Wednesday, 26 August 2026

जेम्स बाल्डविन के उपन्यास Go Tell It on the Mountain का हिंदी अनुवाद- भाग- 2 (संतों की प्रार्थनाएँ/दो: गैब्रियल की प्रार्थना)

 

दो

गैब्रियल की प्रार्थना

अब मेरा परिचय पिता और पुत्र से हो गया है,
और अब मैं उनके लिए कोई अजनबी नहीं हूँ।”

 

जब फ्लोरेंस रोई, गैब्रियल अग्निमय अँधेरे में आगे बढ़ रहा था, प्रभु से बातें कर रहा था। उसकी चीख उसे बहुत दूर से, जैसे किसी अकल्पनीय गहराई से आती हुई सुनाई दी। उसने अपनी बहन की चीख नहीं सुनी बल्कि उस पापी की चीख सुनी, जो अपने पाप में पकड़ा गया हो। यह वही चीख थी, जिसे उसने न जाने कितने दिनों और रातों तक, न जाने कितनी वेदियों के सामने सुना था आज रात भी वह वैसे ही पुकार उठा, जैसे पहले पुकारता आया था, “जैसी तेरी इच्छा हो, प्रभु! जैसी तेरी इच्छा हो!”



फिर चर्च में केवल सन्नाटा था। यहाँ तक कि प्रार्थना-माँ वॉशिंगटन ने भी कराहना बंद कर दिया था। शीघ्र ही कोई फिर चीखेगा और आवाज़ें दोबारा उठने लगेंगीकुछ ही देर में संगीत बजेगा, जयघोष होंगे और टैम्बरीन[1] की आवाज़ सुनाई देगी। लेकिन अभी, इस प्रतीक्षारत, बोझिल सन्नाटे में ऐसा लगता था मानो सारा संसार प्रतीक्षा कर रहा हो। हवा के बीच किसी शक्ति से अभिभूत होकर ठिठका हुआ, उस जीवन-जाग्रत करने वाली शक्ति की प्रतीक्षा में।

यह सन्नाटा, एक गलियारे की तरह लगातार फैला हुआ, गैब्रियल को उस सन्नाटे में वापस ले गया जो मसीह में उसके जन्म से पहले था। सचमुच, यह किसी जन्म के समान था। इस क्षण से पहले जो कुछ घटित हुआ था, वह सब अँधेरे में लिपटा हुआ था, विस्मृति के समुद्र की तलहटी में पड़ा थाअब उसके विरुद्ध नहीं गिना जा रहा था। उसका संबंध केवल उस अंधी, अभिशप्त और बदबूदार भ्रष्टता से था, जो उद्धार पाए जाने से पहले वह स्वयं था।

वह सन्नाटा भोर के उस सन्नाटे जैसा थावह वेश्या के घर से लौट रहा था। फिर भी उसके चारों ओर भोर की ध्वनियाँ थीं, अदृश्य पक्षियों की, जो परमेश्वर की स्तुति कर रहे थेबेलों के बीच झींगुरों की, दलदल में मेंढकों की या दूर और पास भौंकते कुत्तों की, बरामदे में बाँग देते मुर्गों की। सूर्य अभी पूरी तरह जागा भी नहीं थाकेवल पेड़ों की सबसे ऊँची चोटियाँ ही उसके मुड़कर देखने पर काँपने लगी थीं। धुंध उसके सामने और चारों ओर उदासीनता से खिसक रही थी, उस प्रकाश के सामने पीछे हटती हुई, जो दिन में अपना शासन करता है। बाद में, उस सुबह के बारे में कहते हुए, उसने कहा था कि उसका पाप उसके ऊपर था। लेकिन उस समय वह केवल इतना जानता था कि वह एक बोझ ढो रहा है और उसे उतार देने के लिए तड़प रहा है। यह बोझ सबसे ऊँचे पर्वत से भी भारी था और वह उसे अपने हृदय में लिए चल रहा था। वह जितना एक कदम आगे बढ़ाता, उसका बोझ उतना ही भारी होता जाताउसकी साँस धीमी और कर्कश होती जातीअचानक उसके माथे पर ठंडा पसीना छलक आया और उसकी पीठ तर-बतर हो गई।

कैबिन में उसकी माँ अकेली लेटी हुई उसकी प्रतीक्षा कर रही थीकेवल उस सुबह उसके लौटने की ही नहीं बल्कि प्रभु के सामने उसके समर्पण की भी। वह बस इसी के लिए ठहरी हुई थी। गैब्रियल यह जानता था, यद्यपि वह अब उसे वैसे समझाती-बुझाती नहीं थी जैसे, कुछ ही दिन पहले तक किया करती थी। उसने उसे प्रभु के हाथों में सौंप दिया था और धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर रही थी कि प्रभु इस मामले को किस प्रकार सँभालते हैं।

वह प्रभु के वचन की पूर्ति अपनी आँखों से देखने तक जीवित रहना चाहती थी। वह तब तक विश्राम नहीं करेगी, जब तक उसके बच्चों में सबसे छोटे बेटे, जो अंततः उसे कफ़न पहनाएगा, ने संतों की संगति में प्रवेश न कर लिया हो। जो कभी अधीर और उग्र हुआ करती थी, जो पुरुषों की तरह गालियाँ देती, चिल्लाती और झगड़ती थी, वही अब मौन में चली गई थीअब उसका संघर्ष केवल परमेश्वर के साथ था और वह भी अपनी बची-खुची पूरी शक्ति से। यह भी उसने एक पुरुष की तरह ही किया। यह जानते हुए कि उसने अपना विश्वास बनाए रखा है, वह अब प्रतीक्षा कर रही थी कि परमेश्वर अपना वचन निभाएँ। गैब्रियल जानता था कि जब वह भीतर आएगा तो वह उससे नहीं पूछेगी कि वह कहाँ गया थावह उसे उलाहना नहीं देगी और उसकी आँखें, यहाँ तक कि जब वह सोने के लिए अपनी पलकें बंद कर लेगी, तब भी हर जगह उसका पीछा करती रहेंगी।

बाद में, रविवार होने के कारण, कुछ भाई-बहन उसके पास आएँगे और उसके बिस्तर के चारों ओर बैठकर गीत गाएँगे और प्रार्थना करेंगे। वह उसके लिए प्रार्थना करेगी, बिना किसी सहारे के बिस्तर पर उठकर बैठी हुई, सिर ऊपर उठाए, स्थिर आवाज़ में। जबकि वह कमरे के एक कोने में घुटनों के बल काँपता हुआ बैठा होगा और लगभग यह चाहता होगा कि उसकी माँ मर जाएफिर अपने हृदय की इस निराशाजनक दुष्टता के प्रमाण पर स्वयं काँप उठेगा और बिना शब्दों के क्षमा के लिए प्रार्थना करेगा। क्योंकि सिंहासन के सामने घुटनों के बल झुकने पर उसके पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे। वह स्वर्ग के सामने कोई प्रतिज्ञा करने से डरता था, जब तक उसमें उसे निभाने की शक्ति न हो। फिर भी वह जानता था कि जब तक वह प्रतिज्ञा नहीं करेगा, तब तक उसे वह शक्ति कभी नहीं मिलेगी।

उसकी आत्मा में, भय और कंपकंपी के साथ, उन सभी महिमाओं को पाने की तीव्र इच्छा थी, जिनके लिए उसकी माँ प्रार्थना करती थी कि वे उसे प्राप्त हों। हाँ, वह शक्ति चाहता था। वह जानना चाहता था कि वह प्रभु का अभिषिक्त है, उनका अति प्रिय है और लगभग उस हिम-श्वेत कबूतर[2] के योग्य है, जिसे स्वर्ग से यह गवाही देने के लिए भेजा गया था कि यीशु परमेश्वर के पुत्र हैं। वह स्वामी बनना चाहता था, उस अधिकार के साथ बोलना चाहता था जो केवल परमेश्वर से मिल सकता था। बाद में यह उसकी गर्वपूर्ण गवाही बनने वाली थी कि वह अपने पापों से घृणा करता था। यहाँ तक कि जब वह पाप की ओर दौड़ रहा होता था, यहाँ तक कि जब वह पाप कर रहा होता था, तब भी। वह अपने शरीर में बसे उस बुराई से घृणा करता था और उससे भयभीत रहता था, ठीक वैसे ही जैसे वह अपनी मनःस्थिति के असुरक्षित नगर में घूमते वासना और लालसा के उन सिंहों से डरता और घृणा करता था। बाद में वह कहा करता था कि यह उसकी माँ से मिली विरासत थी, कि उसके जीवन के आरंभ से ही परमेश्वर का हाथ उस पर था। लेकिन उस समय वह केवल इतना जानता था कि हर रात होते ही उसके भीतर अराजकता और ज्वर-सा उन्माद उठ खड़ा होता था। कैबिन में उसकी माँ और उसके बीच का सन्नाटा असहनीय हो जाता था। उसकी ओर देखे बिना, जैकेट पहनते समय आईने की ओर मुँह किए और उसमें अपना चेहरा देखने से बचने की कोशिश करते हुए, उसने माँ से कहा कि वह थोड़ी देर टहलने जा रहा है... जल्दी लौट आएगा।

कभी-कभी डेबरा उसकी माँ के पास बैठती और उसे ऐसी आँखों से देखती रहती, जिनमें धैर्य भी था और उलाहना भी। वह तारों से भरी रात में निकल भागता और तब तक चलता रहता, जब तक किसी शराबखाने या ऐसे घर तक न पहुँच जाता, जिस पर उसने अपनी वासना से भरे लंबे दिन के दौरान पहले ही नज़र लगा रखी थी। फिर वह तब तक पीता रहता, जब तक उसके दूर स्थित मस्तिष्क में हथौड़ों की चोट-सी गूँजने न लगतीवह अपने मित्रों और शत्रुओं को गालियाँ देता और तब तक लड़ता, जब तक खून न बहने लगता। सुबह वह स्वयं को कीचड़ में, गारे में, अनजान बिस्तरों पर और एक-दो बार जेल में पाताउसका मुँह खट्टा, कपड़े चिथड़ों में और उसके पूरे शरीर से उसकी अपनी सड़ती हुई भ्रष्टता की दुर्गंध उठ रही होती। तब वह रो भी नहीं पाता था। वह प्रार्थना भी नहीं कर पाता था। वह लगभग मृत्यु की कामना करने लगता था क्योंकि उसे लगता था कि उसके बंधनों की क्रूरता से उसे मुक्त करने वाली एकमात्र चीज़ मृत्यु ही है।

और इन सबके बीच उसकी माँ की आँखें उस पर लगी रहती थींउसका हाथ, जैसे आग में तपे चिमटे की पकड़, उसके हृदय की बुझती हुई चिंगारी को जकड़े रहता थामृत्यु के विचार मात्र से उसके भीतर एक और, उससे भी ठंडी दहशत पैदा कर देता था। बिना शुद्ध हुए, बिना क्षमा पाए कब्र में उतर जाना, सदा के लिए उस गड्ढे में उतर जाना था, जहाँ उसके लिए ऐसे आतंक प्रतीक्षा कर रहे थे, जिनसे भीषण कोई आतंक इस धरती ने, अपनी समूची उम्र और कराह के बावजूद, कभी नहीं झेला था। वह हमेशा के लिए जीवितों से काट दिया जाता। हमेशा के लिए उसका कोई नाम न रहता। जहाँ वह कभी रहा था, वहाँ केवल सन्नाटा, चट्टान, ठूँठ और कोई बीज न होता। उसके लिए, हमेशा के लिए और उसके अपनों के लिए भी, महिमा की कोई आशा न होती। इसलिए जब वह उस वेश्या के पास जाता, तो क्रोध में उसके पास जाता और व्यर्थ की उदासी लेकर वहाँ से लौटता। उसे लगता कि एक बार फिर उससे अत्यंत घृणित ढंग से सब कुछ लूट लिया गया हैउसने अपने पवित्र बीज को एक निषिद्ध अँधेरे में व्यर्थ बहा दिया था, जहाँ वह केवल मर सकता था। वह अपने भीतर रहने वाली उस विश्वासघाती वासना को कोसता और दूसरों में भी उसी वासना को कोसता। लेकिन, “मुझे याद है,” वह बाद में कहा करता था, “वह दिन जब मेरी कालकोठरी हिल उठी और मेरी बेड़ियाँ गिर पड़ीं।”

वह अपने पीछे छूट गई रात के बारे में सोचता हुआ घर की ओर चल पड़ा। उसने उस स्त्री को शाम की शुरुआत में ही देख लिया थालेकिन वह बहुत से दूसरे स्त्री-पुरुषों के साथ थीइसलिए उसने उस पर ध्यान नहीं दिया था। लेकिन बाद में, जब व्हिस्की के नशे से वह भीतर तक तप रहा था, उसने फिर सीधे उसकी ओर देखा और तुरंत समझ गया कि वह भी उसके बारे में सोच रही थी। उसके साथ अब इतने लोग नहीं थे, मानो वह उसके लिए जगह बना रही हो। उसे पहले ही बताया जा चुका था कि वह उत्तर से आई हुई एक विधवा थी, जो अपने लोगों से मिलने के लिए केवल कुछ दिनों के लिए शहर आई थी। जब उसने उसकी ओर देखा तो उसने भी उसकी ओर देखा, मानो अपने मित्रों के साथ चल रही मजाकिया बातचीत का ही हिस्सा हो, ज़ोर से हँस पड़ी। उसके दाँतों के बीच वह विशिष्ट फाँक थी और मुँह बड़ा था। हँसते समय उसने देर से अपने निचले होंठ को दाँतों के बीच दबा लिया, मानो उसे अपने इतने बड़े मुँह पर संकोच हो। उसके स्तन हिल उठे। यह उस उछल-पुथल जैसा नहीं था जो बड़ी, मोटी औरतों के हँसने पर होती है। उसके स्तन उसकी चुस्त पोशाक के कपड़े के नीचे ऊपर-नीचे हो रहे थे। वह उससे काफी बड़ी थी, शायद डेबरा की उम्र की, कोई तीस-बत्तीस वर्ष की। वास्तव में सुंदर भी नहीं थी। फिर भी उनके बीच की दूरी अचानक उसके आकर्षण से भर उठी और उसकी गंध उसकी नासिका में समा गई। लगभग उसे ऐसा महसूस हुआ मानो उसके हाथ के नीचे वे हिलते हुए स्तन हों। उसने फिर शराब पी, अनजाने में, या लगभग अनजाने में, अपने चेहरे पर वही मासूमियत और सामर्थ्य वाली भाव-रेखाएँ ले आते हुए, जिनके बारे में स्त्रियों के साथ उसके अनुभव ने उसे बताया था कि वे उनके प्रेम को अपनी ओर खींच लाती हैं।

....

हाँ,” (वह ठंड से सिहरता हुआ, झनझनाते शरीर के साथ घर की ओर चलता हुआ सोच रहा था)उन्होंने वह सब किया था।” प्रभु, पाप की उस सेज पर वे कैसे लोटे थे वह कैसे रोई और काँपती रही थीप्रभु, उसका प्रेम कैसे उस पर बरसा था! हाँ, वह भागती हुई धुंध के बीच घर की ओर चला जा रहा था, उसके माथे पर ठंडा पसीना छलक रहा था। फिर भी विजय के अहंकार और अपनी पुरुष-विजय की भावना में वह उसके बारे में सोचता रहा। उसकी गंध, अपने हाथों के नीचे उसके शरीर की गर्मी, उसकी आवाज़, उसकी बिल्ली जैसी जीभ, उसके दाँत, उसके उभरे हुए स्तन और वह किस तरह उसके लिए अपने को समर्पित करती थी, उसे थामे रहती थी, उसके साथ श्रम करती थीऔर कैसे दोनों काँपते और कराहते हुए फिर उसी संसार में लौट आए थे। इन बातों को सोचते हुए उसका शरीर पसीने से ठंडा पड़ रहा था, फिर भी वासना की स्मृति से भीतर तक उत्तेजित था। वह एक हल्की ऊँचाई पर खड़े एक पेड़ तक आ पहुँचा। उस पेड़ के आगे, दृष्टि से ओझल, उसका घर था, जहाँ उसकी माँ लेटी हुई थी। तभी उसके मन में अचानक उन सभी सुबहों की स्मृति बाढ़ के उस पानी की तरह उमड़ पड़ी, जिसने बाँध तोड़ दिए हों और किनारों को डुबोते हुए उन अभागे, अचल घरों की ओर अनियंत्रित वेग से बढ़ रहा हो। जिनकी छतों और खिड़कियों पर सूर्य अब भी फीका-सा काँप रहा था। उसे याद आया कि कितनी ही सुबह वह यहाँ से गुज़रा था और इस पेड़ को पार किया था। हर बार कुछ क्षण के लिए उन पापों के बीच अटका हुआ, जो हो चुके थे और उन पापों के बीच जो अभी किए जाने थे। उस ऊँचाई पर छाई धुंध अब छँट चुकी थी और उस अकेले पेड़ के सामने खड़े होकर उसे लगा कि वह स्वर्ग की खुली आँख के ठीक नीचे खड़ा है। तभी, एक क्षण में, हर ओर सन्नाटा छा गया... केवल सन्नाटा। पक्षियों ने भी गाना बंद कर दिया था, कोई कुत्ता नहीं भौंक रहा था और दिन के स्वागत में कोई मुर्गा बाँग नहीं दे रहा था। उसे लगा कि यह सन्नाटा परमेश्वर का न्याय हैपरमेश्वर के न्यायपूर्ण और भयानक क्रोध के सामने सारी सृष्टि स्तब्ध हो गई है और अब उस पापी को और वह पापी स्वयं था, प्रभु की उपस्थिति से काटकर बाहर कर दिए जाने की प्रतीक्षा कर रही है। वह पेड़ को छूने लगा, लगभग इस बात से अनजान कि उसका हाथ पेड़ पर पड़ा है। शायद भीतर की सहज इच्छा थी कि वह कहीं छिप जाए। फिर वह पुकार उठा, “हे प्रभु, दया करो! हे प्रभु, मुझ पर दया करो!”

वह पेड़ से टिककर गिर पड़ा, जमीन पर धँसता हुआ और पेड़ की जड़ों को जकड़ता हुआ। उसने सन्नाटे में चीख लगाई थी और उत्तर में केवल सन्नाटा मिला। फिर भी जब वह चीखा, उसकी चीख ने मानो पृथ्वी की सबसे दूर की सीमाओं तक घंटनाद कर दिया। सृष्टि के आर-पार गूँजती उसकी अकेली पुकार ने सोती हुई मछलियों और पक्षियों को डरा दियाहर जगह, नदी, घाटी और पर्वत की दीवारों में प्रतिध्वनियाँ जगा दीं। इस गूँज ने उसके भीतर इतना गहरा भय भर दिया कि वह कुछ क्षण पेड़ की जड़ में चुपचाप काँपता हुआ पड़ा रहा, मानो वहीं दफन हो जाना चाहता हो। लेकिन उसका बोझिल हृदय शांत होने को तैयार नहीं था। वह उसे मौन रहने नहीं देता था। जब तक वह फिर से न पुकारे, उसे साँस लेने तक नहीं देता था। इसलिए उसने फिर पुकारा और उसकी पुकार फिर लौटकर उसके पास आई। तब भी सन्नाटा परमेश्वर के बोलने की प्रतीक्षा करता रहा।

उसके आँसू बहने लगे। ऐसे आँसू, जिनके बारे में उसे पता ही नहीं था कि उसके भीतर इतने आँसू भी हैं। मैं रोया,” उसने बाद में कहा, “एक छोटे बच्चे की तरह।” लेकिन उस सुबह उस विराट वृक्ष के नीचे, स्वर्ग के सामने मुँह के बल पड़े हुए उसने जैसे आँसू बहाए, वैसे आँसू किसी बच्चे ने कभी नहीं बहाए थे। वे ऐसी गहराइयों से उमड़े थे, जिनका पता कोई बच्चा नहीं पा सकताउन्होंने उसे ऐसे ज्वर-कंप से हिला दिया, जिसे कोई बच्चा सह नहीं सकता। कुछ ही देर में अपनी यातना में वह चीखने लगा। उसकी हर चीख मानो उसका गला चीर डालती, उसकी साँस रोक देती और उसके गरम आँसुओं को उसके चेहरे पर बहा देती, जहाँ से वे उसके हाथों पर टपकते और पेड़ की जड़ को भिगो देते, मुझे बचा लो! मुझे बचा लो!” सारी सृष्टि गूँज उठी, लेकिन कोई उत्तर नहीं आया। मैं किसी को प्रार्थना करते हुए नहीं सुन सका।”

हाँ, वह उसी घाटी में पहुँच गया था, जिसके बारे में उसकी माँ ने कहा था कि एक दिन वह स्वयं को वहीं पाएगा, जहाँ कोई मानवीय सहायता नहीं थी, कोई हाथ उसकी रक्षा करने या उसे बचाने के लिए आगे नहीं बढ़ा था। यहाँ परमेश्वर की दया के अतिरिक्त कुछ भी प्रभावी नहीं था। यहीं परमेश्वर और शैतान के बीच, मृत्यु और अनंत जीवन के बीच युद्ध लड़ा जा रहा था। वह बहुत देर कर चुका था। वह बहुत लंबे समय तक पाप की ओर मुड़ता रहा थाअब परमेश्वर उसकी नहीं सुनेंगे। वह नियत समय बीत चुका था और परमेश्वर ने अपना मुख उसकी ओर से फेर लिया था।

तभी,” उसने गवाही दी, “मैंने अपनी माँ को गाते हुए सुना। वह मेरे लिए गा रही थी। वह धीमी और मधुर आवाज़ में वहीं मेरे पास गा रही थी जैसे, उसे मालूम हो कि यदि वह बस उन्हें पुकार देगी, तो प्रभु आ जाएँगे।” जब उसने वह गायन सुना, जो पूरे निस्तब्ध आकाश को भर रहा था और फैलते-फैलते मानो प्रतीक्षा करती हुई सारी धरती को भर रहा था, तब उसके भीतर का हृदय टूट गया और फिर उसी क्षण उठने लगा, अपने बोझ से मुक्त होता हुआ। उसका गला खुल गया और उसके आँसू ऐसे बरस पड़े, मानो सुनते हुए आकाश के द्वार खुल गए हों। तब मैंने परमेश्वर की स्तुति की, जिन्होंने मुझे मिस्र से बाहर निकाला[3] और मेरे पाँव ठोस चट्टान पर टिकाए।” जब अंततः उसने अपनी आँखें उठाईं तो उसे एक नया आकाश और एक नई पृथ्वी दिखाई दी। उसे गीत का एक नया स्वर सुनाई दिया क्योंकि एक पापी घर लौट आया था। मैंने अपने हाथों को देखा और मेरे हाथ नए थे। मैंने अपने पैरों को देखा और मेरे पैर नए थे। और उस दिन मैंने प्रभु के सामने अपना मुँह खोला और नरक भी मुझे अपना मन बदलने पर विवश नहीं कर सकेगा।” और हाँ, हर ओर गीत गूँज रहा थापक्षी, झींगुर और मेंढक आनंद मना रहे थेदूर के कुत्ते उछलते और सिसकते हुए अपने छोटे-छोटे आँगनों में चक्कर काट रहे थेहर ऊँची बाड़ पर मुर्गे बाँग दे रहे थे, मानो घोषणा कर रहे हों कि यहाँ एक नई शुरुआत हुई है, एक ऐसा दिन जो रक्त से धुला हुआ है!

........

और यही एक मनुष्य के रूप में उसके जीवन की शुरुआत थी। उसकी उम्र अभी इक्कीस वर्ष से कुछ ही अधिक थी। बीसवीं सदी को शुरू हुए अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ था। वह शहर चला आया, उस घर की सबसे ऊपरी मंज़िल पर बने उस कमरे में रहने लगा, जहाँ वह काम करता था और जो उसके लिए तैयार था। इसके बाद उसने उसने प्रचार करना शुरू कर दिया। उसी वर्ष उसने डेबरा से विवाह कर लिया। अपनी माँ की मृत्यु के बाद वह उसे हर समय अपने साथ महसूस करने लगा। वे दोनों साथ-साथ परमेश्वर के घर जाते क्योंकि अब उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। डेबरा उसे अक्सर अपने घर भोजन के लिए बुलाती, उसके कपड़े करीने से रखती और उसके प्रचार करने के बाद उसके उपदेशों पर चर्चा करती अर्थात वह सुनता रहता और वह उसकी प्रशंसा करती रहती।

उसने निश्चित रूप से कभी उससे विवाह करने का इरादा नहीं किया था। जैसा कि वह कहता, ऐसा विचार उसके मन में उतना ही असंभव था जितना चाँद पर उड़कर जाने की संभावना। वह उसे जीवन भर से जानता थावह उसकी बड़ी बहन की बड़ी उम्र की सहेली रही थी और फिर उसकी माँ के पास नियमित रूप से आने वाली विश्वस्त साथी। गैब्रियल की दृष्टि में वह कभी जवान रही ही नहीं थी। जहाँ तक उसका संबंध था, ऐसा लगता था मानो वह अपने उसी कठोर, स्त्रीत्व से रहित, लंबे और बेडौल परिधान में ही पैदा हुई हो, जो हमेशा काला या धूसर होता था। ऐसा लगता था जैसे उसे धरती पर बीमारों की सेवा करने, रोने वालों को सांत्वना देने और मरने वालों के अंतिम वस्त्र व्यवस्थित करने के लिए भेजा गया हो।

फिर उसके बारे में प्रचलित वह कहानी थी, उसका वह अतीत था जो, वह इतनी पूरी तरह अरुचिकर न भी होती तब भी किसी सम्मानित पुरुष की कामना के द्वार से उसे सदा के लिए बाहर रखने के लिए पर्याप्त था। सच तो यह है कि अपने शांत, भावहीन ढंग से वह स्वयं भी यह बात जानती हुई लगती थी। जहाँ संभवतः दूसरी स्त्रियाँ अपने आकर्षण और अपने रहस्य के रूप में उस आनंद को सँजोए रखती थीं, जो वे दूसरों को दे और उनसे पा सकती थीं, उसके पास केवल वह लज्जा थी, जिसे उसने जीवन भर ढोया था। यदि मनुष्य के प्रेम का कोई चमत्कार उसे उस लज्जा से मुक्त न कर दे तो देने के लिए उसके पास बस वही लज्जा थी। इसलिए वह उनके छोटे-से समुदाय में ऐसी स्त्री की तरह रहती थी, जिस पर रहस्यमय ढंग से परमेश्वर की कृपा या छाया पड़ी हो। जैसे, विनम्रता का कोई भयावह उदाहरण या जैसे कोई पवित्र मूर्ख। उसके शरीर पर कभी कोई आभूषण नहीं होता थाउसमें न कोई छनक थी, न चमक, न कोमलता। उसके सादे और कठोर सिर के वस्त्र पर कोई फीता उसकी सादगी को झूठा रूप देने के लिए नहीं थाउसके ऊनी बालों पर तेल भी बस जितना अत्यावश्यक हो, उतना ही लगाया जाता था। वह दूसरी स्त्रियों के साथ गपशप नहीं करती थी। वास्तव में उसके पास गपशप करने के लिए था ही क्या! बल्कि उसकी बातचीत केवल “हाँ” और “नहीं” तक सीमित रहती। वह बाइबल पढ़ती और प्रार्थना करती। चर्च में कुछ लोग, यहाँ तक कि सुसमाचार का प्रचार करने वाले कुछ पुरुष भी, डेबरा का उसकी पीठ पीछे मज़ाक उड़ाते थे। लेकिन उनके उपहास में भी एक बेचैनी होती थी। वे कभी पूरी तरह निश्चित नहीं हो पाते थे कि कहीं वे उनका मज़ाक उड़ाकर अपने बीच के सबसे बड़े संत, प्रभु के उस विशिष्ट खजाने और अत्यंत पवित्र पात्र का ही उपहास तो नहीं कर रहे हैं।

 सिस्टर डेबरा, तुम सचमुच मेरे लिए परमेश्वर का भेजा हुआ वरदान हो,” गैब्रियल कभी-कभी कहता। “मैं नहीं जानता कि तुम्हारे बिना मैं क्या करता।”

क्योंकि उसने गैब्रियल की नई अवस्था में उसे अद्भुत ढंग से सँभाला था। परमेश्वर में अपनी अटूट आस्था और गैब्रियल में अपने विश्वास के द्वारा उसने उन पापियों से भी अधिक, जो गैब्रियल के उपदेश के बाद रोते हुए वेदी के सामने आ जाते थे, उसके बुलावे की सांसारिक गवाही दी थी। और मानो मनुष्यों की भाषा में बोलते हुए, उसने उस महान कार्य को वास्तविकता प्रदान की थी, जिसे प्रभु ने गैब्रियल के हाथों में सौंपा था।

वह अपनी संकोची मुस्कान के साथ उसकी ओर ऊपर देखती। “बस कीजिए, रेवरेन्ड[4]। मैं तो जब भी घुटनों पर झुकती हूँ, पहले प्रभु को आपके लिए धन्यवाद देती हूँ।”

एक बात और थी। वह उसे कभी गैब्रियल या “गेब” नहीं कहती थी। जिस समय से उसने प्रचार करना शुरू किया, उसी समय से वह उसे “रेवरेन्ड” कहती थी क्योंकि वह जानती थी कि वह गैब्रियल, जिसे वह बचपन से जानती थी, अब रहा नहीं था। वह मसीह यीशु में एक नया मनुष्य बन चुका था।

फ्लोरेंस से कभी कोई खबर मिली?” वह कभी-कभी पूछती।

प्रभु जाने, सिस्टर डेबरा, पूछना तो मुझे आपसे चाहिए। वह लड़की मुझे कभी पत्र लिखती ही नहीं।”

मुझे भी अभी हाल में उससे कोई खबर नहीं मिली।” वह कुछ देर रुकी। फिर बोली, “मुझे नहीं लगता कि वह वहाँ बहुत खुश है।”

और उसके साथ यही होना चाहिए। उसे इस तरह यहाँ से पागल औरत की तरह चले जाने का कोई हक नहीं था।” फिर उसने दुर्भावना से पूछा, “उसने तुम्हें बताया कि उसकी शादी हो गई है या नहीं?”

