Monday, 5 October 2026

थॉर्नटन वाइल्डर के प्रसिद्ध उपन्यास The Bridge of San Luis Rey का हिंदी अनुवाद (भाग पाँच: शायद कोई मंशा)

 

भाग पाँच: शायद कोई मंशा


By Simon Poe

पुराने पुल की जगह पत्थर का एक नया पुल बना दिया गया है, लेकिन वह घटना भुलाई नहीं गई है। वह कहावतों और प्रचलित मुहावरों का हिस्सा बन चुकी है। कोई लीमाई (लीमा का निवासी) कहता है, “मैं मंगलवार को तुमसे मिल सकता हूँ, अगर पुल नहीं गिरा तो।” दूसरा कहता है, “मेरा चचेरा भाई सैन लुइस रे के पुल के पास रहता है,” और वहाँ उपस्थित लोगों के बीच एक मुस्कान फैल जाती है क्योंकि इसका अर्थ भी यही है, डैमोक्लीज़ की तलवार के नीचे होना[1]। उस दुर्घटना के बारे में कुछ कविताएँ भी हैं, जो हर पेरूवियन काव्य-संग्रह में मिलने वाली क्लासिक रचनाएँ हैं। लेकिन इस घटना का वास्तविक साहित्यिक स्मारक (प्रतीक) ब्रदर जुनिपर की पुस्तक है।

परिस्थिति पर आश्चर्य करने के सौ तरीके हो सकते हैं। यदि सैन मार्टिन विश्वविद्यालय के एक निश्चित विद्वान के साथ उनकी मित्रता न हुई होती तो ब्रदर जुनिपर कभी अपनी वह पद्धति खोज ही नहीं पाते। इस विद्वान की पत्नी एक सुबह एक सैनिक के पीछे-पीछे नाव से स्पेन चली गई थी और अपनी दो बेटियों को, जो अभी पालने में थीं, उसकी देखभाल में छोड़ गई थी। उसके भीतर वह सारी कटुता भरी हुई थी, जो ब्रदर जुनिपर में नहीं थी और उसे इस विश्वास से एक प्रकार का आनंद मिलता था कि दुनिया में सब कुछ गलत है। वह फ्रांसिस्कन साधु के कान में ऐसे विचार और घटनाएँ फुसफुसाकर सुनाया करता था, जो इस धारणा को झुठलाते थे कि संसार किसी दैवी मार्गदर्शन के अनुसार चल रहा है। एक क्षण के लिए ब्रदर की आँखों में व्यथा, लगभग पराजय की-सी झलक आ जाती। फिर वह धैर्यपूर्वक समझाने लगता कि एक आस्थावान व्यक्ति के लिए ऐसी कहानियों में कोई कठिनाई क्यों नहीं है। “नेपल्स और सिसिली की एक रानी थी,” वह विद्वान कहता, “जिसे पता चला कि उसके शरीर के एक तरफ़ एक पीड़ादायक गाँठ थी। वह बहुत घबरा गई। उसने अपनी प्रजा को आदेश दिया कि वे प्रार्थना में लग जाएँ और यह भी आदेश दिया कि सिसिली और नेपल्स के सारे वस्त्रों पर मन्नत के प्रतीकस्वरूप क्रॉस काढ़े जाएँ। उसकी प्रजा उससे बहुत प्रेम करती थी और उनकी सारी प्रार्थनाएँ और कढ़ाइयाँ सच्ची श्रद्धा से की गई थीं, लेकिन उनका कोई फल नहीं निकला। अब वह मोनरेआले[2] के वैभवशाली गिरजाघर में लेटी हुई है और उसके हृदय से कुछ ही इंच ऊपर ये शब्द पढ़े जा सकते हैं, ‘मैं किसी बुराई से नहीं डरूँगी।’”

आस्था पर इस प्रकार के बहुत-से कटाक्ष सुनते-सुनते ब्रदर जुनिपर को विश्वास हो गया कि अब संसार का समय आ गया है। उस विश्वास का प्रमाण प्रस्तुत करने का, आँकड़ों में दर्ज प्रमाण, जो उनके भीतर इतना उज्ज्वल और रोमांचकारी था। जब महामारी उनके प्रिय गाँव पुएर्तो में पहुँची और बड़ी संख्या में किसानों को अपने साथ ले गई तो उसने गुप्त रूप से पंद्रह मृतकों और पंद्रह जीवित बचे लोगों के गुणों का एक आलेख तैयार किया। उनके मूल्य का, शाश्वतता के परिप्रेक्ष्य में। प्रत्येक आत्मा को उसकी अच्छाई, धार्मिक आचरण में उसकी तत्परता और अपने पारिवारिक समूह के लिए उसकी उपयोगिता के आधार पर दस में से अंक दिए गए। उस महत्वाकांक्षी तालिका का एक अंश यह है: अल्फांसो (अच्छाई- 4, धार्मिकता-4), नीना (अच्छाई-2, धार्मिकता-5), मैनुअल बी. (अच्छाई-10, धार्मिकता-10), अल्फांसो वी. (अच्छाई-माइनस 8, धार्मिकता-माइनस 10), वेरा एन. (अच्छाई-0, धार्मिकता-0) (उपयोगिता का कॉलम खाली)

