छह
बजे जॉन ने अपने पिता की चाबी से चर्च का दरवाज़ा खोला। ‘टैरी सर्विस’[1] आधिकारिक रूप से आठ बजे शुरू
होती थी। लेकिन वह किसी भी समय शुरू हो सकती थी, जब भी प्रभु किसी संत को चर्च में
प्रवेश करके प्रार्थना करने के लिए प्रेरित कर देते। हालाँकि, शायद ही कभी कोई आठ बजकर तीस मिनट से पहले
पहुँचता था। प्रभु की आत्मा इतनी सहनशील थी कि वह संतों को शनिवार की रात की
खरीदारी करने, अपने घर साफ करने और बच्चों को बिस्तर पर
सुलाने के लिए पर्याप्त समय दे देती थी।
जॉन ने अपने पीछे दरवाज़ा बंद किया और चर्च की संकरी
गलियारे में खड़ा हो गया। उसके पीछे उसे बच्चों के खेलने की आवाज़ें सुनाई दे रही
थीं और उनसे भी अधिक रूखी आवाज़ें उनके बड़ों की आवाज़ें जो सड़कों पर गालियाँ दे
रहे थे और चिल्ला रहे थे। चर्च के भीतर अँधेरा था। उसके चारों ओर भीड़भरी सड़क पर
स्ट्रीट लाइटें एक-एक करके जल उठी थीं। दिन का उजाला जा चुका था। जॉन के पैर मानो
इस लकड़ी के फर्श में गड़ गए थे। वे उसे एक कदम भी आगे ले जाने के लिए तैयार नहीं
थे। चर्च का अँधेरा और सन्नाटा उस पर ऐसे दबाव डाल रहा था जैसे, न्याय का ठंडा हाथ
हो। खिड़की से बाहर से आती चीख-पुकार की आवाज़ें मानो किसी दूसरी दुनिया से आ रही
हों। जॉन आगे बढ़ा। उसके पैरों की आहट ढीली पड़ चुकी लकड़ी के फर्श पर पड़ती हुई
सुनाई दे रही थी। वह वेदी पर बिछे लाल कपड़े के बीच बने सुनहरे क्रॉस तक पहुँचा, जो दबे हुए अंगारे की तरह चमक रहा था। उसने
एक मद्धिम-सी बत्ती जला दी।
चर्च की हवा में हमेशा
धूल और पसीने की गंध बसी रहती थी क्योंकि उसकी माँ के बैठक-कक्ष के कालीन की तरह
इस चर्च की धूल भी अजेय थी। जब संत प्रार्थना करते या आनंद से भर उठते तो उनके
शरीरों से एक तीखी, भाप-सी उठती गंध निकलती, पसीने से भीगे
शरीरों और पानी में भिगोकर कड़े किए गए सफेद कपड़ों की मिली-जुली गंध। यह सड़क की
दुकानों के बीच बना एक छोटा-सा चर्च था और जॉन के पूरे जीवनकाल से इस पापपूर्ण
सड़क के कोने पर खड़ा था। उसके सामने वह अस्पताल था, जहाँ
लगभग हर रात अपराधों में घायल और मरते हुए लोगों को लाया जाता था। जब इन संतों ने
यह जगह ली थी, तब यह एक परित्यक्त दुकान थी। उन्होंने दुकान
का सामान और सजावट हटा दी थी। दीवारों पर रंग किया, एक
वेदी-मंच बनाया, एक पियानो और तह करने वाली कुर्सियाँ लाकर
रखीं और जितनी बड़ी बाइबल उन्हें मिल सकती थी, उसमें से सबसे
बड़ी खरीद ली। उन्होंने दुकान की सामने वाली बड़ी खिड़की पर सफेद परदे लगा दिए और
उस पर पेंट से लिख दिया, “अग्नि-बपतिस्मा प्राप्त लोगों का मंदिर।”
इसके बाद वे प्रभु का काम करने के लिए तैयार थे। प्रभु ने, जैसा कि उन्होंने पहली बार एकत्र हुए उन दो
या तीन लोगों से वादा किया था और लोगों को भेजा। वे लोग और लोगों को लाए और इस तरह
एक चर्च बन गया। इस मूल शाखा से यदि प्रभु की कृपा हुई तो दूसरी शाखाएँ निकल सकती
थीं और पूरे शहर तथा पूरे देश में एक महान धार्मिक कार्य शुरू हो सकता था। इस
मंदिर के इतिहास में प्रभु ने प्रचारकों, शिक्षकों और
भविष्यवक्ताओं को उठाया था और उन्हें अपने कार्य के लिए बाहर के क्षेत्र में भेजा
था। देश भर में घूम-घूमकर सुसमाचार का प्रचार करने के लिए या दूसरे मंदिर स्थापित
करने के लिए फिलाडेल्फिया, जॉर्जिया, बोस्टन
या ब्रुकलिन में। प्रभु जहाँ भी ले जाते, वे वहीं जाते। समय-समय
पर उनमें से कोई वापस घर आता और बताता कि प्रभु ने उसके माध्यम से कितने अद्भुत
कार्य किए थे। कभी-कभी किसी विशेष रविवार को वे सभी ब्रदरहुड[2] के आस-पास के किसी चर्च में
जाते।
जॉन के जन्म से पहले एक
समय ऐसा भी था, जब उसके पिता भी प्रभु के कार्य के लिए बाहर
जाया करते थे। लेकिन अब, अपने परिवार के लिए रोज़ी-रोटी
जुटाने के कारण, उनके लिए फिलाडेल्फिया से अधिक दूर जाना
शायद ही कभी संभव होता था। वहाँ भी वे बहुत थोड़े समय के लिए ही जा पाते थे। अब
उसके पिता पहले की तरह बड़े-बड़े जागरण नहीं करवाते थे, जहाँ
ईश्वर के एक सेवक के आने का विज्ञापन करने वाले पोस्टरों पर उनका नाम बड़े-बड़े
अक्षरों में छपा होता था। कभी उसके पिता की बहुत बड़ी प्रतिष्ठा थी। लेकिन ऐसा
