Sunday, 16 August 2026

जेम्स बाल्डविन के उपन्यास Go Tell It on the Mountain का हिंदी अनुवाद- भाग- 1 (अध्याय चार)

 

उसके पिता उस व्यक्ति की तरह जो पापी को उस गड्ढे में झाँकने के लिए मजबूर कर रहा हो और जो आगे चलकर उसका भाग्य बनने वाला है, थोड़ा-सा हट गए ताकि जॉन, रॉय का घाव देख सके।

            रॉय के माथे पर चाकू से गहरा चीरा लगा था। सौभाग्य से चाकू बहुत तेज़ नहीं था। चीरा उसके माथे के बीचोंबीच, जहाँ से उसके बाल शुरू होते थे, वहाँ से नीचे की ओर बाईं आँख के ठीक ऊपर की हड्डी तक गया था। घाव एक अजीब-से अर्धचंद्राकार आकार में था और अंत में एक बेतरतीब, रेशेदार-सी पूँछ की तरह फैल गया था जिसने रॉय की भौंह का एक हिस्सा पूरी तरह बिगाड़ दिया था। समय बीतने पर यह अर्धचंद्राकार घाव रॉय की साँवली त्वचा पर और गहरा पड़ जाएगा। लेकिन इतनी बेरहमी से दो हिस्सों में बँट चुकी उसकी भौंह को फिर से कोई चीज़ जोड़ नहीं सकेगी। भौंह का यह अजीब-सा उठा हुआ आकार, यह मानो कोई सवालिया निशान, जीवन भर उसके चेहरे पर बना रहेगा और हमेशा उसके चेहरे में एक उपहासपूर्ण और अशुभ भाव को और उभारता रहेगा। जॉन के भीतर अचानक मुस्कुराने की इच्छा हुई। लेकिन उसके पिता की आँखें उसी पर टिकी थीं और उसने उस इच्छा को दबा लिया। निस्संदेह घाव इस समय बहुत भद्दा और बहुत लाल था। जॉन को लगा, रॉय के प्रति उसकी सहानुभूति अचानक बढ़ गई थी क्योंकि रॉय ने एक बार भी चीख नहीं मारी थी कि उसे बहुत दर्द हुआ होगा। वह कल्पना कर सकता था कि जब रॉय खून से लगभग अंधा होकर लड़खड़ाता हुआ घर में आया होगा, तब उसे कैसा महसूस हुआ होगा। लेकिन फिर भी, वह मरा नहीं था। वह बदला नहीं था। ठीक होते ही वह फिर सड़कों पर निकल पड़ेगा।



देख रहे हो?” उसके पिता की आवाज़ अब आई। “गोरे लोगों ने, उन गोरे लोगों में से कुछ ने जिन्हें तुम इतना पसंद करते हो तुम्हारे भाई का गला काटने की कोशिश की।”

जॉन ने तुरंत क्रोध से और अपने पिता की इस गलतबयानी के प्रति एक अजीब-सी अवमानना के साथ सोचा कि चाहे वह कितना ही गोरा क्यों न हो, कोई अंधा आदमी ही रॉय के गले को निशाना बनाते हुए उसके माथे पर वार कर सकता था। तभी उसकी माँ ने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में कहा, “और वह भी उनका गला काटने की कोशिश कर रहा था। वह और वे बदमाश लड़के।”

हाँ,” आंटी फ्लोरेंस ने कहा, “मैंने तो तुम्हें यह पूछते हुए सुना ही नहीं कि आखिर यह सब हुआ कैसे। लगता है, तुमने तो जैसे किसी भी हालत में हंगामा खड़ा करने की ठान ली है और सिर्फ इसलिए इस पूरे घर के लोगों को दुख देना चाहते हो कि तुम्हारी आँख का तारा मुसीबत में पड़ गया है।”

मैंने तुमसे कहा है,” उसके पिता भयानक झुँझलाहट में चिल्लाए, “अपनी ज़बान बंद रखो। इनमें से किसी बात से तुम्हारा कोई लेना-देना नहीं है। यह मेरा परिवार है और यह मेरा घर है। क्या चाहती हो, मैं तुम्हारे सिर पर एक थप्पड़ जड़ दूँ?”