यह काम जितना उन्होंने पहले सोचा था, उससे कहीं अधिक कठिन निकला। कठिन परिस्थितियों वाले लगभग हर सीमावर्ती समुदाय में प्रत्येक व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से अपरिहार्य सिद्ध हुआ और तीसरा स्तंभ लगभग बेकार साबित हुआ। जब परीक्षक का सामना अल्फांसो वी. (Alfonso V.) के व्यक्तिगत चरित्र से हुआ तो उसे ऋणात्मक अंक देने पड़े। वह वेरा एन. (Vera N.) की तरह केवल बुरा व्यक्ति नहीं था। वह बुराई का प्रचारक था। वह केवल स्वयं चर्च जाने से बचता ही नहीं था बल्कि दूसरों को भी चर्च जाने से रोकता था। वेरा एन. वास्तव में बुरी थी लेकिन वह आदर्श उपासक थी और एक भरे हुए झोंपड़े का मुख्य सहारा थी। इन सभी दुखद आँकड़ों से ब्रदर जुनिपर ने प्रत्येक किसान के लिए एक सूचकांक तैयार किया। उन्होंने मृतकों के कुल अंकों को जोड़ा और उनकी तुलना जीवित बचे लोगों के कुल अंकों से की। परिणाम यह निकला कि जो लोग मारे गए थे, वे बचाए जाने के योग्य जीवित बचे लोगों की तुलना में पाँच गुना अधिक मूल्यवान थे। ऐसा लगभग प्रतीत हुआ, मानो पुएर्तो गाँव में महामारी ने जान-बूझकर उन्हीं लोगों को अपना निशाना बनाया हो, जो वास्तव में सबसे अधिक मूल्यवान थे। और उसी दोपहर ब्रदर जुनिपर प्रशांत महासागर के किनारे-किनारे टहलने निकल गए। उन्होंने अपने निष्कर्षों को फाड़ डाला और उनके टुकड़े लहरों में फेंक दिए। एक घंटे तक वे उस समुद्र के क्षितिज पर हमेशा ठहरे रहने वाले मोती-जैसे विशाल बादलों को निहारता रहे और उनकी सुंदरता से एक ऐसी समर्पण-भावना अपने भीतर ग्रहण करता रहे, जिसकी जाँच-पड़ताल उसने अपनी बुद्धि को करने की अनुमति नहीं दी। आस्था और तथ्यों के बीच की विसंगति जितनी सामान्यतः मानी जाती है, उससे कहीं अधिक बड़ी है।

लेकिन सैन मार्टिन के उस विद्वान की एक और कहानी थी। यह वाली इतनी विद्रोही नहीं थी, जिसने संभवतः सैन लुइस रे का पुल गिरने के बाद ब्रदर जुनिपर को अपनी जाँच-पद्धति की एक झलक दी थी। एक दिन यह विद्वान लीमा के गिरजाघर के भीतर से होकर जा रहा था। वहाँ वह एक महिला की समाधिलेख-पट्टी पढ़ने के लिए रुक गया। जैसे-जैसे वह पढ़ता गया, उसका निचला होंठ और अधिक स्पष्ट रूप से आगे निकलता गया। उस पर लिखा था कि बीस वर्षों तक वह अपने घर का केंद्र और आनंद रही थी। वह अपने मित्रों की खुशी थी। जो भी उससे मिलता, उसकी अच्छाई और सुंदरता से चकित होकर लौटता और अब वह वहाँ अपने प्रभु के लौटने की प्रतीक्षा कर रही थी। जिस दिन उसने ये शब्द पढ़े, उस दिन सैन मार्टिन के विद्वान को पहले ही बहुत-सी बातें परेशान कर चुकी थीं। इसलिए उसने समाधिलेख से आँखें उठाईं और क्रोध में ऊँची आवाज़ में बोल पड़ा, “कितनी शर्म की बात है! कितनी बड़ी धूर्तता! दुनिया में हम क्या करते हैं, यह हर कोई जानता है। हम केवल अपनी इच्छाओं को तृप्त करते हैं। फिर निःस्वार्थता की इस कहानी को क्यों बनाए रखना? इस चीज़ को जीवित क्यों रखना, इस अफ़वाह को कि मनुष्य बिना किसी स्वार्थ के दूसरों के लिए जीता है?”

यह कहते हुए उसने पत्थर तराशने वालों की इस साज़िश का पर्दाफाश करने का निश्चय कर लिया। उस महिला को मरे हुए केवल बारह वर्ष हुए थे। उसने उसके नौकरों, उसके बच्चों और उसके मित्रों का पता लगाया। और जहाँ-जहाँ वह गया, वहाँ उसकी प्रिय विशेषताएँ मानो किसी सुगंध की तरह उसके पीछे जीवित बची हुई थीं। जहाँ भी उसका उल्लेख होता, वहाँ एक पीड़ाभरी मुस्कान उभर आती और लोग इस बात पर ज़ोर देते कि उसके स्नेहपूर्ण और उदार व्यवहार को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। यहाँ तक कि उसके पोते-पोतियों की उत्साही युवावस्था भी इस खबर से कुछ अधिक कठिन हो गई थी कि इतना अच्छा होना भी संभव है कि कोई व्यक्ति वास्तव में इतना भला हो सकता है। वह व्यक्ति यह सब देखकर स्तब्ध रह गया। अंततः उसने धीरे से बुदबुदाया, “फिर भी, मैंने जो कहा था, वह सच था। यह स्त्री एक अपवाद थी... शायद एक अपवाद।”

