथ जाना चाहे तो तुम्हें वह दोपहर के आस-पास सराय में मिल जाएगा। शुभ रात्रि। ईश्वर तुम्हारे साथ हो।”

“ईश्वर तुम्हारे साथ हो।”

वह वापस घर चली गई। अगले दिन वह गंभीर-सा छोटा लड़का सराय में आ पहुँचा। अब उसके अच्छे कपड़े फटे और दाग़दार हो चुके थे और अपने कपड़े बदलने के लिए वह एक छोटी-सी गठरी साथ लिए था। उसकी माँ ने उसे खर्च के लिए सोने का एक सिक्का दिया था और एक छोटा-सा पत्थर भी, जो अँधेरे में चमकता था ताकि जागती हुई रातों में वह उसे देख सके। वे दोनों एक गाड़ी में चल पड़े, लेकिन जल्द ही अंकल पियो को महसूस हुआ कि गाड़ी के झटके लड़के के लिए ठीक नहीं हैं। उसने लड़के को अपने कंधे पर उठा लिया। जब वे सैन लुइस रे के पुल के निकट पहुँचे तो जैमे ने अपनी शर्म छिपाने की कोशिश की क्योंकि वह जानता था कि उन क्षणों में से एक आने वाला है जो उसे दूसरे लोगों से अलग कर देता था। उसे खास तौर पर इसलिए शर्म आ रही थी कि अंकल पियो अभी-अभी उसके एक मित्र, एक समुद्री जहाज़ के कप्तान से आगे निकल गए थे। और जैसे ही वे पुल पर पहुँचे, उसने एक वृद्ध महिला से बात की, जो एक छोटी लड़की के साथ यात्रा कर रही थी। अंकल पियो ने कहा कि पुल पार करने के बाद वे बैठकर आराम करेंगे, लेकिन इसकी ज़रूरत ही नहीं पड़ी।



[1] फ़्रांस में ईसाई पादरी, विशेषकर कैथोलिक पादरी के लिए प्रयुक्त संबोधन/उपाधि। साहित्य में यह किसी पादरी के नाम से पहले सम्मानसूचक रूप में भी आता है

[2] चीनी या शहद, मेवों (विशेषकर बादाम) और कभी-कभी अंडे की सफेदी से बनाई जाने वाली एक मुलायम या चबाने योग्य मिठाई

[3] फ़िरोज़ा — नीले और हरे के बीच का रंग; साथ ही इसी रंग का एक रत्न भी

[4] स्पेनी लेखक पेद्रो काल्देरोन दे ला बार्का के नाम का हिस्सा है

[5] वे 16वीं शताब्दी के प्रसिद्ध स्पेनी संगीतकार और चर्च-संगीत (sacred music) के रचयिता थे

[6] कैथोलिक चर्च की धार्मिक उपासना/प्रार्थना की विधि

[7] ऐसी रचना जिसमें दो या अधिक स्वतंत्र स्वर-धुनें एक साथ चलती हैं और आपस में सामंजस्य बनाती हैं

[8] बड़ी ज़मींदारी, विशाल कृषि-जागीर, या उसका बड़ा मकान/एस्टेट

[9] लोकप्रिय हल्का-फुल्का रंगमंचीय मनोरंजन था, जिसमें एक ही कार्यक्रम में कई तरह की प्रस्तुतियाँ होती थीं

[10] सर्वांतेस का पूरा नाम मिगेल दे सर्वांतेस सावेद्रा (Miguel de Cervantes Saavedra) था। वे 16वीं–17वीं शताब्दी के महान स्पेनी लेखक थे और विशेष रूप से अपने उपन्यास डॉन कीहोते (Don Quixote) के लिए प्रसिद्ध हैं

