Friday, 7 August 2026

(सेनेका के) अन्य पत्र का अंश

 प्रिय लूसीलियस 


एनियस के कुछ विचार इतने उत्कृष्ट हैं कि यद्यपि वे मैले-कुचैले लोगों के बीच लिखे गए थे, फिर भी वे इत्र लगाए हुए लोगों के बीच भी निश्चय ही सुखद लग सकते हैं। लेकिन उसकी कविताएँ कभी-कभी बहुत हास्यास्पद भी होती हैं। उदाहरण के लिए, कैथेगस के बारे में ये पंक्तियाँ— “उसके बारे में उन आम लोगों ने, जो उन दिनों जीवित थे और अपना जीवन बिताते थे, कहा कि वह जनता का सबसे श्रेष्ठ पुष्प और वाक्पटुता का सार था।” तुम निश्चिंत रहो कि जिस प्रकार की पंक्तियाँ पसंद करने वाले लोग हैं, वे सोटेरिकस के सोफों की भी प्रशंसा करेंगे।



    मुझे आश्चर्य होता है कि जो लोग स्वयं अत्यंत वाक्पटु हैं और एनियस के प्रति बहुत अनुरक्त हैं, उन्होंने उसकी श्रेष्ठ पंक्तियों के बजाय उसकी हास्यास्पद पंक्तियों की प्रशंसा की। उदाहरण के लिए, सिसरो ने एनियस की जिन उत्कृष्ट पंक्तियों को उद्धृत किया है, उनमें इन पंक्तियों को भी शामिल किया है। मुझे इस बात पर आश्चर्य नहीं होता कि कोई व्यक्ति इन पंक्तियों को लिख सकता था क्योंकि जब इनकी प्रशंसा करने वाला कोई व्यक्ति मौजूद था तो इन्हें लिखने वाला भी मिल ही सकता था। या फिर ऐसा तो नहीं कि महान वक्ता सिसरो वास्तव में अपना ही पक्ष प्रस्तुत कर रहे थे। अर्थात वे अपनी कविता को तुलना में अच्छा दिखाना चाहते थे! स्वयं सिसरो की रचनाओं में, यहाँ तक कि उनके गद्य में भी, ऐसे अंश मिलते हैं जिनसे तुम अनुमान लगा सकते हो कि एनियस को पढ़ने से उन्हें कुछ लाभ मिला था। उदाहरण के लिए, अपनी पुस्तक ‘राज्य के विषय में’ में वे लिखते हैं, “क्योंकि स्पार्टा के मेनेलाउस में एक प्रकार की मधुर-वाणी वाली विनम्रता थी,” और एक अन्य स्थान पर, “वह अपने वक्तृत्व में संक्षिप्त-वाणी का अभ्यास करता है।” 

    दोष सिसरो का नहीं बल्कि उस समय का था। जब पढ़ने के लिए ऐसी ही सामग्री उपलब्ध हो, तब उसी ढंग से बोलने से बच पाना संभव नहीं होता। लेकिन सिसरो के पास अपने लेखन में एनियस की कुछ पंक्तियों को सम्मिलित करने का एक कारण भी था। ऐसा करके वे अपनी शैली को अत्यधिक अलंकृत और परिष्कृत कहे जाने वाली आलोचना से बच जाते थे। हमारे कवि वर्जिल ने भी अपनी रचनाओं में कुछ अटपटी और भद्दी पंक्तियाँ तथा कुछ ऐसी पंक्तियाँ सम्मिलित कीं जो छंद की सामान्य सीमा से अधिक लंबी थीं ताकि एनियस के अनुयायी और उसके साहित्यिक परंपरा से जुड़े लोग नई कविता में भी प्राचीनता की एक झलक पहचान सकें।


विदा 

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