इन लोगों के बारे में अपनी पुस्तक तैयार करते समय ब्रदर जुनिपर को ऐसा लगता था, मानो एक भय उसका पीछा कर रहा हो—यह भय कि यदि उसने ज़रा-सी भी बात छोड़ दी, तो शायद वह कोई ऐसा संकेत खो देगा, जो उसे सही दिशा दिखा सकता था।

जितना अधिक वह काम करता गया, उतना ही अधिक उसे महसूस हुआ कि वह किसी विशाल, धुँधली आभास-भूमि में टटोलता हुआ आगे बढ़ रहा है। बार-बार ऐसा होता कि कुछ विवरण उसे इस तरह दिखाई देते मानो वे महत्त्वपूर्ण हों। काश, वह केवल यह खोज पाता कि उन्हें किस संदर्भ में रखा जाए। इसलिए उसने हर बात लिख डाली, इस आशा से कि शायद यदि वह स्वयं (या कोई उससे अधिक पैनी बुद्धि वाला व्यक्ति) इस पुस्तक को बीस बार फिर से पढ़े तो असंख्य तथ्य अचानक अपने-आप गति करने लगेंगे, एक-दूसरे के साथ जुड़कर कोई रूप बनाने लगेंगे और अपना रहस्य प्रकट कर देंगे। मार्केसा दे मोंतेमायोर की रसोइया ने उसे बताया कि वह लगभग पूरी तरह चावल, मछली और थोड़े-से फल पर जीवित रहती थी। ब्रदर जुनिपर ने यह बात भी इस आशा में लिख ली कि शायद किसी दिन इससे उसके स्वभाव की कोई आध्यात्मिक विशेषता प्रकट हो जाए। डॉन रूबियो ने उसके बारे में कहा कि वह बिना निमंत्रण के उसकी दावतों में आ जाया करती थी ताकि चम्मच चुरा सके। शहर के बाहरी किनारे पर रहने वाली एक दाई ने बताया कि डोना मारिया उसके पास ऐसी विचित्र और मनोविक्षुब्ध करने वाली बातें पूछने आती रही थी कि अंततः उसे उसे किसी भिखारी की तरह दरवाज़े से दूर हट जाने का आदेश देना पड़ा। शहर के पुस्तक-विक्रेता ने बताया कि वह लीमा के तीन सबसे अधिक विद्वान और संस्कारित लोगों में से एक थी। एक किसान की पत्नी ने कहा कि वह भुलक्कड़ थी। लेकिन पूरी तरह अच्छाई से बनी हुई थी। जीवनी लिखने की कला जितनी कठिन है, आम तौर पर जितना समझा जाता है, उससे कहीं अधिक कठिन है।

ब्रदर जुनिपर ने पाया कि जिन लोगों का उसके जाँच के विषयों से सबसे घनिष्ठ संबंध रहा था, उनसे सीखने के लिए सबसे कम बातें मिलती थीं। माद्रे मारिया देल पिलार ने उससे पेपिता के बारे में बहुत देर तक बातें कीं, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि पेपिता के लिए उसकी अपनी क्या आकांक्षाएँ थीं। पेरीकोले से आरंभ में संपर्क करना कठिन था, लेकिन कुछ ही समय बाद वह उस फ्रांसिस्कन साधु को पसंद करने लगी। अंकल पियो के बारे में उसका वर्णन उन तमाम अप्रिय और बदनाम करने वाली गवाहियों से पूरी तरह विपरीत था, जो उसने अन्य लोगों से इकट्ठी की थीं। अपने बेटे के बारे में उसके उल्लेख बहुत कम थे और बड़ी पीड़ा के साथ किए गए थे। इस कारण मुलाक़ात अचानक समाप्त हो गई। कैप्टन अल्वाराडो ने एस्तेबान और अंकल पियो के बारे में जितना बता सकता था, बताया। जो लोग इस संसार के बारे में सबसे अधिक जानते हैं, वे ही सबसे कम कहने का साहस करते हैं।

मैं तुम्हें ब्रदर जुनिपर के सामान्य निष्कर्षों से बचा लूँगा। वे तो हमेशा हमारे सामने रहते हैं। उसे लगा कि उसी एक दुर्घटना में उसने देखा है कि दुष्टों पर विनाश आ पड़ा और अच्छे लोगों को समय से पहले स्वर्ग बुला लिया गया। उसे लगा कि उसने घमंड और धन को संसार के लिए एक शिक्षाप्रद उदाहरण के रूप में परास्त होते देखा है और उसे लगा कि उसने विनम्रता को नगर के लिए एक अनुकरणीय शिक्षा के रूप में सम्मानित और पुरस्कृत होते देखा है। लेकिन ब्रदर जुनिपर अपने इन कारणों से संतुष्ट नहीं थे। यह भी संभव था कि मार्केसा दे मोंतेमायोर लोभ की राक्षसी मूर्ति न हो और अंकल पियो स्वेच्छाचारिता या भोग-विलास का प्रतीक न हो।