लगता था कि दक्षिण छोड़ने के बाद से यह सब बदल गया था। शायद अब उनके पास अपना कोई
चर्च होना चाहिए था। जॉन सोचता था कि क्या उसके पिता भी ऐसा चाहते थे। शायद उन्हें
भी फादर जेम्स की तरह एक बड़ी मंडली का नेतृत्व करते हुए उसे परमेश्वर के राज्य की
ओर ले जाना चाहिए था। लेकिन उसके पिता तो अब ईश्वर के घर के केवल देखरेख करने वाले
थे। जली हुई बिजली की बल्बों को बदलवाना, चर्च की सफाई रखना,
बाइबलों और भजन-पुस्तकों की देखभाल करना और दीवारों पर लगे पोस्टरों
का ध्यान रखना, इन सबकी जिम्मेदारी उन्हीं की थी। शुक्रवार की रात वे युवा सेवकों
की सभा चलाते और उनके साथ उपदेश देते। रविवार की सुबह वे बहुत कम ही संदेश देते थे।
केवल तब, जब बोलने के लिए कोई और उपलब्ध न होता, उनके पिता को बुलाया जाता। वे एक तरह के वैकल्पिक वक्ता थ, एक पवित्र
कामचलाऊ कारीगर।
फिर भी, जहाँ
तक जॉन देख सकता था, उनके साथ बहुत सम्मान से व्यवहार किया
जाता था। किसी ने कम-से-कम संतों में से किसी ने भी कभी उसके पिता को उलाहना नहीं
दिया था, न फटकारा था, न यह संकेत किया
था कि उनका जीवन निष्कलंक होने के अलावा कुछ और भी था। फिर भी, यही आदमी, ईश्वर का सेवक, जॉन
की माँ को थप्पड़ मार चुका था। जॉन उसे मार डालना चाहता था और अब भी चाहता था।
जॉन चर्च का एक हिस्सा साफ कर चुका था और वेदी के सामने
वाली जगह में कुर्सियाँ अभी भी एक के ऊपर एक रखी थीं कि तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।
उसने दरवाज़ा खोला तो देखा कि एलिशा आया था, उसकी मदद करने के लिए।
“प्रभु की जय हो,”
एलिशा ने दरवाज़े की चौखट पर खड़े होकर मुस्कराते हुए कहा।
“प्रभु की जय हो,” जॉन
ने कहा। संतों के बीच हमेशा यही अभिवादन किया जाता था।
भाई एलिशा भीतर आया, अपने पीछे दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया और पैरों को ज़मीन पर पटकते हुए खड़ा
हो गया। वह शायद अभी-अभी बास्केटबॉल के मैदान से आया था। उसके माथे पर ताज़े पसीने
की चमक थी और उसके बाल खड़े हुए थे। उसने हरे ऊनी स्वेटर पहन रखा था, जिस पर उसके हाई स्कूल का अक्षर अंकित था। उसकी कमीज़ गले के पास खुली हुई
थी।
“तुम्हें इस तरह ठंड नहीं लग रही?” जॉन ने उसे घूरते हुए पूछा।
“नहीं, छोटे भाई,
मुझे ठंड नहीं लग रही। क्या तुम्हें लगता है कि हर कोई तुम्हारी तरह
कमज़ोर होता है?”
“सिर्फ छोटे बच्चों को ही कब्रिस्तान नहीं ले
जाया जाता,” जॉन ने कहा। वह आज असामान्य रूप से बेखौफ और
प्रसन्न महसूस कर रहा था। एलिशा के आ जाने से उसका मूड ही बदल गया था। एलिशा,
जो गलियारे से पीछे वाले कमरे की ओर जा रहा था, जॉन की ओर मुड़ा और आश्चर्य तथा धमकी भरी नज़र से उसे देखने लगा। “अच्छा,” उसने कहा, “तो आज रात
तुम भाई एलिशा के साथ बदतमीज़ी करने की तैयारी में हो। मुझे तुम्हें ज़रा सबक
सिखाना पड़ेगा। बस रुको, पहले मैं अपने हाथ धो लूँ।”
“अगर तुम यहाँ काम करने आए हो तो हाथ धोने की
कोई ज़रूरत नहीं है। बस वह पोछा उठाओ और बाल्टी में साबुन और पानी डालो।”
“हे प्रभु,” एलिशा ने
सिंक में पानी छोड़ते हुए कहा। ऐसा लगता था मानो वह पानी से ही बात कर रहा हो,
“वहाँ एक बड़ा ही बदतमीज़ निग्रो खड़ा है। मैं उम्मीद करता हूँ कि
एक दिन इस तरह अपनी ज़बान चलाते-चलाते वह खुद को मुसीबत में न डाल बैठे। लगता है,
जब तक कोई उसकी आँख न फोड़ दे, तब तक यह अपनी
ज़बान बंद नहीं करेगा।”
उसने गहरी साँस ली और अपने हाथों पर साबुन मलने लगा। “देखो तो मैं भागा-भागा यहाँ तक आया ताकि यह
कुर्सियों में से कोई एक उठाते हुए अपनी आँतें न फाड़ बैठे। मुझे बस इतना कहता है,
‘बाल्टी में पानी डालो।’ किसी निग्रो का कुछ नहीं किया जा सकता।” वह रुक गया और
जॉन की ओर मुँह करके खड़ा हो गया। “लड़के, तुम्हें ज़रा भी तमीज़ नहीं है? तुम्हें बड़ों से
बात करना सीखना चाहिए।”
“तुम वह पोछा और बाल्टी लेकर यहाँ आओ। हमारे
पास पूरी रात नहीं है।”
“बोलते रहो,” एलिशा ने
कहा। “अब मुझे समझ आ गया है कि आज रात तुम्हें तुम्हारी अच्छी-खासी पिटाई देनी
पड़ेगी।”
वह गायब हो गया। जॉन ने उसे शौचालय में जाते सुना और फिर
पानी की गरजती आवाज़ के ऊपर उसे पीछे वाले कमरे में चीज़ें गिराने-पटकने की आवाज़
सुनाई दी।
“अब तुम क्या कर रहे हो?”