उसने जल्दी से उसकी ओर देखा और फिर नज़रें फेर लीं। “फ्लोरेंस किसी पति के बारे में नहीं सोच रही है,” उसने कहा।

वह हँसा। “तुम्हारे इस पवित्र हृदय को परमेश्वर आशीर्वाद दें, सिस्टर डेबरा। लेकिन अगर वह लड़की पति की तलाश में यहाँ से नहीं गई है तो मेरा नाम गैब्रियल ग्राइम्स नहीं है।”

अगर उसे पति ही चाहिए था तो मुझे तो लगता है कि वह यहीं किसी को चुन सकती थी। क्या तुम यह कहना चाहती हो कि वह सिर्फ इसी के लिए इतनी दूर उत्तर तक चली गई?” और वह अजीब ढंग से मुस्कराई, ऐसी मुस्कान के साथ जो पहले जैसी गंभीर और निर्वैयक्तिक नहीं थी। उसे ऐसा मुस्कराते देखकर गैब्रियल ने सोचा कि उस मुस्कान ने उसके चेहरे के साथ सचमुच अजीब काम किया था। वह एक डरी हुई लड़की जैसी लगने लगी थी।

तुम जानती हो,” उसने उसे और ध्यान से देखते हुए कहा, “फ्लोरेंस ने यहाँ के किसी भी नीग्रो को कभी अपने योग्य नहीं समझा।”

मैं सोचती हूँ,” उसने संकोच से कहा, “क्या उसे कभी अपने योग्य कोई पुरुष मिलेगा भी? वह इतनी घमंडी है। ऐसा लगता है, जैसे वह किसी को अपने पास आने ही नहीं देगी।”

हाँ,” उसने भौंहें सिकोड़ते हुए कहा, “वह इतनी घमंडी है कि एक दिन प्रभु उसे झुका देंगे। मेरी बात याद रखना।”

हाँ,” उसने आह भरते हुए कहा, “वचन[5] सचमुच हमें बताता है कि विनाश से पहले अभिमान आता है।”

और पतन से पहले घमंडी मन। यही वचन कहता है।”

हाँ,” वह फिर मुस्कराई, “परमेश्वर के वचन से बचने की कोई शरण नहीं है, है न, रेवरेन्ड? बस उसमें बने रहना होता है क्योंकि उसका हर शब्द सत्य है और नरक के फाटक भी उसके सामने टिक नहीं पाएँगे।”

वह मुस्कराया, उसे देखता रहा और उसके हृदय में गहरी कोमलता भर गई। तुम बस वचन में बनी रहो, छोटी सिस्टर। स्वर्ग की खिड़कियाँ तुम्हारे लिए खुल जाएँगी और तुम पर इतनी आशीषें बरसेंगी कि तुम्हें समझ नहीं आएगा कि उन्हें कहाँ रखोगी।”

अब उसकी मुस्कान और भी गहरी खुशी से भरी थी। उसने मुझे पहले ही आशीष दे दी है, रेवरेन्ड। उसने मुझे तब आशीष दी, जब उसने तुम्हारी आत्मा को बचाया और तुम्हें अपना सुसमाचार प्रचार करने के लिए भेज दिया।”

सिस्टर डेबरा,” उसने धीरे से कहा, “वह सारा पापमय समय... क्या तुम मेरे लिए प्रार्थना करती थीं?” उसकी आवाज़ थोड़ी धीमी हो गई। हाँ, रेवरेन्ड। मैं और तुम्हारी माँ, हम हर समय तुम्हारे लिए प्रार्थना करते थे।”

उसने उसे देखा, कृतज्ञता और अचानक उमड़ी एक विचित्र कल्पना से भरा हुआ। वह उसके लिए वास्तविक थावह उन सारे वर्षों में उसे देखती रही थी और उसके लिए प्रार्थना करती रही थी जबकि गैब्रियल की दृष्टि में वह इतने वर्षों तक केवल एक छाया थी। और वह अब भी उसके लिए प्रार्थना कर रही थी। जीवन भर उसकी सहायता के लिए उसकी प्रार्थनाएँ उसके साथ रहेंगी। यह बात अब उसे उसके चेहरे से दिखाई दे रही थी। वह कुछ नहीं बोली और मुस्कराई भी नहींबस अपनी गंभीर करुणा से उसे देखती रही। उस दृष्टि में अब थोड़ी-सी जिज्ञासा और थोड़ी-सी झिझक भी थी।

परमेश्वर तुम्हें आशीर्वाद दें, सिस्टर,” उसने अंततः कहा।

इसी बातचीत के दौरान या इसके समाप्त होते ही, शहर एक विराट पुनर्जागरण सभा की चपेट में आ गया। आस-पास के सभी काउंटियों[6] से, दक्षिण में फ्लोरिडा तक और उत्तर में शिकागो तक से प्रचारक एक जगह इकट्ठे हुए ताकि लोगों को जीवन की रोटी बाँट सकें। इसे “ट्वेंटी-फोर एल्डर्स रिवाइवल मीटिंग” कहा गया और वह उस गर्मी का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन था। क्योंकि उनमें चौबीस प्रचारक थे और प्रत्येक को एक रात उपदेश देने का अवसर दिया गया था, मानो मनुष्यों के सामने चमकने और अपने स्वर्गीय पिता की महिमा करने के लिए। इन चौबीसों में सभी बड़े अनुभव और आध्यात्मिक शक्ति वाले पुरुष थे और कुछ तो बहुत प्रसिद्ध भी थे। उनमें से एक बनने के लिए, गैब्रियल को, उसके आश्चर्य और गर्व के लिए बुलाया गया था। यह उसके लिए बहुत बड़ा और भारी सम्मान था। वह विश्वास में भी और उम्र में भी अभी बहुत युवा था। अभी कल ही तो वह पाप की नालियों में उल्टी से लथपथ पड़ा हुआ था। निमंत्रण पाकर गैब्रियल का हृदय भय से काँप उठा। फिर भी उसे लगा कि यह परमेश्वर का ही हाथ था, जिसने इतनी जल्दी उसे आगे बुलाया था ताकि वह इतने महान पुरुषों के सामने स्वयं को सिद्ध कर सके।

उसे बारहवीं रात को उपदेश देना था। यह सोचकर कि शायद लोग उसे सुनने के लिए पर्याप्त संख्या में आकर्षित न हों, तय किया गया कि उसके दोनों ओर लगभग उतनी ही संख्या में अनुभवी और प्रभावशाली प्रचारक होंगे। इस तरह उसे उन प्रचारकों द्वारा पहले ही उठाए गए धार्मिक जोश के तूफान का लाभ मिलेगायदि वह उनके प्रभाव में पर्याप्त वृद्धि न कर सका तो उसके बाद आने वाले दूसरे प्रचारक उसके प्रदर्शन को लगभग भुला देंगे।

लेकिन गैब्रियल नहीं चाहता था कि अब तक के अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अवसर पर उसका प्रदर्शन मिट जाए—एक ऐसा अवसर, जिस पर बहुत कुछ निर्भर था। वह नहीं चाहता था कि उसे केवल एक ऐसा लड़का समझकर टाल दिया जाए, जो अभी इस दौड़ में शामिल होने योग्य भी नहीं हुआ है, पुरस्कार का दावेदार होना तो दूर की बात है। इसलिए वह परमेश्वर के सामने घुटनों के बल उपवास करता और दिन-रात लगातार प्रार्थना करता रहा कि परमेश्वर उसके माध्यम से कोई महान कार्य करें और सभी लोगों को दिखा दें कि सचमुच परमेश्वर का हाथ उस पर है कि वह प्रभु का अभिषिक्त है।

बिना उसके कहे डेबरा ने भी उसके साथ उपवास किया और प्रार्थना की। उसने उसका सबसे अच्छा काला सूट भी अपने पास रख लिया ताकि उस महान दिन के लिए उसे साफ, रफ़ू और अच्छी तरह इस्त्री कर सके। और सभा के तुरंत बाद उसने उसे फिर अपने पास रख लिया ताकि उस बड़े रविवार के भोज में भी वह उतना ही शानदार दिखाई दे, जो आधिकारिक रूप से उस पुनर्जागरण सभा का समापन करने वाला था। वह रविवार सबके लिए दावत का दिन होने वाला थालेकिन विशेष रूप से उन चौबीस बुज़ुर्ग प्रचारकों के लिए, जिनके सम्मान में उस दिन संतों के श्रम और खर्च से भव्य भोज दिया जाना था।

जिस शाम उसे उपदेश देना था, वह और डेबरा साथ-साथ उस बड़े, रोशन सभा-भवन की ओर चले, जहाँ कुछ ही समय पहले तक नृत्य के लिए संगीत-बैंड बजा करता था और जिसे संतों ने पुनर्जागरण सभा के पूरे समय के लिए किराए पर लिया था। सभा पहले ही शुरू हो चुकी थीरोशनी सड़कों तक फैल रही थी, संगीत हवा में गूँज रहा था और राहगीर रुक-रुककर सुन रहे थे तथा आधे खुले दरवाज़ों से भीतर झाँक रहे थे। वह चाहता था कि वे सब भीतर आ जाएँ। वह चाहता था कि सड़कों पर दौड़ता फिरे और सभी पापियों को पकड़कर परमेश्वर का वचन सुनने के लिए भीतर ले आए। लेकिन जैसे ही वे दरवाज़ों के पास पहुँचे, इतने दिनों और रातों से दबा हुआ भय फिर उसके भीतर उठ खड़ा हुआ। उसने सोचा कि आज रात वह कितनी ऊँचाई पर और बिल्कुल अकेला खड़ा होगा ताकि उन शब्दों की सच्चाई सिद्ध कर सके जो उसके होंठों से निकले थे कि परमेश्वर ने उसे प्रचार करने के लिए बुलाया है।

सिस्टर डेबरा,” उसने अचानक कहा, जब वे दरवाज़े के सामने खड़े थे, “तुम ऐसी जगह बैठना जहाँ मैं तुम्हें देख सकूँ?”

मैं ऐसा ही करूँगी, रेवरेन्ड,” उसने कहा। “आप आगे जाइए। परमेश्वर पर भरोसा रखिए।”

एक शब्द और कहे बिना वह मुड़ा, उसे दरवाज़े पर छोड़कर, और लंबे गलियारे से होता हुआ मंच पर बने उपदेश-स्थान की ओर चला गया। वहाँ वे सभी पहले से मौजूद थे। बड़े, सुख-सुविधा में रहने वाले, विधिवत अभिषिक्त धर्मोपदेशक। जब वह मंच की सीढ़ियाँ चढ़ा तो वे मुस्कराए और सिर हिलाकर उसका स्वागत किया। उनमें से एक ने सभा की ओर संकेत करते हुए, जो किसी भी प्रचारक की इच्छा के अनुरूप उत्साह से भरी हुई थी, कहा, बस इन लोगों को तुम्हारे लिए जोश में ला रहे हैं, लड़के। आज रात देखना, तुम इन्हें कैसे चिल्लाने पर मजबूर करते हो।”

वह मुस्कराया और फिर प्रार्थना करने के लिए सिंहासन जैसी अपनी कुर्सी के सामने घुटनों के बल बैठ गया। उसी क्षण उसने फिर सोचा जैसा कि पिछले ग्यारह दिनों से सोचता आया था। उसके इन वरिष्ठ धर्मोपदेशकों में पवित्र स्थान के भीतर एक ऐसी सहजता और हल्कापन था, जो उसकी आत्मा को बेचैन करता था। जब वह बैठकर अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहा था, उसने देखा कि डेबरा ने सभा के बिल्कुल आगे, मंच के ठीक नीचे वाली जगह पर सीट ढूँढ़ ली थी और अपनी गोद में बाइबल खोले बैठी थी।

अंततः शास्त्र-पाठ हो गया, लोगों ने अपनी गवाहियाँ दीं, गीत गाए गए और चढ़ावा एकत्र किया गया। तब पिछले रात उपदेश देने वाले बुज़ुर्ग प्रचारक ने उसका परिचय कराया। वह अपने पैरों पर खड़ा हुआ और उस मंच की ओर बढ़ा, जहाँ विशाल बाइबल उसकी प्रतीक्षा कर रही थी। नीचे सभा की ओर देखते हुए, जो मानो एक खड़ी गहरी खाई की तरह फैली हुई थी, उसे एक चक्कर-सा देने वाला भय महसूस हुआ कि वह इतनी ऊँचाई पर खड़ा है। और इसी के साथ तुरंत उसके भीतर अवर्णनीय गर्व और आनंद उमड़ आया कि परमेश्वर ने उसे यहाँ खड़ा किया है।

उसने शुरुआत किसी “शाउट” वाले गीत से नहीं की, न ही किसी जोशीली गवाही से। उसने सूखी, तथ्यात्मक-सी आवाज़ में, जिसमें केवल थोड़ा-सा कंपन था, लोगों से कहा कि वे उसके साथ यशायाह के छठे[7] अध्याय की पाँचवीं आयत देखें। फिर उसने डेबरा से कहा कि वह उसे ऊँची आवाज़ में पढ़े।

और उसने असामान्य रूप से दृढ़ आवाज़ में पढ़ा, तब मैंने कहा, हाय मुझ पर! मैं नाश हुआ क्योंकि मैं अशुद्ध होंठों वाला मनुष्य हूँ। अशुद्ध होंठों वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूँ क्योंकि मैंने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज[8] को अपनी आँखों से देखा है।”

उस वाक्य को पढ़े जाने के बाद सभा-भवन में सन्नाटा छा गया। एक क्षण के लिए गैब्रियल अपने ऊपर टिकी आँखों और पीछे बैठे उन वरिष्ठ धर्मोपदेशकों को देखकर भयभीत हो गया और समझ नहीं पाया कि आगे कैसे बोले। फिर उसने डेबरा की ओर देखा और बोलना शुरू किया।

ये शब्द भविष्यद्वक्ता यशायाह ने कहे थे, जिन्हें “गरुड़-दृष्टि वाला” कहा जाता था क्योंकि उन्होंने अँधेरे में फैली सदियों के पार देखकर मसीह के जन्म की भविष्यवाणी की थी। यशायाह ने ही यह भविष्यवाणी की थी कि एक मनुष्य आँधी और तूफान से छिपने का स्थान होगा। यशायाह ने ही पवित्रता के मार्ग का वर्णन किया था और कहा था कि सूखी धरती एक तालाब बन जाएगी और प्यासी भूमि जल के सोते बन जाएगी। स्वयं मरुभूमि आनंद मनाएगी और गुलाब की तरह खिल उठेगी। यशायाह ने ही यह भविष्यवाणी की थी, हमारे लिए एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया और प्रभुता उसके कंधे पर होगी।” यह वही मनुष्य था जिसे परमेश्वर ने धार्मिकता में उठाया था, जिसे उन्होंने अनेक महान कार्य करने के लिए चुना था। फिर भी, परमेश्वर की महिमा का दर्शन करते हुए इसी मनुष्य ने पुकार उठाया था, हाय मुझ पर!”

हाँ!” एक स्त्री चिल्लाई। “कहते जाइए!”

यशायाह की इस पुकार में हम सबके लिए एक शिक्षा है, हम सबके लिए एक अर्थ है, एक कठोर सत्य। यदि हमने कभी यह पुकार नहीं लगाई तो हमने कभी उद्धार को जाना ही नहीं और यदि हम हर घंटे, हर दिन, आधी रात के समय और दोपहर के उजाले में भी इस पुकार के साथ जीना छोड़ दें तो उद्धार हमसे दूर हो गया है और हमारे पैर नरक को पकड़ चुके हैं। हाँ, हमारे परमेश्वर की सदा जय हो! जब हम उनके सामने काँपना छोड़ देते हैं, तब हम सही मार्ग से भटक चुके होते हैं।”

आमीन!” दूर से एक आवाज़ आई। “आमीन! कहते जाइए, लड़के!”

वह केवल एक क्षण के लिए रुका और अपने माथे का पसीना पोंछा। उसके भीतर का हृदय भय और कंपकंपी से, और साथ ही शक्ति से, भर उठा था।

क्योंकि हमें याद रखना चाहिए कि पाप की मजदूरी मृत्यु हैयह लिखा हुआ है और टल नहीं सकता। जो प्राणी पाप करता है, वह मर जाएगा। हमें याद रखना चाहिए कि हम पाप में जन्म लेते हैं, हमारी माताओं ने हमें पाप में गर्भ में धारण किया। हमारे शरीर के प्रत्येक अंग में पाप का राज्य है। पाप हमारे मलिन हृदय का स्वाभाविक रस हैपाप आँखों से झाँकता है... आमीन... और वासना की ओर ले जाता हैपाप कानों से सुनता है और मूर्खता की ओर ले जाता हैपाप जीभ पर बैठा है और हत्या की ओर ले जाता है। हाँ! स्वाभाविक मनुष्य की एकमात्र विरासत पाप है। वह पाप जो हमारे प्राकृतिक पिता, उस पतित आदम ने हमें विरासत में दिया, जिसका सेब आज भी समस्त जीवित पीढ़ियों और आने वाली अजन्मी पीढ़ियों को बीमार करता रहेगा! यह पाप ही था जिसने प्रभात के पुत्र को स्वर्ग से बाहर कर दिया; पाप ही था जिसने आदम को ईडन से बाहर निकालापाप ही था जिसने कैन को अपने भाई की हत्या करने के लिए उकसायापाप ही था जिसने बाबेल की मीनार बनवाई। पाप ही था जिसने सदोम पर आग बरसाई।[9] पाप, जो संसार की नींव से ही मनुष्य के हृदय में जीवित और साँस लेता आया है। वही पाप स्त्रियों को पीड़ा और अँधेरे में अपने बच्चों को जन्म देने के लिए विवश करता है, भयानक श्रम के बोझ से पुरुषों की पीठ झुका देता है, खाली पेट को खाली ही रखता है, मेज को सूना रखता है और हमारे बच्चों को चिथड़े पहनाकर संसार के वेश्यालयों और नृत्य-सभागृहों में भेज देता है!”

आमीन! आमीन!”

आह! हाय मुझ पर! हाय मुझ पर! हाँ, प्रिय भाइयो और बहनो, मनुष्य में कोई धार्मिकता नहीं है। सभी मनुष्यों के हृदय बुरे हैं, सभी मनुष्य झूठे हैं। केवल परमेश्वर सत्य हैं। दाऊद[10] की यह पुकार सुनो, यहोवा मेरी चट्टान, मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है। मेरा परमेश्वर, मेरी चट्टान, जिसका मैं भरोसा करता हूँमेरी ढाल और मेरे उद्धार का सींग, मेरा ऊँचा गढ़।’ अय्यूब[11] को सुनो, जो धूल और राख में बैठा था, जिसके बच्चे मर चुके थे, जिसकी सारी संपत्ति चली गई थी और जो झूठी सांत्वना देने वालों से घिरा हुआ था, देखो, वह मुझे मार भी डाले तो भी मैं उसी पर भरोसा रखूँगा।’ और पौलुस को सुनो, जो पहले शाऊल था। उद्धार पाए लोगों का सताने वाला, जिसे दमिश्क के मार्ग पर गिरा दिया गया और जो आगे चलकर सुसमाचार का प्रचार करने निकला, और यदि तुम मसीह के हो तो अब्राहम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस हो!’”

ओ हाँ!” एक बुज़ुर्ग प्रचारक चिल्लाया, “हमारे परमेश्वर की सदा जय हो!”

क्योंकि परमेश्वर की एक योजना थी। वह मनुष्य की आत्मा को नष्ट होने नहीं देना चाहते थे बल्कि उन्होंने उसके उद्धार की योजना तैयार कर रखी थी। आरंभ में, बहुत पीछे, संसार की नींव रखे जाने के समय ही, परमेश्वर की एक योजना थी... आमीन!... कि समस्त मनुष्यजाति को सत्य का ज्ञान कराया जाए। प्रारंभ में वचन था और वचन परमेश्वर के साथ था और वचन परमेश्वर था’, हाँ और उसी में जीवन था, हल्लेलूय्याह![12] और यह जीवन मनुष्यों की ज्योति था। प्रिय भाइयो और बहनो, जब परमेश्वर ने देखा कि मनुष्यों के हृदय कितने दुष्ट हो गए हैं कि वे अपने-अपने मार्ग पर भटक गए हैं... कि वे विवाह करते और विवाह में दिए जाते हैंकि वे अधर्मी भोजन और पेय का उत्सव मनाते हैं, वासना में डूबते हैं, ईशनिंदा करते हैं और प्रभु के विरुद्ध पापपूर्ण अभिमान में अपने हृदयों को ऊँचा उठाते हैं। ओह, तब परमेश्वर का पुत्र, वह धन्य मेमना[13] जो संसार के पापों को उठा लेता है, परमेश्वर का वह पुत्र जो देहधारी वचन था, प्रतिज्ञा की पूर्ति था... ओह, तब उसने अपने पिता की ओर मुड़कर पुकारा, पिता, मेरे लिए एक देह तैयार कर, और मैं नीचे जाकर पापी मनुष्य का उद्धार करूँगा।’”

आज शाम मेरा हृदय कितना आनंदित है, प्रभु की स्तुति... जय हो!”

आज यहाँ उपस्थित पिताओ, क्या कभी तुम्हारा कोई बेटा राह भटक गया है? माताओ, क्या तुमने अपनी बेटियों को उनकी जवानी के गर्व और उमंग के बीच ही नष्ट होते देखा है? क्या यहाँ किसी पुरुष ने उस आदेश के बारे में सुना है जो अब्राहम को दिया गया था कि उसे अपने बेटे को परमेश्वर की वेदी पर जीवित बलिदान के रूप में चढ़ाना होगा? पिताओ, अपने बेटों के बारे में सोचो, कैसे तुम उनके लिए काँपते हो, उन्हें सही राह दिखाने की कोशिश करते हो, उन्हें भरपेट खिलाने की कोशिश करते हो ताकि वे मजबूत होकर बड़े हों। अपने बेटे के लिए अपने प्रेम के बारे में सोचोयह सोचो कि उस पर आने वाली कोई भी विपत्ति तुम्हारे हृदय को किस तरह चीर देती है। फिर उस पीड़ा के बारे में सोचो, जिसे परमेश्वर ने सहा, जब उन्होंने अपने एकमात्र पुत्र को नीचे भेजा ताकि वह पापी धरती पर मनुष्यों के बीच रहे, सताया जाए, कष्ट सहे, क्रूस उठाए और मर जाए। अपने पापों के लिए नहीं, जैसे हमारे सांसारिक बेटे मरते हैं बल्कि समस्त संसार के पापों के लिए ताकि वह सारे संसार के पापों को उठा ले और आज रात हमारे हृदयों की गहराइयों में आनंद की घंटियाँ बज सकें!”

उसकी स्तुति करो!” डेबरा चिल्लाई और गैब्रियल ने उसकी आवाज़ को कभी इतना ऊँचा नहीं सुना था।

हाय मुझ पर! क्योंकि जब परमेश्वर ने पापी पर प्रहार किया, तब पापी की आँखें खुल गईं और उसने परमेश्वर की महिमा के सामने अपने आपको अपनी सारी मलिनता और नग्नता में देखा। हाय मुझ पर! क्योंकि उद्धार का क्षण ऐसी चकाचौंध कर देने वाली ज्योति है, जो स्वर्ग से टूटकर सीधे हृदय में उतरती है। इतने ऊँचे स्वर्ग से और इतने नीचे पड़े पापी के हृदय में। हाय मुझ पर! क्योंकि यदि परमेश्वर उस पापी को उठा न दें तो वह फिर कभी उठ नहीं सकता!”

हाँ, प्रभु! मैं वहाँ था!”

आज रात यहाँ कितने लोग उस स्थान पर गिर चुके हैं, जहाँ यशायाह गिरा था? कितनों ने यशायाह की तरह पुकार लगाई है? कितने लोग यशायाह की तरह यह गवाही दे सकते हैं, “मेरी आँखों ने राजा को, सेनाओं के प्रभु को देखा है”? आह! जो कोई यह गवाही देने में असमर्थ रहा, उसे कभी उसका मुख देखने को नहीं मिलेगा बल्कि उस महान दिन उससे कहा जाएगा, “हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से दूर हो जाओ।” और उसे सदा के लिए उस आग की झील में फेंक दिया जाएगा, जो शैतान और उसके सभी दूतों के लिए तैयार की गई है। ओह, क्या आज रात वह पापी उठेगा? क्या वह अपने उद्धार तक पहुँचने के लिए इस छोटी-सी दूरी को तय करेगा और यहाँ दया के आसन तक आएगा?