पुस्तक पूरी हुई तो कुछ न्यायाधीशों की नज़र उस पर पड़ी और अचानक उसे विधर्मपूर्ण घोषित कर दिया गया। आदेश दिया गया कि उसके लेखक के साथ उसे भी चौक में जला दिया जाए। ब्रदर जुनिपर ने इस निर्णय को स्वीकार कर लिया कि शैतान ने पेरू में अपना एक शानदार अभियान चलाने के लिए उनका उपयोग किया था। वे उस अंतिम रात अपनी कोठरी में बैठे रहे और अपने ही जीवन में उस रूपरेखा को खोजने की कोशिश करते रहे, जो उन पाँच अन्य लोगों के जीवन में उनसे छूट गई थी। वे विद्रोही नहीं थे। वे चर्च की पवित्रता के लिए अपना जीवन तक अर्पित करने को तैयार थे, लेकिन उनके भीतर यह तीव्र इच्छा थी कि कहीं कोई एक आवाज़ तो हो जो उनके पक्ष में यह गवाही दे कि कम-से-कम उनकी मंशा आस्था के लिए थी। उन्हें लगता था कि संसार में कोई भी उन पर विश्वास नहीं करता। लेकिन अगली सुबह, उस सारी भीड़ और धूप के बीच, ऐसे बहुत-से लोग थे जो उन पर विश्वास करते थे क्योंकि वे उनसे बहुत प्रेम करते थे।

पुएर्तो गाँव से एक छोटा-सा प्रतिनिधिमंडल भी आया था। नीना (अच्छाई 2, धार्मिकता 5, उपयोगिता 10) और कुछ अन्य लोग उलझन और असमंजस से भरे चेहरों के साथ खड़े थे, जबकि उनके उस छोटे-से फ्रायर को उन अनुकूल-सी प्रतीत होने वाली लपटों के हवाले किया जा रहा था। उस क्षण भी, हाँ, उस क्षण भी, उनके हृदय में एक हठीली-सी आवाज़ बनी रही, जो इस बात पर अड़ी हुई थी कि कम-से-कम सेंट फ्रांसिस ने तो उन्हें पूरी तरह दोषी नहीं ठहराया होता और किसी उनसे बड़े नाम को पुकारने का साहस न करते हुए क्योंकि इन मामलों में उन्हें स्वयं इतना अधिक भूल करने वाला प्रतीत होता था। उसने दो बार पुकारा, “सेंट फ्रांसिस!” फिर वह एक लपट का सहारा लेते हुए मुस्कराया और मर गया।

…. ……

अंतिम प्रार्थना-सभा का दिन साफ़ और गर्म था। लीमा के लोग, विस्मय से फैली हुई अपनी काली आँखों के साथ, गलियों से होकर गिरजाघर में उमड़ पड़े और काले मखमल तथा चाँदी से ढँके शव-मंच को निहारते हुए खड़े रहे। आर्कबिशप अपने अद्भुत और लगभग लकड़ी जैसे कठोर धार्मिक वस्त्रों में, अपने आसन पर बैठे पसीना बहा रहे थे और समय-समय पर एक संगीत-रसिक के पारखी कान से विट्टोरिया के काउंटरपॉइंट की सुंदरताओं को सुन रहे थे। गायक-मंडली ने उन पृष्ठों का फिर से अभ्यास किया था जिन्हें तोमास लुइस ने संगीत से अपनी विदाई के रूप में अपने मित्र और संरक्षक, ऑस्ट्रिया की सम्राज्ञी, के लिए रचा था। वह सारा शोक और माधुर्य, इतालवी संगीत-पद्धति से छनकर आती हुई वह सारी स्पेनी यथार्थपरकता, मंतिल्या[3] पहने स्त्रियों के समुद्र के ऊपर उठती-गिरती रही। डॉन आंद्रेस अपने पद के रंगों और पंखों से सजे आवरण के नीचे घुटने टेककर बैठे थे। बीमार और व्याकुल। वे जानते थे कि भीड़ चोरी-छिपे उनकी ओर देख रही थी और उनसे यह अपेक्षा कर रही थी कि वे उस पिता की भूमिका निभाए जिसने अपना इकलौता बेटा खो दिया हो। वह सोच रहे थे कि क्या पेरीकोले भी वहाँ मौजूद है। उसे इतने लंबे समय तक बिना धूम्रपान किए रहने के लिए कभी विवश नहीं होना पड़ा था। कैप्टन अल्वाराडो कुछ क्षण के लिए धूप से भरे चौक से भीतर आ गए। उन्होंने काले बालों और लेस से भरे उस समुद्र के पार मोमबत्तियों की कतारों और धूप की लहराती लड़ियों को देखा। “कितना झूठा, कितना अवास्तविक है,” उन्होंने कहा और भीड़ को चीरता हुआ बाहर निकल गए। वे समुद्र की ओर उतर गए और अपनी नाव के किनारे पर बैठकर नीचे साफ़ पानी में देखने लगे। “डूब जाने वाले कितने सुखी हैं, एस्तेबान,” उन्होंने कहा।