“लड़के, मुझे अकेला
छोड़ो। मैं काम करने जा रहा हूँ।”
“हाँ, आवाज़ से तो ऐसा
ही लग रहा है।” जॉन ने अपनी झाड़ू नीचे रख दी और पीछे वाले कमरे में चला गया।
एलिशा ने कोने में तह करके रखी हुई कुर्सियों के ढेर को गिरा दिया था और गुस्से
में उनके ऊपर खड़ा था। उसके हाथ में पोछा था।
“मैं तुम्हें बार-बार कहता हूँ कि उस पोछे को
वहाँ पीछे मत छिपाया करो। वहाँ से कोई उसे निकाल ही नहीं सकता।”
“मैं तो हमेशा निकाल लेता हूँ। हर कोई
तुम्हारी तरह अनाड़ी थोड़े ही होता है।”
एलिशा ने कड़ा, धूसर पोछा हाथ से गिरा दिया और जॉन पर झपट पड़ा। जॉन संतुलन खो बैठा और
एलिशा ने उसे ज़मीन से उठा लिया। दोनों बाँहों से जॉन की कमर को कसकर पकड़कर उसने
उसकी साँस रोकने की कोशिश की। साथ ही वह जॉन को देखता रहा। जॉन जितना छटपटाता और
मचलता गया, उसके चेहरे की मुस्कान उतनी ही सख्त और उग्र भाव
में बदलती गई। जॉन ने दोनों हाथों से एलिशा के कंधों और बाजुओं की मांसपेशियों पर
धक्का दिया और घुटनों से उसके पेट पर वार करने की कोशिश की। आमतौर पर ऐसी कुश्ती
जल्दी खत्म हो जाती थी क्योंकि एलिशा उससे बहुत बड़ा और ताकतवर था और पहलवानी में
भी उससे कहीं अधिक निपुण था। लेकिन आज रात जॉन ने मन में ठान लिया था कि वह हार
नहीं मानेगा या कम-से-कम एलिशा को उसे हराने की अच्छी-खासी कीमत चुकानी पड़ेगी। अपनी
पूरी ताकत लगाकर वह एलिशा से लड़ता रहा और उसके भीतर ऐसी शक्ति भर गई थी, जो लगभग घृणा जैसी थी। वह लात मारता, मुक्के बरसाता,
शरीर मरोड़ता और धक्का देता रहा। वह अपने छोटे कद का इस्तेमाल एलिशा
को उलझाने और परेशान करने के लिए कर रहा था। जॉन की पीठ के निचले हिस्से पर जकड़ी
एलिशा की पसीने से नम मुट्ठियाँ जल्द ही फिसलने लगीं। मुकाबला बराबरी पर अटक गया
था। एलिशा अपनी पकड़ और कस नहीं पा रहा था और जॉन उसकी पकड़ छुड़ा नहीं पा रहा था।
इस तरह वे उस संकरे कमरे में लड़ते हुए घूमते रहे और एलिशा के पसीने की गंध जॉन की
नाक में तेज़ी से भरती रही। उसने देखा कि एलिशा के माथे और गर्दन की नसें उभर आई
थीं। उसकी साँसें तेज़, टूटी हुई और भारी हो गई थीं और उसके
चेहरे का भाव और अधिक क्रूर होता जा रहा था। अपनी आँखों के सामने एलिशा की शक्ति
के ये रूप देखकर जॉन के भीतर एक उन्मत्त आनंद भर गया। वे तह करके रखी कुर्सियों से
टकरा गए। एलिशा का पैर फिसला और उसकी पकड़ टूट गई। दोनों एक-दूसरे को देखते रहे,
चेहरे पर आधी मुस्कान थी। जॉन फर्श पर ढह-सा गया और दोनों हाथों से
अपना सिर पकड़ लिया।
“मैंने तुम्हें चोट तो नहीं पहुँचाई?”
एलिशा ने पूछा।
जॉन ने ऊपर देखा। “मुझे? नहीं। मैं तो बस अपनी साँस सँभालना चाहता हूँ।”
एलिशा सिंक के पास गया और चेहरे तथा गर्दन पर ठंडा पानी
छींटने लगा। “अब तो तुम मुझे काम
करने दोगे, मेरा खयाल है,” उसने कहा।
“पहली बार तुम्हें मैंने काम करने से नहीं
रोका था।” वह उठ खड़ा हुआ। उसने पाया कि उसके पैर काँप रहे थे। उसने एलिशा की ओर
देखा, जो तौलिये से अपना चेहरा और गर्दन सुखा रहा था। “एक बार तुम मुझे कुश्ती सिखाओगे, ठीक है?”