तुम मुझे थप्पड़ मारकर तो देखो,” उसने उतने ही भयावह शांत भाव से कहा, “मैं गारंटी देती हूँ कि उसके बाद तुम जल्दी किसी और को थप्पड़ मारने की हालत में नहीं रहोगे।”

बस करो अब,” उसकी माँ उठते हुए बोली, “इस सबकी कोई ज़रूरत नहीं है। जो होना था हो गया। हमें घुटनों के बल बैठकर प्रभु को धन्यवाद देना चाहिए कि बात इससे भी ज़्यादा नहीं बिगड़ी।”

आमीन,” आंटी फ्लोरेंस ने कहा, “अब उस मूर्ख निग्रो को भी कुछ समझाओ।”

तुम अपने उस मूर्ख बेटे को कुछ समझाओ,” उसने ज़हर भरे स्वर में अपनी पत्नी से कहा। ऐसा लगता था कि उसने अपनी बहन की बात को अनसुना करने का फैसला कर लिया था। “वह वहाँ उन बड़ी-बड़ी आँखों से खड़ा है। तुम उससे कह सकती हो कि इसे प्रभु की ओर से दी गई चेतावनी समझे। गोरे लोग निग्रो लोगों के साथ ऐसा ही करते हैं। मैं तुम्हें पहले से बताता आ रहा हूँ, अब तुम खुद देख रही हो।”

            उसे इसे चेतावनी माननी चाहिए?” आंटी फ्लोरेंस चीख उठीं। “उसे इसे चेतावनी माननी चाहिए? अरे, गैब्रियल, यह लड़का तो नहीं था जो पूरे शहर को पार करके गोरे लड़कों से लड़ाई करने गया था। सोफ़े पर पड़ा यह लड़का जान-बूझकर दूसरे बहुत-से लड़कों के साथ शहर के पश्चिमी हिस्से तक गया था, सिर्फ लड़ाई करने के लिए। सच कहूँ, मुझे तो कभी-कभी आश्चर्य होता है कि तुम्हारे दिमाग में आखिर चलता क्या रहता है।”

उसकी माँ ने सीधे उसके पिता की ओर देखते हुए कहा, “तुम अच्छी तरह जानते हो कि जॉनी वैसे लड़कों के साथ नहीं घूमता, जैसे रॉय घूमता है। तुम इसी कमरे में रॉय को बहुत बार पीट चुके हो क्योंकि वह उन बदमाश लड़कों के साथ बाहर जाता था। आज दोपहर रॉय को चोट इसलिए लगी क्योंकि वह ऐसा काम करने बाहर गया था जिसका उसे कोई अधिकार नहीं था। बस, बात खत्म। तुम्हें अपने उद्धारकर्ता को धन्यवाद देना चाहिए कि वह मरा नहीं।”

और तुम जिस तरह उसकी देखभाल करती हो,” उसने कहा, “उससे तो लगता है कि वह मरा हुआ ही होता तो भी तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसा नहीं लगता कि तुम्हें इस बात की ज़रा भी परवाह है कि वह जिएगा या मरेगा।”

हे प्रभु, दया करो,” आंटी फ्लोरेंस ने कहा।

वह मेरा भी बेटा है,” उसकी माँ ने उत्तेजित होकर कहा। “मैंने उसे नौ महीने अपनी कोख में रखा है और मैं उसे उतना ही अच्छी तरह जानती हूँ, जितना उसके पिता को जानती हूँ। दोनों बिल्कुल एक जैसे हैं। अब तुम दुनिया में कोई अधिकार नहीं रखते कि मुझसे इस तरह बात करो।”

मैं मानता हूँ कि तुम जानती होगी,” उसने गला रुंधे हुए और तेज़-तेज़ साँस लेते हुए कहा, “माँ के प्यार के बारे में सब कुछ। मैं मानता हूँ, तुम मुझे यह बताने वाली हो कि कोई औरत पूरे दिन घर में बैठी रह सकती है और अपने ही खून-मांस के बच्चे को बाहर जाकर लगभग कटकर मरने की हालत में पहुँचने दे सकती है। मुझे यह मत कहना कि तुम्हें उसे रोकने का कोई तरीका नहीं मालूम था क्योंकि मुझे अपनी माँ याद है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और वह कोई-न-कोई तरीका ढूँढ़ ही लेतीं।”