[11] पिग्मेलियन (Pygmalion) यूनानी मिथक का एक प्रसिद्ध पात्र है। पिग्मेलियन एक मूर्तिकार था। उसने अपने आदर्श की एक अत्यंत सुंदर स्त्री की मूर्ति बनाई और अपनी ही बनाई हुई मूर्ति से इतना प्रेम करने लगा कि उसने देवताओं से प्रार्थना की कि वह मूर्ति जीवित हो जाए। उसकी प्रार्थना स्वीकार हुई और मूर्ति एक जीवित स्त्री बन गई। इसी मिथक से प्ले पिग्मेलियन (play Pygmalion) का अर्थ निकला है—किसी व्यक्ति को अपनी कल्पना और प्रशिक्षण के अनुसार गढ़ना, तराशना और विकसित करना जैसे, कोई कलाकार अपनी कृति को आकार देता है

[12] रोमन देवता

[13] देवतुल्य व्यक्तित्व

[14] स्पेन के मैड्रिड में स्थित एक ऐतिहासिक शाही महल और उद्यान-परिसर था

[15] बहुत बढ़िया

[16]पियेर द बूरदाय, स्योर द ब्रांतोम (Pierre de Bourdeille, seigneur de Brantôme) से है, जो 16वीं शताब्दी के फ्रांसीसी लेखक और संस्मरणकार थे

[17] अरेतिनो से यहाँ आशय पिएत्रो अरेतिनो (Pietro Aretino, 1492–1556) से है। ये इतालवी पुनर्जागरण के प्रसिद्ध लेखक, कवि और व्यंग्यकार थे

[18] एपिक्यूरियन शब्द प्राचीन यूनानी दार्शनिक एपिक्यूरस के दर्शन से आया है। एपिक्यूरस के दर्शन में सुख महत्वपूर्ण था, लेकिन उसका अर्थ केवल भोग-विलास नहीं था। वे मन की शांति, भय से मुक्ति और संयमित सुख को अधिक महत्व देते थे

[19] ब्रोकेड का कपड़ा, ज़री-बूटी या उभरी हुई बुनावट वाला महँगा कपड़ा

[20] किसी युवती की देखरेख के लिए साथ रहने वाली बड़ी उम्र की स्त्री, विशेषकर पुराने ज़माने के स्पेनिश समाज में

[21] मैरी मैग्डलीन

[22] फ्रांसीसी दार्शनिक, गणितज्ञ और वैज्ञानिक थे। उन्हें आधुनिक पाश्चात्य दर्शन के प्रमुख संस्थापकों में माना जाता है

[23] फ़्रांस का प्रसिद्ध स्पा-नगर था, जो अपने खनिज जल और स्वास्थ्य-उपचार के लिए जाना जाता था

[24] एशियाई शैली का बहुमंज़िला, छतों वाला धार्मिक भवन या मीनारनुमा मंदिर

[25] यह स्पेन में मैड्रिड के निकट स्थित एक विशाल राजमहल, मठ और ऐतिहासिक परिसर है

[26] यह बाइबिल केडेनियल, अध्याय 5 की प्रसिद्ध घटना है। बेलशज़ार (Belshazzar) प्राचीन बाबुल का राजा था। उसने एक भव्य भोज दिया और यरूशलेम के मंदिर से लाए गए पवित्र पात्रों में शराब पी। उसी समय दीवार पर एक रहस्यमय हाथ दिखाई दिया और उसने लिखा, “MENE, MENE, TEKEL, UPHARSIN” डेनियल ने इसका अर्थ बताया कि राजा का राज्य अपने अंत की ओर पहुँच चुका है। उसी रात बेलशज़ार मारा गया और बाबुल का राज्य समाप्त हो गया

 

थॉर्नटन वाइल्डर के प्रसिद्ध उपन्यास The Bridge of San Luis Rey का हिंदी अनुवाद (भाग चार: अंकल पियो)

  भाग चार: अंकल पियो By Louisa Starr Canziani अपने एक पत्र ( XXIX उ नतीसवें पत्र) में मार्केसा दे मोंतेमायोर अंकल पियो, “ हमारे बूढ़े हार...