“नहीं, लड़के,” एलिशा ने हँसते हुए कहा, “मैं तुम्हारे साथ कुश्ती नहीं करना चाहता। तुम तो मेरे लिए बहुत ज़्यादा
ताकतवर हो।” और वह बड़ी बाल्टी में गरम पानी भरने लगा।
जॉन उसके पास से आगे बढ़कर सामने आया और अपनी झाड़ू उठा ली।
थोड़ी देर में एलिशा भी उसके पीछे आ गया और दरवाज़े के पास पोछा लगाने लगा। जॉन
झाड़ू लगा चुका था और अब वह वेदी-मंच पर चढ़ गया। वहाँ रखी तीन सिंहासन जैसी
कुर्सियों की धूल झाड़ने लगा। वे बैंगनी रंग की थीं और उनके ऊँचे पीठ वाले हिस्सों
तथा भारी-भरकम हत्थों पर सफेद लिनन के चौकोर कपड़े लगे थे। सब पर वेदी-मंच का ही
प्रभुत्व था—मंडली से ऊँचा उठा हुआ एक लकड़ी का चबूतरा, जिसके बीचोंबीच बाइबल रखने के लिए एक ऊँचा
स्टैंड था और जिसके सामने उपदेशक खड़ा होता था। इस ऊँचाई से नीचे की ओर मंडली के
सामने लाल रंग का वेदी-वस्त्र लटकता था, जिस पर सुनहरा क्रॉस
और ये शब्द अंकित थे, “JESUS SAVES” — “ईसा मसीह बचाते हैं।”
वेदी-मंच पवित्र था। कोई व्यक्ति वहाँ इतनी ऊँचाई पर खड़ा नहीं हो सकता था,
जब तक उस पर ईश्वर की मुहर न लगी हो।
जॉन ने पियानो की धूल भी झाड़ी और फिर पियानो की स्टूल पर
बैठकर प्रतीक्षा करने लगा कि एलिशा चर्च के एक हिस्से में पोछा लगाना पूरा कर ले ताकि
वह कुर्सियाँ वापस अपनी जगह रख सके। अचानक एलिशा ने उसकी ओर देखे बिना कहा, “लड़के, क्या अब
तुम्हें अपनी आत्मा के बारे में सोचना शुरू करने का समय नहीं आ गया?”
“मेरा खयाल है, आ गया
है,” जॉन ने इतनी शांत आवाज़ में कहा कि खुद उसकी अपनी आवाज़
से ही वह डर गया।
“बाहर से यह मुश्किल लगता है,” एलिशा ने कहा, “खासकर तब, जब
तुम जवान होते हो। लेकिन मेरी बात मानो, लड़के, तुम्हें प्रभु की सेवा में जितना आनंद मिलता है, उससे
बड़ा आनंद तुम्हें कहीं नहीं मिल सकता।”
जॉन ने कुछ नहीं कहा। उसने पियानो की एक काली चाभी को छुआ
और उससे एक धीमी आवाज़ निकली, जैसे
दूर कहीं कोई ढोल बज रहा हो।
“तुम्हें याद रखना होगा,” एलिशा ने अब उसकी ओर मुड़कर देखते हुए कहा, “कि तुम
इन बातों के बारे में सांसारिक मन से सोचते हो। तुम्हारे भीतर अभी भी आदम का मन है,
लड़के। तुम अपने दोस्तों के बारे में सोचते रहते हो, तुम वही करना चाहते हो जो वे करते हैं, तुम फिल्मों
में जाना चाहते हो और मुझे यकीन है कि तुम लड़कियों के बारे में भी सोचते हो,
है न जॉनी?” “ज़रूर
सोचते हो,” उसने आधी मुस्कान के साथ कहा। जॉन के चेहरे से ही
उसे अपने सवाल का जवाब मिल गया था। “और तुम यह सब छोड़ना
नहीं चाहते। लेकिन जब प्रभु तुम्हारा उद्धार करते हैं तो वह तुम्हारे भीतर के उस
पुराने आदम को जला देते हैं। वह तुम्हें एक नया मन और एक नया हृदय देते हैं। फिर
तुम्हें दुनिया में कोई आनंद नहीं मिलता। तुम्हारा सारा आनंद हर दिन यीशु के साथ
चलते और उनसे बातें करते हुए मिलता है।”
वह आतंक से उपजी एक
सुन्न-सी अवस्था में एलिशा के शरीर को घूरता रहा। उसने एलिशा को देखा, क्या एलिशा
यह बात भूल गया था? वेदी के सामने एलिशा एलिशा मे के पास
खड़ा था। जबकि फादर जेम्स उसे उस बुराई के लिए फटकार रहे थे जो देह में वास करती
है। उसने एलिशा के चेहरे की ओर देखा, जिसमें ऐसे बहुत-से
सवाल भरे थे जिन्हें वह कभी पूछ नहीं पाएगा। लेकिन एलिशा के चेहरे ने उसे कुछ नहीं
बताया।
“लोग कहते हैं कि यह मुश्किल है,” एलिशा ने फिर अपने पोछे की ओर झुकते हुए कहा, “लेकिन
मेरी बात मानो, इस दुष्ट दुनिया में जीना, उस दुनिया के सारे दुख सहना, जहाँ किसी तरह का कोई
आनंद नहीं है और फिर मरकर नरक में जाना, यह उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है। उससे
कठिन और कुछ नहीं है।” और उसने फिर जॉन की ओर देखा। “तुम
देखते हो न कि शैतान किस तरह लोगों को उनकी आत्माएँ गँवाने के लिए छलता है?”