परदे के पीछे अबेस अपनी लड़कियों के बीच बैठी थी। पिछली रात उसने अपने हृदय से एक मूर्ति उखाड़ फेंकी थी और उस अनुभव ने उसे पीला, लेकिन दृढ़ बना दिया था। उसने इस तथ्य को स्वीकार कर लिया था कि उसका काम आगे चलता है या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। काम करते रहना ही पर्याप्त था। वह उस नर्स की तरह थी जो ऐसे रोगियों की देखभाल करती है जो कभी स्वस्थ नहीं होते। वह उस पुरोहित की तरह थी जो ऐसे वेदी के सामने निरंतर पूजा की विधि दोहराता रहता है, जहाँ कोई उपासक आता ही नहीं। अब कोई पेपिता नहीं होगी जो उसके काम को विस्तार दे सके। उसका काम फिर उसके सहकर्मियों की आलस्य और उदासीनता में सिमट जाएगा। ऐसा लगता था कि स्वर्ग के लिए इतना ही पर्याप्त था कि कुछ समय के लिए पेरू में निःस्वार्थ प्रेम खिला और फिर मुरझा गया। उसने अपना माथा हाथ पर टिका लिया और उस लंबी, कोमल धुन का अनुसरण करती रही जिसे सोप्रानो काइरी[4] (Kyrie) में ऊपर उठाती है। “पेपिता, मेरे स्नेह में भी उस रंग की कुछ अधिक मात्रा होनी चाहिए थी। मेरे पूरे जीवन में उस गुण की कुछ अधिक मात्रा होनी चाहिए थी। मैं बहुत व्यस्त रही हूँ,” उसने खेदपूर्वक जोड़ा और उसका मन प्रार्थना में बह गया।

कैमिला अंतिम प्रार्थना-सभा में सम्मिलित होने के लिए खेत वाले घर से निकल पड़ी थी। उसका हृदय घबराहट और विस्मय से भरा हुआ था। यह आकाश की ओर से एक और संकेत था। तीसरी बार उससे जैसे कोई बात कही गई थी। उसका चेचक, जैमे की बीमारी और अब पुल का गिरना... ओह, ये दुर्घटनाएँ नहीं थीं। उसे ऐसी लज्जा महसूस हो रही थी, मानो उसके माथे पर कोई पत्र लिखकर चिपका दिया गया हो। महल से एक आदेश आया था कि वायसराय उसकी दोनों बेटियों को स्पेन के एक कॉन्वेंट-विद्यालय में भेज रहा है। यह ठीक ही था। अब वह अकेली थी। उसने यंत्रवत कुछ सामान इकट्ठा किया और अंतिम प्रार्थना-सभा के लिए शहर की ओर चल पड़ी। लेकिन रास्ते में वह यह सोचने लगी कि भीड़ किस तरह उसके अंकल पियो और उसके बेटे के शवों पर आँखें गड़ाएगी। वह चर्च के उस विराट अनुष्ठान के बारे में सोचने लगी, जो उसे उस खाई जैसा लगा जिसमें प्रिय व्यक्ति गिर जाता है, और डिएस इराए [5] (Dies Irae) के उस तूफ़ान के बारे में, जिसमें व्यक्ति मृतकों की करोड़ों भीड़ के बीच खो जाता है। चेहरे धुँधले पड़ जाते हैं और व्यक्तित्व की विशेषताएँ मिट जाती हैं। आधे से कुछ अधिक रास्ता तय करने के बाद, सैन लुइस रे के कच्ची मिट्टी के बने छोटे-से गिरजाघर में वह भीतर चली गई और विश्राम के लिए एक खंभे से टिककर घुटनों के बल बैठ गई। वह अपनी स्मृति में भटकने लगी, अपने उन दोनों के चेहरों को खोजती हुई। वह किसी भावना के उभरने की प्रतीक्षा करती रही। “लेकिन मुझे कुछ महसूस ही नहीं हो रहा,” उसने अपने आप से फुसफुसाकर कहा। “मेरे भीतर कोई हृदय ही नहीं है। मैं बस एक गरीब, अर्थहीन स्त्री हूँ और कुछ नहीं। मैं बाहर कर दी गई हूँ। मेरे भीतर कोई हृदय नहीं है। देखो, मैं किसी चीज़ के बारे में सोचने की कोशिश नहीं करूँगी। मुझे बस यहाँ थोड़ा आराम करने दो।” और वह मुश्किल से रुकी ही थी कि फिर वही भयानक, अव्यक्तनीय पीड़ा उसके भीतर उमड़ पड़ी। वही पीड़ा, जो कभी एक बार भी अंकल पियो से यह कह नहीं सकी कि वह उससे प्रेम करती थी और केवल एक बार जैमे के कष्टों में उसे साहस देने के लिए उसके पास नहीं पहुँच सकी थी। वह घबराकर उछलकर खड़ी हो गई। “मैं सबको निराश कर देती हूँ,” वह चिल्लाई। “वे मुझसे प्रेम करते हैं और मैं उन्हें निराश कर देती हूँ।” वह खेत वाले घर लौट गई और एक वर्ष तक अपने आत्म-निराशा के भाव को ढोती रही। एक दिन संयोग से उसे पता चला कि उस अद्भुत अबेस (मठाध्यक्षा) ने भी उसी दुर्घटना में अपने दो प्रिय व्यक्तियों को खो दिया था। उसके हाथ से सिलाई गिर पड़ी। अब वह जान पाएगी, वह समझा पाएगी। “लेकिन नहीं, वह मुझसे क्या कहेगी! वह तो यह भी विश्वास नहीं करेगी कि मेरे जैसी कोई स्त्री प्रेम कर सकती है या किसी को खो सकती है।” कैमिला ने तय किया कि वह लीमा जाएगी और दूर से अबेस को देखेगी। “अगर उसके चेहरे से मुझे पता चल गया कि वह मुझे तुच्छ नहीं समझेगी तो मैं उससे बात करूँगी,” उसने कहा।