और वह प्रतीक्षा करता रहा। डेबरा शांत, दृढ़ मुस्कान के साथ उसे देख रही थी। उसने सामने उठे हुए उन सभी चेहरों की ओर देखा। उन चेहरों पर उसे आनंद, पवित्र उत्तेजना और विश्वास दिखाई दे रहा था और वे सभी ऊपर उसकी ओर देख रहे थे। तभी, बहुत पीछे से, एक लड़का उठ खड़ा हुआ। लंबा, साँवला लड़का। उसकी सफेद कमीज़ गले के पास खुली हुई और फटी हुई थीउसकी पतलून धूल से भरी और जर्जर थी और एक पुरानी टाई से बँधी हुई थी। उसने उस अथाह, भयावह और जीवंत दूरी को पार करते हुए गैब्रियल की ओर देखा और फिर लंबे, उजले गलियारे से उसकी ओर चल पड़ा। किसी ने पुकारा, “ओह, प्रभु की स्तुति हो!” और गैब्रियल की आँखों में आँसू भर आए। वह लड़का सिसकता हुआ दया के आसन के सामने घुटनों के बल बैठ गया और चर्च में गीत गूँजने लगा।

तब गैब्रियल दूसरी ओर मुड़ गया। वह जानता था कि आज रात उसने अपनी दौड़ अच्छी तरह पूरी की थी और परमेश्वर ने उसके माध्यम से अपना कार्य किया था। सभी बुज़ुर्ग प्रचारक मुस्करा रहे थे। उनमें से एक ने उसका हाथ थामा और कहा, “बहुत बढ़िया था, लड़के। सचमुच बहुत बढ़िया।”

फिर वह रविवार आया, जब उस भव्य भोज का आयोजन होना था, जो पुनर्जागरण सभा का समापन करने वाला था। उस भोज के लिए डेबरा और दूसरी सभी स्त्रियाँ कई दिनों से पहले ही पकाती, सेंकती, भूनती और उबालती चली आ रही थीं। गैब्रियल ने मज़ाक में, इस बात के बदले उसे थोड़ा-सा श्रेय देने के लिए कि वह उसे इस पुनर्जागरण सभा का सबसे अच्छा प्रचारक मानती थी, कह दिया कि वह भी सभी स्त्रियों में सबसे अच्छी रसोइया है। उसने संकोच से कहा कि इस मामले में उसे एक सुखद लाभ मिला हुआ है। उसने तो सभी प्रचारकों को सुना थालेकिन गैब्रियल ने बहुत लंबे समय से किसी दूसरी स्त्री के हाथ का खाना खाया ही नहीं था।

जब रविवार आया और गैब्रियल ने स्वयं को एक बार फिर उन बुज़ुर्ग प्रचारकों के बीच पाया और भोजन की मेज़ पर जाने वाला था तो उसके भीतर का प्रसन्न और गर्वित उत्साह कुछ फीका पड़ गया। वह इन लोगों के साथ सहज नहीं था। बस यही बात थी। उसके लिए यह स्वीकार करना कठिन था कि ये लोग विश्वास में उसके वरिष्ठ और उससे बेहतर हैं। उसे वे बहुत ढीले-ढाले, लगभग सांसारिक लगते थेवे पुराने समय के उन पवित्र भविष्यद्वक्ताओं जैसे नहीं थे, जो प्रभु की सेवा करते-करते दुबले और लगभग नग्न हो जाते थे। इसके विपरीत, ये परमेश्वर के सेवक सचमुच मोटे हो गए थे और उनके वस्त्र महँगे तथा तरह-तरह के थे। वे इतने लंबे समय से सेवा के मैदान में थे कि अब परमेश्वर के सामने काँपते ही नहीं थे। वे परमेश्वर की शक्ति को अपना अधिकार समझते थे, मानो वह शक्ति उनके अपने आत्मविश्वास से भरे, विशेष और प्रभावशाली व्यक्तित्व को और अधिक रोमांचक बनाने वाली कोई चीज़ हो। ऐसा लगता था, उनमें से प्रत्येक के पास उपदेशों की एक पूरी गठरी थी, जिन्हें वह बार-बार दे चुका थाकिसी सभा पर एक लापरवाह-सी नज़र डालते ही वह समझ जाता था कि वहाँ कौन-सा उपदेश सुनाना है। यद्यपि वे बड़े अधिकार के साथ उपदेश देते थे और लोगों की आत्माओं को वेदी के सामने इस तरह झुका देते थे जैसे, खेतिहर मजदूर अपने रोज़ के काम में मकई की बालियों को काटकर गिरा देता है, फिर भी वे इसका श्रेय परमेश्वर को नहीं देते थे। न ही इसे कोई विशेष महिमा समझते थे। गैब्रियल को लगता था कि वे बड़ी आसानी से बहुत अधिक पैसे पाने वाले सर्कस के कलाकार हो सकते थे—हर एक के पास अपना अलग, चकाचौंध पैदा करने वाला हुनर। गैब्रियल ने यह भी पाया कि वे मज़ाक-मज़ाक में इस बात की तुलना करते थे कि उनमें से किसने कितनी आत्माओं को बचाया है, मानो किसी जुए के अड्डे में बैठकर वे हिसाब रख रहे हों कि किसके कितने अंक हैं। यह बात उसे आहत भी करती थी और भयभीत भी। वह कभी नहीं चाहता था कि परमेश्वर के वरदान को इतनी हल्के ढंग से अपने हाथ में रखे।

वे धर्मोपदेशक सभा-भवन के ऊपर वाले कमरे में अकेले भोजन कर रहे थे। मसीह की दाख की बारी[14] में काम करने वाले कम विशेष पद वाले सेवक नीचे एक मेज़ पर भोजन कर रहे थे और स्त्रियाँ भोजन से भरी बड़ी-बड़ी थालियाँ लेकर सीढ़ियों पर बार-बार ऊपर-नीचे आ-जा रही थीं ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि वे भरपेट खाएँ। डेबरा भी उन सेविका स्त्रियों में से एक थी। वह कुछ नहीं बोलती थी, फिर भी, अपनी झिझक के बावजूद, जब-जब वह कमरे में आती, गैब्रियल का मन लगभग खुशी से फट पड़ता। वह जानता था कि उसे यह देखकर कितना गर्व होता होगा कि वह वहाँ, इतने प्रसिद्ध धर्मोपदेशकों के बीच, कितनी शांति और पुरुषोचित गरिमा के साथ बैठा है। अपने कठोर काले-सफेद परिधान में, जो अब उसकी पहचान-सी बन चुका था। और काश, उसकी माँ भी यहाँ होती और यह सब देख पाती, उसका गैब्रियल, कितनी ऊँचाई तक पहुँच गया था!

लेकिन भोजन समाप्त होने के करीब, जब स्त्रियाँ पाई, कॉफी और क्रीम लेकर आईं और मेज़ के चारों ओर की बातचीत पहले से कहीं अधिक हँसमुख और बेफिक्र हो गई, तब स्त्रियों के बाहर जाने के बाद दरवाज़ा अभी ठीक से बंद भी नहीं हुआ था कि एक बुज़ुर्ग धर्मोपदेशक, भारी शरीर वाला, प्रसन्नचित्त, बालू-से रंग के बालों वाला आदमी, जिसका चेहरा, निस्संदेह उसके कठोर अतीत की गवाही देता था और सूखे खून जैसे धब्बों वाली झाइयों से भरा था, हँसा और डेबरा की ओर संकेत करते हुए बोला, “वह तो सचमुच बड़ी पवित्र औरत है!” उसका कहना था कि सफेद आदमियों का दूध उसने इतनी कम उम्र में ही पीना शुरू कर दिया था कि वह दूध आज तक उसके पेट में इतना खट्टा पड़ा हुआ है कि अब वह किसी नीग्रो पुरुष को अपने लिए उसका अधिक गाढ़ा और मीठा रस चखने की अनुमति नहीं दे पाएगी। मेज़ पर बैठे सभी लोग ठहाका मारकर हँस पड़े। लेकिन गैब्रियल का खून ठंडा पड़ गया। उसे यह सोचकर घृणा और भय हुआ कि परमेश्वर के सेवक ऐसी घृणित अश्लीलता और हल्की बातों के दोषी हो सकते हैंयह सोचकर भी कि जिस स्त्री को परमेश्वर ने उसे सांत्वना देने के लिए भेजा था और जिसके सहारे के बिना वह आसानी से सही मार्ग से भटक सकता था, उसी स्त्री का वे इस तरह अपमान कर रहे थे। वह जानता था कि वे सोचते थे कि आपस में थोड़ा भद्दा मज़ाक करने से कोई नुकसान नहीं होगा। वे अपने विश्वास में इतने गहरे जड़ जमाए हुए थे कि शैतान के हथौड़े की ऐसी मामूली चोट उन्हें गिरा नहीं सकती। लेकिन गैब्रियल उनके उन्मत्त, हँसते हुए चेहरों को देखता रहा और उसे लगा कि न्याय के दिन उन्हें इसका बहुत बड़ा हिसाब देना पड़ेगा क्योंकि वे सच्चे विश्वासी के मार्ग में ठोकर की बाधाएँ बन रहे थे।

अब उस बालू-रंगे बालों वाले व्यक्ति ने गैब्रियल के कटु और विस्मय से भरे चेहरे को देखा, अपनी हँसी रोक ली और बोला, “क्या बात है, बेटे? आशा है मैंने तुम्हें नाराज़ करने के लिए कुछ नहीं कहा?”

एक दूसरे बुज़ुर्ग ने समझौता कराने वाले स्वर में पूछा, “उस रात जब तुमने उपदेश दिया था, उसी स्त्री ने तुम्हारे लिए बाइबल पढ़ी थी, है न?”

वह स्त्री,” गैब्रियल ने कहा, उसके सिर में मानो गर्जना हो रही थी, “प्रभु के संबंध में मेरी बहन है।” (धार्मिक बहन न कि सगी बहन) 

अच्छा, यहाँ एल्डर पीटर्स को यह मालूम नहीं था,” किसी और ने कहा। “उसका गलत मतलब बिल्कुल नहीं था।”

अब तुम नाराज़ तो नहीं हो जाओगे?” एल्डर पीटर्स ने स्नेहपूर्वक पूछा। हालाँकि गैब्रियल को बहुत ध्यान से देखने पर उसके चेहरे और आवाज़ में अब भी कुछ उपहास-सा दिखाई दे रहा था। “तुम हमारी यह छोटी-सी दावत तो खराब नहीं करोगे?”

मुझे नहीं लगता कि किसी के बारे में बुरी बातें करना सही है,” गैब्रियल ने कहा। “वचन मुझे बताता है कि किसी का उपहास करना सही नहीं है।”

अब यह याद रखना,” एल्डर पीटर्स ने पहले की तरह ही स्नेहपूर्ण स्वर में कहा, “तुम अपने से बड़े धर्मोपदेशकों से बात कर रहे हो।”

तो मुझे ऐसा लगता है,” उसने अपनी ही निर्भीकता पर चकित होते हुए कहा, “अगर मुझे आप लोगों को अपना उदाहरण मानकर चलना है तो आपको भी एक उदाहरण बनना चाहिए।”

अब तुम जानते हो,” किसी और ने हँसते हुए कहा, “तुम उस औरत को अपनी पत्नी बनाने तो नहीं जा रहे हो... तो फिर इतना उत्तेजित होने और हमारी यह छोटी-सी सभा खराब करने की कोई ज़रूरत नहीं। एल्डर पीटर्स का कोई बुरा मतलब नहीं था। अगर तुमने उससे भी बुरी बात कभी नहीं कही तो समझो कि तुम अभी से चुने हुए लोगों के साथ परमेश्वर के राज्य में पहुँच गए!”

इस पर मेज़ के चारों ओर हल्की-सी हँसी दौड़ गई। वे फिर खाने-पीने में लग गए, मानो बात समाप्त हो गई हो।

फिर भी गैब्रियल को लगा कि उसने उन्हें चौंका दिया था। उसने उनका असली रूप देख लिया था और वे उसकी पवित्रता के सामने कुछ लज्जित और हतप्रभ हो गए थे। अचानक उसे मसीह के वे शब्द समझ में आए, जो लिखे हैं, “बहुतों को बुलाया गया है, पर थोड़े ही चुने हुए हैं।” हाँ, और उसने मेज़ के चारों ओर देखा। वे फिर से प्रसन्नचित्त हो चुके थेलेकिन अब उसकी ओर कुछ अधिक सावधानी से भी देख रहे थे। उसने सोचा इन सब में से आखिर कौन पिता के दाहिने हाथ पर महिमा में बैठेगा?

और फिर वहीं बैठे-बैठे, एल्डर पीटर्स की उस शोरगुल भरी, लापरवाही से कही गई बात को याद करते हुए, वह बात उसके भीतर डेबरा के संबंध में मौजूद उन सभी धुँधले संदेहों और भय, उन झिझकों और कोमल भावनाओं को एक साथ झकझोर गई। अब उसे समझ में आया कि इन सबका मूल क्या था। उसे पूरा विश्वास था कि डेबरा के साथ उसका यह संबंध पहले से ही परमेश्वर द्वारा निर्धारित था। उसके मन में आया कि जैसे प्रभु ने उसे सँभालने और मजबूती देने के लिए डेबरा को उसके जीवन में भेजा था, वैसे ही प्रभु ने उसे भी डेबरा के पास भेजा था ताकि वह उसे ऊपर उठाए और उस अपमान से मुक्त करे, जो मनुष्यों की दृष्टि में उसके हिस्से में आया था। यह विचार एक ही क्षण में उसके भीतर एक दर्शन की तीव्रता के साथ पूरी तरह भर गया। उससे बेहतर स्त्री और कौन मिल सकती थी? वह सिय्योन की उन बनावटी, नखरेबाज़ बेटियों[15] जैसी नहीं थी! वह सड़कों पर अश्लील ढंग से मटकती हुई नहीं घूमती थी, न उसकी आँखें वासना से बोझिल और मुँह आधा खुला रहता था, न वह आधी रात को बाड़ों के नीचे किसी अश्वेत लड़के के साथ अश्लील संबंधों में लिप्त पाई जाती थी! नहीं, उनका वैवाहिक बिस्तर पवित्र होगा और उनके बच्चे विश्वासियों की वंश-परंपरा को आगे बढ़ाएँगे, एक राजवंश की तरह। और इस विचार से भीतर प्रज्वलित होकर, उसके भीतर एक और अधिक नीची लौ भी भड़क उठी, जिसने उसके भीतर सोए हुए भय को जगा दिया। तभी उसे याद आया। जब मेज़, धर्मोपदेशक, भोजन और उनकी बातचीत सब फिर उसकी चेतना पर छा गए... इस में संबंध पौलुस ने लिखा था, विवाह कर लेना वासना की आग में जलते रहने से अच्छा है।”

फिर भी उसने सोचा कि कुछ समय तक वह चुप ही रहेगा। वह इस विषय में प्रभु की इच्छा को और स्पष्ट रूप से जानने का प्रयास करेगा। उसे याद था कि डेबरा उससे कितनी बड़ी थी, आठ वर्ष। अपने जीवन में पहली बार उसने उस अपमान की कल्पना करने की कोशिश की, जिसे बहुत वर्षों पहले श्वेत पुरुषों ने डेबरा पर थोपा था। उसके सिर के ऊपर उठा दिए गए वस्त्र और उसकी गुप्त बात का श्वेत पुरुषों द्वारा जान लिया जाना। कितने पुरुष थे? उसने इसे कैसे सहा होगा? क्या वह चीखी होगी? उसने सोचा। हालाँकि इस विचार ने वास्तव में उसे परेशान नहीं किया क्योंकि यदि मसीह उसे बचाने के लिए क्रूस पर चढ़ सकते थे तो वह भी मसीह की और बड़ी महिमा के लिए उपहास सह सकता था... कि जब लोगों को पता चलेगा कि वह और डेबरा विवाह करने वाले हैं तो कितनी मुस्कराहटें फैलेंगी, कितनी गंदी अटकलें, जो अभी मुश्किल से सोई पड़ी हैं, रातोंरात योना की लौकी[16] की तरह फैलकर ऊपर उठ आएँगी। वह डेबरा, जो उनके प्रतिदिन के अपमान की जीवित प्रमाण और साक्षी रही थी और जो उनकी “पवित्र मूर्ख” बन गई थी। वह स्वयं, जो उनकी बेटियों को वश में न आने वाली वासना से भ्रष्ट करने वाला, उनकी स्त्रियों को छीनने वाला, उनका चलता-फिरता अँधेरे का राजकुमार रहा था! वह मुस्कराया। वह उन बुज़ुर्ग धर्मोपदेशकों के तृप्त और मोटे चेहरों तथा चबाते हुए जबड़ों को देख रहा था। सबके सब अपवित्र चरवाहे, अविश्वासी भंडारी। उसने प्रार्थना की कि वह कभी इतना मोटा या इतना कामुक न हो जाए बल्कि परमेश्वर उसके माध्यम से ऐसा महान कार्य करें कि आने वाली अनगिनत पीढ़ियों तक भी वह कार्य उनके अनंत प्रेम और दया का मधुर, गंभीर और महान प्रमाण बनकर गूँजता रहे। अब जो दिव्य उपस्थिति उसे चारों ओर से घेरे हुए थी, उससे वह काँप रहा था। उसके लिए अपनी जगह पर बैठे रहना भी कठिन हो रहा था। उसे लगा कि स्वर्ग से उस पर, उस चुने हुए व्यक्ति पर, प्रकाश बरस रहा है। उसे लगा कि मसीह ने भी मंदिर में कुछ ऐसा ही अनुभव किया होगा, जब वे अपने उन बुज़ुर्गों के सामने खड़े थे, जो पूरी तरह हतप्रभ रह गए थे। उसने अपनी आँखें ऊपर उठा दीं। उसे उनकी निगाहों या उनके गला साफ करने की आवाज़ों की कोई परवाह नहीं थी। मेज़ पर अचानक जो सन्नाटा छा गया था, उसकी भी उसे चिंता नहीं थी। वह मन-ही-मन सोच रहा था, हाँ। परमेश्वर अपने चमत्कारों को पूरा करने के लिए अनेक रहस्यमय तरीकों से कार्य करते हैं।”

सिस्टर डेबरा,” उस रात बहुत देर बाद, जब वह उसे उसके घर के दरवाज़े तक छोड़ने जा रहा था, उसने कहा, “प्रभु ने मेरे हृदय पर एक बात रखी है और मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे साथ उसके लिए प्रार्थना करो और उनसे प्रार्थना करो कि वे मुझे सही मार्ग दिखाएँ।”

वह सोच रहा था कि क्या वह समझ पा रही है कि उसके मन में क्या चल रहा है। उसके चेहरे पर केवल धैर्य था। उसने उसकी ओर मुड़कर कहा, मैं तो हर समय प्रार्थना करती हूँ। लेकिन अगर तुम चाहते हो तो इस सप्ताह मैं और भी अधिक मन लगाकर प्रार्थना करूँगी।”

इसी प्रार्थना के समय गैब्रियल ने एक सपना देखा।

बाद में वह कभी याद नहीं कर पाया कि सपना कैसे शुरू हुआ था, उसमें क्या हुआ था, वह किसके साथ था या उसका कोई भी दूसरा विवरण। वास्तव में ये दो सपने थेपहला दूसरे सपने की धुँधली, अस्पष्ट और नारकीय पूर्वछाया जैसा था। पहले सपने की उस भूमिका या प्रस्तावना में उसे केवल उसका वातावरण याद था। वही वातावरण जो उसके जागते जीवन के दिनों जैसा था। भारी, चारों ओर खतरे से भरा हुआ, और शैतान उसके कंधे पर सवार होकर उसे गिराने की कोशिश कर रहा था। उस रात जब वह सोने की कोशिश कर रहा था, शैतान ने उसके बिस्तर के पास दुष्ट आत्माओं को भेज दिया। वे पुराने मित्र, जिनके साथ कभी उसका उठना-बैठना थालेकिन अब वह उन्हें नहीं देखता थाशराब और जुए के वे दृश्य, जिनके बारे में उसने सोचा था कि वे फिर कभी उसे सताने के लिए वापस नहीं आएँगे और वे स्त्रियाँ, जिन्हें वह कभी जानता था। वे स्त्रियाँ इतनी वास्तविक थीं कि वह लगभग उन्हें छू सकता था। उसे फिर उनकी हँसी और उनकी आहें सुनाई दीं और फिर अपने हाथों के नीचे उनकी जाँघों और स्तनों का स्पर्श महसूस हुआ। वह आँखें बंद करके यीशु को पुकारता रहा। बार-बार, लगातार यीशु का नाम लेता रहा। लेकिन उसका पापमय शरीर तन गया, आग की तरह जलने लगा और वे स्त्रियाँ हँसती रहीं। वे उससे पूछने लगीं कि जब वे उसकी प्रतीक्षा कर रही हैं तो वह इस संकरे बिस्तर में अकेला क्यों पड़ा हैउन्होंने पूछा कि उसने अपने शरीर को पवित्रता के कवच में क्यों बाँध रखा है जबकि वे अपने बिस्तरों पर उसके लिए आहें भरती और करवटें बदलती हैं। वह भी आहें भरता और करवटें बदलता रहा। हर हरकत उसके लिए यातना थीचादर का हर स्पर्श एक अश्लील दुलार जैसा लगता था।  उसके मन में वह स्पर्श उस किसी भी दुलार से अधिक घृणित हो उठा था, जो उसे वास्तविक जीवन में कभी मिला था। उसने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं और “रक्त की दुहाई” देने लगा अर्थात मसीह के रक्त की शक्ति का आह्वान करके नरक की दुष्ट शक्तियों को दूर करने की प्रार्थना करने लगा। लेकिन वह हरकत भी उसके लिए किसी दूसरी शारीरिक हरकत जैसी ही लगने लगी। अंततः वह प्रार्थना करने के लिए घुटनों के बल गिर पड़ा। धीरे-धीरे वह बेचैन और अशांत नींद में चला गया। उसे लगा कि उसे पत्थरों से मारकर मृत्यु के घाट उतारा जाने वाला है। फिर वह युद्ध में थाफिर पानी में जहाज़ डूबने के बाद स्वयं को डूबता हुआ पाया और अचानक उसकी आँख खुल गई। उसे समझ में आ गया कि उसने अवश्य कोई सपना देखा होगा क्योंकि उसकी कमर और शरीर के निचले हिस्से पर उसका अपना सफेद वीर्य लगा हुआ था।

काँपते हुए वह फिर बिस्तर से उठा और स्वयं को धोया। वह एक चेतावनी थी और वह यह जानता था। उसे ऐसा लगा जैसे उसके सामने शैतान द्वारा खोदी गई एक गहरी खाई दिखाई दे रही हो। गहरी, शांत और उसकी प्रतीक्षा करती हुई। उसे उस कुत्ते की बात याद आई जो अपनी उल्टी के पास लौट आया था। उस मनुष्य की भी, जो शुद्ध किया गया था, फिर गिर पड़ा और जिसमें सात दुष्ट आत्माएँ आ बसी थीं और उस मनुष्य की अंतिम दशा उसकी पहली दशा से भी बदतर हो गई थी। अंततः, अपने ठंडे बिस्तर के पास घुटनों के बल बैठकर, भीतर का हृदय प्रार्थना के लिए लगभग बहुत अधिक बीमार और व्याकुल होते हुए भी, उसने ओनान के बारे में सोचा। उस ओनान[17] के बारे में जिसने अपने भाई का वंश आगे बढ़ाने के बजाय अपना वीर्य भूमि पर गिरा दिया था। अब्राहम के पुत्र, दाऊद के घराने से आने वाला वह व्यक्ति। उसने फिर यीशु का नाम पुकारा और दोबारा सो गया।

उसने स्वप्न देखा कि वह एक ठंडी, बहुत ऊँची जगह पर है, किसी पर्वत की तरह। वह इतनी ऊँचाई पर था कि धुंध और बादलों के बीच चल रहा था। लेकिन उसके सामने पर्वत का खाली, खड़ा हुआ ढलान ऊपर की ओर फैला हुआ था। एक आवाज़ ने कहा, “और ऊपर आओ।” वह चढ़ने लगा। कुछ दूर चढ़ने के बाद, चट्टान को पकड़े हुए उसने स्वयं को इस स्थिति में पाया कि उसके ऊपर केवल बादल थे और नीचे धुंध। वह जानता था कि उस धुंध की दीवार के पार अग्नि का साम्राज्य है। उसके पैर फिसलने लगेकंकड़ और पत्थर उसके पैरों के नीचे खनखनाने लगे। उसने काँपते हुए ऊपर देखामृत्यु के भय से आतंकित होकर वह चिल्लाया, “प्रभु, मैं इससे अधिक ऊपर नहीं आ सकता।” लेकिन कुछ क्षण बाद वही आवाज़ फिर सुनाई दी। शांत, दृढ़ और ऐसी जिसे नकारना असंभव था। “आओ, बेटे। और ऊपर आओ।” तब उसे समझ में आया कि यदि वह गिरकर मरना नहीं चाहता तो उसे उस आवाज़ की आज्ञा माननी ही होगी। वह फिर चढ़ने लगा और उसके पैर फिर फिसल गए। जब उसे लगा कि अब वह गिर पड़ेगा, तभी अचानक उसके सामने काँटेदार हरी पत्तियाँ उभर आईं। उसने उन पत्तियों को पकड़ लिया। उनके काँटों से उसका हाथ घायल हो गया। फिर वही आवाज़ आई, “और ऊपर आओ।” इस प्रकार गैब्रियल चढ़ता गया। हवा उसके कपड़ों को चीरती हुई निकल रही थीउसके पैरों से खून बहने लगा था और उसके हाथ भी लहूलुहान हो गए थे। फिर भी वह चढ़ता रहा। उसे लगा जैसे उसकी पीठ टूट रही है। उसके पैर सुन्न पड़ रहे थे और काँप रहे थे, उन पर उसका कोई नियंत्रण नहीं रह गया था। फिर भी उसके सामने केवल बादल थे और नीचे गरजती हुई धुंध। वह अपने इस स्वप्न में कितनी देर तक चढ़ता रहा, उसे पता नहीं था। फिर अचानक बादल अलग हो गए। उसे सूर्य का प्रकाश ऐसा महसूस हुआ जैसे महिमा का मुकुट उसके सिर पर रख दिया गया हो और वह एक शांत, सुखद मैदान में पहुँच गया।

वह चलने लगा। अब उसने लंबे, सफेद वस्त्र पहन रखे थे। उसे गीत सुनाई दिया, मैं घाटी में चला, वह कितनी सुंदर लगी, मैंने अपने प्रभु से पूछा, क्या यह सब मेरा है?” लेकिन वह जानता था कि यह सब उसी का था। एक आवाज़ ने कहा, “मेरे पीछे चलो।” वह आगे बढ़ा और फिर एक ऊँची जगह के किनारे जा पहुँचा। लेकिन अब वह स्थान स्नान किए हुए, आशीष पाए हुए और प्रचंड सूर्य-प्रकाश में महिमामंडित था। वह वहाँ ऐसे खड़ा था मानो स्वयं परमेश्वर हो। पूरा का पूरा सुनहरी आभा में नहाया हुआ और नीचे, बहुत नीचे, उस लंबे मार्ग को देख रहा था जिसे उसने तय किया था और उस पर्वत के खड़े ढलान को, जिस पर वह चढ़ा था। अब उसी पर्वत पर सफेद वस्त्र पहने, गीत गाते हुए चुने हुए लोग ऊपर आ रहे थे। आवाज़ ने कहा, “उन्हें मत छूनामेरी मुहर उन पर है।” गैब्रियल मुड़ा और मुँह के बल भूमि पर गिर पड़ा। फिर आवाज़ ने कहा, इसी प्रकार तेरी संतति भी होगी।” तभी उसकी आँख खुल गई। खिड़की पर सुबह हो चुकी थी। वह अपने बिस्तर पर लेटे-लेटे परमेश्वर को धन्यवाद देने लगा। उसने जो दिव्य दर्शन देखा था, उसके कारण उसके चेहरे पर आँसू बह रहे थे।

जब वह डेबरा के पास गया और उसने उसे बताया कि प्रभु ने उसे प्रेरित किया है कि वह डेबरा को अपनी पत्नी, अपनी पवित्र जीवन-संगिनी बनाने के लिए कहे तो डेबरा ने कुछ क्षण उसकी ओर देखा। उसके चेहरे पर ऐसा भाव था मानो वह बोलने में असमर्थ आतंक से भर गई हो। गैब्रियल ने उसके चेहरे पर ऐसा भाव पहले कभी नहीं देखा था। उसे जानने के बाद पहली बार उसने उसे छुआ। उसने अपने हाथ उसके कंधों पर रखे और सोचा कि कभी इन कंधों ने कितने कठोर और कोमलता-विहीन स्पर्श सहे होंगे और अब वह उसे सम्मान के स्थान पर उठाना चाहता था। उसने पूछा, “तुम डरी हुई तो नहीं हो, सिस्टर डेबरा? तुम्हें डरने की कोई बात तो नहीं है?”

तब उसने मुस्कराने की कोशिश कीलेकिन मुस्कराने के बजाय रोने लगी। एक ऐसी हरकत के साथ जिसमें हिंसक आवेग और झिझक दोनों थे, उसने अपना सिर उसके सीने पर झुका दिया।

नहीं,” उसने उसकी बाँहों में दबे हुए धीमे स्वर में कहा, “मैं डरी हुई नहीं हूँ।” लेकिन वह रोना बंद नहीं कर सकी।

गैब्रियल ने उसके खुरदरे, झुके हुए सिर पर हाथ फेरा। परमेश्वर तुम्हें आशीष दें, छोटी बच्ची,” उसने असहाय भाव से कहा। “परमेश्वर तुम्हें आशीष दें।”

.......