“हाँ,” आखिरकार जॉन ने
कहा। उसकी आवाज़ लगभग क्रोध से भरी लग रही थी। वह अपने विचारों को सह नहीं पा रहा
था और न ही उस खामोशी को, जिसमें एलिशा उसे देख रहा था।
एलिशा मुस्कराया। “जिस स्कूल में मैं पढ़ता हूँ, वहाँ कुछ लड़कियाँ हैं।”
वह चर्च के एक हिस्से में पोछा लगा चुका था और उसने जॉन को कुर्सियाँ वापस अपनी
जगह रखने का इशारा किया, “और वे अच्छी लड़कियाँ हैं। लेकिन उनके मन में प्रभु नहीं
हैं। मैं उन्हें समझाने की कोशिश करता हूँ कि पश्चात्ताप करने का समय कल नहीं,
आज है। वे सोचती हैं कि अभी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। मरते
समय वे चुपके से स्वर्ग में घुस जाएँगी।” “लेकिन मैं उनसे
कहता हूँ, प्यारी लड़की, हर किसी को
मरने के लिए बिस्तर पर लेटने का मौका नहीं मिलता। लोग हर समय चले जाते हैं,
बस ऐसे ही। आज तुम उन्हें देख रहे हो और कल वे नहीं होंगे।” “लड़के, उन्हें समझ ही नहीं आता कि इस बूढ़े एलिशा का
क्या किया जाए क्योंकि वह न फिल्मों में जाता है, न नाचता है,
न ताश खेलता है और न ही सीढ़ियों के पीछे उनके साथ जाता है।” वह
रुका और जॉन को देखने लगा। जॉन असहाय भाव से उसे देख रहा था और उसे समझ नहीं आ रहा
था कि क्या कहे। “और लड़के, उनमें से
कुछ सचमुच बहुत अच्छी लड़कियाँ हैं। मेरा मतलब है, बहुत
सुंदर लड़कियाँ। और जब तुम्हारे भीतर इतनी शक्ति आ जाए कि वे तुम्हें प्रलोभित ही
न कर सकें, तब समझो कि तुम्हारा सचमुच उद्धार हो गया है। मैं
बस उन्हें देखता हूँ और कहता हूँ कि एक दिन यीशु ने मेरा उद्धार किया था और अब मैं
उनके साथ पूरी तरह अंत तक जाऊँगा। कोई स्त्री नहीं। नहीं, कोई
पुरुष भी नहीं। मुझे अपना मन बदलने पर मजबूर नहीं कर सकता।” वह फिर रुका, मुस्कराया और अपनी आँखें नीचे झुका लीं। “उस रविवार,”
उसने कहा, “वह रविवार याद है? जब फादर जेम्स वेदी-मंच पर खड़े हुए थे और उन्होंने मुझे और एला मे को
नीचे बुलाया था क्योंकि उन्हें लगा था कि हम पाप करने वाले हैं। तो लड़के, मैं झूठ नहीं बोलूँगा, उस रविवार को मैं उस बूढ़े
आदमी पर बहुत गुस्सा था।” “लेकिन मैंने इस बारे में सोचा और
प्रभु ने मुझे समझा दिया कि वह सही थे। मेरे और एला मे के मन में ऐसा कुछ भी नहीं
था। लेकिन लगता है शैतान हर जगह है। कभी-कभी शैतान तुम पर अपना हाथ रख देता है और
ऐसा लगता है कि तुम साँस ही नहीं ले सकते। लगता है जैसे तुम्हारे भीतर आग जल रही
हो और तुम्हें कुछ करना ही है। लेकिन तुम कुछ कर नहीं सकते।” “मैं कितनी ही बार घुटनों के बल बैठकर प्रभु के सामने रोया और संघर्ष किया
हूँ। रोते हुए, जॉनी और यीशु का नाम पुकारते हुए। शैतान पर
अधिकार रखने वाला यही एक नाम है।” “कभी-कभी मेरे साथ ऐसा ही
होता रहा है। मेरा उद्धार हो चुका है। अब तुम सोचो, लड़के,
तुम्हारे साथ क्या होने वाला है?” उसने जॉन की
ओर देखा। जॉन सिर झुकाए कुर्सियों को ठीक जगह पर लगा रहा था। “क्या तुम उद्धार पाना चाहते हो, जॉनी?”
“मुझे नहीं मालूम,”
जॉन ने कहा।
“क्या तुम एक बार उसकी परीक्षा लोगे? किसी दिन बस घुटनों के बल गिरकर उससे प्रार्थना करके यह तो कहो कि वह
तुम्हारी मदद करे।”
जॉन मुड़ गया और पूरे चर्च की ओर देखने लगा। अब उसे यह चर्च
एक विशाल, ऊँचा खेत-सा दिखाई दे रहा था, जो फसल काटे जाने के लिए तैयार हो। उसे हाल ही का एक पहला रविवार याद आया।
कम्यूनियन का रविवार। उस दिन सभी संत सफेद कपड़े पहने हुए थे। उन्होंने चपटी,
बिना नमक की यहूदी रोटी खाई थी, जो प्रभु का
शरीर मानी जाती थी और लाल अंगूर का रस पिया था, जो उनका रक्त
था। जब वे उस मेज़ से उठे, जो विशेष रूप से उस दिन के लिए
तैयार की गई थी तो वे अलग-अलग हो गए। एक ओर पुरुष और दूसरी ओर स्त्रियाँ। फिर पानी
से दो बड़े पात्र भर दिए गए ताकि वे एक-दूसरे के पैर धो सकें, जैसा कि मसीह ने अपने शिष्यों को करने की आज्ञा दी थी। वे एक-दूसरे के
सामने घुटनों के बल बैठ गए। स्त्री के सामने स्त्री और पुरुष के सामने पुरुष। एक-दूसरे
के पैर धोकर उन्हें पोंछते रहे। भाई एलिशा, जॉन के पिता के सामने घुटनों के बल
बैठा था। सेवा समाप्त होने पर उन्होंने एक-दूसरे को पवित्र चुंबन दिया। जॉन फिर
मुड़ा और एलिशा की ओर देखने लगा।
एलिशा ने उसकी ओर देखा और मुस्कराया। “लड़के, मैंने जो कहा
है, उसके बारे में सोचना।”
काम पूरा होने पर एलिशा पियानो के पास बैठ गया और अपने लिए
ही बजाने लगा। जॉन आगे की पंक्ति में एक कुर्सी पर बैठकर उसे देखने लगा।
काफी देर बाद उसने कहा, “ऐसा नहीं लगता कि आज रात कोई आने वाला है।” एलिशा ने शोक-भरा गीत बजाना
बंद नहीं किया, “हे प्रभु, मुझ पर दया
करो।”
“वे आएँगे,” एलिशा ने
कहा।
और जैसे ही उसने यह कहा, दरवाज़े पर दस्तक हुई। एलिशा ने पियानो बजाना रोक दिया। जॉन दरवाज़े तक
गया। वहाँ दो बहनें खड़ी थीं। सिस्टर मैककैंडलेस और सिस्टर प्राइस।
“प्रभु की जय हो, बेटे,” उन्होंने
कहा।
“प्रभु की जय हो,” जॉन ने कहा।
वे सिर झुकाए और अपने
सामने हाथों में बाइबल थामे भीतर आईं। उन्होंने वही काले कपड़े के कोट पहन रखे थे,
जो वे पूरे सप्ताह पहनती थीं और उनके सिर पर पुरानी फेल्ट की