वह मेरी भी माँ थीं,” आंटी फ्लोरेंस ने कहा, “और मुझे याद है, अगर तुम्हें याद नहीं कि तुम्हें कितनी ही बार घर लाया गया था। इस हालत में कि तुम ज़िंदा कम और मरे हुए ज़्यादा लगते थे। वह तुम्हें रोकने का कोई तरीका नहीं ढूँढ़ पाईं। तुम्हें पीटते-पीटते उन्होंने खुद को थका डाला था, ठीक वैसे ही जैसे तुम इस लड़के को पीटते-पीटते खुद को थका रहे हो।”

अरे, अरे, अरे,” उसने कहा, “तुम्हारे पास कहने के लिए बहुत कुछ है।”

मैं कुछ नहीं कर रही,” उसने कहा, “सिवाय इसके कि तुम्हारे उस बड़े, काले, हठी सिर में थोड़ी अक्ल डालने की कोशिश कर रही हूँ। एलिज़ाबेथ पर हर बात का दोष मढ़ना बंद करो और अपने ही गलत कामों पर नज़र डालो।”

            रहने दो, फ्लोरेंस,” उसकी माँ ने कहा, “अब जो होना था, हो गया।”

मैं इस घर से बाहर रहता हूँ,” वह चिल्लाया, “हर दिनजितने दिन प्रभु देते हैं, काम करता हूँ ताकि इन बच्चों के मुँह में खाना डाल सकूँ। क्या तुम्हें नहीं लगता कि मुझे इन बच्चों की माँ से यह कहने का अधिकार है कि वह इनकी देखभाल करे और यह सुनिश्चित करे कि मेरे घर लौटने से पहले ये अपनी जान न गँवा बैठें?”

तुम्हारा सिर्फ एक बच्चा ऐसा है,” उसने कहा, “जो बाहर जाकर अपनी जान जोखिम में डाल सकता है और वह रॉय है। तुम यह जानते हो। मुझे समझ नहीं आता कि तुम मुझसे आखिर किस तरह उम्मीद करते हो कि मैं यह घर सँभालूँ, इन बच्चों की देखभाल करूँ और साथ-साथ रॉय के पीछे-पीछे पूरे मुहल्ले में दौड़ती फिरूँ। नहीं, मैं उसे रोक नहीं सकती। मैं तुम्हें यह पहले ही बता चुकी हूँ और तुम भी उसे रोक नहीं सकते। तुम्हें इस लड़के के साथ करना क्या है, यह तुम खुद नहीं जानते। इसी वजह से तुम हर समय किसी-न-किसी पर दोष डालने की कोशिश करते रहते हो। किसी की गलती नहीं है, गैब्रियल। तुम्हें बस ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह उसे रोक दें। इससे पहले कि कोई उसके भीतर फिर चाकू घोंप दे और उसे कब्र में पहुँचा दे।”

दोनों एक पल तक एक-दूसरे को देखते रहे। उनके बीच एक भयानक सन्नाटा छा गया। उसकी आँखों में अचानक उपजा हुआ, विनती करता हुआ सवाल था। फिर उसने अपनी पूरी ताकत से हाथ बढ़ाकर उसके चेहरे पर थप्पड़ मार दिया। वह उसी क्षण सिकुड़कर गिर-सी पड़ी और अपने एक पतले हाथ से चेहरा ढक लिया। आंटी फ्लोरेंस उसे सँभालने के लिए आगे बढ़ीं। सारा यह सब लालची, उत्सुक आँखों से देख रही थी। तभी रॉय उठकर बैठ गया और काँपती हुई आवाज़ में बोला, मेरी माँ को थप्पड़ मत मारो। वह मेरी माँ है। उसे फिर थप्पड़ मारा, काले हरामी तो मैं कसम खाकर कहता हूँ, मैं तुम्हें मार डालूँगा।”