चर्च में छाया हुआ सन्नाटा तब टूटा, जब पियानो के पास घुटने टेककर बैठे ब्रदर एलिशा ने अचानक पुकार लगाई और प्रभु की शक्ति के वश में होकर पीछे की ओर गिर पड़े। तुरंत दो-तीन और लोगों ने भी पुकार लगाई और एक हवा-सी पूरे चर्च में बह गई। उस महान आत्मिक वर्षा की एक झलक, जिसका वे इंतज़ार कर रहे थे। इस पुकार और उसके बाद गूँजती पुकारों के साथ ‘टैरी सर्विस’ अपने पहले चरण से आगे बढ़ गई। अब तक वहाँ लगातार धीमी बुदबुदाहट थी, जिसे बीच-बीच में कराहें और कभी-कभार किसी की अकेली चीख तोड़ देती थी। अब वह आँसुओं और सिसकियों, ऊँची आवाज़ में पुकारने और गाने के उस चरण में पहुँच गई, जो उस स्त्री की प्रसव-पीड़ा जैसा था जो अपने बच्चे को जन्म देने वाली हो। इस आध्यात्मिक ‘खलिहान’[18] में वह बच्चा आत्मा थी, जो प्रकाश तक पहुँचने के लिए संघर्ष कर रही थी प्रसव-पीड़ा में पूरी चर्च-सभा थी, जो यीशु का नाम पुकारते हुए धकेलती, खींचती और संघर्ष करती रहती थी। जब ब्रदर एलिशा चीखकर पीछे गिर पड़े तो सिस्टर मैककैंडलेस उठीं और उनके ऊपर खड़ी होकर उनकी प्रार्थना में सहायता करने लगीं। आत्मा का पुनर्जन्म निरंतर आवश्यक था। हर घंटे नया जन्म ही शैतान के हाथ को रोक सकता था। सिस्टर प्राइस गाने लगीं, प्रभु, मैं उस पार जाना चाहती हूँ, मैं उस पार जाना चाहती हूँ। प्रभु, मुझे उस पार ले चलो, मुझे उस पार ले चलो।”

एक अकेली आवाज़, जिसमें धीरे-धीरे दूसरी आवाज़ें भी जुड़ गईंउनमें जॉन की काँपती हुई आवाज़ भी थी। गैब्रियल ने उस आवाज़ को पहचान लिया। एलिशा के चीखने पर वह एक क्षण में वर्तमान समय और स्थान में लौट आया। उसे डर लगा कि उसने जॉन की आवाज़ सुनी है कि जॉन ही प्रभु की शक्ति के नीचे अचंभित होकर पड़ा हुआ है। वह लगभग सिर उठाकर पीछे मुड़ने ही वाला था। लेकिन फिर उसे पता चला कि वह एलिशा था और उसका भय दूर हो गया।

अपनी इच्छा पूरी कर, प्रभु, अपनी इच्छा पूरी कर।”

उसके दोनों बेटों में से कोई भी आज रात यहाँ नहीं था। बल्कि कभी भी किसी ने इस आध्यात्मिक खलिहान में आकर इस तरह पुकार नहीं लगाई थी। एक बेटा लगभग चौदह वर्षों से मर चुका था। शिकागो की एक शराबखाने में, गले में घुसे चाकू से उसकी मृत्यु हुई थी। उसका जीवित बेटा, बच्चा रॉय, पहले ही सिर के बल विनाश की ओर जा रहा था और उसका हृदय कठोर हो चुका था। वह घर पर पड़ा था, अब चुप और अपने पिता के प्रति कटु, माथे पर पट्टी बाँधे हुए। वे यहाँ नहीं थे। उस स्थान पर, जहाँ वैध उत्तराधिकारी को खड़ा होना चाहिए था, केवल दासी का पुत्र खड़ा था।

मैं तेरी आज्ञा मानूँगा, प्रभु, मैं तेरी आज्ञा मानूँगा।”

गैब्रियल को लगा कि उसे उठकर एलिशा के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। जब कोई पुरुष इस तरह पुकारे तो उचित है कि दूसरा पुरुष उसका मध्यस्थ बनकर उसके लिए प्रार्थना करे। उसने सोचा कि यदि आज रात फर्श पर रोता हुआ उसका अपना बेटा होता तो वह कितनी प्रसन्नता से उठता और कितनी शक्ति के साथ उसके लिए प्रार्थना करता। लेकिन वह वहीं घुटनों के बल झुका रहा। गिरे हुए एलिशा की हर पुकार उसके भीतर चीरती हुई उतर रही थी। उसे अपने मृत बेटे की और अपने जीवित बेटे की पुकार सुनाई दे रही थी। एक की पुकार उस गड्ढे से आ रही थी जहाँ वह हमेशा के लिए, दया की किसी आशा से परे, पड़ा था और दूसरे की पुकार एक दिन उस समय उठेगी, जब दया का समय समाप्त हो चुका होगा।

अब गैब्रियल ने अपने उस साक्ष्य के बल पर, परमेश्वर द्वारा दिखाए गए अपनी कृपा के उन सभी संकेतों के सहारे अपने जीवित बेटे और उसे निगलने के लिए प्रतीक्षा कर रहे अँधेरे के बीच स्वयं को खड़ा करने का प्रयास किया। उसके जीवित बेटे ने उसे “हरामी” कहकर शाप दिया था और उसका हृदय परमेश्वर से बहुत दूर था। ऐसा नहीं हो सकता था कि आज रात रॉय के होंठों से निकला यह शाप केवल उसी पुराने शाप की प्रतिध्वनि हो, जो बहुत दूर से, बहुत लंबे समय से गूँजता चला आ रहा था। उस शाप की, जिसे उसके पहले बेटे की माँ ने उस शिशु को स्वयं से दूर धकेलते हुए दिया था और जिसके होंठों पर वह शाप था, जब वह स्वयं भी तुरंत मृत्यु की अनंतता में चली गई थी। उसका शाप पहले रॉयल को निगल गया थावह पाप में गर्भित हुआ था और पाप में ही नष्ट हो गया था। यह परमेश्वर की सज़ा थी और न्यायसंगत थी। लेकिन रॉय वैवाहिक बिस्तर में गर्भित हुआ था। उस बिस्तर में जिसे पौलुस ने पवित्र बताया था और राज्य का वादा उसी से किया गया था। यह संभव नहीं था कि जीवित बेटा अपने पिता के पापों के कारण शापित हो क्योंकि बहुत कराहने और अनेक वर्षों के बाद परमेश्वर ने स्वयं उसे एक संकेत दिया था, जिससे उसे यह जानने का विश्वास हुआ था कि उसे क्षमा कर दिया गया है। फिर भी अचानक उसके मन में आया कि यह जीवित बेटा। यह उतावला, जीवित रॉयल, शायद अपनी माँ के पाप के कारण शापित हो सकता है क्योंकि वह उसकी माँ के पाप का जीवित प्रमाण था। आज रात घुटनों के बल बैठा यह व्यक्ति, जो संतों के बीच मानो एक अनधिकृत घुसपैठिए की तरह था, उसकी माँ की आत्मा और परमेश्वर के बीच खड़ा था।

हाँ, उसकी पत्नी एलिज़ाबेथ कठोर हृदय वाली, हठी और झुकने में कठिन थी। वर्षों पहले जब प्रभु ने उसके हृदय में उसे एलिज़ाबेथ को और उसके उस अनाम बच्चे को, जो आज उसका नाम धारण करता था, ऊपर उठाने की इच्छा जगाई थी, तब वह ऐसी नहीं लगी थी। रॉय ठीक उसी के जैसा था। चुप, देखते रहने वाला और दुष्ट अभिमान से भरा हुआ। एक दिन उन्हें बाहर के अँधेरे में फेंक दिया जाएगा।

एक बार गैब्रियल ने एलिज़ाबेथ से पूछा था, तब उनकी शादी को काफी समय हो चुका था, रॉय छोटा बच्चा था और वह सारा के गर्भ से थी, कि क्या उसने सचमुच अपने पाप का पश्चात्ताप कर लिया है।

उसने उसकी ओर देखा और कहा था, “तुम यह बात पहले भी पूछ चुके हो। और मैंने तुम्हें बता दिया था, हाँ।”

लेकिन उसे उस पर विश्वास नहीं हुआ। उसने पूछा, तुम्हारा मतलब है कि तुम उसे फिर कभी नहीं करोगी? अगर तुम फिर उसी समय और उसी जगह लौट जाओ, जैसी तुम तब थीं तो क्या तुम उसे फिर से करोगी?”

उसने नीचे देखाफिर अधीर होकर दोबारा उसकी आँखों में देखा। अच्छा, अगर मैं वहाँ वापस होती, गैब्रियल और वही लड़की होती जो तब थी!…”

एक लंबा मौन छा गया। वह उसके उत्तर की प्रतीक्षा करती रही। फिर लगभग अनिच्छा से उसने पूछा, “और… क्या तुम उसे फिर जन्म लेने देतीं?”

उसने स्थिर स्वर में उत्तर दिया, “मुझे पता है, तुम मुझसे यह नहीं कहलवाना चाहते कि मुझे जॉनी को इस दुनिया में लाने का अफसोस है। है न?” जब उसने कोई उत्तर नहीं दिया तो वह बोली, “और सुनो, गैब्रियल। मैं तुम्हें कभी ऐसा करने नहीं दूँगी कि मुझे इसका अफसोस हो। न तुम, न कोई और, न इस दुनिया की कोई चीज़। हमारे दो बच्चे हैं, गैब्रियलजल्द ही हमारे तीन हो जाएँगे। मैं उनमें कोई भेद नहीं करूँगी और तुम भी नहीं करोगे।”

लेकिन एक कमजोर, अभिमानी स्त्री और किसी लापरवाह लड़के से पैदा हुए बेटे और उस बेटे में भला भेद कैसे न होता, जिसे परमेश्वर ने उसके लिए देने का वादा किया था, जो अपने पिता का नाम आनंदमय वंश-परंपरा में आगे बढ़ाता और अपने पिता के राज्य को स्थापित करने के लिए प्रभु के दूसरे आगमन के दिन तक काम करता रहता? क्योंकि परमेश्वर ने उससे बहुत वर्ष पहले यह वादा किया था और वह केवल इसी के लिए जीता आया था। उसने संसार और उसकी सुख-सुविधाओं को त्याग दिया था, यहाँ तक कि अपने जीवन की खुशियों को भीइन कड़वे वर्षों में वह केवल इसलिए ठहरा रहा था कि प्रभु के वादे को पूरा होते देख सके। उसने एस्तेर को मर जाने दिया था, रॉयल मर चुका था और डेबरा निःसंतान मर गई थी। फिर भी वह उस वादे को थामे रहा था। उसने सच्चे पश्चात्ताप के साथ परमेश्वर के सामने जीवन बिताया था और उस वादे की प्रतीक्षा की थी। अब वादे के पूरा होने का समय निश्चित ही निकट था। उसे केवल धैर्यपूर्वक अपनी आत्मा को थामे रखना था और प्रभु की प्रतीक्षा करनी थी।

उसका मन, एलिज़ाबेथ के प्रति कटुता से भरा हुआ होते हुए भी, फिर पीछे लौटकर एस्तेर के बारे में सोचने लगा, जो पहले रॉयल की माँ थी। उसने उसे देखा। आनंद और इच्छा की वे मूक, फीकी और चौंकाने वाली छायाएँ, जो अब भी उसके भीतर मंडरा रही थीं। एक दुबली, जीवंत, काली आँखों वाली लड़की के रूप में। उसके गालों की हड्डियों, उसके चलने-ढंग और उसके बालों में कुछ आदिवासी-सा था। वह उसे ऐसी दृष्टि से देखती थी जिसमें उपहास, स्नेह, इच्छा, अधीरता और तिरस्कार सब मिले हुए थे। उसने उसे उन अग्नि-जैसे रंगों के वस्त्रों में देखा, जिन्हें उसने वास्तव में बहुत कम पहना थालेकिन गैब्रियल के मन में वह हमेशा उन्हीं वस्त्रों में दिखाई देती थी। उसके मन में एस्तेर का संबंध आग से था। पतझड़ के अग्निमय पत्तों से, दूर की पहाड़ी के पीछे शाम को डूबते हुए अग्निमय सूर्य से और नरक की अनंत अग्नियों से।

वह गैब्रियल और डेबरा के विवाह के कुछ ही समय बाद शहर आई थी और उसी श्वेत परिवार में नौकरानी का काम करने लगी थी, जिसके यहाँ गैब्रियल काम करता था। इसलिए वह उसे हर समय देखता रहता था। काम खत्म होने पर युवक अक्सर पिछवाड़े के दरवाज़े पर उसका इंतज़ार करते रहते थे। गैब्रियल उसे संध्या के धुँधलके में किसी युवक की बाँह पर हाथ रखकर जाते हुए देखता था। उनकी आवाज़ें और हँसी उसके पास लौटकर आतीं और उसकी अपनी स्थिति का उपहास करती हुई प्रतीत होतीं। वह जानता था कि वह अपनी माँ और सौतेले पिता के साथ रहती थी। दो पापी लोग, जो शराब पीने, जुआ खेलने, रैगटाइम संगीत और ब्लूज़ में डूबे रहते थे और जो केवल क्रिसमस या ईस्टर के अवसर पर ही चर्च में दिखाई देते थे।

गैब्रियल को उस पर दया आने लगी। एक दिन जब उसे शाम को उपदेश देना था, उसने एस्तेर को चर्च आने का निमंत्रण दिया। यही पहली बार था जब एस्तेर ने सचमुच उसकी ओर देखा। उसने उसी क्षण इसे महसूस किया था और आने वाले कई दिनों और रातों तक उस दृष्टि को याद करता रहा।

क्या तुम सचमुच आज रात उपदेश देने वाले हो? तुम जैसे सुंदर आदमी?”

प्रभु की सहायता से,” उसने इतने गंभीर स्वर में कहा कि उसमें लगभग कठोरता आ गई। उसी समय उसके देखने और बोलने के ढंग से गैब्रियल के भीतर कुछ फिर से जाग उठा था, जिसे वह समझता था कि उसने हमेशा के लिए दबा दिया है।

अच्छा, मुझे तो बहुत खुशी होगी,” उसने कुछ देर बाद कहा। ऐसा लग रहा था जैसे उसे अपने उस उतावलेपन पर थोड़ी देर के लिए पछतावा हुआ हो, जिसके कारण उसने उसे “सुंदर” कह दिया था।

क्या तुम आज रात आने के लिए समय निकाल सकती हो?” वह अपने-आप को यह पूछने से रोक नहीं सका।

वह मुस्कराई। उसने उसकी बात को एक अप्रत्यक्ष प्रशंसा समझा था। अच्छा, मैं नहीं जानती, रेवरेंड। लेकिन कोशिश करूँगी।”

दिन समाप्त होने पर वह एक और युवक की बाँह पर हाथ रखकर चली गई। गैब्रियल को विश्वास नहीं था कि वह आएगी। और इस बात से वह इतना विचित्र रूप से उदास हो गया कि रात के खाने पर वह डेबरा से मुश्किल से बोल सका और दोनों पूरे रास्ते चर्च तक चुपचाप चलते रहे। डेबरा अपनी आदत के अनुसार आँख के कोने से उसे देखती रही। एक ऐसी मौन और कभी-कभी खीज पैदा करने वाली आदत। उसके लिए यह उसके पति के धार्मिक दायित्व के प्रति सम्मान जताने का तरीका था। अगर कभी गैब्रियल ने उससे इस बारे में पूछा होता तो वह कहती कि जब प्रभु ने उसके हृदय पर कोई बात रखी हो, तब वह उसे विचलित नहीं करना चाहती। आज रात तो वह उपदेश देने वाला था। इसलिए इसमें संदेह ही नहीं था कि प्रभु सामान्य से अधिक उसके हृदय में बोल रहे होंगे। अतः प्रभु के अभिषिक्त सेवक की जीवन-संगिनी और मानो, इस पवित्र मंदिर की देखभाल करने वाली होने के नाते, उसका कर्तव्य था कि वह चुप रहे। फिर भी, वास्तव में गैब्रियल उससे बात करना चाहता था। वह उससे बहुत-सी बातें पूछना चाहता था। उसकी आवाज़ सुनना चाहता था और जब वह अपने दिन, अपनी आशाओं, अपने संदेहों, अपने जीवन और अपने प्रेम के बारे में बताती, तब उसका चेहरा देखना चाहता था। लेकिन गैब्रियल और डेबरा कभी बातचीत नहीं करते थे। जिस आवाज़ को वह अपने मन में सुनता था और जिस चेहरे को वह इतने प्रेम और सावधानी से देखता था, वह डेबरा का नहीं, एस्तेर का था। फिर उसके भीतर वह अजीब-सी सिहरन उठी, जिसमें विनाश और आनंद दोनों का संकेत था। फिर उसने आशा की कि एस्तेर न आएकि ऐसा कुछ हो जाए जिससे वह उसे फिर कभी न देख सके।

लेकिन वह आई। वह देर से पहुँची। ठीक उस समय जब पादरी घंटे के वक्त के उपदेशक का परिचय सभा से कराने वाला था। वह अकेली नहीं आई थीअपनी माँ को भी साथ लाई थी। गैब्रियल कल्पना भी नहीं कर सकता था कि यह दृश्य कैसे संभव हुआ, न ही वह समझ सकता था कि वह उस शाम के अपने युवक से कैसे बच निकली थी। लेकिन वह बच निकली थी। वह यहाँ थी। उस समय उसने दूसरों के साथ शारीरिक सुख में लगे रहने के बजाय उसके मुख से सुसमाचार सुनना अधिक पसंद किया था। वह यहाँ थी और उसका हृदय आनंद से भर उठा। जैसे ही खुलते हुए दरवाज़े से वह दिखाई दी, उसके भीतर कुछ विस्फोट-सा हुआ। वह हल्की मुस्कान के साथ, आँखें नीची किए, सीधे सभा के पीछे की एक सीट की ओर चली गई। उसने गैब्रियल की ओर बिल्कुल नहीं देखा, फिर भी वह तुरंत जान गया कि उसने उसे देख लिया है। एक क्षण में उसने कल्पना कर ली कि उसके उपदेश के प्रभाव से एस्तेर वेदी के सामने घुटनों के बल पड़ी है। उसके बाद उसकी माँ और उसका जुआ खेलने वाला, ऊँची आवाज़ में बोलने वाला सौतेला पिता भी एस्तेर के कारण प्रभु की सेवा में आ गए हैं। उनके भीतर आते ही लोगों ने अपनी गर्दनें घुमाईं और चर्च में बहुत धीमी, लेकिन आश्चर्य और प्रसन्नता से भरी फुसफुसाहट फैल गई। ये पापी लोग थे, जो परमेश्वर का वचन सुनने आए थे।

सचमुच, उनके कपड़ों से ही उनके जीवन की पापपूर्णता दिखाई देती थी। एस्तेर ने नीली टोपी पहन रखी थी, जिस पर बहुत-से रिबन लगे थे। गहरे शराबी-लाल रंग की भारी पोशाक पहनी थी। उसकी माँ, जो भारी शरीर की और एस्तेर से भी अधिक साँवली थी, अपने छिदे हुए कानों में बड़े-बड़े सोने के झुमके पहने थी और उसके व्यक्तित्व में उन स्त्रियों जैसी कुछ बदनाम-सी, जल्दबाज़ी में तैयार होकर आने वाली छवि थी, जिन्हें गैब्रियल ने वेश्यागृहों में देखा था। वे पीछे बैठ गईं तनकर और असहज होकर, मानो पाप की बहनें हों, संतों की नीरस पवित्रता के सामने जीवित विद्रोह। डेबरा ने मुड़कर उनकी ओर देखा और उसी क्षण गैब्रियल ने, जैसे पहली बार देखा कि उसकी पत्नी कितनी काली और हड्डियों से उभरी हुई थी और कितनी पूरी तरह अनाकर्षक थी। डेबरा ने अपनी आँखों में चौकन्ने मौन के साथ उसकी ओर देखा। गैब्रियल ने महसूस किया कि बाइबल पकड़े हुए उसका हाथ पसीजने और काँपने लगा है। उसे अपने वैवाहिक बिस्तर की आनंदहीन कराहें याद आ गईं और उसे डेबरा से घृणा होने लगी।

तभी पादरी खड़ा हुआ। जब वह बोल रहा था, गैब्रियल ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसे लगा कि जो शब्द वह बोलने वाला था, वे उससे दूर उड़ गए हैंउसे लगा कि परमेश्वर की शक्ति उसके भीतर से निकल गई है। फिर पादरी की आवाज़ बंद हुई। गैब्रियल ने सन्नाटे में अपनी आँखें खोलीं और पाया कि सबकी निगाहें उसी पर हैं। वह उठ खड़ा हुआ और सभा की ओर मुख किया।

प्रभु में प्रिय भाइयो और बहनो,” उसने शुरू किया, लेकिन एस्तेर की आँखें उस पर टिकी थीं, उनमें वही अजीब, वही उपहास भरी चमक थी, “आइए, हम प्रार्थना के लिए अपने सिर झुकाएँ।” उसने अपनी आँखें बंद करके सिर झुका लिया।

बाद में उस उपदेश की उसकी स्मृति किसी तूफान की स्मृति जैसी थी। जैसे ही उसने सिर उठाकर फिर से सभा के चेहरों की ओर देखा, उसकी जिह्वा खुल गई और वह पवित्र आत्मा की शक्ति से भर गया। हाँ, उस रात प्रभु की शक्ति उस पर थी। उसने ऐसा उपदेश दिया जिसे आगे चलकर धार्मिक शिविरों और झोपड़ियों में याद किया गया और जिसने आने वाली एक पूरी पीढ़ी के भ्रमणशील धर्मोपदेशकों के लिए एक मानक स्थापित कर दिया। वर्षों बाद, जब एस्तेर, रॉयल और डेबरा मर चुके थे और गैब्रियल दक्षिण छोड़कर जा रहा था, तब भी लोग उस उपदेश और उस दुबले-पतले, मानो किसी आत्मिक शक्ति से वशीभूत युवक को याद करते थे जिसने वह उपदेश दिया था।

उसने अपने उपदेश का आधार शमूएल की दूसरी पुस्तक[19] के अठारहवें अध्याय से लिया। उस युवा अहीमास की कथा, जो युद्ध का समाचार राजा दाऊद तक पहुँचाने के लिए बहुत जल्दी दौड़ पड़ा था। दौड़ने से पहले योआब ने उससे पूछा था, हे मेरे बेटे, तू क्यों दौड़ेगा, जब तेरे पास कोई समाचार ही तैयार नहीं है?” जब अहीमास राजा दाऊद के पास पहुँचा, जो अपने उतावले बेटे अबशालोम के भाग्य को जानने के लिए व्याकुल था तो वह केवल इतना कह सका, मैंने एक बड़ा हंगामा देखा पर मैं नहीं जानता था कि वह क्या था।”

यह उन सभी लोगों की कहानी थी, जो प्रभु की सलाह की प्रतीक्षा करने में असफल रहे। जो अपने ही अहंकार में स्वयं को बुद्धिमान समझ बैठे और समाचार पूरी तरह पाए बिना ही आगे दौड़ पड़े। यह उन असंख्य चरवाहों की कहानी थी, जो अपने अहंकार में भूखी भेड़ों को चराने में असफल रहेउन अनेक माता-पिताओं की कहानी थी, जिन्होंने अपने बच्चों को रोटी के बजाय पत्थर दिया, जिन्होंने उन्हें ईश्वर का सत्य देने के बजाय इस संसार की चमक-दमक थमा दी। यह विश्वास नहीं बल्कि अविश्वास था। विनम्रता नहीं बल्कि घमंड था। ऐसे मनुष्य के हृदय में वही इच्छा काम कर रही थी, जिसने प्रभात के पुत्र को स्वर्ग से उठाकर नरक की गहराइयों में पटक दिया था। ईश्वर द्वारा निर्धारित समय को उलट देने की इच्छा और उस प्रभु से, जिसके हाथों में सारी शक्ति थी, ऐसी शक्ति छीन लेने की इच्छा जो मनुष्यों के लिए उचित नहीं थी। ओह, हाँ, उन्होंने यह सब देखा था। आज रात उसकी आवाज़ के नीचे बैठे प्रत्येक भाई और बहन ने इसे देखा था। उन्होंने देखा था कि ऐसी दुखद अपरिपक्वता कैसी तबाही लाती है! भूख से बिलखते, पिता-विहीन बच्चे, पाप से बीमार होकर नालियों में पड़ी लड़कियाँ, ठिठुरते खेतों में लहूलुहान पड़े युवक। हाँ, उनमें से कुछ ऐसे भी थे जो चिल्लाते थे। उन्होंने यह अपने घरों में, सड़क के नुक्कड़ों पर और स्वयं मंच से भी सुना था कि अब उन्हें और प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए कि वे उठें और उन शक्तिशाली लोगों को गिरा दें जिन्होंने उन्हें तुच्छ समझा, ठुकराया और उन पर थूका है। वह प्रतिशोध लें जिसे ईश्वर ने अपने लिए सुरक्षित रखा है। लेकिन खून, खून की पुकार करता है जैसे, हाबिल का खून[20] धरती से पुकार रहा था। यह व्यर्थ नहीं लिखा गया है, “जो विश्वास करता है, वह उतावली नहीं करेगा।” ओह, लेकिन कभी-कभी मार्ग कठिन और पथरीला होता है। क्या वे कभी-कभी सोचते हैं कि ईश्वर उन्हें भूल गया है? तब अपने घुटनों पर गिरो और धैर्य के लिए प्रार्थना करोअपने घुटनों पर गिरो और विश्वास के लिए प्रार्थना करोउस विजयकारी शक्ति के लिए प्रार्थना करो, जो उसके शीघ्र आने के दिन तुम्हें तैयार रखे ताकि तुम जीवन का मुकुट प्राप्त कर सको। क्योंकि ईश्वर भूलता नहीं। उसके मुख से निकला कोई भी वचन विफल नहीं हो सकता। इसलिए बेहतर है कि अय्यूब की तरह अपने नियत समय के पूरे होने तक प्रतीक्षा करो, जब तक हमारा परिवर्तन न आ जाए बजाय इसके कि ईश्वर के बोलने से पहले ही, बिना तैयारी के उठ खड़े हो। क्योंकि यदि हम उसके सामने विनम्रतापूर्वक प्रतीक्षा करें तो वह हमारी आत्माओं को आनंददायक शुभ समाचार सुनाएगायदि हम प्रतीक्षा करें तो हमारा परिवर्तन आएगा। वह भी एक क्षण में, पलक झपकते ही। एक दिन हम इस नश्वर, भ्रष्ट दशा से बदलकर सदा के लिए अविनाशी हो जाएँगे और बादलों के पार उसके साथ उठा लिए जाएँगे। और यही वह समाचार है जिसे अब हमें सभी राष्ट्रों तक पहुँचाना है। दाऊद का एक और पुत्र काठ पर टाँगा गया और जो उस महान कोलाहल का अर्थ नहीं जानता, वह सदा के लिए नरक में दण्ड पाएगा! भाई, बहन, तुम दौड़ सकते हो। लेकिन वह दिन आने वाला है जब राजा पूछेगा, “तुम कौन-सा समाचार लेकर आए हो?” उस महान दिन तुम क्या उत्तर दोगे, यदि तुम उसके पुत्र की मृत्यु का अर्थ ही नहीं जानते?

क्या आज रात यहाँ कोई ऐसी आत्मा है”, उसकी आँखों में आँसू थे और वह अपनी बाँहें फैलाकर उनके ऊपर खड़ा था। “जो उस कोलाहल का अर्थ नहीं जानती? क्या आज रात यहाँ कोई ऐसी आत्मा है जो यीशु से बात करना चाहती है? जो प्रभु के सामने तब तक प्रतीक्षा करना चाहती है, आमेनजब तक वह स्वयं न बोले? जब तक वह तुम्हारी आत्मा में, आमेनउद्धार का आनंददायक शुभ समाचार न गूँजा दे? ओ भाइयो और बहनो” ... और फिर भी वह नहीं उठीवह केवल दूर से उसे देखती रही। “समय समाप्त होता जा रहा है। एक दिन वह राष्ट्रों का न्याय करने, अपने बच्चों को, हालेलुयाह... उनके विश्राम में ले जाने के लिए लौटेगा। उन्होंने मुझे बताया है, प्रभु की जय हो कि दो लोग खेत में काम कर रहे होंगे, उनमें से एक उठा लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। दो लोग, आमेन...  बिस्तर पर लेटे होंगे, उनमें से एक उठा लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। वह प्रियजनों, रात में चोर की तरह आएगा और कोई मनुष्य उसके आने का समय नहीं जानता। तब ‘प्रभु, दया कर’ पुकारने में बहुत देर हो चुकी होगी। अभी स्वयं को तैयार करने का समय है, अभी, आमेन... आज रात, उसकी वेदी के सामने। क्या कोई आज रात आगे आएगा? क्या कोई शैतान को ‘नहीं’ कहेगा और अपना जीवन प्रभु को सौंप देगा?”