टोपियाँ थीं। जब वे जॉन के पास से होकर गुज़रीं, तो उसे
सिहरन-सी हुई और उसने दरवाज़ा बंद कर दिया।
एलिशा खड़ा हो गया और दोनों स्त्रियों ने फिर पुकारा, “प्रभु की जय हो!” फिर दोनों स्त्रियाँ
अपनी-अपनी सीट के सामने कुछ क्षण घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना करने लगीं। यह भी
एक भावपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान था। चर्च में प्रवेश करने वाले प्रत्येक संत को सेवा
में भाग लेने से पहले कुछ क्षण अकेले प्रभु के साथ आध्यात्मिक संवाद करना होता था।
जॉन प्रार्थना करती हुई स्त्रियों को देखता रहा। एलिशा फिर पियानो पर बैठ गया और
अपना उदास गीत बजाने लगा। स्त्रियाँ उठीं। पहले सिस्टर प्राइस और फिर सिस्टर
मैककैंडलेस। उन्होंने चर्च के चारों ओर देखा।
“क्या हम ही सबसे पहले आए हैं?” सिस्टर प्राइस ने पूछा। उनकी आवाज़ मृदु थी और उनकी त्वचा ताँबे जैसी
साँवली थी। वे सिस्टर मैककैंडलेस से कई वर्ष छोटी थीं। वे अविवाहित थीं और जैसा कि
वे स्वयं गवाही देते हुए कहती थीं, उन्होंने कभी किसी पुरुष
का संसर्ग नहीं किया था।
“नहीं, सिस्टर प्राइस,”
भाई एलिशा मुस्कराते हुए बोला, “भाई जॉनी यहाँ
सबसे पहले आ गया था। इस शाम चर्च की सफाई हम दोनों ने की है।”
“भाई जॉनी बहुत निष्ठावान है,” सिस्टर मैककैंडलेस ने कहा। “प्रभु उसके माध्यम से एक महान कार्य करने वाले
हैं, मेरी बात याद रखना।”
कभी-कभी वास्तव में, जब भी प्रभु ने उसके माध्यम से अपनी कृपा प्रकट की थी सिस्टर मैककैंडलेस
की कही हुई कोई भी बात धमकी जैसी लगती थी। आज रात भी वह पिछली रात दिए गए अपने
उपदेश के प्रभाव में पूरी तरह डूबी हुई थीं। वह बहुत विशाल कद-काठी की स्त्री थीं।
ईश्वर ने जितनी बड़ी और जितनी गहरी काली स्त्रियों को बनाया था, उनमें से एक। प्रभु ने उन्हें गायन और उपदेश देने के लिए एक बुलंद और
शक्तिशाली आवाज़ दी थी और अब वह शीघ्र ही धर्म-प्रचार के लिए बाहर निकलने वाली
थीं। कई वर्षों से प्रभु सिस्टर मैककैंडलेस को उनके शब्दों में, उठने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे थे। लेकिन उनका स्वभाव संकोची था
और उन्हें डर था कि कहीं वे स्वयं को दूसरों से ऊपर न समझने लगें। जब तक प्रभु ने
इसी वेदी के सामने उन्हें पूरी तरह दीन और असहाय नहीं कर दिया था, तब तक उन्होंने उठकर सुसमाचार का प्रचार करने का साहस नहीं किया था। लेकिन
अब उन्होंने यात्रा के लिए अपने जूते कस लिए थे। अब वे ऊँची आवाज़ में पुकारेंगी
और किसी बात को छिपाएँगी नहीं। वे सिय्योन[3] में तुरही की तरह अपनी आवाज़
बुलंद करेंगी।
“हाँ,” सिस्टर प्राइस
ने अपनी कोमल मुस्कान के साथ कहा, “वह कहते हैं कि जो
थोड़ी-सी बातों में विश्वासयोग्य रहता है, उसे बहुतों का
प्रधान बनाया जाएगा।”
जॉन ने भी उन्हें देखकर मुस्कराया। वह मुस्कान संकोच भरे
आभार को व्यक्त करने के लिए थी। लेकिन उसमें व्यंग्य बल्कि कुछ दुर्भावना भी झलक
गई। सिस्टर प्राइस यह समझ नहीं पाईं। इससे जॉन का भीतर छिपा तिरस्कार और गहरा हो
गया।
“क्या चर्च की सफाई करने वाले बस तुम दोनों
ही थे?” सिस्टर मैककैंडलेस ने एक बेचैन कर देने वाली मुस्कान
के साथ पूछा। ऐसी मुस्कान, जैसी किसी भविष्यवक्ता की होती है,
जो मनुष्यों के हृदय में छिपे रहस्यों को देख लेता है।
“हे प्रभु, सिस्टर
मैककैंडलेस,” एलिशा ने कहा, “लगता है,
हमेशा हम दोनों ही रह जाते हैं। मुझे नहीं मालूम कि दूसरे जवान लोग
शनिवार की रातों में क्या करते हैं, लेकिन वे यहाँ के आस-पास
भी नहीं आते।”
वास्तव में, एलिशा भी आम तौर पर शनिवार की शाम को चर्च के आस-पास नहीं आता था। लेकिन
पादरी का भतीजा होने के कारण उसे कुछ विशेष छूट मिली हुई थी। उसके लिए तो इतना ही
बहुत बड़ी धार्मिक अच्छाई मानी जाती थी कि वह कभी-कभार यहाँ आ ही जाता था।
“निश्चित रूप से अब हमारे जवान लोगों के बीच
एक जागरण होना चाहिए,” सिस्टर मैककैंडलेस ने कहा। “वे बहुत
बुरी तरह ठंडे पड़ते जा रहे हैं। प्रभु उस चर्च को आशीर्वाद नहीं देंगे, जो अपने जवान लोगों को इस तरह ढीला-ढाला और लापरवाह होने देता है।
उन्होंने कहा है, ‘क्योंकि तुम न तो गर्म हो, न ठंडे,
इसलिए मैं तुम्हें अपने मुँह से उगल दूँगा।’ यही प्रभु का वचन है।” और
उन्होंने कठोरता से चारों ओर देखा। सिस्टर प्राइस ने सिर हिलाकर उनकी बात का
समर्थन किया।
“और यहाँ भाई जॉनी का
अभी तक उद्धार भी नहीं हुआ है,” एलिशा ने कहा। “लगता है,
जिन जवान लोगों का उद्धार हो चुका है, उन्हें
इस बात पर शर्म आनी चाहिए कि परमेश्वर के घर में यह लड़का उनसे ज्यादा निष्ठावान
है।”
“उन्होंने कहा है कि जो पहले हैं, वे अंत में होंगे
और जो अंत में हैं, वे पहले होंगे,” सिस्टर
प्राइस ने विजयी मुस्कान के साथ कहा।
“बिल्कुल, उन्होंने ऐसा
ही कहा है,” सिस्टर मैककैंडलेस ने सहमति जताई। “यह लड़का उन
सब से पहले परमेश्वर के राज्य में पहुँच जाएगा, तुम बस देखते
जाओ।”
“आमेन,” भाई एलिशा ने
कहा और जॉन की ओर देखकर मुस्कराया।
कुछ देर बाद सिस्टर मैककैंडलेस ने पूछा, “क्या फादर आज रात हमारे साथ आने वाले हैं?”