कैमिला कॉन्वेंट के गिरजाघर के आस-पास मंडराती रहती और उस साधारण-से बूढ़े चेहरे से विनम्रतापूर्वक प्रेम करने लगी थी। हालाँकि उससे उसे थोड़ा भय भी लगता था। अंततः उसने उनसे मिलने का निश्चय किया।

“माँ,” उसने कहा, “मैं... मैं...”

“क्या मैं तुम्हें जानती हूँ, बेटी?”

“मैं वही अभिनेत्री थी, मैं पेरिकोल थी।”

“ओह, हाँ। ओह, मैं बहुत समय से तुमसे मिलना चाहती थी, लेकिन उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम किसी से मिलना नहीं चाहतीं। तुम भी, मैं जानती हूँ, सैन लुईस के पुल के गिरने में...”

कैमिला उठी और लड़खड़ाने लगी। लो, फिर वही पीड़ा का अचानक उमड़ आना। मृतकों के वे हाथ, जिन्हें वह छू नहीं सकती थी। उसके होंठ सफेद पड़ गए। उसका सिर अबेस के घुटने से जा लगा। “माँ, मैं क्या करूँ? मैं बिल्कुल अकेली हूँ। दुनिया में मेरा अपना कुछ भी नहीं है। मैं उनसे प्रेम करती हूँ। मैं क्या करूँ?”

अबेस ने उसे ध्यान से देखा। “बेटी, यहाँ गर्मी है। आओ, बगीचे में चलें। वहाँ तुम आराम कर सकोगी।”

 उन्होंने गलियारे में खड़ी एक लड़की को इशारा किया कि वह पानी ले आई और कैमिला से यंत्रवत् बोलती रही। “सेन्योरा, मैं बहुत समय से तुमसे मिलना चाहती थी। उस दुर्घटना से भी बहुत पहले से मैं तुमसे मिलना चाहती थी। लोगों ने मुझे बताया था कि ऑटो साक्रामेंटालेस[6] में तुम बेलशज़ार के भोज में एक बहुत महान और सुंदर अभिनेत्री थीं।”

“ओह, माँ, आपको ऐसा नहीं कहना चाहिए। मैं पापिनी हूँ। आपको ऐसा नहीं कहना चाहिए।”

“लो, इसे पी लो, मेरी बच्ची। हमारा बगीचा बहुत सुंदर है, है न? तुम अक्सर यहाँ आया करना और किसी दिन तुम्हारी मुलाकात सिस्टर हुआना से होगी, जो हमारी मुख्य माली हैं। धर्म-जीवन में प्रवेश करने से पहले उन्होंने लगभग कभी कोई बगीचा नहीं देखा था क्योंकि वे बहुत ऊँचे पहाड़ों में खानों में काम करती थीं। अब उनके हाथों के नीचे हर चीज़ उगती है। “सेन्योरा, हमारी उस दुर्घटना को एक वर्ष बीत चुका है। मैंने अपने अनाथालय में पले-बढ़े दो बच्चों को खोया था, लेकिन तुमने अपना सगा बच्चा खोया है?”

“हाँ, माँ।”

“और एक बहुत घनिष्ठ मित्र को भी?”

“हाँ, माँ।”

“मुझे बताओ...”

और तब कैमिला के दीर्घकालीन निराशा का पूरा ज्वार... वह अकेली, हठीली निराशा जो उसके किशोरावस्था से ही उसके भीतर चली आ रही थी, सिस्टर हुआना के फव्वारों और गुलाबों के बीच, उस धूल-भरी, स्नेहिल गोद में आकर ठहर गया।

.... ....

लेकिन उन घटनाओं को समेटने के लिए पर्याप्त पुस्तकें कहाँ हैं, जो पुल के गिरने के बिना कभी उसी तरह घटित ही न होतीं? ऐसी घटनाओं की एक लंबी श्रृंखला में से मैं एक और घटना चुनता हूँ। “कोंदेसा द’अबुइरे आपसे मिलना चाहती हैं,” अबेस के कार्यालय के दरवाज़े पर खड़ी एक ले-सिस्टर[7] ने कहा।

“अच्छा,” अबेस ने अपनी कलम नीचे रखते हुए कहा, “वह कौन हैं?”

“अभी-अभी स्पेन से आई हैं। मैं नहीं जानती।”

“ओह, यह ज़रूर कुछ धन होगा, इनेस... मेरे अंधों के लिए बने आश्रम के लिए कुछ धन। जल्दी करो, उन्हें भीतर बुलाओ।”

लंबी, कुछ अलसाई हुई-सी सुंदर स्त्री कमरे में दाख़िल हुई। डोना क्लारा, जो सामान्यतः इतनी आत्मविश्वासी और सहज रहती थीं, इस बार कुछ संकुचित-सी दिखाई दे रही थीं। “क्या आप व्यस्त हैं, प्यारी मदर? क्या मैं आपसे थोड़ी देर बात कर सकती हूँ?”