लेकिन वह नहीं उठी। वह केवल उसे देखती रही और फिर अपने चारों ओर देखने लगी, उसके चेहरे पर चमकता हुआ उत्सुक आनंद था, मानो वह किसी रंगमंच पर बैठी हो और यह देखने की प्रतीक्षा कर रही हो कि अब कौन-सा असंभव-सा मनोरंजक दृश्य उसके सामने प्रस्तुत होगा। वह किसी तरह जान गया कि वह कभी नहीं उठेगी और उस लंबे गलियारे से चलकर दया के आसन तक नहीं आएगी। और इस बात ने एक क्षण के लिए उसके भीतर पवित्र क्रोध भर दिया कि वह इतनी निर्लज्जता से धर्मियों की सभा में खड़ी थी और फिर भी अपना सिर झुकाने से इनकार कर रही थी।

उसने “आमेन” कहा, उन्हें आशीर्वाद दिया और मुड़ गया। तुरंत ही मंडली गाने लगी। अब फिर उसे लगा कि उसकी सारी शक्ति चूस ली गई है और वह बीमार-सा महसूस कर रहा था। उसका पूरा शरीर पसीने से तर था और उसे अपने ही शरीर की गंध आ रही थी। मंडली के आगे खड़ी डेबरा गीत गा रही थी और अपनी खंजरी बजा रही थी। वह उसे देख रही थी। अचानक उसे लगा कि वह एक असहाय बच्चे की तरह है। वह चाहता था कि हमेशा के लिए कहीं छिप जाए और रोना कभी बंद न करे।

एस्तेर और उसकी माँ गीत के दौरान ही चली गईं अर्थात वे केवल उसका उपदेश सुनने आई थीं। वह कल्पना नहीं कर पा रहा था कि अब वे क्या कह रही होंगी या क्या सोच रही होंगी। वह अगले दिन के बारे में सोचने लगा, जब उसे फिर एस्तेर को देखना पड़ेगा।

क्या वह वही छोटी लड़की नहीं है जो तुम्हारे साथ उसी जगह काम करती है?” घर लौटते समय डेबरा ने उससे पूछा।

हाँ,” उसने कहा। अब उसका बात करने का मन नहीं था। वह घर पहुँचकर अपने पसीने से भीगे कपड़े उतारना और सो जाना चाहता था।

वह बहुत सुंदर है,” डेबरा ने कहा। “मैंने उसे पहले कभी चर्च में नहीं देखा।”

उसने कोई उत्तर नहीं दिया।

क्या तुमने ही उसे आज रात आने के लिए बुलाया था?” थोड़ी देर बाद उसने पूछा।

हाँ,” उसने कहा। “मैंने सोचा था, ईश्वर का वचन उसका कुछ बिगाड़ तो नहीं सकता।”

डेबरा हँसी। “ऐसा तो नहीं लगता, है न? वह जैसे ठंडी और पाप में डूबी हुई आई थी, वैसे ही चली गई। वह और उसकी माँ भी। और तुमने कितना बढ़िया उपदेश दिया था। लगता है, उसके मन में प्रभु के लिए ज़रा भी जगह नहीं है।”

लोगों के पास प्रभु के लिए समय नहीं है,” उसने कहा, “एक दिन ऐसा आएगा जब प्रभु के पास उनके लिए समय नहीं होगा।”

घर पहुँचने पर उसने उसके लिए गरम चाय बनाने की पेशकश कीलेकिन उसने मना कर दिया। वह चुपचाप कपड़े उतारने लगा और उसने उसकी इस चुप्पी का भी सम्मान किया। फिर वह बिस्तर पर जा लेटा। कुछ देर बाद वह भी उसके पास लेट गई, मानो शाम को नीचे रख दिया गया कोई बोझ हो, जिसे सुबह फिर उठा लेना हो।

अगली सुबह, जब वह लकड़ी के ढेर के लिए लकड़ी काट रहा था, एस्तेर आँगन में आई और बोली, “सुप्रभात, रेवरेन्ड। मैंने तो आज तुम्हें देखने की उम्मीद नहीं की थी। मैंने सोचा था, उस उपदेश के बाद तुम बिल्कुल चूर हो गए होगे। क्या तुम हमेशा इतनी ताकत लगाकर उपदेश देते हो?”

उसने क्षणभर कुल्हाड़ी हवा में रोक लीफिर दोबारा घुमाकर लकड़ी पर दे मारी। उसने कहा, “मैं उसी तरह उपदेश देता हूँ, जैसे प्रभु मुझे मार्ग दिखाते हैं, बहन।”

उसके स्वर की कठोरता देखकर वह थोड़ा पीछे हट गई। “अच्छा,” उसने बदले हुए स्वर में कहा, “वह बहुत बढ़िया उपदेश था। मुझे और माँ को बहुत खुशी हुई कि हम आए।”

उसने कुल्हाड़ी लकड़ी में गड़ी रहने दी क्योंकि उससे लकड़ी के टुकड़े उड़ रहे थे और उसे डर था कि कहीं कोई टुकड़ा उसे लग न जाए। “तुम और तुम्हारी माँ... तुम लोग बहुत कम चर्च आते हो?”

प्रभु, रेवरेन्ड,” उसने कराहते हुए कहा, “लगता है हमारे पास बस समय ही नहीं है। माँ पूरे हफ्ते इतनी मेहनत करती है कि रविवार को बस बिस्तर पर पड़ी रहना चाहती है। और वह चाहती है कि मैं भी,” उसने थोड़ी देर रुककर जल्दी से जोड़ा, “उसके साथ रहूँ।”

तब उसने सीधे उसकी ओर देखा। “क्या तुम सचमुच यह कहना चाहती हो बहन कि तुम्हारे पास प्रभु के लिए समय नहीं है? बिल्कुल भी समय नहीं?”

रेवरेन्ड,” उसने उसे एक ऐसे बच्चे की साहसपूर्ण चुनौती से देखते हुए कहा, जिसे धमकाया गया हो, “मैं अपनी पूरी कोशिश करती हूँ। सचमुच करती हूँ। हर किसी के भीतर एक जैसा आत्मिक भाव होना ज़रूरी तो नहीं है।”

वह कुछ देर हँसा। “तुम्हारे भीतर एक ही आत्मा होनी चाहिए और वह है प्रभु की आत्मा।”

अच्छा,” उसने कहा, “मेरे ख्याल से वह आत्मा हर किसी के भीतर एक ही तरह से काम करे, यह ज़रूरी नहीं।”

फिर दोनों चुप हो गए। दोनों को बिल्कुल स्पष्ट रूप से महसूस हो रहा था कि वे ऐसी स्थिति में पहुँच गए हैं जहाँ आगे कोई रास्ता नहीं था। कुछ क्षण बाद उसने फिर कुल्हाड़ी उठा ली। “अच्छा, बहन, तुम जाओ। मैं तुम्हारे लिए प्रार्थना कर रहा हूँ।”

तब उसके चेहरे पर कुछ हलचल हुई। वह एक क्षण और खड़ी रहकर उसे देखती रही। उसके चेहरे पर क्रोध और मनोरंजन का मिला-जुला भाव थाइस भाव ने उसे फ्लोरेंस के चेहरे की वह अभिव्यक्ति याद दिला दी, जिसे वह अक्सर देखता था। और यह वही भाव था, जो उस बहुत दूर घटे, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण रविवार के भोज में उन बुज़ुर्ग पादरियों के चेहरों पर भी दिखाई दिया था। जब वह इस तरह उसे घूर रही थी, तब वह इतना क्रोधित था कि स्वयं को बोलने के लिए सुरक्षित नहीं समझ रहा था। फिर उसने कंधे उचकाए। इतना सहज और उदासीन इशारा, जैसा उसने उसके चेहरे पर पहले कभी नहीं देखा था और मुस्कराई। मैं आपकी बहुत आभारी हूँ, रेवरेन्ड,” उसने कहा। फिर वह घर के भीतर चली गई।

ठिठुरती हुई उस सुबह आँगन में यह पहली बार था जब उन दोनों के बीच बातचीत हुई। उस सुबह की किसी भी बात से उसे आने वाली घटना का कोई संकेत नहीं मिला था। वह उससे इसलिए खिन्न हुआ था क्योंकि उसके पापों के प्रति उसमें इतनी निर्लज्जता थी। बस यही बात थी। उसने उसकी आत्मा के लिए प्रार्थना की, जो एक दिन मसीह के न्यायासन के सामने नग्न और निरुत्तर खड़ी होगी। बाद में उसने उसे बताया कि उसने उसका पीछा किया था, कि उसकी आँखों ने उसे एक क्षण के लिए भी चैन नहीं लेने दिया था।

उन सुबहों में मुझे देखने वाला कोई रेवरेन्ड नहीं था,” उसने कहा था। “तुम मुझे बिल्कुल एक मर्द की तरह देखते थे. ऐसे मर्द की तरह, जिसने कभी पवित्र आत्मा का नाम तक नहीं सुना हो।” लेकिन उसका विश्वास था कि प्रभु ने उसे एस्तेर को एक बोझ की तरह उसके हृदय पर रखने के लिए सौंपा है। वह उसे अपने हृदय में लिए फिरता रहाउसके लिए प्रार्थना करता और उसे समझाता-बुझाता रहा, जब तक समय रहते उसकी आत्मा को ईश्वर की ओर लाया जा सके।

लेकिन वह ईश्वर के बारे में नहीं सोच रही थी। यद्यपि वह उसपर अपने मन में उसके प्रति वासना रखने का आरोप लगाती थी, फिर भी जब वह उसे देखती थी तो वह ईश्वर के सेवक को नहीं बल्कि एक “खूबसूरत आदमी” को देखने पर ही अड़ी रहती थी। उसकी ज़बान पर उसके धार्मिक दायित्व से जुड़ा यही संबोधन भी अनादर का सूचक बन गया था।

यह सब एक ऐसी शाम से शुरू हुआ, जब उसे उपदेश देना था और वे दोनों घर में अकेले थे। घर के लोग तीन दिनों के लिए रिश्तेदारों से मिलने चले गए थे। रात का खाना खाने के बाद गैब्रियल उन्हें रेलवे स्टेशन तक छोड़ आया था और एस्तेर रसोई समेट रही थी। जब वह घर को बंद करने के लिए वापस आया तो उसने एस्तेर को बरामदे की सीढ़ियों पर उसका इंतज़ार करते पाया।

मैंने सोचा कि आपके लौटने तक चले जाना ठीक नहीं होगा,” उसने कहा, “मेरे पास इस घर को बंद करने की चाबियाँ नहीं हैं और गोरे लोग बड़े अजीब होते हैं। अगर कुछ गायब हुआ तो मैं नहीं चाहती कि वे मुझे दोष दें।”

गैब्रियल को तुरंत समझ में आ गया कि उसने शराब पी रखी थी। वह नशे में धुत्त नहीं थीलेकिन उसकी साँस से व्हिस्की की गंध आ रही थी। न जाने क्यों, इससे उसके भीतर एक विचित्र उत्तेजना जाग उठी।

यह तुम्हारी बड़ी समझदारी थी, बहन,” उसने कहा। वह उसे घूरकर देख रहा था ताकि उसे पता चल जाए कि वह समझ गया है कि उसने शराब पी रखी है। उसने भी उसकी निगाह का सामना एक शांत, निर्भीक मुस्कान से किया। ऐसी मुस्कान, जिसमें भोलेपन का उपहास था और उसके चेहरे पर स्त्री की आदिम चतुराई झलक रही थी।

वह उसके पास से होकर घर के भीतर जाने लगा। फिर, बिना सोचे और उसकी ओर देखे बिना, उसने कहा, “अगर तुम्हारा इंतज़ार करने वाला कोई नहीं है तो मैं तुम्हें घर की राह में कुछ दूर तक छोड़ दूँगा।”

नहीं,” उसने कहा, “आज शाम मेरा इंतज़ार करने वाला कोई नहीं है, रेवरेंड। आपका बहुत धन्यवाद।”

प्रस्ताव करते ही उसे पछतावा होने लगा। उसे पूरा विश्वास था कि वह किसी न किसी प्रेम-मिलन के लिए भागने वाली हैवह केवल इस बात की पुष्टि करना चाहता था। लेकिन अब जब वे दोनों साथ-साथ घर में दाखिल हुए तो उसे अचानक उसकी युवावस्था और जीवंत उपस्थिति तथा उसकी भटकी हुई दशा का तीव्र एहसास हुआउसी समय घर का सूनापन और खामोशी उसे चेतावनी देने लगे कि वह खतरे के साथ अकेला है।

तुम रसोई में बैठो,” उसने कहा। “मैं जितनी जल्दी हो सके, सब कर देता हूँ।”

लेकिन उसके अपने कानों को ही उसकी आवाज़ कठोर लगी और वह उसकी आँखों का सामना नहीं कर पा रहा था। वह मेज़ पर बैठकर मुस्कराती हुई उसका इंतज़ार करने लगी। उसने खिड़कियों के पट बंद करने और दरवाज़ों पर ताले लगाने का काम जितनी जल्दी हो सकता था, उतनी जल्दी करने की कोशिश की। लेकिन उसकी उँगलियाँ अकड़ी हुई और फिसलन-भरी लग रही थीं। उसका दिल उसके मुँह में आ गया था। तभी उसके मन में आया कि वह इस घर से बाहर जाने का हर रास्ता बंद कर रहा है। सिवाय उस रसोई के रास्ते के, जहाँ एस्तेर बैठी थी।

जब वह फिर रसोई में पहुँचा तो वह अपनी जगह से हट चुकी थी और अब दरवाज़े पर खड़ी बाहर देख रही थी, हाथ में एक गिलास था। उसे यह समझने में एक क्षण लगा कि उसने मालिक की व्हिस्की में से अपने लिए फिर कुछ निकाल लिया था।

उसके कदमों की आहट पर वह मुड़ी। गैब्रियल उसे और उसके हाथ में पकड़े गिलास को क्रोध और भय से घूरने लगा।

मैंने सोचा,” उसने लगभग बिना किसी झिझक के कहा, “जब तक मैं आपका इंतज़ार कर रही हूँ, तब तक थोड़ा-सा पी लूँ। लेकिन मैंने नहीं सोचा था कि आप मुझे ऐसा करते पकड़ लेंगे, रेवरेंड।”

उसने अपनी बची हुई शराब पी ली और गिलास धोने के लिए सिंक की ओर बढ़ गई। शराब निगलते समय उसने बहुत शालीनता से हल्की-सी खाँसी की। गैब्रियल निश्चित नहीं कर सका कि वह खाँसी सचमुच आई थी या वह उसका मज़ाक उड़ा रही थी।

मेरा खयाल है,” उसने द्वेषपूर्वक कहा, “तुमने अपने सारे दिन शैतान की सेवा में बिताने का फैसला कर लिया है।”

मैंने यह तय कर लिया है,” उसने उत्तर दिया, “कि जब तक जी सकती हूँ, जितना हो सके जी लूँ। अगर यह पाप है, तो ठीक है, मैं नरक में चली जाऊँगी और उसकी सज़ा भुगत लूँगी। लेकिन आप चिंता मत कीजिए, रेवरेंड। इससे आपकी आत्मा को कोई नुकसान नहीं होगा।”

वह आगे बढ़ा और उसके पास जाकर खड़ा हो गया, क्रोध से भरा हुआ।

लड़की,” उसने कहा, “क्या तुम्हें ईश्वर पर विश्वास नहीं है? ईश्वर झूठ नहीं बोलता और वह साफ़-साफ़ कहता है जैसे, मैं तुमसे बात कर रहा हूँ कि ‘जो प्राणी पाप करता है, वह मरेगा।’”

उसने आह भरी। “रेवरेंड, मुझे तो लगता है कि आपको हर समय इस बेचारी छोटी-सी एस्तेर को पीटते-पीटते उसे ऐसी चीज़ बनाने की कोशिश करते-करते, जो वह है ही नहीं, थक जाना चाहिए। मुझे अपने भीतर ऐसा कुछ महसूस ही नहीं होता,” उसने कहा और एक हाथ अपनी छाती पर रख दिया। “अब आप क्या करेंगे? क्या आपको मालूम नहीं कि मैं अब बड़ी हो चुकी औरत हूँ और मैं बदलने वाली नहीं हूँ?”

उसका रो पड़ने का मन हुआ। वह आगे बढ़कर उसे थाम लेना चाहता था, उसे उस विनाश से बचा लेना चाहता था जिसकी ओर वह इतनी उत्कटता से बढ़ रही थी। उसे अपनी बाँहों में छिपा लेना चाहता था, जब तक कि ईश्वर का क्रोध टल न जाए। लेकिन उसी समय उसकी नाक में फिर उसकी व्हिस्की से भरी साँस की गंध आई और उसके नीचे से, बहुत हल्की और अंतरंग, उसके शरीर की गंध भी। उसे ऐसा लगने लगा जैसे वह किसी दुःस्वप्न में फँसा हुआ आदमी हो, जो सामने आते विनाश के रास्ते में खड़ा है और जिसे जल्दी से हट जाना चाहिए। लेकिन वह हट नहीं सकता। उसके मन में बार-बार “यीशु, यीशु, यीशु” की ध्वनि घंटी की तरह गूँजती रही और वह उसकी साँस, उसकी चौड़ी, क्रोधित और उपहास करती आँखों से विचलित होकर उसके और निकट बढ़ता गया।

तुम अच्छी तरह जानती हो,” उसने काँपते हुए, क्रोध से भरी धीमी आवाज़ में कहा, “तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम्हारे पीछे क्यों पड़ा रहता हूँ। मैं इस तरह तुम्हारे पीछे क्यों पड़ा रहता हूँ?”

नहीं, मैं नहीं जानती,” उसने उत्तर दिया। उसने सिर को हल्का-सा हिलाते हुए उसकी तीव्रता पर विश्वास करने से इनकार कर दिया। “मैं सचमुच नहीं जानती कि आप एस्तेर को उसकी थोड़ी-सी व्हिस्की और उसकी अपनी छोटी-छोटी आदतों के साथ क्यों नहीं रहने देते, क्यों हर समय उसे दुखी करने की कोशिश करते रहते हैं।”

उसने झुँझलाहट से आह भरी और महसूस किया कि उसका शरीर काँपने लगा है। “मैं बस यह नहीं चाहता कि तुम बर्बादी की राह पर चली जाओ, लड़की। मैं नहीं चाहता कि किसी अच्छी-सी सुबह तुम अपनी सारी की हुई पापपूर्ण ज़िंदगी पर पछताती हुई जागो, बूढ़ी, बिल्कुल अकेली और ऐसी कि कोई तुम्हारा सम्मान करने वाला भी न हो।”

लेकिन वह अपने ही शब्दों को सुन रहा था और उसे उन पर शर्म आने लगी। वह चाहता था कि यह बातचीत समाप्त हो और वह इस घर से निकल जाए। बस एक क्षण और, फिर वे चले जाएँगे और यह दुःस्वप्न समाप्त हो जाएगा।

रेवरेंड,” उसने कहा, “मैंने ऐसा कुछ नहीं किया, जिस पर मुझे शर्म हो और आशा करती हूँ कि जीवन में कभी ऐसा कुछ नहीं करूँगी, जिस पर मुझे शर्म आए।”

रेवरेंड” शब्द सुनते ही उसका मन हुआ कि वह उसे मार दे। इसके बजाय उसने हाथ बढ़ाकर उसके दोनों हाथ अपने हाथों में ले लिए। अब वे एक-दूसरे की आँखों में सीधे देख रहे थे। उसकी आँखों में आश्चर्य था और सावधानी से छिपी हुई विजय की चमक भी। उसे एहसास हुआ कि उनके शरीर लगभग एक-दूसरे को छू रहे थे और उसे पीछे हट जाना चाहिए। लेकिन वह नहीं हटा। वह हट ही नहीं सका।

लेकिन इसमें मेरी क्या गलती,” उसने कुछ देर बाद द्वेषपूर्ण छेड़ने वाले अंदाज़ में कहा, “अगर आपने ऐसे काम किए हैं, जिन पर आपको शर्म आती है, रेवरेंड?”

वह उसके हाथों को ऐसे पकड़े रहा, जैसे वह समुद्र के बीच फँसा हो और उसके हाथ वह जीवन-रेखा हों, जो उसे किनारे तक खींच ले जाएगी। यीशु, यीशु, यीशु,” उसने प्रार्थना की, “ओह, यीशु, यीशु। मुझे दृढ़ खड़े रहने की शक्ति दे।” उसे लगा कि वह उसके हाथों से स्वयं को पीछे खींच रहा है। लेकिन वास्तव में वह उसे अपनी ओर खींच रहा था। अब उसने उसकी आँखों में वह भाव देखा, जो उसने बहुत दिनों और रातों से नहीं देखा था। वह भाव जो कभी डेबरा की आँखों में नहीं था।

हाँ, तुम जानती हो,” उसने कहा, “तुम जानती हो कि मैं हर समय तुम्हारी चिंता क्यों करता रहता हूँ... तुम्हें देखकर मैं हर समय दुखी क्यों रहता हूँ?”

लेकिन आपने मुझे कभी यह सब बताया ही नहीं,” उसने कहा।

उसका एक हाथ उसकी कमर तक गया और वहीं ठहर गया। उसके स्तनों के सिरे उसके कोट से छू गएजैसे तेज़ाब भीतर तक जल रहा हो और उसका गला जकड़ रहा हो। अब बहुत देर होने वाली थी और वह चाहता था कि देर हो ही जाए। उसकी वह उन्मत्त कामना नदी की तरह उठी, उमड़ी और उसे अपने साथ बहा ले चली। मानो वह बहुत पहले डूब चुका कोई शव हो।

तुम जानती हो,” उसने फुसफुसाकर कहा और उसके स्तनों को छुआ, फिर अपना चेहरा उसकी गर्दन में छिपा लिया।

इस तरह वह गिर गया, अपने धर्म-परिवर्तन के बाद पहली बार और अपने जीवन में आखिरी बार। गिर गया। वह और एस्तेर गोरे लोगों की रसोई में, जलती हुई रोशनी के नीचे, आधे खुले दरवाज़े के पास, सिंक के बगल में एक-दूसरे से लिपटे और तपते हुए। सचमुच गिर गया। अब समय का कोई अस्तित्व नहीं था और पाप, मृत्यु, नरक और न्याय, सब मिट गए थे। केवल एस्तेर थी, जिसके छोटे-से शरीर में समस्त रहस्य और समस्त वासना समाई हुई थी और जो उसकी हर आवश्यकता का उत्तर थी। तेज़ी से गुर्राता हुआ बीतता समय उसे उनके पहले मिलन की अनाड़ीपन, पसीने और गंदगी को भुला चुका था। वह भूल चुका था कि उनके हाथ कैसे काँप रहे थे जब उसने वहीं खड़े-खड़े उसके कपड़े उतारे थे। कैसे अंततः उसका कपड़ा उसके पैरों के चारों ओर फंदे की तरह गिर पड़ा था। कैसे उसके हाथों ने उसके अंतःवस्त्रों को खींच-फाड़ दिया था ताकि उसका नग्न, जीवंत शरीर उसके हाथों के स्पर्श में आ सके। कैसे उसने विरोध करते हुए कहा था, “यहाँ नहीं, यहाँ नहीं।” कैसे उसके मन के किसी दबे हुए हिस्से में खुले दरवाज़े, उस उपदेश, जिसे उसे देना था, अपने जीवन और डेबरा की चिंता बनी हुई थीकैसे मेज़ उनके रास्ते में आ रही थीकैसे उसका कॉलर, जब तक एस्तेर की उँगलियों ने उसे ढीला नहीं किया, उसका गला घोंटने जैसा लग रहा था और कैसे अंततः वे दोनों फर्श पर जा गिरे थे। पसीने से तर, कराहते हुए और एक-दूसरे में बँधे हुएसभी लोगों से, स्वर्गीय और मानवीय हर सहायता से अलग-थलग। केवल वे ही एक-दूसरे की सहायता कर सकते थे। दुनिया में वे दोनों अकेले थे।

क्या उसी रात उसके बेटे रॉयल की गर्भधारणा हुई थी? या अगली रात? या उसके बाद वाली रात? यह केवल नौ दिनों तक चला था। फिर उसे होश आया और नौ दिनों के बाद ईश्वर ने उसे यह कहने की शक्ति दी कि यह सब अब नहीं हो सकता।

उसने उसके निर्णय को उसी सहजता से, लगभग उसी मनोरंजन-भरे भाव से स्वीकार किया, जिस भाव से उसने उसके पतन को स्वीकार किया था। उन नौ दिनों के दौरान उसने एस्तेर के बारे में एक बात समझी थी। वह उसके भय और कंपकंपी को कल्पनाशील और बचकाना समझती थी। जीवन को जितना सरल होना चाहिए, उससे अधिक जटिल बनाने का एक तरीका। वह जीवन को इस तरह नहीं देखती थीवह चाहती थी कि जीवन सरल हो। वह समझ गया था कि उसे उस पर दया आती थी क्योंकि वह हमेशा चिंतित रहता था। कभी-कभी, जब वे साथ होते, वह उसे यह बताने की कोशिश करता कि वह क्या महसूस करता है कि जिस पाप को वे कर रहे हैं, उसके लिए ईश्वर उन्हें दंड देगा। लेकिन वह सुनना नहीं चाहती थी। वह कहती, “अब आप प्रवचन देने वाले मंच पर नहीं हैं। आप यहाँ मेरे साथ हैं। एक रेवरेंड को भी कभी-कभी अपने कपड़े उतारकर एक सामान्य आदमी की तरह व्यवहार करने का अधिकार है।” जब उसने उससे कहा कि अब वह उससे दोबारा नहीं मिलेगा तो वह नाराज़ हुईलेकिन उसने बहस नहीं की। उसकी आँखें उसे बता रही थीं कि वह उसे मूर्ख समझती हैलेकिन, चाहे वह उससे कितनी ही गहराई से प्रेम करती होती, उसके लिए उसके निर्णय पर बहस करना अपने स्तर से गिरना होता। उसकी सहजता का एक बड़ा हिस्सा इसी बात में था कि जो चीज़ वह आसानी से हासिल नहीं कर सकती थी, उसे चाहने से ही इनकार कर दे।

इस तरह सब समाप्त हो गया। यद्यपि इस घटना ने उसे भीतर तक घायल और भयभीत कर दिया था, यद्यपि उसने हमेशा के लिए एस्तेर का सम्मान खो दिया था। उसने प्रार्थना की कि वह फिर कभी उसका उपदेश सुनने न आए। फिर भी उसने ईश्वर को धन्यवाद दिया कि बात इससे अधिक बिगड़ी नहीं। उसने प्रार्थना की कि ईश्वर उसे क्षमा करे और फिर कभी उसे गिरने न दे।

फिर भी जिस बात ने उसे सबसे अधिक भयभीत किया और पहले से भी अधिक घुटनों पर ला दिया, वह यह ज्ञान था कि एक बार गिर जाने के बाद दोबारा गिरना कितना आसान हो जाता है। एस्तेर को पा लेने के बाद उसके भीतर का सांसारिक पुरुष जाग उठा था और उसे हर जगह विजय की संभावना दिखाई देने लगी थी। उसे याद आ गया कि पवित्र होने के बावजूद वह अभी युवा था। जो स्त्रियाँ कभी उसे चाहती थीं, वे अब भी उसे चाहती थीं। उसे केवल हाथ बढ़ाकर अपनी इच्छा की वस्तु ले लेनी थी। यहाँ तक कि चर्च की बहनों को भी। वह अपने विवाह-शय्या में इन कल्पनाओं को थका देने के लिए संघर्ष करता रहा। वह डेबोरा को भी जागृत करने का प्रयास करता रहा, जिसके प्रति उसकी घृणा दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी।

वसंत की शुरुआत होते समय उसकी और एस्तेर की फिर आँगन में मुलाकात हुई। पिघलती बर्फ और बर्फीले पानी से ज़मीन अभी भी गीली थी। सूरज हर ओर फैला हुआ था। पेड़ों की नंगी डालियाँ मानो फीकी धूप की ओर ऊपर उठ रही थीं और अधीरता से पत्ते और फूल निकालने की प्रतीक्षा कर रही थीं। वह अपनी कमीज़ की बाँहें चढ़ाए कुएँ के पास खड़ा था और धीमे-धीमे अपने आप गा रहा था। उन खतरों के लिए ईश्वर की स्तुति कर रहा था, जिनसे वह गुज़र चुका था। वह बरामदे की सीढ़ियों से उतरकर आँगन में आई और यद्यपि उसने उसके हल्के कदमों की आहट सुन ली थी और जानता था कि वह वही है, फिर भी उसे मुड़कर देखने में एक क्षण लग गया।

उसे उम्मीद थी कि वह उसके पास आएगी और घर में किए जा रहे किसी काम में उसकी मदद माँगेगी। जब उसने कुछ नहीं कहा तो वह मुड़ा। उसने हल्के कपड़े की पोशाक पहन रखी थी, जिस पर हल्के-भूरे और गहरे-भूरे रंग के चौखाने बने थे। उसके बाल सिर के चारों ओर कसकर गूँथे हुए थे। वह एक छोटी लड़की जैसी लग रही थी और उसके चेहरे पर लगभग मुस्कान आ गई। फिर उसने पूछा, “क्या बात है?” और उसी क्षण उसके भीतर का दिल जैसे बैठ गया।

गैब्रियल,” उसने कहा, “मैं एक बच्चे को जन्म देने वाली हूँ।”

वह उसे घूरता रहावह रोने लगी। उसने पानी से भरी दोनों बाल्टियाँ सावधानी से ज़मीन पर रख दीं। उसने उसकी ओर बढ़ने के लिए हाथ फैलाए लेकिन वह पीछे हट गया।

लड़की, यह रोना बंद करो। तुम क्या कह रही हो?”

लेकिन एक बार आँसू निकल पड़े तो वह उन्हें तुरंत रोक नहीं सकी। वह रोती रही, जहाँ खड़ी थी वहीं थोड़ा-सा डगमगाती हुई और दोनों हाथ चेहरे पर रखे हुए। गैब्रियल ने घबराकर आँगन और घर की ओर देखा। “इसे बंद करो,” उसने फिर कहा। यहाँ और अभी उसे छूने का साहस नहीं हुआ, “और मुझे बताओ कि बात क्या है!”