जैसे ही ये शब्द कमरे में गूँजे और वहीं ठहर गए। ठीक उस बेहद छोटे-से क्षण की तरह जो विस्फोट से ठीक पहले हवा में बिजली की टेढ़ी-मेढ़ी चमक के ठहर जाने जैसा होता है। जॉन और उसके पिता एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे। उस क्षण जॉन को लगा कि उसके पिता समझ रहे थे कि ये शब्द उसी ने कहे हैं। उनके आँखों में ऐसा उन्मत्त और अथाह द्वेष था और दर्द से उनका मुँह इस तरह विकृत होकर गुर्रा रहा था। फिर रॉय के शब्दों के बाद छाए पूर्ण सन्नाटे में जॉन ने देखा कि उसके पिता उसे देख ही नहीं रहे थे। वे कुछ भी नहीं देख रहे थे, सिवाय शायद किसी ऐसी चीज़ के जो उनके सामने किसी भयानक दृश्य की तरह उपस्थित थी। जॉन का मन हुआ कि वह मुड़कर भाग जाए जैसे, जंगल में उसे कोई दुष्ट, भूखा जानवर दिखाई दे गया हो जिसकी आँखें खुले हुए नरक जैसी हों। ठीक वैसे ही जैसे किसी सड़क के मोड़ पर अचानक सामने निश्चित विनाश दिखाई पड़ जाए, उसने पाया कि वह हिल भी नहीं पा रहा था। फिर उसके पिता मुड़े और रॉय की ओर नीचे देखने लगे।

तुमने क्या कहा?” उसके पिता ने पूछा।

मैंने कहा,” रॉय ने कहा, “कि मेरी माँ को हाथ मत लगाना।”

तुमने मुझे गाली दी,” उसके पिता ने कहा।

रॉय ने कुछ नहीं कहा। उसने अपनी आँखें भी नहीं झुकाईं।

गैब्रियल,” उसकी माँ ने कहा, “गैब्रियल। चलो, प्रार्थना करें…”

उसके पिता के हाथ कमर पर गए और उन्होंने अपनी बेल्ट उतार ली। उनकी आँखों में आँसू थे।

गैब्रियल,” आंटी फ्लोरेंस चिल्लाईं, “आज रात के लिए भी मूर्खता का यह खेल बंद नहीं करोगे?”

तभी उसके पिता ने बेल्ट उठाई और वह सीटी जैसी आवाज़ करती हुई रॉय पर जा पड़ी। रॉय सिहर उठा और दीवार की ओर मुँह करके पीछे गिर पड़ा। लेकिन उसने चीख नहीं मारी। बेल्ट फिर उठी और फिर गिरी। हवा में उसकी सीटी जैसी आवाज़ गूँजती रही और फिर रॉय के शरीर पर उसके पड़ने की चटाक सुनाई देती रही। बच्ची रूथ चीखने लगी।

हे मेरे प्रभु, हे मेरे प्रभु,” उसके पिता फुसफुसाए, “हे मेरे प्रभु, हे मेरे प्रभु।”

उन्होंने फिर बेल्ट उठाई। लेकिन आंटी फ्लोरेंस ने पीछे से उसे पकड़ लिया और थामे रखा। उसकी माँ सोफ़े की ओर दौड़ी और रॉय को अपनी बाँहों में भर लिया। वह ऐसी चीख-पुकार के साथ रो रही थी, जैसा रोते हुए जॉन ने आज तक किसी स्त्री को या किसी भी व्यक्ति को नहीं देखा था। रॉय ने अपनी माँ की गर्दन को बाँहों से जकड़ लिया और उसे इस तरह पकड़े रहा जैसे, वह डूब रहा हो और उसकी माँ ही उसे डूबने से बचाने वाली आख़िरी चीज़ हो।

            आंटी फ्लोरेंस और उसके पिता आमने-सामने खड़े थे।

हाँ, प्रभु,” आंटी फ्लोरेंस ने कहा, “तुम पैदा ही जंगली हुए थे और जंगली ही मरोगे। लेकिन पूरी दुनिया को अपने साथ ले जाने की कोशिश करने का कोई फायदा नहीं है। तुम कुछ भी नहीं बदल सकते, गैब्रियल। अब तक तो तुम्हें यह समझ जाना चाहिए था।”

 

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