“मैं बिल्कुल खाली हूँ, बेटी। एक बूढ़ी औरत की याददाश्त को क्षमा करना। क्या मैं तुमसे पहले कभी मिली हूँ?”

“मेरी माँ मार्के़सा दे मोंतेमायोर थीं...”

डो ना क्लारा को लगा कि अबेस को उनकी माँ पसंद नहीं थीं और जब तक वह स्वयं डोना मारिया का एक लंबा, भावुक बचाव न कर लें, उन्होंने उस वृद्धा को बोलने ही नहीं दिया। अपने ही आत्म-भर्त्सना में डूबते ही उनके चेहरे की वह अलसाई हुई मुद्रा गायब हो गई। अंततः अबेस ने उन्हें पेपिता और एस्तेबान के बारे में बताया और कैमिला के आने की बात भी कही। “हम सब, हममें से हर एक, असफल हुआ है। मनुष्य चाहता है कि उसे दंड मिले। वह हर तरह का प्रायश्चित्त करने को तैयार हो जाता है। लेकिन क्या तुम जानती हो, मेरी बेटी, कि प्रेम में, मैं यह कहने का साहस भी मुश्किल से कर पा रही हूँ... लेकिन प्रेम में हमारी अपनी गलतियाँ भी जैसे बहुत देर तक टिक नहीं पातीं?”

कोंदेसा ने अबेस को डोना मारिया का आख़िरी पत्र दिखाया। मद्रे मारिया यह कहने का साहस नहीं कर सकीं कि उन्हें कितना गहरा आश्चर्य हुआ था कि ऐसे शब्द... ऐसे शब्द, जिन्हें तब से सारी दुनिया आनंद के साथ दोहराती रही है, पेपिता की स्वामिनी के हृदय से निकल सकते थे। “अब सीखो,” उन्होंने स्वयं को आदेश दिया, “आख़िरकार यह सीखो कि कहीं भी, किसी भी जगह, तुम्हें अनुग्रह की आशा रखनी चाहिए।” और वे इस नए प्रमाण से एक लड़की की तरह आनंद से भर उठीं कि जिन गुणों और आदर्शों के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया था, वे हर जगह मौजूद थे। संसार उनके लिए तैयार था। “क्या तुम मेरे लिए एक काम करोगी, मेरी बेटी? क्या तुम मुझे अपना काम दिखाने दोगी?”

सूरज डूब चुका था, लेकिन अबेस हाथ में लालटेन लिए एक के बाद एक गलियारे से होती हुई आगे बढ़ती गईं। डोना क्लारा ने बूढ़ों और जवानों को देखा, बीमारों और अंधों को देखा। लेकिन सबसे अधिक उसने उस थकी हुई, उज्ज्वल वृद्धा को देखा जो उसे अपने साथ लिए जा रही थी। अबेस किसी गलियारे में रुक जातीं और अचानक कहतीं, “मैं यह सोचने से अपने को रोक नहीं पाती कि बहरे और गूँगे लोगों के लिए कुछ किया जा सकता है। मुझे लगता है कि कोई धैर्यवान व्यक्ति... कोई उनके लिए एक भाषा खोजने का अध्ययन कर सकता है। तुम जानती हो, पेरू में ऐसे सैकड़ों और सैकड़ों लोग हैं। क्या तुम्हें याद है कि स्पेन में किसी ने उनके लिए कोई उपाय खोजा है? खैर, किसी दिन ऐसा उपाय अवश्य मिल जाएगा।” थोड़ी देर बाद वे फिर कहतीं, “क्या तुम जानती हो, मैं बार-बार सोचती रहती हूँ कि पागल लोगों के लिए भी कुछ किया जा सकता है। मैं बूढ़ी हूँ, तुम जानती हो और उन जगहों तक नहीं जा सकती जहाँ इन विषयों पर बातें होती हैं। लेकिन कभी-कभी मैं उन्हें देखती हूँ और मुझे ऐसा लगता है... स्पेन में, अब, क्या उनके साथ कोमलता से व्यवहार किया जाता है? मुझे ऐसा लगता है कि इसके पीछे कोई रहस्य है, जो हमसे बस छिपा हुआ है, मानो अगले ही मोड़ पर हमारे सामने आ जाने वाला हो। किसी दिन, जब तुम वापस स्पेन में हो और तुम्हें ऐसी कोई बात सुनने को मिले जिससे हमारी मदद हो सकती हो तो तुम मुझे एक पत्र लिखोगी... यदि तुम बहुत व्यस्त न हो तो?”