मैंने आपको बताया,” वह सिसकते हुए बोली, “मैंने आपको बताया। मैं एक बच्चे को जन्म देने वाली हूँ।” उसने उसकी ओर देखा। उसका चेहरा आँसुओं से बिखर-सा गया था और गर्म आँसू बह रहे थे। “यह प्रभु की सच्ची बात है। मैं कोई कहानी नहीं बना रही हूँ, यह प्रभु की सच्ची बात है।”

वह अपनी आँखें उससे हटा नहीं सका, यद्यपि जो कुछ वह देख रहा था, उससे उसे घृणा हो रही थी। और तुम्हें यह कब पता चला?”

बहुत समय नहीं हुआ। मुझे लगा था शायद मुझसे गलती हो रही है। लेकिन कोई गलती नहीं है। गैब्रियल, अब हम क्या करेंगे?”

फिर जब उसने उसके चेहरे की ओर देखा तो उसके आँसू दोबारा बहने लगे।

चुप,” उसने ऐसी शांति से कहा जिससे वह स्वयं भी हैरान था, “हम कुछ न कुछ करेंगे, बस तुम चुप रहो।”

हम क्या करेंगे, गैब्रियल? मुझे बताओ। तुम्हारे मन में क्या करने का विचार है?”

तुम वापस घर में चली जाओ। अभी हमारे लिए बात करना संभव नहीं है।”

गैब्रियल...”

घर के अंदर जाओ, लड़की। जाओ!” और जब वह नहीं हिली बल्कि उसे देखती रही तो उसने कहा, “आज रात हम इस बारे में बात करेंगे। आज रात हम इस मामले की तह तक जाएँगे!”

वह उससे मुँह फेरकर बरामदे की सीढ़ियाँ चढ़ने लगी। “और अपना चेहरा सुखा लो,” उसने फुसफुसाकर कहा। वह झुकी, अपनी पोशाक का अगला हिस्सा उठाकर आँखें पोंछीं और एक क्षण तक निचली सीढ़ी पर उसी तरह खड़ी रही जबकि वह उसे देखता रहा। फिर वह सीधी हुई और पीछे मुड़कर देखे बिना घर के भीतर चली गई।

वह उसके बच्चे को जन्म देने वाली थी। उसका बच्चा? जबकि डेबरा, उनके कराहते हुए वैवाहिक जीवन के बावजूद, उसके शरीर को जितनी विनम्रता से सहती थी, उसके बावजूद किसी आने वाले जीवन से गर्भवती होने में असमर्थ रही थी। उसी एस्तेर की कोख में, जो किसी वेश्या से बेहतर नहीं थी, उस भविष्यवक्ता का बीज पाला जाएगा।

वह कुएँ से हट गया जैसे, कोई सम्मोहित व्यक्ति होउसने पानी की भारी बाल्टियाँ उठाईं। वह घर की ओर बढ़ा, जो अब ऊँची चमकती छत और सुनहरे धागों-सी चमकती खिड़कियों वाला, मानो उसे देख और सुन रहा था। उसके सिर के ऊपर का सूरज और पैरों के नीचे की धरती तक जैसे घूमना बंद कर चुके थे। पानी, मानो लाखों चेतावनी देती आवाज़ों की तरह, उसके दोनों ओर लटकती बाल्टियों में हिलोरें ले रहा था। उसकी माँ, जिस चौंकी हुई धरती पर वह चल रहा था, उसके नीचे से, अनंत रूप से अपनी आँखें उठाए हुए थी।

जब एस्तेर रसोई साफ कर रही थी, तब वे वहीं बात करने लगे।

तुम्हें कैसे” यह उसका पहला सवाल था, “इतना यकीन है कि यह बच्चा मेरा है?”

अब वह नहीं रो रही थी। “तुम इस तरह की बातें शुरू मत करो,” उसने कहा। “एस्तेर किसी से झूठ बोलने की आदी नहीं है और मैं इतने मर्दों के साथ नहीं रही हूँ कि मेरा दिमाग उलझ जाए।”

वह बहुत ठंडी और संयत थी और अपने कामों में उग्र एकाग्रता के साथ रसोई में इधर-उधर घूम रही थी, मुश्किल से उसकी ओर देखती थी। वह नहीं जानता था कि क्या कहे, उस तक कैसे पहुँचे।

तुमने अपनी माँ को बताया?” कुछ देर बाद उसने पूछा। “क्या तुम डॉक्टर के पास गई थीं? तुम्हें इतना यकीन कैसे है?”

उसने तीखी साँस छोड़ी। “नहीं, मैंने अपनी माँ को नहीं बताया। मैं पागल नहीं हूँ। मैंने आपके अलावा किसी को नहीं बताया।”

तुम्हें इतना यक़ीन कैसे है?” उसने फिर पूछा। “जबकि तुम किसी डॉक्टर के पास गई ही नहीं?”

इस शहर में कौन-सा डॉक्टर है जिसके पास तुम चाहते हो कि मैं जाऊँ? मैं डॉक्टर के पास जाऊँगी तो मानो छत पर चढ़कर ऐलान कर दूँगी। नहीं, मैं किसी डॉक्टर के पास नहीं गई और न ही जल्दी जाने वाली हूँ। मुझे यह बताने के लिए किसी डॉक्टर की ज़रूरत नहीं कि मेरे पेट में क्या हो रहा है।”

और तुम्हें यह बात कब से मालूम है?”

मुझे करीब एक महीने से... शायद छह हफ्तों से—पता है।”

छह हफ्तों से? तो पहले मुँह क्यों नहीं खोला?”

क्योंकि मुझे यक़ीन नहीं था। मैंने सोचा, इंतज़ार करूँ और पक्का जान लूँ। जब तक मुझे पता न हो, तब तक बेवजह हंगामा खड़ा करने की कोई ज़रूरत नहीं थी। अगर इसकी कोई ज़रूरत ही न होती तो मैं तुम्हें परेशान, डरा हुआ और गुस्से में नहीं देखना चाहती थी।” वह रुकी और उसे देखने लगी। फिर बोली, “और तुमने आज सुबह कहा था कि हम कुछ करेंगे। क्या करेंगे? अब हमें यही तय करना है, गैब्रियल।”

हम क्या करेंगे?” उसने आखिर दोहराया और उसे लगा जैसे उसके भीतर से जीवन को सँभाले रखने वाली शक्ति निकल गई हो। वह रसोई की मेज़ पर बैठ गया और फर्श पर बने घूमते हुए नमूने को देखने लगा।

लेकिन उसके भीतर से जीवन नहीं गया था। वह उसके पास आई और धीमी आवाज़ में, कड़वी आँखों से बोली, “तुम मुझे बहुत अजीब लग रहे हो। मुझे तो ऐसा लगता है कि तुम बस यही सोच रहे हो कि इससे और मुझसे भी, जितनी जल्दी हो सके, कैसे छुटकारा पाया जाए। हमेशा तो ऐसा नहीं था, है न, रेवरेन्ड? एक समय था जब तुम मेरे सिवा किसी और के बारे में सोच ही नहीं सकते थे। आज रात तुम क्या सोच रहे हो? अगर मैं गलत न हूँ तो तुम मेरे बारे में तो नहीं सोच रहे।”

लड़की,” उसने थकी हुई आवाज़ में कहा, “ऐसी बातें मत करो जैसे तुम्हें समझ ही न हो। तुम्हें मालूम है कि मुझे अपनी पत्नी के बारे में सोचना है।” वह और कुछ कहना चाहता था लेकिन शब्द नहीं मिले और असहाय होकर चुप हो गया।

यह मैं जानती हूँ,” उसने कुछ कम तीखे स्वर में कहा लेकिन फिर भी उसे देखती रही। उसकी आँखों में पुरानी अधीर, व्यंग्यपूर्ण चमक अभी पूरी तरह नहीं गई थी। “लेकिन मेरा मतलब यह है कि अगर तुम एक बार उसे भूल सके थे तो दूसरी बार भी भूल सकते हो।”

वह तुरंत उसकी बात नहीं समझ पाया। फिर वह एकदम सीधा बैठ गया। उसकी आँखें फैल गईं और उनमें क्रोध भर आया। “तुम्हारा क्या मतलब है, लड़की? तुम कहना क्या चाहती हो?”

वह ज़रा भी नहीं झिझकी। अपनी निराशा और क्रोध के बावजूद गैब्रियल ने पहचान लिया कि वह उस चंचल बच्ची से बहुत दूर थी, जैसी वह हमेशा उसे समझता आया था। या क्या इतने थोड़े समय में ही उसका रूप पूरी तरह बदल गया था? लेकिन इस मामले में गैब्रियल की स्थिति कमजोर थी। वह उसके भीतर आए किसी भी बदलाव के लिए तैयार नहीं था जबकि वह शुरू से ही उसे अच्छी तरह समझ चुकी थी और उसके भीतर होने वाले किसी भी बदलाव से चौंकने वाली नहीं थी।

तुम जानते हो मेरा क्या मतलब है,” उसने कहा। “तुम उस दुबली-पतली, काली औरत के साथ कभी किसी तरह का जीवन नहीं बिता सकते और तुम उसे कभी खुश नहीं कर पाओगे। उसके कभी बच्चे भी नहीं होंगे। सच कहूँ तो मुझे तो यही लगता है कि जब तुमने उससे शादी की थी तब तुम होश में ही नहीं थे। तुम्हारा बच्चा मैं पैदा करने वाली हूँ!”

तुम चाहती हो,” उसने आखिर पूछा, “कि मैं अपनी पत्नी को छोड़ दूँ और तुम्हारे साथ आ जाऊँ?”

मैंने सोचा,” उसने उत्तर दिया, “कि तुम खुद यह बात बहुत पहले, न जाने कितनी बार, सोच चुके होगे।”

तुम जानती हो,” उसने रुक-रुककर, क्रोध से कहा, “मैंने कभी ऐसा कुछ नहीं कहा। मैंने तुम्हें कभी नहीं बताया कि मैं अपनी पत्नी को छोड़ना चाहता हूँ।”

मैं,” वह अपनी सहनशक्ति के अंत पर चिल्लाई, “तुमने क्या कहा था, उसकी बात ही नहीं कर रही!”

तुरंत दोनों की निगाहें रसोई के बंद दरवाज़े की ओर उठ गईं क्योंकि इस बार घर में वे अकेले नहीं थे। उसने आह भरी और हाथ से अपने बाल सँवारे। तभी उसने देखा कि उसका हाथ काँप रहा था और उसका शांत, संयत व्यवहार वास्तव में उन्मत्त घबराहट का केवल दिखावा था।

लड़की,” उसने कहा, “क्या तुम्हें लगता है कि सिर्फ इसलिए कि तुम कहती हो कि मेरे बच्चे को अपने पेट में पलता महसूस कर रही हो, मैं सब कुछ छोड़कर तुम्हारे साथ कहीं भाग जाऊँगा और पाप की ज़िंदगी जीऊँगा? तुम मुझे किस हद तक मूर्ख समझती हो? मुझे परमेश्वर का काम करना है। मेरा जीवन तुम्हारा नहीं है और न ही उस बच्चे का, अगर वह मेरा बच्चा है।”

वह तुम्हारा बच्चा है,” उसने ठंडे स्वर में कहा, “और दुनिया में कोई रास्ता नहीं जिससे तुम इस सच्चाई से बच सको। और बहुत ज़्यादा समय भी नहीं बीता, यहीं इसी कमरे में, जब मुझे तो ऐसा लगता था कि पाप की ज़िंदगी के लिए तुम पूरी तरह तैयार थे।”

हाँ,” उसने उठते हुए और मुँह फेरते हुए उत्तर दिया, “शैतान ने मुझे बहकाया और मैं गिर पड़ा। मैं पहला आदमी नहीं हूँ जो किसी दुष्ट स्त्री के कारण पतन में पड़ा हो।”

संभलकर बात करना,” एस्थर ने कहा, “कि तुम मुझसे किस तरह बात करते हो। मैं पहली लड़की भी नहीं हूँ जिसे किसी पवित्र आदमी ने बरबाद किया हो।”

बरबाद?” वह चिल्लाया। “तुम? तुम कैसे बरबाद हो गईं? जब तुम इस पूरे शहर में वेश्या की तरह घूमती रही हो और हर जगह ऐश करती फिरती हो? तुम मेरे सामने खड़ी होकर कैसे कह सकती हो कि तुम बरबाद हो गईं? अगर मैं नहीं होता तो कोई और होता।”

लेकिन वह तुम थे,” उसने पलटकर कहा, “और मैं यह जानना चाहती हूँ कि अब हम इसका क्या करेंगे।”

उसने उसकी ओर देखा। उसका चेहरा ठंडा और कठोर था, कुरूप वह इससे पहले कभी इतनी कुरूप नहीं लगी थी।

मुझे नहीं मालूम,” उसने जान-बूझकर ठहरकर कहा, “कि हम क्या करने वाले हैं। लेकिन मैं तुम्हें बताता हूँ कि मेरे खयाल से तुम्हें क्या करना चाहिए। तुम जाओ और उन लड़कों में से किसी एक को, जिनके साथ तुम घूमती रही हो, अपने से शादी करने के लिए कहो। क्योंकि मैं तुम्हारे साथ कहीं नहीं जा सकता।”

वह मेज़ पर बैठ गई और तिरस्कार तथा विस्मय से उसकी ओर देखने लगीवह इस तरह भारी होकर बैठी, मानो किसी ने उसे चोट मारकर गिरा दिया हो। वह जानता था कि वह अपने को सँभाल रही है। अब उसने वही बात कही, जिसे सुनने से वह डर रहा था, और अगर मैं पूरे शहर में घूमकर तुम्हारी पत्नी को, चर्चवालों को और सबको बता दूँ, मान लो मैंने ऐसा कर दिया, रेवरेन्ड?”

और तुम्हें क्या लगता है,” उसने पूछा। उसे लगा जैसे एक भयानक, गिरता हुआ सन्नाटा उसे चारों ओर से घेर रहा हो, “कौन तुम्हारी बात पर विश्वास करेगा?”

वह हँसी। “इतने लोग तो मेरा विश्वास करेंगे कि तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल खड़ी हो जाएगी।” वह उसे देखती रही। वह रसोई में इधर-उधर टहलता रहा। उसकी आँखों से बचने की कोशिश करता हुआ। तुम बस उस पहली रात के बारे में सोचो,” उसने कहा, “यहीं इन कमबख्त गोरों के फर्श पर, तब तुम्हें समझ में आएगा कि अब तुम एस्तेर के सामने यह कहने की हालत में नहीं हो कि तुम कितने पवित्र हो। मुझे परवाह नहीं कि तुम झूठी ज़िंदगी जीना चाहते हो लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आता कि उसकी कीमत मुझे क्यों चुकानी पड़े।”

तुम चाहो तो लोगों के पास जाकर सब बता सकती हो,” उसने साहस दिखाते हुए कहा, “लेकिन इससे तुम्हारी भी कोई बहुत अच्छी छवि नहीं बनेगी।”

वह फिर हँसी। “लेकिन मैं कोई पवित्र स्त्री तो हूँ नहीं। तुम शादीशुदा आदमी हो और तुम एक उपदेशक हो। तुम्हें क्या लगता है, लोग सबसे ज़्यादा दोष किसे देंगे?”

वह उसे घृणा से देख रहा था, जिसमें उसकी पुरानी इच्छा भी मिली हुई थी। वह जानता था कि एक बार फिर जीत उसी की हुई थी।

मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता, यह तुम जानती हो,” उसने कहा। “अब तुम चाहती क्या हो कि मैं करूँ?”

नहीं,” उसने कहा, “और मेरा खयाल है कि अगर तुम आज़ाद भी होते, तब भी मुझसे शादी नहीं करते। मुझे लगता है कि तुम एस्तेर जैसी वेश्या को अपनी पत्नी नहीं बनाना चाहते। एस्तेर तो बस रात के लिए है, अँधेरे के लिए, जहाँ कोई तुम्हें अपने पवित्र शरीर को एस्तेर के साथ गंदा करते हुए न देख सके। एस्तेर तो बस इतनी ही लायक है कि कहीं उस कमबख्त जंगल में जाकर तुम्हारे हरामी बच्चे को जन्म दे। है न, रेवरेन्ड?”

उसने कोई उत्तर नहीं दिया। उसे कोई शब्द नहीं सूझ रहा था। उसके भीतर कब्र जैसा सन्नाटा था।

वह उठी और रसोई के खुले दरवाज़े तक गई। वहाँ खड़ी होकर, उसकी ओर पीठ किए, वह बाहर आँगन और उन शांत गलियों को देखने लगी, जहाँ सूर्य की अंतिम, बुझी हुई किरणें अब भी ठहरी हुई थीं।

लेकिन मेरा खयाल है,” उसने धीरे-धीरे कहा, “कि जितना तुम मेरे साथ रहना चाहते हो, उससे ज़्यादा मैं भी तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती। मुझे ऐसा आदमी नहीं चाहिए जो शर्मिंदा और डरा हुआ हो। ऐसे आदमी से मेरा कोई भला नहीं हो सकता।” वह दरवाज़े पर मुड़ी और उसकी ओर देखने लगी। यह आखिरी बार था जब उसने सचमुच उसकी ओर देखा था और वह उस नज़र को अपनी कब्र तक साथ लेकर जाता। मैं बस एक काम चाहती हूँ कि तुम करो,” उसने कहा। “वह कर दो, तो हमारे बीच सब ठीक हो जाएगा।”

तुम चाहती क्या हो कि मैं करूँ?” उसने पूछा और उसे शर्म महसूस हुई।

मैं पूरे शहर में घूमकर,” उसने कहा, “लोगों को बता सकती हूँ कि परमेश्वर का अभिषिक्त आदमी क्या करता है। बस एक ही वजह है कि मैं ऐसा नहीं करती। मैं नहीं चाहती कि मेरी माँ और मेरे पिता को पता चले कि मैं कितनी मूर्ख रही हूँ। मुझे अपने किए पर शर्म नहीं है। मुझे तुम पर शर्म आती है। तुमने मुझे ऐसी शर्म महसूस कराई है, जैसी मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। मुझे अपने परमेश्वर के सामने शर्म आती है कि मैंने किसी को मुझे सस्ता और तुच्छ बना देने दिया, जैसा तुमने किया।”

उसने कुछ नहीं कहा। वह फिर उसकी ओर पीठ करके खड़ी हो गई।

मैं... बस कहीं जाना चाहती हूँ,” उसने कहा, “कहीं जाकर अपना बच्चा पैदा करना चाहती हूँ और इन सारी बातों को अपने दिमाग से निकाल देना चाहती हूँ। मैं कहीं जाना चाहती हूँ और अपने मन को ठीक करना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि तुम बस इतना करो और यह तो बहुत मामूली-सी बात है। लगता है, किसी लड़की को सचमुच वेश्या बनाने के लिए एक पवित्र आदमी ही काफी होता है।”

लड़की,” उसने कहा, “मेरे पास पैसे नहीं हैं।”

तो,” उसने ठंडे स्वर में कहा, “तुम्हें किसी भी तरह पैसे जुटाने ही होंगे।”

फिर वह रोने लगी। वह उसकी ओर बढ़ा, लेकिन वह उससे दूर हट गई।

अगर मैं खेतों में काम करने जाऊँ,” उसने असहाय होकर कहा, “तो शायद इतना कमा सकूँ कि तुम्हें यहाँ से दूर भेज सकूँ।”

उसमें कितना समय लगेगा?”

शायद एक महीना।”

उसने सिर हिला दिया। “मैं यहाँ इतनी देर नहीं रुकूँगी।”

वे दोनों रसोई के खुले दरवाज़े पर चुप खड़े रहे। वह अपने आँसुओं को रोकने की कोशिश कर रही थी और वह अपनी शर्म से जूझ रहा था। उसके मन में बस यही शब्द घूम रहे थे, जीसस, जीसस, जीसस। जीसस, जीसस।”

आखिर उसने पूछा, “क्या तुम्हारे पास कुछ भी बचाकर रखा हुआ नहीं है? मुझे तो लगता है कि तुम्हारी शादी को इतना समय हो गया है कि तुमने कुछ-न-कुछ बचा रखा होगा!”

तब उसे याद आया कि डेबरा शादी के दिन से ही पैसे बचाती आ रही थी। वह उन्हें अलमारी के ऊपर रखे एक टिन के डिब्बे में रखती थी। उसे लगा, पाप कैसे एक पाप को दूसरे पाप की ओर ले जाता है।

हाँ,” उसने कहा, “थोड़े हैं। मुझे नहीं मालूम कितने।”

कल उन्हें ले आना,” उसने कहा।

हाँ,” उसने उत्तर दिया।

उसने उसे देखा, जब वह दरवाज़े से हटकर अलमारी के पास अपनी टोपी और कोट लेने गई। फिर वह लौटकर आई, बाहर जाने के कपड़ों में तैयार थी और बिना एक शब्द कहे उसके पास से निकलकर छोटी-सी सीढ़ियों से आँगन में उतर गई। उसने नीचा-सा फाटक खोला और लंबी, सुनसान, अग्निमय सड़क पर मुड़ गई। वह धीरे-धीरे चल रही थी, सिर झुकाए, मानो उसे ठंड लग रही हो। वह उसे देखता रहा और उन अनगिनत मुलाकातों के समय को याद करता रहा जब उसने उसे पहले देखा था। तब उसकी चाल कितनी अलग होती थी और उसकी हँसी की गूँज लौटकर उसका उपहास करती थी।

उसने डेबरा के सोते समय पैसे चुरा लिए। सुबह वे पैसे एस्तेर को दे दिए। उसी दिन उसने नौकरी छोड़ने की सूचना दे दी और एक सप्ताह बाद वह चली गई। उसके माता-पिता ने कहा, शिकागो, बेहतर नौकरी और बेहतर जीवन की तलाश में।

........

 

इसके बाद के हफ्तों में डेबरा पहले से भी अधिक शांत हो गई। कभी-कभी उसे पूरा विश्वास होता कि उसे पैसे गायब होने का पता चल गया है और वह जानती है कि उसने ही उन्हें लिया है। कभी उसे पूरा विश्वास होता कि उसे कुछ भी मालूम नहीं। कभी-कभी उसे लगता कि वह सब कुछ जानती है। चोरी भी और चोरी की वजह भी। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। वसंत के मध्य में वह उपदेश देने के लिए बाहर देहात में चला गया और तीन महीने तक वहीं रहा। जब लौटा तो पैसे अपने साथ वापस ले आया और उन्हें फिर उसी डिब्बे में रख दिया। इस बीच उसमें एक भी पैसा नहीं जोड़ा गया था, इसलिए वह अब भी निश्चित नहीं हो सका कि डेबरा को कुछ पता था या नहीं।

उसने निश्चय किया कि इस पूरी बात को भुला देगा और अपना जीवन फिर से शुरू करेगा।

लेकिन गर्मियों में उसे एक पत्र मिला। उस पर भेजने वाले का कोई नाम या पता नहीं था। लेकिन डाक की मुहर शिकागो की थी। नाश्ते के समय डेबरा ने वह पत्र उसे दिया। ऐसा लगा जैसे उसने न तो लिखावट पर ध्यान दिया था, न डाक की मुहर पर। वह पत्र बाइबल-प्रकाशन संस्था से आए उन धार्मिक पर्चों के बंडल के साथ था, जिन्हें वे दोनों हर सप्ताह पूरे शहर में बाँटते थे। डेबरा के पास फ्लोरेंस का भी एक पत्र था और शायद इसी नई बात ने उसका ध्यान दूसरी ओर लगा दिया था।

एस्तेर का पत्र इस तरह समाप्त हुआ था,

मेरा खयाल है कि मैंने गलती की, यह सच है। अब मैं उसकी कीमत चुका रही हूँ। लेकिन यह मत समझना कि तुम्हें उसकी कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी। मुझे नहीं मालूम कब और कैसे। लेकिन मुझे मालूम है कि इन अच्छे दिनों में से किसी एक दिन तुम्हें भी नीचे गिराया जाएगा। मैं तुम्हारी तरह पवित्र नहीं हूँ। लेकिन सही और गलत में फर्क जानती हूँ।

मैं अपने बच्चे को जन्म दूँगी और उसे बड़ा करके एक आदमी बनाऊँगी। मैं उसे किसी बाइबल से नहीं पढ़ाऊँगी और न ही किसी उपदेश को सुनने के लिए ले जाऊँगी। अगर वह अपनी पूरी ज़िंदगी केवल शराब ही क्यों न पीता रहे, तब भी वह अपने बाप से बेहतर आदमी होगा।”

फ्लोरेंस ने क्या लिखा है?” उसने बेरुखी से पूछा और इस पत्र को अपनी मुट्ठी में मसल दिया।

डेबरा ने हल्की मुस्कान के साथ उसकी ओर देखा। “कुछ खास नहीं, डिअर। लेकिन लगता है कि वह शादी करने वाली है।”

........