एलिशा ने भौंहें सिकोड़ लीं और नीचे का होंठ आगे निकाल
लिया। “मुझे नहीं लगता, बहन,”
उसने कहा। “मेरा खयाल है कि आज रात वे घर पर रहकर अपनी ताकत सुबह की
प्रार्थना-सभा के लिए बचाए रखना चाहेंगे। प्रभु उनसे स्वप्नों और दर्शनों में
बातें कर रहे हैं और पिछले कुछ समय से उन्हें ज्यादा नींद नहीं मिली है।”
“हाँ,” सिस्टर
मैककैंडलेस ने कहा, “वे सचमुच बहुत प्रार्थना करने वाले
व्यक्ति हैं। मैं तुमसे कहती हूँ, हर चरवाहा अपनी भेड़ों के
लिए प्रभु के सामने उतनी देर नहीं ठहरता, जितनी फादर जेम्स
ठहरते हैं।”
“निश्चय ही, यह सच है,”
सिस्टर प्राइस ने उत्साहपूर्वक कहा। “प्रभु ने हमें कितना अच्छा
चरवाहा दिया है!”
“वे कभी-कभी बहुत कठोर होते हैं,” सिस्टर मैककैंडलेस ने कहा, “लेकिन प्रभु का वचन भी
कठोर है। पवित्रता का मार्ग कोई मज़ाक नहीं है।”
“उन्होंने मुझे यह बात अच्छी तरह समझा दी है,”
भाई एलिशा ने मुस्कराते हुए कहा।
सिस्टर मैककैंडलेस ने उसकी ओर घूरकर देखा। फिर हँस पड़ीं। “हे प्रभु!” वह चिल्लाईं, “मुझे यकीन है, तुम यह बात अच्छी तरह कह सकते हो!”
“और इसी वजह से मैं उनसे प्रेम करती हूँ,”
सिस्टर प्राइस ने कहा। “हर पादरी ऐसा नहीं होता जो अपने ही भतीजे को
वह भी पूरे चर्च के सामने, सबके बीच इस तरह बैठा दे। और एलिशा ने कोई बड़ा अपराध
भी नहीं किया था।”
“छोटा या बड़ा अपराध जैसी कोई चीज़ नहीं होती,”
सिस्टर मैककैंडलेस ने कहा। “शैतान अगर दरवाज़े में अपना पैर भी जमा
दे तो वह तब तक चैन नहीं लेगा जब तक पूरा का पूरा कमरे के भीतर न आ जाए। या तो तुम
प्रभु के वचन में हो या नहीं हो। ईश्वर के साथ आधे-अधूरे रास्ते की कोई गुंजाइश
नहीं है।”
कुछ देर बाद सिस्टर प्राइस ने संकोच से पूछा, “क्या तुम्हें लगता है कि हमें शुरू कर
देना चाहिए? मुझे तो ऐसा नहीं लगता कि अब कोई और आने वाला
है।” “अरे, तुम वहाँ बैठी-बैठी इस तरह
कमज़ोर विश्वास मत दिखाओ,” सिस्टर मैककैंडलेस हँसते हुए
बोलीं। “मुझे पूरा विश्वास है कि प्रभु आज रात हमें एक महान धार्मिक सभा देंगे।”
फिर उन्होंने जॉन की ओर मुड़कर पूछा, “क्या तुम्हारे डैडी आज रात यहाँ नहीं आने
वाले?”
“जी हाँ,” जॉन ने जवाब
दिया, “उन्होंने कहा था कि वे आएँगे।”
“देखा!” सिस्टर मैककैंडलेस ने कहा। “और
तुम्हारी माँ... क्या वह भी आज रात आएँगी?”