अंततः, जब डोना क्लारा रसोईघर तक भी देख चुकीं, तब अबेस ने कहा, “अब तुम मुझे क्षमा करना क्योंकि मुझे उन लोगों के कमरे में जाना है जो बहुत बीमार हैं और उनके लिए कुछ शब्द कहने हैं। ऐसे शब्द जिनके बारे में वे तब सोच सकें जब उन्हें नींद न आए। मैं तुमसे वहाँ अपने साथ चलने के लिए नहीं कहूँगी क्योंकि तुम ऐसी... ऐसी आवाज़ों और चीज़ों की अभ्यस्त नहीं हो। और फिर, मैं उनसे उसी तरह बात करती हूँ जैसे कोई बच्चों से बात करता है।” उन्होंने अपनी विनम्र, थोड़ी उदास-सी मुस्कान के साथ ऊपर उनकी ओर देखा। अचानक वे एक क्षण के लिए वहाँ से चली गईं और फिर अपनी एक सहायक के साथ लौट आईं। वह भी उस पुल की दुर्घटना की घटना से जुड़ी हुई थी और पहले अभिनेत्री रह चुकी थी। “यह मुझे छोड़कर जा रही है,” अबेस ने कहा, “शहर के उस पार कुछ काम करने के लिए। और जब मैं यहाँ अपनी बात कह चुकी होऊँगी तो मुझे तुम दोनों को छोड़ना पड़ेगा क्योंकि आटे का व्यापारी अब मेरा और इंतज़ार नहीं करेगा और हमारी बहस में बहुत समय लगेगा।”

लेकिन डोना क्लारा दरवाज़े पर ही खड़ी रही, जबकि अबेस उनसे बातें कर रही थीं। उसके पास ही फर्श पर लालटेन रखी थी। मद्रे मारिया एक खंभे से पीठ टिकाए खड़ी थीं। बीमार लोग कतारों में लेटे छत की ओर देख रहे थे और अपनी साँसों को थामे हुए थे। उस रात उन्होंने उन सभी लोगों के बारे में बात की जो बाहर अँधेरे में थे, (मन ही मन अकेले एस्तेबान के बारे में सोच रही थीं, अकेली पेपिता के बारे में सोच रही थीं) उन लोगों के बारे में, जिनके पास मुड़कर जाने के लिए कोई नहीं था। जिनके लिए यह संसार शायद असह्य रूप से कठिन था, अर्थहीन था। और वहाँ अपने बिस्तरों पर लेटे हुए उन लोगों को लगा कि वे उस दीवार के भीतर हैं जिसे अबेस ने उनके लिए बनाया है। उसके भीतर सब कुछ प्रकाश और ऊष्मा से भरा है और बाहर वह अँधेरा है, जिसे वे पीड़ा और मृत्यु से मुक्ति के बदले भी नहीं छोड़ना चाहेंगे। लेकिन जब वे बोल रही थीं, उसी समय उनके मन के किसी गहरे कोने में दूसरे विचार भी चल रहे थे। “अभी भी,” उन्होंने सोचा, “लगभग कोई भी एस्तेबान और पेपिता को याद नहीं करता। सिवाय मेरे। कैमिला ही अकेली अपने अंकल पियो और अपने बेटे को याद करती है और यह स्त्री, अपनी माँ को। लेकिन शीघ्र ही हम भी मर जाएँगे और उन पाँचों की सारी स्मृति पृथ्वी से मिट जाएगी और स्वयं हमें भी कुछ समय तक प्रेम किया जाएगा और फिर भुला दिया जाएगा। “लेकिन वह प्रेम पर्याप्त रहा होगा। प्रेम की वे सारी प्रेरणाएँ उसी प्रेम में लौट जाती हैं जिसने उन्हें जन्म दिया था। प्रेम के लिए स्मृति भी आवश्यक नहीं है। “जीवितों की एक भूमि है और मृतकों की एक भूमि और इन दोनों के बीच पुल प्रेम है। एकमात्र शेष रहने वाली चीज़, एकमात्र अर्थ।”

 



[1] यह यूनानी कथा से आया मुहावरा है। डेमोक्लीज़ नाम के व्यक्ति को राजा डायोनिसियस की शक्ति और ऐश्वर्य से ईर्ष्या थी। राजा ने उसे कुछ समय के लिए अपने सिंहासन पर बैठाया, लेकिन उसके सिर के ठीक ऊपर घोड़े के बाल से एक तेज़ तलवार लटका दी। इससे डेमोक्लीज़ समझ गया कि राजा का वैभव और सत्ता हमेशा खतरे के साथ आती है। मुहावरे के रूप में इसका अर्थ, “हर समय सिर पर मंडराते खतरे के साये में रहना” या “आसन्न संकट के भय में रहना”

[2]मोनरेआले (Monreale) सिसिली, इटली में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है, जो मोनरेआले के पास अपने प्रसिद्ध कैथेड्रल के लिए विशेष रूप से जाना जाता है

[3] मंतील्या स्पेन और स्पेनी-भाषी क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा सिर और कंधों पर ओढ़ा जाने वाला पारंपरिक, प्रायः काला या लेसदार घूँघट/ओढ़नी है, जिसे विशेष रूप से चर्च या धार्मिक अवसरों पर पहना जाता था

[4] प्रार्थना के साथ गाए जाने वाले चर्च के संगीत का अंश है

[5] प्रलय का दिन

[6] धार्मिक रूपक-नाटक या ईसाई धार्मिक नाटक

[7] कैथोलिक धार्मिक समुदाय में ऐसी महिला सदस्य को कहा जाता है जो नन/धार्मिक बहन होती है, लेकिन उसका मुख्य कार्य धार्मिक अनुष्ठानों या बौद्धिक/पादरी कार्यों के बजाय समुदाय की व्यावहारिक सेवाओं से जुड़ा होता है—जैसे रसोई, सफ़ाई, देखभाल, घरेलू काम आदि


[समाप्त]


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