उस गर्मी के अंत के करीब वह फिर बाहर देहात में चला गया। वह अपना घर, अपना काम, यहाँ तक कि उस शहर को भी सहन नहीं कर पा रहा था। वह दिन-रात उन दृश्यों और उन लोगों का सामना नहीं कर सकता था, जिन्हें वह जीवन भर से जानता आया था। अचानक उसे लगता था कि वे सभी उसका उपहास कर रहे हैं, उसका न्याय कर रहे हैं। हर व्यक्ति की आँखों में उसे अपना अपराध दिखाई देता था। जब वह मंच पर खड़े होकर उपदेश देता तो उसे लगता कि लोग उसकी ओर ऐसे देख रहे हैं मानो उसे वहाँ खड़े होने का कोई अधिकार ही न हो, मानो वे उसी तरह उसे दोषी ठहरा रहे हों जैसे, कभी उसने तेईस बुज़ुर्गों को दोषी ठहराया था। जब पापी आत्माएँ रोती हुई वेदी के सामने आतीं तो वह मुश्किल से प्रसन्न होने का साहस करता। उसे उस आत्मा की याद आती जो झुकी ही नहीं थी और जिसका रक्त, शायद, न्याय के दिन उससे माँगा जाएगा।

इसलिए वह इन लोगों से और उन मूक गवाहों से भाग गया। दूसरी जगह जाकर ठहरने और उपदेश देने के लिए, मानो गुप्त रूप से अपने पहले किए हुए कामों को फिर से करने और उस पवित्र अग्नि[21] को दोबारा खोजने के लिए जिसने कभी उसे पूरी तरह बदल दिया था। लेकिन उसे वैसा ही अनुभव होने वाला था जैसा भविष्यद्वक्ताओं ने किया था। जो व्यक्ति प्रभु से भागता है, उसके लिए पूरी पृथ्वी ही एक जेल बन जाती है। कहीं शांति नहीं थी, कहीं उपचार नहीं था और कहीं विस्मृति नहीं थी। वह जिस भी चर्च में प्रवेश करता, उसका पाप उससे पहले वहाँ पहुँच चुका होता। वह अनजान, स्वागत करती हुई आँखों से उसे पुकारता हुआ दिखाई देता। वेदी से उसकी ओर चिल्लाता हुआ सुनाई देता और जब वह मंच की सीढ़ियाँ चढ़ता तो वहीं उसकी सीट पर बैठा हुआ उसकी प्रतीक्षा करता प्रतीत होता। वह उसकी बाइबल से ऊपर उठकर उसे घूरता था। उस पवित्र पुस्तक में ऐसा कोई शब्द नहीं था जिससे वह काँप न उठता। जब वह पातमुस द्वीप पर यूहन्ना[22] के बारे में बोलता, जिसे प्रभु के दिन आत्मा में उठा लिया गया था ताकि वह बीती, वर्तमान और आने वाली बातें देख सके। वह कहता, “जो अशुद्ध है, वह अशुद्ध ही बना रहे,” तो इन शब्दों को ऊँची आवाज़ में पुकारने वाला स्वयं वही होता और उन्हीं शब्दों से पूरी तरह विचलित हो जाता। जब वह चरवाहे के बालक दाऊद के बारे में बोलता, जिसे परमेश्वर की शक्ति ने उठाकर इस्राएल का राजा बना दिया था, तब लोग “आमीन!” और “हल्लेलूयाह!” पुकारते और वह स्वयं फिर अपनी बेड़ियों में संघर्ष करता हुआ महसूस करता। जब वह पिन्तेकुस्त के दिन[23] के बारे में बोलता, जब पवित्र आत्मा उन प्रेरितों पर उतरा था जो ऊपर की कोठरी में ठहरे हुए थे और उन्हें अग्नि की जीभों में बोलने लगा था, तब उसे अपना बपतिस्मा याद आता और यह भी कि उसने पवित्र आत्मा को किस प्रकार दुख पहुँचाया था। नहीं, भले ही पोस्टरों पर उसका नाम बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा जाता था, भले ही लोग उस महान कार्य के लिए उसकी प्रशंसा करते थे जो परमेश्वर उसके द्वारा कर रहा था और भले ही दिन-रात लोग उसके सामने वेदी तक आते थे, उस पवित्र पुस्तक में उसके लिए कोई शब्द नहीं था।

इस भटकन में उसने देखा कि उसके अपने लोग परमेश्वर से कितनी दूर भटक चुके थे। वे सब मार्ग से हट गए थे और जंगल में जा पहुँचे थे, जहाँ वे सोने-चाँदी, लकड़ी और पत्थर की मूर्तियों के सामने झुकते थे। ऐसे झूठे देवताओं के सामने, जो उन्हें चंगा नहीं कर सकते थे। वह संगीत जो किसी भी शहर या कस्बे में उसके प्रवेश करते ही चारों ओर गूँजता था, संतों का संगीत नहीं था बल्कि एक दूसरी, नारकीय धुन थी, जो वासना का महिमामंडन करती और धार्मिकता का उपहास करती थी। कुछ स्त्रियाँ, जिनमें से कुछ को तो घर पर रहकर अपने पोते-पोतियों को प्रार्थना करना सिखाना चाहिए था। रात-दर-रात धुएँ से भरे, जिन की गंध से भारी नृत्य-सभागारों में अपने शरीरों को अश्लील ढंग से मटकाती हुई, अपने “प्रेमी आदमी” के लिए गाती थीं। उनका प्रेमी आदमी कोई भी आदमी हो सकता था। सुबह, दोपहर या रात, कभी भी। एक आदमी के शहर छोड़ते ही उन्हें दूसरा मिल जाता। ऐसा लगता था कि पुरुष उनके गर्म शरीरों में डूब सकते थे और उन्हें कभी कोई फर्क ही महसूस नहीं होता था। यह तुम्हारे लिए यहाँ मौजूद है। अगर तुम इसे हासिल नहीं करते तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है।” जब वे उसे देखते तो उस पर हँसतीं, “तुम जैसे सुंदर आदमी को?”, और उससे कहतीं कि वे एक ऐसी लंबी, साँवली लड़की को जानती हैं जो उससे उसकी बाइबल नीचे रखवा सकती है। वह उनसे भागता था। वे उसे डराती थीं। उसने एस्तेर के लिए प्रार्थना करना शुरू कर दिया। वह कल्पना करता कि एक दिन वह भी उन्हीं स्त्रियों की जगह खड़ी होगी, जहाँ आज ये स्त्रियाँ खड़ी थीं।

जिन-जिन शहरों से वह गुज़रा, उन सबमें खून बहता हुआ दिखाई देता था। ऐसा लगता था कि कहीं भी ऐसा कोई दरवाज़ा नहीं था, जिसके पीछे से खून लगातार खून की पुकार न कर रहा हो। ऐसी कोई स्त्री नहीं थी, चाहे वह विद्रोही तुरहियों के सामने गा रही हो या प्रभु के सामने आनंद मना रही हो, जिसने अपने पिता, अपने भाई, अपने प्रेमी या अपने बेटे को निर्दयता से काट डाले जाते न देखा हो, जिसने अपनी बहन को गोरे आदमी के उस विशाल वेश्यालय का हिस्सा बनते न देखा हो और जो स्वयं भी बड़ी मुश्किल से उस वेश्यालय में जाने से बची न हो। ऐसा कोई पुरुष नहीं था, चाहे वह उपदेश दे रहा हो, गालियाँ दे रहा हो, एकांत नीली शाम में गिटार बजा रहा हो या रात में क्रोध और उन्माद के साथ अपने सुनहरे सींग वाले वाद्य को बजा रहा हो, जिसे गोरे लोगों का गंदला पानी पीने के लिए सिर झुकाने पर विवश न किया गया हो, ऐसा कोई पुरुष नहीं था जिसकी पुरुषत्व की जड़ तक को विषाक्त न कर दिया गया हो, जिसकी काम-शक्ति को अपमानित न किया गया हो, जिसका वीर्य विस्मृति में और विस्मृति से भी बदतर, जीवित लज्जा और क्रोध तथा अंतहीन संघर्ष में न बिखेर दिया गया हो। हाँ, उनके अंग काट दिए गए थे। उनका अपमान किया गया था। उनके अपने नाम तक समय के मैदान में उपेक्षा से उड़ती हुई धूल से अधिक कुछ नहीं रह गए थे। वे कहाँ जाकर गिरेंगे, कहाँ फूलेंगे, आगे चलकर कौन-सा फल देंगे, कहाँ? उनके अपने नाम भी उनके अपने नहीं थे। उनके पीछे अँधेरा था, केवल अँधेरा। चारों ओर विनाश था और उनके आगे केवल आग, एक नाजायज़ संतति, परमेश्वर से दूर, जंगल में गाती और रोती हुई!

फिर भी, सबसे विचित्र बात यह थी कि उसकी आस्था उन गहराइयों से ऊपर उठी, जिन्हें उसने पहले कभी नहीं जाना था। उसने जिस दुष्टता को देखा था, जिस दुष्टता से वह भाग रहा था, उसके सामने भी उसने आकाश के बीचोंबीच जलते हुए ध्वज की तरह मुक्ति की उस शक्ति को देखा, जिसके लिए उसे मृत्यु तक साक्षी देना था। वह शक्ति जो उसे पूरी तरह कुचल दे, फिर भी वह उसका इनकार नहीं कर सकता था। जीवित लोगों में से कोई उसे कभी देख पाए या न देख पाए, उसने उसे देख लिया था और अब उसे विश्वास बनाए रखना ही था। वह किसी मित्र के लिए, किसी प्रेमिका के लिए, यहाँ तक कि अपने नाजायज़ बेटे के लिए भी मिस्र वापस नहीं जाएगा। वह परमेश्वर से अपना मुँह नहीं मोड़ेगा, चाहे वह अँधेरा कितना ही गहरा क्यों न हो जाए, जिसमें परमेश्वर ने अपना मुख उससे छिपा लिया था। एक दिन परमेश्वर उसे कोई संकेत देगा और सारा अँधेरा समाप्त हो जाएगा। एक दिन परमेश्वर उसे उठा खड़ा करेगा, उसी परमेश्वर ने जिसे उसे इतनी गहराई तक गिरने दिया था।

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उस सर्दी में उसके लौटने के कुछ ही समय बाद एस्तेर भी घर लौट आई। उसकी माँ और सौतेला पिता उत्तर की ओर गए थे ताकि उसके निर्जीव शरीर और उसके जीवित बेटे को वापस ला सकें। क्रिसमस के कुछ ही समय बाद, वर्ष के उन अंतिम, मृतप्राय दिनों में, उसे चर्च के कब्रिस्तान में दफना दिया गया। बहुत कड़ाके की ठंड थी और ज़मीन पर बर्फ जमी हुई थी, ठीक वैसे ही जैसे उन दिनों में थी जब उसने पहली बार उसे अपने वश में किया था। वह डेबरा के पास खड़ा था। डेबरा की बाँह उसके हाथ में थी और ठंड के कारण लगातार काँप रही थी। वह देखता रहा, जब लंबे, सादे ताबूत को कब्र में उतारा गया। एस्तेर की माँ गहरे गड्ढे के पास चुपचाप खड़ी थी और अपने पति का सहारा लिए हुए थी। उसका पति उनकी नन्ही संतान को बाँहों में उठाए था। किसी ने कहना शुरू किया, “प्रभु, दया कर, दया कर, दया कर,” और बूढ़ी शोकाकुल स्त्रियाँ अचानक एस्तेर की माँ के चारों ओर इकट्ठी हो गईं ताकि उसे सँभाल सकें। फिर मिट्टी ताबूत पर गिरने लगी। बच्चा जाग गया और चीखने लगा।

तब गैब्रियल ने प्रार्थना की कि उसे रक्त-दोष से मुक्ति मिले। उसने परमेश्वर से प्रार्थना की कि एक दिन उसे कोई ऐसा संकेत दे, जिससे वह जान सके कि उसे क्षमा कर दिया गया है। लेकिन उस क्षण चर्च के कब्रिस्तान में जो बच्चा चीख रहा था, वह परमेश्वर द्वारा उसे कोई संकेत देने से पहले ही शापित हो चुका था, गा चुका था और परमेश्वर के सामने हमेशा के लिए मौन कर दिया गया था।

उसने इस बेटे को बड़ा होते देखा। अपने पिता के लिए अजनबी और परमेश्वर के लिए भी अजनबी। एस्तेर की मृत्यु के बाद डेबरा, एस्तेर के परिवार वालों के साथ अधिक मित्रवत हो गई थी और आरंभ से ही गैब्रियल को बताती रही थी कि रॉयल को कितनी बुरी तरह बिगाड़ा जा रहा था। वह स्वाभाविक रूप से उनकी आँखों का तारा था। एक ऐसी बात जिसे व्यवहार में देखकर डेबरा कभी भौंहें सिकोड़ती और कभी अनिच्छा से मुस्करा देती और जैसा कि वे लोग कहते थे, अगर उसके भीतर कोई गोरा खून था भी तो वह दिखाई नहीं देता था। वह बिल्कुल अपनी माँ की हूबहू छवि था।

ऐसा कोई सूर्योदय या सूर्यास्त नहीं होता था जब गैब्रियल अपने खोए हुए, अपने अधिकार से वंचित बेटे को न देखता हो या उसके बारे में न सुनता हो। ऐसा लगता था कि हर बीतते दिन के साथ वह अपने माथे पर लिखे हुए विनाश को और अधिक गर्व से धारण करता जा रहा था। गैब्रियल उसे डेविड के उतावले बेटे की तरह सिर के बल उस विनाश की ओर भागते देखता था, जो उसके गर्भ में ठहराए जाने के क्षण से ही उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। ऐसा लगता था कि उसने अभी चलना शुरू ही किया था कि अकड़कर चलने लगा। उसने अभी बोलना शुरू ही किया था कि गालियाँ देने लगा। गैब्रियल अक्सर उसे गलियों में अपने हमउम्र लड़कों के साथ फुटपाथ के किनारे खेलते देखता था। एक बार जब वह वहाँ से गुज़रा तो लड़कों में से एक ने कहा, “रेवरेंड ग्राइम्स आ रहे हैं,” और छोटी, सम्मानपूर्ण चुप्पी के साथ सिर हिलाया। लेकिन रॉयल ने निर्भीकता से उपदेशक के चेहरे की ओर देखा। उसने कहा, “कैसे हैं, रेवरेंड?” और अचानक, अपने को रोक न पाने की तरह हँस पड़ा। गैब्रियल चाहता था कि मुस्कराकर उस लड़के के चेहरे की ओर देखे, कुछ देर रुके और उसके माथे को छुए। लेकिन उसने इनमें से कुछ भी नहीं किया और आगे बढ़ गया। उसके पीछे उसने रॉयल की फूटती हुई फुसफुसाहट सुनी, “मैं शर्त लगाता हूँ, उसके पास बहुत बड़ा वाला होगा!”, और फिर सभी बच्चे हँस पड़े। तभी गैब्रियल को समझ में आया कि अपनी माँ ने उसे देखकर कितना कष्ट सहा होगा। उस ऐसी अपरिष्कृत मासूमियत में, जो निश्चित रूप से मृत्यु और नरक की ओर ले जाती थी।

एक बार डेबरा ने यूँ ही कहा, “मुझे समझ में नहीं आता कि उसने उसका नाम रॉयल क्यों रखा? तुम्हें लगता है, यह उसके बाप का नाम है?”

उसे इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ। उसने एक बार एस्तेर से कहा था कि यदि प्रभु कभी उसे बेटा दें तो वह उसका नाम रॉयल रखेगा क्योंकि विश्वासियों की वंश-परंपरा एक राजसी वंश है। उसका बेटा एक राजसी बालक होगा। जब उसने उसे अपने से दूर धकेला था, तब एस्तेर को यह बात याद थी। शायद अपनी आखिरी साँस के साथ उसने इसी नाम के द्वारा उसका और उसके पिता का उपहास किया था। तब वह उससे घृणा करते हुए मर गई थी। वह उसके और उसके वंश के लिए एक शाप लेकर अनंतता में चली गई थी।

मेरा खयाल है,” उसने आखिर कहा, “यह उसके बाप का ही नाम होगा। नहीं तो अस्पताल में उत्तर में उसकी माँ के मर जाने के बाद उन्होंने बस यही नाम दे दिया होगा।”

उसकी नानी, सिस्टर मैकडॉनल्ड”, वह एक पत्र लिख रही थी और बोलते समय उसकी ओर नहीं देख रही थी। “अच्छा, उसका मानना है कि शायद उन लड़कों में से कोई रहा होगा, जो हमेशा यहाँ से गुजरते रहते हैं, काम की तलाश में, उत्तर की ओर जाते हुए। तुम जानते हो न, वे एकदम निकम्मे-आवारा निग्रो... अच्छा, उसका मानना है कि उन्हीं में से किसी ने एस्तेर को मुसीबत में डाला होगा। वह कहती है कि अगर एस्तेर उस लड़के के बाप को खोजने की कोशिश न कर रही होती तो वह कभी उत्तर की ओर नहीं जाती। क्योंकि जब वह यहाँ से गई थी, तब वह गर्भवती थी”, और एक क्षण के लिए उसने अपने पत्र से नज़र उठाई, “यह तो पक्का है।”

मेरा खयाल है,” उसने फिर कहा। उसकी इस असामान्य बातचीत से वह असहज हो रहा था। लेकिन इतनी तीखी प्रतिक्रिया देकर उसे रोकने का साहस भी नहीं कर पा रहा था। वह एस्तेर के बारे में सोच रहा था, जो ठंडी और निश्चल होकर ज़मीन के नीचे पड़ी थी, वही एस्थर जो उसकी बाँहों में इतनी जीवंत और निर्लज्ज हुआ करती थी।

सिस्टर मैकडॉनल्ड कहती है,” वह आगे बोली, “कि वह यहाँ से थोड़े-से ही पैसे लेकर गई थी। जब तक वह वहाँ रही, लगभग लगातार उन्हें उसे पैसे भेजते रहना पड़ा, खासकर आखिर के दिनों में। हम कल ही इस बारे में बात कर रहे थे। वह कहती है, ऐसा लगता है जैसे एस्तेर ने एक रात अचानक तय कर लिया कि उसे जाना ही है और उसे कोई रोक नहीं सकता। वह कहती है कि वह लड़की के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहती थी। लेकिन अगर उसे ज़रा भी पता होता कि कोई बात गड़बड़ है तो वह उस लड़की को कभी अपने से दूर नहीं जाने देती।”

मुझे तो यह अजीब लगता है,” वह बुदबुदाया, उसे खुद भी ठीक-ठीक पता नहीं था कि वह क्या कह रहा है, “कि उसने कुछ सोचा ही नहीं।”

अरे, उसने कुछ नहीं सोचा क्योंकि एस्तेर अपनी माँ को सब कुछ बताया करती थी। उन दोनों के बीच कोई बात छिपी नहीं थी। वे दोनों साथ रहने वाली दो औरतों जैसी थीं। वह कहती है कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अगर एस्तेर किसी मुसीबत में पड़ गई तो वह उससे भाग जाएगी।” और उसने गैब्रियल के पार बाहर की ओर देखा। उसकी आँखों में अजीब-सी, कड़वी करुणा भरी थी। “बेचारी,” उसने कहा, “उसे बहुत कष्ट सहना पड़ा होगा।”

मुझे नहीं लगता कि तुम्हें और सिस्टर मैकडॉनल्ड को हर समय बैठकर इसी के बारे में बातें करते रहना चाहिए,” उसने तब कहा। “इस बात को बहुत लंबा समय बीत चुका है। वह लड़का अब बड़ा हो रहा है।”

यह बात तो सही है,” उसने फिर सिर झुका लिया, “लेकिन कुछ बातें ऐसी होती हैंलगता है, जिन्हें जल्दी भुलाया नहीं जा सकता।”

किसे पत्र लिख रही हो?” उसने पूछा। अचानक उसकी चुप्पी उसे उतनी ही भारी लगने लगी थी, जितनी अभी-अभी उसकी बातें लगी थीं।

उसने सिर उठाया। “मैं तुम्हारी बहन फ्लोरेंस को लिख रही हूँ। कुछ कहना चाहते हो उसे?”

नहीं,” उसने कहा। “बस उसे बता देना कि मैं उसके लिए प्रार्थना कर रहा हूँ।”

........

जब रॉयल सोलह वर्ष का था, तब युद्ध छिड़ गया और सभी नौजवान, पहले ताकतवर और संपन्न लोगों के बेटे, और फिर उसके अपने लोगों के बेटे विदेशी देशों में बिखर गए। गैब्रियल हर रात घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना करता कि रॉयल को न जाना पड़े। लेकिन मैंने सुना है कि वह जाना चाहता है,” डेबरा ने कहा। “उसकी नानी ने मुझे बताया कि वह उसे बहुत परेशान कर रहा है क्योंकि वह उसे जाने और सेना में भर्ती होने नहीं देती।”

लगता है,” उसने उदासीनता से कहा, “इन नौजवानों को तब तक चैन नहीं मिलेगा जब तक कहीं जाकर अपने को अपाहिज या मरवा न लें।”

हम्म, तुम जानते ही हो कि जवान लोग ऐसे ही होते हैं,” डेबरा ने प्रसन्नता से कहा। “तुम उन्हें कभी कुछ समझा नहीं सकते और जब उन्हें बात समझ आती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।”

उसने महसूस किया कि जब भी डेबरा रॉयल के बारे में बात करती, उसके भीतर कहीं गहरी छिपी हुई कोई आशंका जागकर सुनने और प्रतीक्षा करने लगती थी। कई बार उसने सोचा था कि अपने मन का बोझ उसके सामने खोल दे। लेकिन डेबरा उसे कभी ऐसा अवसर नहीं देती थी। वह कभी ऐसी कोई बात नहीं कहती थी, जिससे उसे स्वीकारोक्ति के माध्यम से मिलने वाली वह उपचारकारी विनम्रता प्राप्त हो सके या... बल्कि जिससे वह अंततः यह कह सके कि उसकी बाँझपन के कारण वह उससे कितनी घृणा करता था। वह उससे वही माँगती थी, जो वह स्वयं देती थी... कुछ नहीं। कम-से-कम ऐसा कुछ भी नहीं, जिसके लिए उसे दोषी ठहराया जा सके। वह उसका घर सँभालती थी और उसके साथ शय्या साझा करती थी। वह बीमारों से मिलने जाती थी, जैसा वह हमेशा करती आई थी और मरने वालों को सांत्वना देती थी, जैसा वह हमेशा करती आई थी। जिस विवाह के बारे में उसने कभी सोचा था कि दुनिया उसका मज़ाक उड़ाएगी, उसने स्वयं को दुनिया की नज़रों में इतना उचित सिद्ध कर दिया था कि अब कोई भी उन दोनों के लिए किसी और तरह के जीवन या संबंध की कल्पना नहीं कर सकता था। यहाँ तक कि डेबरा की कमजोरी भी, जो वर्षों के साथ और अधिक स्पष्ट होती गई थी और जिसके कारण उसे अधिक बार बिस्तर पर पड़े रहना पड़ता था और उसका बाँझपन भी... ठीक उसी तरह जैसे उसका पहले का अपमान। अब इस बात के रहस्यमय प्रमाण जैसे लगने लगे थे कि उसने स्वयं को पूरी तरह परमेश्वर को समर्पित कर दिया था।

उसकी पिछली बात के बाद उसने सावधानी से कहा, “आमीन,” और अपना गला साफ किया।

सच कहती हूँ,” उसने उसी प्रसन्नता से कहा, “कभी-कभी वह मुझे तुम्हारी याद दिलाता है, जब तुम जवान थे।”

उसने उसकी ओर नहीं देखा, यद्यपि उसे महसूस हो रहा था कि उसकी आँखें उसी पर टिकी हैं। उसने अपनी बाइबल उठाई और उसे खोल लिया। जवान लड़के,” उसने कहा, “सब एक जैसे होते हैं, जब तक यीशु उनके हृदय को बदल नहीं देते।”

रॉयल युद्ध में नहीं गया लेकिन उस गर्मी में दूसरे शहर के घाटों पर काम करने के लिए घर से दूर चला गया। युद्ध समाप्त होने तक गैब्रियल ने उसे फिर नहीं देखा।

उस दिन जिसे वह जीवन भर कभी नहीं भूलने वाला था, काम समाप्त होने के बाद वह डेबरा के लिए दवा खरीदने गया। डेबरा पीठ में भयंकर दर्द के कारण बिस्तर पर पड़ी थी। अभी रात नहीं हुई थी और सड़कें धूसर तथा सुनसान थीं। सिवाय इसके कि यहाँ-वहाँ किसी बिलियर्ड-कक्ष या शराबखाने से बाहर फैलती रोशनी में आधा दर्जन-आधा दर्जन गोरे आदमी समूह बनाकर खड़े थे। जब भी वह किसी समूह के पास से गुजरता, वहाँ अचानक सन्नाटा छा जाता और वे उसे धृष्टता से देखते रहते, मानो उसे मार डालने के लिए बेचैन हों। लेकिन वह कुछ नहीं कहता। सिर झुकाए आगे बढ़ता रहता और वे जानते ही थे कि वह एक उपदेशक है। सड़कों पर उसके सिवा एक भी अश्वेत व्यक्ति नहीं था। उस सुबह शहर के ठीक बाहर एक सैनिक का शव मिला था। उसकी वर्दी उस जगह से चिथड़ी-चिथड़ी थी जहाँ उसे कोड़े मारे गए थे और काली त्वचा के भीतर से कच्चा, लाल मांस दिखाई दे रहा था। वह एक पेड़ के नीचे औंधे मुँह पड़ा था। उसके नाखून उस रगड़ी हुई मिट्टी में धँसे हुए थे। जब उसे पलटाया गया तो उसकी आँखें आश्चर्य और भय से ऊपर की ओर खुली हुई थीं। उसका मुँह पूरी तरह खुला हुआ और जकड़ा पड़ा था। उसकी पतलून खून से भीगी हुई थी और फटी हुई थी। ठंडी, सफेद सुबह की हवा के सामने उसकी जाँघों के घने बाल खुले दिखाई दे रहे थे। आपस में चिपके हुए, काले और जंग जैसे लाल। वह घाव, जो अब भी मानो धड़क रहा था। उसे चुपचाप घर ले जाया गया था और अब वह बंद दरवाज़ों के पीछे पड़ा था। उसके जीवित परिजन उसके पास बैठे रो रहे थे, प्रार्थना कर रहे थे, बदले के सपने देख रहे थे और अगली विपत्ति की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब किसी ने गैब्रियल के पैरों के पास फुटपाथ पर थूक दिया। वह बिना अपना चेहरा बदले आगे बढ़ता रहा। उसके पीछे उसने धीमी, निंदात्मक फुसफुसाहट सुनी कि वह एक अच्छा निग्रो है। निश्चित ही किसी तरह की मुसीबत खड़ी करने वाला नहीं। वह आशा कर रहा था कि उससे कोई बात न करे कि उसे इन इतने परिचित गोरे चेहरों में से किसी के सामने मुस्कराना न पड़े। वह चलते हुए अपनी सावधानी से इस तरह जकड़ा हुआ था जैसे, कोई तीर अपने धनुष पर तना हो। वह अपनी माँ द्वारा सिखाई प्रार्थना के अनुसार प्रेममय करुणा के लिए प्रार्थना कर रहा था। फिर भी वह अपने जूते के नीचे किसी गोरे आदमी के माथे के स्पर्श की कल्पना कर रहा था बार-बार, तब तक, जब तक सिर टूटी हुई गर्दन पर डगमगाने न लगे और उसके पैर को उस तेज़ी से बहते खून के सिवा कुछ महसूस न हो। वह सोच रहा था कि यह केवल प्रभु का हाथ था जिसने रॉयल को उससे दूर कर दिया था क्योंकि अगर वह यहाँ रहता तो वे निश्चित ही उसे मार डालते। तभी एक मोड़ मुड़ते ही उसकी नज़र रॉयल के चेहरे पर पड़ी।

रॉयल अब गेब्रियल जितना ही लंबा, चौड़े कंधों वाला और दुबला हो गया था। उसने नीले रंग का नया सूट पहन रखा था, जिस पर नीली चौड़ी धारियाँ थीं। बगल में भूरे कागज़ में बँधा, डोरी से लपेटा हुआ एक पुलिंदा दबा रखा था। एक क्षण के लिए वह और गेब्रियल एक-दूसरे को बिना पहचान के देखते रहे। रॉयल के चेहरे पर निर्विकार शत्रुता थी। फिर, जैसे उसे गेब्रियल का चेहरा याद आ गया हो, उसने होंठों के बीच दबाई जलती हुई सिगरेट निकाली और पीड़ाभरी शिष्टता से कहा, “आप कैसे हैं?” उसकी आवाज़ भारी और खुरदरी थी और उसकी साँसों में हल्की-सी व्हिस्की की गंध थी।

लेकिन गेब्रियल तुरंत बोल नहीं सका। वह अपनी साँस सँभालने की कोशिश करता रहा। फिर उसने कहा, “नमस्कार।” दोनों उस सुनसान चौराहे पर इस तरह खड़े रहे, मानो उनमें से कोई दूसरे के मुँह से किसी अत्यंत महत्वपूर्ण बात के कहे जाने की प्रतीक्षा कर रहा हो। तभी, जब रॉयल वहाँ से जाने ही वाला था गेब्रियल को पूरे शहर में फैले उन गोरे लोगों का ध्यान आया।

लड़के,” वह चिल्लाया, “तुम्हारे पास ज़रा भी अक़्ल नहीं है क्या? तुम्हें मालूम नहीं कि इस तरह यहाँ बाहर घूमने का तुम्हें कोई हक़ नहीं? ”

रॉयल उसे घूरता रहा। वह तय नहीं कर पा रहा था कि हँसे या इस बात का बुरा माने। तब गेब्रियल ने कुछ नरम होकर कहा, “मेरा मतलब है कि तुम्हें सावधान रहना चाहिए, बेटे। आज शहर में गोरे लोगों के सिवा कोई नहीं है। उन्होंने कल रात… हत्या कर दी…”

इसके आगे वह बोल नहीं सका। उसकी आँखों के सामने मानो एक दृश्य उभर आया। रॉयल का शरीर, भारी और हमेशा के लिए निश्चल, धरती पर पड़ा हुआ और उसकी आँखें आँसुओं से धुँधली हो गईं।

रॉयल उसे देखता रहा। उसके चेहरे पर अलगाव से युक्त क्रोध से मिली हुई करुणा थी।

मुझे मालूम है,” उसने अचानक कहा, “लेकिन वे मुझे कुछ नहीं करेंगे। इस हफ्ते के लिए उन्हें अपना एक नीग्रो मिल चुका है। मैं कहीं दूर नहीं जा रहा।”

तब जिस चौराहे पर वे खड़े थे, वह अचानक जैसे भयंकर खतरे के भार से काँप उठा। एक क्षण के लिए ऐसा लगा कि मृत्यु और विनाश उनकी ओर दौड़े चले आ रहे हैं। दो अश्वेत पुरुष उस अँधेरे और खामोश शहर में अकेले खड़े थे, जहाँ गोरे लोग शेरों की तरह घूम रहे थे। यदि वे दोनों यहाँ एक साथ बातें करते हुए मिल जाते तो उनसे किसी दया की क्या आशा की जा सकती थी? निश्चित ही लोग समझते कि वे बदला लेने की साज़िश कर रहे हैं। गेब्रियल अपने बेटे को बचाने के विचार से वहाँ से हटने लगा।

ईश्वर तुम्हें आशीर्वाद दे, लड़के,” गेब्रियल ने कहा। “अब तुम जल्दी से चले जाओ।”

हाँ,” रॉयल ने कहा, “धन्यवाद।” वह आगे बढ़ा और मुड़कर अगली गली में जाने ही वाला था कि उसने गेब्रियल की ओर फिर देखा। लेकिन आप भी सावधान रहिए,” उसने कहा और मुस्कराया।

वह मुड़ गया और गेब्रियल उसके कदमों की आवाज़ सुनता रहा, जो धीरे-धीरे दूर होती गई। फिर वे आवाज़ें खामोशी में डूब गईं। उसने रॉयल को रास्ते में मार गिराने के लिए उठती हुई कोई आवाज़ नहीं सुनी। जल्द ही हर ओर फिर सन्नाटा छा गया।

दो वर्ष भी पूरे नहीं हुए थे कि डेबरा ने उसे बताया कि उसका बेटा मर गया है।

.... .....