“मुझे नहीं मालूम,”
जॉन ने कहा। “वह बहुत थकी हुई हैं।”
“वह इतनी भी थकी हुई नहीं हैं कि थोड़ी देर
के लिए यहाँ आकर प्रार्थना न कर सकें,” सिस्टर मैककैंडलेस ने
कहा।
एक पल के लिए जॉन को उनसे घृणा हो गई और उसने गुस्से से
उनके मोटे, काले चेहरे के बगल
वाले प्रोफ़ाइल को घूरकर देखा। सिस्टर प्राइस ने कहा, “लेकिन
मैं कहती हूँ, यह सचमुच हैरानी की बात है कि वह औरत जिस तरह
काम करती है, फिर भी बच्चों को इतना साफ-सुथरा और करीने से
रखती है और लगभग हर रात परमेश्वर के घर भी आ जाती है। यह प्रभु के अलावा और कौन हो
सकता है जो उसे इतनी ताकत देता है।”
“मेरा खयाल है, हमें एक
छोटा-सा गीत गा लेना चाहिए,” सिस्टर मैककैंडलेस ने कहा,
“बस माहौल में थोड़ी गर्मी लाने के लिए। मुझे ऐसे चर्च में आना
बिल्कुल अच्छा नहीं लगता, जहाँ लोग बस बैठे-बैठे बातें करते
रहें। ऐसा लगता है जैसे इससे मेरी सारी आध्यात्मिक शक्ति ही चली जाती है।”
“आमेन,” सिस्टर प्राइस
ने कहा।
एलिशा ने गीत शुरू किया, “शायद यह आख़िरी बार हो,” और वे गाने लगीं, “शायद यह आख़िरी बार है जब मैं तुम्हारे साथ प्रार्थना करूँ, शायद यह मेरी आख़िरी बार हो, मुझे नहीं मालूम।”
गाते हुए वे तालियाँ बजाने लगीं। जॉन ने देखा कि सिस्टर
मैककैंडलेस अपने आस-पास डफ़ली ढूँढ़ रही थीं। वह उठकर वेदी-मंच की सीढ़ियाँ चढ़
गया और उसके नीचे बने छोटे-से खाने में से तीन डफ़लियाँ निकाल लाया। उसने एक डफ़ली
सिस्टर मैककैंडलेस को दे दी। उन्होंने ताल की लय बनाए रखते हुए सिर हिलाकर
मुस्कराते हुए उसे ले लिया। बाकी दोनों डफ़लियाँ उसने सिस्टर प्राइस के पास एक
कुर्सी पर रख दीं।... “शायद यह आख़िरी बार है जब मैं तुम्हारे साथ
गाऊँ, शायद यह मेरी आख़िरी बार हो, मुझे
नहीं मालूम।”
वह उन्हें देखता रहा और
उनके साथ गाता भी रहा क्योंकि यदि वह ऐसा नहीं करता तो वे उसे गाने के लिए मजबूर
कर देतीं। साथ ही वह उन शब्दों को सुनने से बचने की कोशिश कर रहा था, जिन्हें वह अपने गले से जबरन बाहर निकाल रहा था। उसने सोचा कि तालियाँ
बजाए। लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका। उसके हाथ उसकी गोद में कसकर जुड़े हुए ही रह गए।
यदि वह गाना बंद कर देता तो वे उसके पीछे पड़ जातीं, लेकिन
उसका दिल उससे कह रहा था कि उसे न तो गाने का अधिकार है, न
ही आनंद मनाने का। “ओह, यह शायद मेरा
आख़िरी बार हो, यह
शायद मेरा आख़िरी बार हो, ओह, यह…” “शायद मेरी आख़िरी बार हो…”
और वह एलिशा को देखता रहा। उस एलिशा को, जो प्रभु में एक युवा व्यक्ति था। जो
मलिकिसिदक[4] की रीति के अनुसार एक पुरोहित
की तरह था और जिसे मृत्यु और नरक पर अधिकार प्रदान किया गया था। प्रभु ने उसे ऊपर
उठाया था। उसे घुमाकर सही दिशा में खड़ा कर दिया था और उसके पैर उस चमकते हुए
मार्ग पर रख दिए थे।
जब
रात आती और वह अकेला होता। ऐसी जगह जहाँ कोई आँख उसे देख नहीं सकती थी और कोई
ज़बान उसके विरुद्ध गवाही नहीं दे सकती थी सिवाय ईश्वर की तुरही जैसी आवाज़ के तब
एलिशा के मन में क्या विचार आते होंगे? क्या उसके विचार, उसका बिस्तर, उसका शरीर अपवित्र होते थे? वह सपने में क्या देखता
था?
“शायद यह मेरी आख़िरी बार हो, मुझे नहीं मालूम।”
तभी उसके पीछे का दरवाज़ा खुला और सर्द हवा भीतर दौड़ आई। वह
मुड़ा तो देखा कि उसके पिता, उसकी
माँ और उसकी आंटी भीतर आ रहे थे। उसे केवल अपनी आंटी की उपस्थिति ने चौंकाया क्योंकि
वह इससे पहले कभी इस चर्च में नहीं आई थी। ऐसा लग रहा था मानो उसे किसी खूनी घटना
की गवाह बनने के लिए बुलाया गया हो। उसके पूरे व्यक्तित्व में एक भयानक शांति थी।
वह उसकी माँ के पीछे-पीछे गलियारे से आगे बढ़ी और एक क्षण के लिए अपनी माँ और पिता
के पास घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना करने लगी। जॉन जानता था कि प्रभु का ही हाथ
उसे यहाँ खींच लाया था और उसका हृदय ठंडा पड़ गया। आज रात प्रभु हवा पर सवार होकर
आ रहे थे। सुबह होने से पहले वह हवा क्या-क्या कह चुकी होगी?
[1] ईसाई
धार्मिक संदर्भ में
tarry का अर्थ होता है—ईश्वर की उपस्थिति की
प्रतीक्षा करते हुए प्रार्थना में बने रहना/ देर तक प्रार्थना करने की सभा
[2] धार्मिक
संगठन/समुदाय से संबद्ध चर्चों के समूह के अर्थ में है।
[3] अफ्रीकी-अमेरिकी
चर्च के संदर्भ में
Zion का अर्थ अक्सर स्वर्ग, मुक्ति और ईश्वर के
राज्य से जुड़ा
हुआ होता है।
[4] यहाँ Melchizedek (मेल्कीसेदेक) बाइबल में वर्णित शालेम का राजा और
परमेश्वर का याजक था। Hebrews (इब्रानियों) में
यीशु के याजकीय पद की तुलना
मेल्कीसेदेक के याजकत्व
से की गई है।
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