अब जॉन ने प्रार्थना करने की कोशिश की। उसके चारों ओर प्रार्थनाओं का भारी शोर था, रोने-बिलखने और गीत का एक बड़ा शोर। सिस्टर मैककैंडलेस ही गीत का नेतृत्व कर रही थीं। लगभग अकेली वही गा रही थीं क्योंकि बाकी लोग कराहना और रोना बंद नहीं कर रहे थे। यह वही गीत था, जिसे उसने जीवन भर सुना था,

प्रभु, मैं यात्रा पर हूँ, प्रभु, मैंने यात्रा के जूते पहन लिए हैं।”

अपनी आँखें ऊपर उठाए बिना भी वह उन्हें पवित्र स्थान पर खड़ी देख सकता था। वे वहाँ आने वालों के ऊपर प्रभु के लहू की दुहाई दे रही थीं। उनका सिर पीछे की ओर उठा हुआ था, आँखें बंद थीं और उनका पैर ज़ोर-ज़ोर से फर्श पर पड़ रहा था। उस समय वह उन सिस्टर मैककैंडलेस जैसी नहीं दिख रही थीं, जो कभी-कभी उनके घर मिलने आया करती थीं। न ही उस स्त्री जैसी, जो हर दिन शहर के बीचोंबीच गोरे लोगों के लिए काम करने जाती थी और शाम को घर लौटते समय उन लंबी, अँधेरी सीढ़ियों पर अत्यंत थकान के साथ चढ़ती थी। नहीं, अब उनका चेहरा मानो रूपांतरित हो गया था। उनके उद्धार की शक्ति ने उनके पूरे अस्तित्व को नया बना दिया था।

उद्धार सचमुच होता है,” एक आवाज़ ने उससे कहा, “परमेश्वर सचमुच है। मृत्यु जल्दी आए या देर से फिर तुम क्यों देर कर रहे हो? यही समय है प्रभु को खोजने और उसकी सेवा करने का।” इन सभी लोगों के लिए उद्धार सच था और उसके लिए भी सच हो सकता था। उसे केवल अपना हाथ बढ़ाना था और परमेश्वर उसे स्पर्श कर देता। उसे केवल पुकारना था और परमेश्वर उसकी सुन लेता। ये सभी लोग, जो अब उससे इतनी दूर, इतने आनंद के साथ पुकार रहे थे, कभी उसी की तरह पाप में डूबे हुए थे। उन्होंने पुकारा था और परमेश्वर ने उनकी सुन ली थी तथा उन्हें उनकी सारी विपत्तियों से छुड़ा लिया था। जो परमेश्वर ने दूसरों के लिए किया था, वह उसके लिए भी कर सकता था।

लेकिन उनकी सारी विपत्तियों से? फिर उसकी माँ क्यों रोती थी? उसके पिता क्यों त्यौरियाँ चढ़ाए रहते थे? यदि परमेश्वर की शक्ति इतनी महान थी तो उनका जीवन इतना परेशानियों से भरा क्यों था?

उसने पहले कभी उनके दुखों के बारे में सोचने की कोशिश नहीं की थी बल्कि पहले कभी उसने इतने संकरे स्थान में उनके दुखों का इस तरह सामना ही नहीं किया था। इतने वर्षों से वह दुख शायद उसके पीछे मौजूद था। लेकिन उसने कभी मुड़कर उसका सामना नहीं किया था। अब वह उसके सामने खड़ा था, उसे घूर रहा था। अब उससे बच निकलने का कोई रास्ता नहीं था। उसका मुँह असीम रूप से फैल गया था। वह उसे निगल जाने के लिए तैयार था। केवल परमेश्वर का हाथ ही उसे बचा सकता था। फिर भी, उसी क्षण, किसी तरह उसे उस तूफ़ान की आवाज़ से यह मालूम हो गया जो अब उसके भीतर इतनी पीड़ा के साथ उठ रहा था, जो उसके मन के उस विचित्र, फिर भी सांत्वना देने वाले संसार को, क्या हमेशा के लिए? उजाड़ रहा था कि परमेश्वर का हाथ निश्चित रूप से उसे उस घूरते हुए, प्रतीक्षा करते मुँह के भीतर ले जाएगा। उन फैले हुए जबड़ों में, उस आग जैसी गर्म साँस के भीतर। उसे अँधेरे में ले जाया जाएगा और वह अँधेरे में ही पड़ा रहेगा। जब तक कि आने वाले किसी ऐसे समय में, जिसका हिसाब नहीं लगाया जा सकता, परमेश्वर का हाथ नीचे पहुँचकर उसे उठा न ले। उसे जॉन को, जो अँधेरे में पड़ा रहने के बाद अब स्वयं नहीं रहेगा बल्कि कोई दूसरा मनुष्य बन चुका होगा। वह बदल चुका होगा, जैसा वे कहते थे, सदा के लिए। वह अपमान में बोया गया होगा और सम्मान में उठाया जाएगा। वह नए सिरे से जन्मा होगा।

तब वह अपने सांसारिक पिता का पुत्र नहीं रहेगा बल्कि अपने स्वर्गीय पिता, राजा का पुत्र होगा। तब उसे अपने पिता से डरने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि वह अपने पिता के साथ अपना विवाद मानो उसके सिर के ऊपर से स्वर्ग तक ले जा सकेगा। उस पिता के पास, जो उससे प्रेम करता था, जो उसके लिए देह धारण करके धरती पर आया था और उसके लिए मर गया था। तब परमेश्वर की दृष्टि में उसकी आवाज़ में और उसके प्रेम में वह और उसका पिता बराबर होंगे। तब उसका पिता उसे फिर मार नहीं सकेगा, न उसे तुच्छ समझ सकेगा, न उसका उपहास कर सकेगा। उसे, जॉन को, प्रभु के अभिषिक्त को। तब वह अपने पिता से वैसे बात कर सकेगा जैसे मनुष्य एक-दूसरे से बात करते हैं। जैसे, बेटे अपने पिता से बात करते हैं। काँपते हुए नहीं बल्कि मधुर विश्वास के साथ। घृणा से नहीं बल्कि प्रेम से। उसका पिता उसे अपने से बाहर नहीं निकाल सकेगा क्योंकि परमेश्वर ने उसे अपने भीतर समेट लिया होगा।

फिर भी, काँपते हुए जॉन जानता था कि वह यह नहीं चाहता था। वह अपने पिता से प्रेम नहीं करना चाहता था। वह उससे घृणा करना चाहता था, उस घृणा को सँजोकर रखना चाहता था और एक दिन अपनी उस घृणा को शब्द देना चाहता था। वह अपने पिता का चुंबन नहीं चाहता था। अब तो बिल्कुल नहीं। वह जिसने इतने प्रहार सहे थे। वह आने वाले किसी भी दिन की कल्पना नहीं कर सकता था, चाहे वह कितना ही बदल क्यों न जाए। जब वह अपने पिता का हाथ पकड़ना चाहेगा। आज रात उसके भीतर जो तूफ़ान उमड़ रहा था, वह इस घृणा को उखाड़ नहीं सकता था। यह जॉन की पूरी दुनिया का सबसे शक्तिशाली वृक्ष था। उस बाढ़ के समय में, जो आज रात जॉन के भीतर उमड़ आई थी, यही एक चीज़ थी जो अब भी बची हुई थी।

थकान तथा उलझन में उसने वेदी के सामने अपना सिर और भी झुका लिया। ओह, काश उसका पिता मर जाता! तब जॉन के सामने वह रास्ता खुल जाता जैसा कि दूसरों के लिए खुलना ही चाहिए। फिर भी कब्र में पड़े होने पर भी वह उससे घृणा करता रहता। उसके पिता ने केवल परिस्थितियाँ बदली होतीं, वह फिर भी जॉन का पिता ही रहता। सज़ा के लिए, न्याय के लिए, बदला लेने के लिए केवल कब्र पर्याप्त नहीं थी। नरक, अनंत, निरंतर, कभी समाप्त न होने वाला, सदा जलता हुआ नरक। यही उसके पिता का भाग होना चाहिए। जॉन वहाँ मौजूद हो। देखता रहे, ठहरा रहे, मुस्कराए, ज़ोर से हँसे और अंततः अपने पिता की यातना-भरी चीखें सुने।

तब भी सब समाप्त नहीं होगा। अनंत पिता।

ओह, उसके विचार कितने दुष्ट थे। लेकिन आज रात उसे इसकी परवाह नहीं थी। इस सारे बवंडर में कहीं, उसके हृदय के अँधेरे में, इस तूफ़ान के भीतर कुछ था। कुछ ऐसा जिसे उसे खोज निकालना था। वह प्रार्थना नहीं कर सकता था। उसका मन स्वयं समुद्र जैसा था। उथल-पुथल से भरा और इतना गहरा कि सबसे साहसी मनुष्य भी उसकी गहराई में उतरने का साहस न कर सके। कभी-कभी वह समुद्र की अतल गहराइयों में बहुत पहले भुला दिए गए खज़ाने और मलबे को ऊपर उछाल देता। नंगी आँखों को विस्मित कर देने वाली चीज़ें, हड्डियाँ और जवाहरात, विचित्र सीपियाँ, वह जेली जो कभी मांस रही होगी, वे मोती जो कभी आँखें रहे होंगे। वह इस समुद्र की दया पर था। चारों ओर अँधेरा था और वह उसमें लटका हुआ था।

..... ......

उस दिन की सुबह, जब गेब्रियल उठा और काम पर निकलने लगा, आकाश बहुत नीचे झुका हुआ और लगभग काला था और हवा इतनी भारी थी कि साँस लेना कठिन था। दोपहर बाद हवा तेज़ हो गई, आकाश खुल गया और बारिश शुरू हो गई। बारिश इस तरह बरसने लगी, मानो एक बार फिर स्वर्ग में प्रभु को बाढ़ के सदुपयोगों के बारे में समझा दिया गया हो। वह झुके हुए राहगीर को अपने आगे धकेलती चली गई, बच्चों को धड़ाधड़ घरों के भीतर पहुँचा दिया, ऊँची, मज़बूत दीवार, फिर झोंपड़ी की दीवार और फिर केबिन की दीवार से भयंकर क्रोध के साथ टकराती रही। पेड़ों की छाल और पत्तियों पर प्रहार करती रही, चौड़ी घास को रौंदती रही और फूलों की गर्दन तोड़ती रही। दुनिया हर जगह, हमेशा के लिए अँधेरी हो गई। खिड़कियाँ इस तरह बह रही थीं, मानो उनके शीशों में अनंत काल के सारे आँसू समा गए हों और वे हर क्षण भीतर की ओर टूट पड़ने की धमकी दे रहे हों। धरती पर अचानक टूट पड़े इस अनियंत्रित बल के सामने। गेब्रियल पानी की इस उजाड़ दुनिया के बीच घर की ओर चला। हालाँकि बारिश हवा को साफ करने में असफल रही थी। जहाँ डेबरा उसकी प्रतीक्षा उस बिस्तर पर कर रही थी, जिसे वह इन दिनों शायद ही कभी छोड़ने की कोशिश करती थी।

घर में आए उसे पाँच मिनट भी नहीं हुए थे कि उसे डेबरा की चुप्पी के स्वर में आया परिवर्तन महसूस हो गया। उस चुप्पी में कुछ प्रतीक्षा कर रहा था जैसे, किसी भी क्षण झपट पड़ने के लिए तैयार हो।

वह मेज़ पर बैठा खाना खा रहा था, जो डेबरा ने बड़ी कठिनाई से तैयार किया था। उसने उसकी ओर देखा और पूछा, “आज कैसी तबीयत है, बुढ़िया?”

लगभग हमेशा जैसी ही,” उसने मुस्कराकर कहा। “न कुछ बेहतर महसूस होता है, न कुछ बदतर।”

हम चर्च के लोगों से तुम्हारे लिए प्रार्थना करवाएँगे,” उसने कहा, “और तुम्हें फिर अपने पैरों पर खड़ा कर देंगे।”

उसने कुछ नहीं कहा और गेब्रियल फिर अपनी थाली की ओर ध्यान देने लगा। लेकिन वह उसे देख रही थी। उसने ऊपर देखा।

आज मैंने एक बहुत बुरी खबर सुनी,” उसने धीरे-धीरे कहा।

क्या सुना?”

सिस्टर मैकडोनल्ड आज दोपहर यहाँ आई थीं और प्रभु ही जानता है, उनकी हालत कितनी दयनीय थी।” वह बिल्कुल स्थिर बैठा उसे घूरता रहा। आज उन्हें एक चिट्ठी मिली है, जिसमें लिखा है कि उनका पोता, तुम जानते हो, वही रॉयल, शिकागो में मारा गया। लगता है, प्रभु ने उस परिवार पर कोई अभिशाप डाल दिया है। पहले माँ और अब बेटा।”

एक क्षण तक वह मूर्खों की तरह उसे घूरता ही रह गया। उसके मुँह में रखा खाना धीरे-धीरे भारी और सूखा होता गया। बाहर बारिश की सेनाएँ दौड़ रही थीं और खिड़की पर बिजली चमक रही थी। फिर उसने निगलने की कोशिश की और उसका जी मिचलाने लगा। वह काँपने लगा। हाँ,” उसने कहा, अब उसकी ओर देखे बिना, “वह करीब एक साल से शिकागो में रह रहा था। बस शराब पीता और आवारागर्दी करता था। उसकी दादी ने मुझे बताया कि लगता है, एक रात वह कुछ उत्तरी नीग्रो लोगों के साथ जुआ खेलने बैठ गया था। उनमें से एक को गुस्सा आ गया क्योंकि उसे लगा कि वह लड़का उसे धोखा देने की कोशिश कर रहा है। उसने चाकू निकाल लिया और उसे घोंप दिया। गले में चाकू मारा। उसकी दादी कहती है कि वह वहीं उस शराबखाने के फर्श पर मर गया। उसे अस्पताल तक ले जाने का समय भी नहीं मिला।” वह बिस्तर पर मुड़ी और उसकी ओर देखने लगी। प्रभु ने उस बेचारी औरत को सचमुच बहुत भारी क्रूस उठाने को दिया है।”

तब उसने बोलने की कोशिश की। उसे वह चर्च का कब्रिस्तान याद आया, जहाँ एस्तेर को दफनाया गया था। रॉयल की पहली, क्षीण-सी चीख याद आई। क्या वह उसे घर वापस लाएगी?”

वह उसे घूरती रही। घर? अरे, वे तो उसे वहीं किसी सामूहिक कब्रिस्तान में दफना भी चुके हैं। अब उस बेचार लड़के को फिर कभी कोई देखने वाला नहीं है।”

तब वह रोने लगा, बिना कोई आवाज़ किए। मेज़ पर बैठा हुआ, उसका पूरा शरीर काँप रहा था। वह बहुत देर तक उसे देखती रही और अंततः उसने अपना सिर मेज़ पर रख दिया, जिससे कॉफी का प्याला उलट गया। वह फूट-फूटकर रोने लगा। तब ऐसा लगा मानो हर जगह रोना ही रोना है। दुख के सागर पूरी दुनिया पर उमड़ रहे हैं। गेब्रियल रो रहा था, बारिश छत पर बरस रही थी, खिड़कियों पर प्रहार कर रही थी और मेज़ के किनारे से कॉफी टपक रही थी। अंत में उसने पूछा, गेब्रियल… वह रॉयल… वह तुम्हारा अपना खून था, है न?”

हाँ,” उसने कहा। अपनी पीड़ा के बीच भी उसके होंठों से ये शब्द निकलकर उसे एक अजीब संतोष दे रहे थे। “वह मेरा बेटा था।”

फिर फिर से चुप्पी छा गई। फिर उसने पूछा, “तुमने उस लड़की को दूर भेजा था, है न? उस संदूक में रखे पैसों से?”

हाँ,” उसने कहा, “हाँ।”

गेब्रियल,” उसने पूछा, “तुमने ऐसा क्यों किया? तुमने उसे अकेले मरने के लिए क्यों जाने दिया? तुमने कभी कुछ कहा क्यों नहीं?”

अब वह कोई उत्तर नहीं दे सका। वह अपना सिर भी नहीं उठा सका।

क्यों?” उसने ज़ोर देकर पूछा। “मैंने तुमसे कभी नहीं पूछा, गेब्रियल। लेकिन मुझे जानने का अधिकार है। खासकर तब, जब तुम बेटे के लिए इतने तरसते थे?”

तब काँपते हुए वह मेज़ से उठा और धीरे-धीरे खिड़की के पास जाकर बाहर देखने लगा।

मैंने अपने परमेश्वर से क्षमा माँगी,” उसने कहा। “लेकिन मैं किसी वेश्या के बेटे को नहीं चाहता था।”

एस्तेर कोई वेश्या नहीं थी,” उसने शांत स्वर में कहा।

वह मेरी पत्नी नहीं थी। मैं उसे अपनी पत्नी नहीं बना सकता था। मेरे पास पहले से तुम थी” उसने आखिरी शब्द ज़हर भरे स्वर में कहे, “एस्तेर का मन प्रभु में नहीं था। वह मुझे भी अपने साथ सीधे नरक में खींच ले जाती।”

वह लगभग ऐसा कर ही चुकी थी,” डेबरा ने कहा।

प्रभु ने मुझे रोक लिया,” उसने कहा। वह गरज सुन रहा था और बिजली को चमकते देख रहा था। “उसने अपना हाथ बढ़ाकर मुझे रोक लिया।”  फिर कुछ क्षण बाद वह कमरे की ओर मुड़ा। मैं और कुछ कर ही नहीं सकता था,” वह चिल्लाया। “मैं और क्या करता? मैं एस्तेर के साथ कहाँ जाता जबकि मैं एक उपदेशक भी था? और मैं तुम्हारे साथ क्या करता?” उसने उसकी ओर देखा। वह बूढ़ी, अश्वेत और धैर्यवान थी। उसके शरीर से बीमारी, बुढ़ापे और मृत्यु की गंध आ रही थी। आह,” उसने कहा, आँसू अब भी बह रहे थे, “मुझे यक़ीन है कि आज तुम बहुत खुश हुई होगी, बुढ़िया, है न? जब उसने तुम्हें बताया कि रॉयल मेरा बेटा... मर गया है। तुम्हारा तो कभी कोई बेटा हुआ ही नहीं।” वह फिर खिड़की की ओर मुड़ गया। फिर पूछा, “तुम्हें यह बात कब से मालूम थी?”

मुझे मालूम था,” उसने कहा, “उसी शाम से, बहुत पहले, जब एस्तेर चर्च में आई थी।”

तुम्हारा मन बहुत दुष्ट है,” उसने कहा। “तब मैंने उसे छुआ तक नहीं था।”

नहीं,” उसने धीरे से कहा, “लेकिन तब तक तुम मुझे छू चुके थे।”

वह खिड़की से थोड़ा हटकर बिस्तर के पायताने खड़ा हो गया और ऊपर से उसकी ओर देखने लगा।

गेब्रियल,” उसने कहा, “मैं इन सारे वर्षों से प्रार्थना करती रही कि प्रभु मेरे शरीर को स्पर्श करे और मुझे भी उन औरतों जैसा बना दे। उन सब औरतों जैसा, जिनके साथ तुम हर समय जाया करते थे।” वह बहुत शांत थी। उसके चेहरे पर बहुत गहरी कड़वाहट और धैर्य था। लगता है, यह उसकी इच्छा नहीं थी। लगता है, मैं किसी तरह यह भूल ही नहीं सकी… कि बहुत पहले, जब मैं सिर्फ एक लड़की थी, उन्होंने मेरे साथ क्या किया था।” वह कुछ क्षण रुकी और दूसरी ओर देखने लगी। लेकिन, गेब्रियल, अगर तुमने कुछ कह दिया होता... यहाँ तक कि तब भी, जब उस बेचारी लड़की को दफनाया गया था... अगर तुम उस बेचार लड़के को अपना मान लेते तो मुझे किसी बात की परवाह नहीं होती। न इस बात की कि लोग क्या कहते, न इस बात की कि हमें कहाँ जाना पड़ता, न किसी और चीज़ की। मैं उसे अपने बेटे की तरह पालती, मैं अपने परमेश्वर की कसम खाकर कहती हूँ, पालती और शायद वह आज जीवित होता।”

डेबरा,” उसने पूछा, “तुम इतने समय से क्या सोचती रही हो?”

वह मुस्कराई। मैं सोचती रही हूँ,” उसने कहा, “कि जब प्रभु तुम्हें तुम्हारे मन की इच्छा देता है, तब तुम्हें काँपना शुरू कर देना चाहिए।” वह रुकी। मैं तुम्हें तब से चाहती थी, जब से मैंने किसी चीज़ को चाहना जाना था। और फिर मुझे तुम मिल गए।”

वह खिड़की की ओर वापस चला गया। आँसू उसके चेहरे पर बह रहे थे।

गेब्रियल,” उसने एक अलग, अधिक दृढ़ स्वर में कहा, “तुम्हें परमेश्वर से क्षमा माँगनी चाहिए। तब तक उससे हाथ मत छोड़ना, जब तक वह तुम्हें यह विश्वास न दिला दे कि तुम्हें क्षमा कर दिया गया है।”

हाँ,” उसने आह भरते हुए कहा, “मैं प्रभु की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।”

फिर केवल बारिश की आवाज़ के सिवा कोई आवाज़ नहीं थी। बारिश बाल्टियों की तरह बरस रही थी। जैसा कि लोग कहते हैं, ऐसा लग रहा था मानो कुदालों और नीग्रो बच्चों की बारिश हो रही हो। आकाश में फिर बिजली चमकी और बादल गरजे।

सुनो,” गेब्रियल ने कहा। “परमेश्वर बोल रहा है।”

..... ......

धीरे-धीरे अब वह अपने घुटनों से उठा क्योंकि चर्च का आधा हिस्सा खड़ा हो चुका था। सिस्टर प्राइस, सिस्टर मैककैंडलेस और प्रेइंग मदर वॉशिंगटन और युवा एला मे अपनी कुर्सी पर बैठी एलिशा को देख रही थी, जो वहीं पड़ा था। फ्लोरेंस और एलिज़ाबेथ अब भी घुटनों के बल थीं और जॉन भी घुटनों के बल था।

उठते हुए गैब्रियल ने सोचा कि कितने समय पहले प्रभु उसे इस चर्च में लेकर आए थे और कैसे एक रात उसके उपदेश देने के बाद एलिज़ाबेथ उस लंबे गलियारे से होती हुई वेदी तक आई थी ताकि अपने पाप के लिए परमेश्वर के सामने पश्चात्ताप कर सके। फिर उन्होंने विवाह कर लिया था क्योंकि जब उसने कहा था कि वह बदल गई है तो उसने उसकी बात पर विश्वास किया था। वह सचमुच बदल गई थी। वह और उसका वह अनाम बच्चा, वही संकेत थे जिसके लिए वह इतने अंधकारमय वर्षों तक प्रभु के सामने ठहरा रहा था। ऐसा लगा था मानो उन्हें देखकर प्रभु ने उसे वह सब फिर लौटा दिया हो जो उससे खो गया था।

फिर, जब वह दूसरों के साथ गिरे हुए एलिशा के चारों ओर खड़ा था, जॉन अपने घुटनों से उठ खड़ा हुआ। उसने एलिशा और बाकी लोगों पर विस्मित, उनींदी और भौंहें सिकोड़ती हुई दृष्टि डाली और थोड़ा काँप उठा जैसे, उसे ठंड लग रही हो। फिर उसने अपने पिता की आँखों को महसूस किया और ऊपर अपने पिता की ओर देखा।

उसी क्षण फर्श पर पड़े एलिशा ने अग्निमय भाषा में बोलना शुरू कर दिया। पवित्र आत्मा की शक्ति के अधीन। जॉन और उसके पिता एक-दूसरे को देखते रह गए जैसे, स्तब्ध होकर गूंगे और निश्चल हो गए हों। उनके बीच कुछ जीवित हो उठा हो जबकि पवित्र आत्मा बोल रहा था। गैब्रियल ने जॉन के चेहरे पर इससे पहले कभी ऐसा भाव नहीं देखा था। उस क्षण, जब आत्मा बोल रहा था, जॉन की आँखों से शैतान झाँकता हुआ प्रतीत हो रहा था। फिर भी उस रात जॉन की घूरती हुई आँखों ने गैब्रियल को दूसरी आँखों की याद दिला दीं। अपनी माँ की आँखें, जब वह उसे पीटती थी। फ्लोरेंस की आँखें, जब वह उसका मज़ाक उड़ाती थी। डेबरा की आँखें, जब वह उसके लिए प्रार्थना करती थी। एस्तेर की आँखें और रॉयल की आँखें। आज रात एलिज़ाबेथ की आँखें, रॉय के उसे गाली देने से पहले और रॉय की आँखें, जब रॉय ने कहा था, “तू काला हरामी है।” जॉन ने अपनी आँखें नहीं झुकाईं बल्कि ऐसा लगता था मानो वह हमेशा के लिए गैब्रियल की आत्मा की गहराई में घूरते रहना चाहता हो। गैब्रियल, मुश्किल से विश्वास कर पा रहा था कि जॉन इतना ढीठ हो सकता है। एलिज़ाबेथ के उस धृष्ट, नाजायज़ बेटे को क्रोध और भय से घूरता रहा, जो बुराई में अचानक इतना बूढ़ा हो गया था। उसने लगभग अपना हाथ उठाकर उसे मारना चाहा। लेकिन हाथ नहीं उठाया क्योंकि एलिशा उनके बीच पड़ा था। तब उसने बिना आवाज़ के केवल अपने होंठों से कहा, घुटनों के बल बैठ जाओ।” जॉन अचानक मुड़ा। उसकी यह हरकत किसी अभिशाप जैसी थी। फिर वेदी के सामने घुटनों के बल बैठ गया।

 



[1] यह एक छोटा गोल वाद्य-यंत्र होता है, जिसके चारों ओर धातु की छोटी-छोटी झंकारियाँ लगी होती हैं। इसे हाथ में पकड़कर हिलाया या थपथपाया जाता है।

[2] यह प्रसंग यीशु के बपतिस्मा से जुड़ा है, जहाँ पवित्र आत्मा के कबूतर के समान उतरने का वर्णन मिलता है।

[3] बाइबल के अनुसार, इस्राएली लोग मिस्र में गुलाम थे। ईश्वर ने मूसा (Moses) के माध्यम से उन्हें मिस्र की गुलामी से बाहर निकाला और प्रतिज्ञात देश की ओर ले गया। इस घटना को Exodus (निर्गमन) कहा जाता है। इसलिए बाइबल में “Egypt से बाहर निकालना” अक्सर केवल भौगोलिक स्थान छोड़ने का अर्थ नहीं रखता, बल्कि गुलामी और बंधन से मुक्ति एवं स्वतंत्रता की ओर ले जाना है।

 

[4] पादरी

[5] बाइबल के वचन

[6] प्रशासनिक जिले

[7] यह बाइबल के पुराने नियम (Old Testament) की पुस्तक यशायाह (Isaiah) का अध्याय 6 है।

[8] यहोवा (YHWH) पुराने नियम में इस्राएल के परमेश्वर का विशेष नाम है। अंग्रेज़ी बाइबलों में इसे प्रायः LORD (बड़े अक्षरों में) के रूप में लिखा जाता है।

[9] Eden — ईडन का बाग, जहाँ आदम और हव्वा रहते थे।

  Cain — कैन, जिसने अपने भाई हाबिल (Abel) की हत्या की।

 tower of Babel — बाबेल की मीनार, मनुष्यों द्वारा बनाई गई उस मीनार का बाइबिलीय प्रसंग।

 Sodom — सदोम, जिस पर उसके पापों के कारण अग्नि बरसने का वर्णन बाइबिल में मिलता है।

[10] दाऊद बाइबिल के प्रसिद्ध राजा थे, जिन्होंने गोलियत को हराकर और बाद में इस्राएल के राजा बनकर ख्याति पाई। बतशेबा के साथ उनके संबंध और उसके पति ऊरिय्याह की मृत्यु का प्रसंग उनके जीवन के पाप, पश्चात्ताप और ईश्वर की क्षमा को दर्शाता है।

[11] अय्यूब (Job) बाइबिल के एक धर्मी और धैर्यवान व्यक्ति थे, जिनकी ईश्वर में गहरी आस्था थी। उनके जीवन में अनेक भयंकर दुःख और परीक्षाएँ आईं, फिर भी उन्होंने ईश्वर पर अपना विश्वास बनाए रखा। उनकी कथाअय्यूब की पुस्तक’ (Book of Job) में मिलती है।

 

[12] प्रभु की स्तुति करोHallelu - स्तुति करो/प्रशंसा करो, Yah - यहोवा (ईश्वर)

[13] बाइबिलीय/ईसाई संदर्भ में Lamb (मेमना) अक्सर यीशु मसीह के लिए प्रयुक्त होता है। उन्हें “Lamb of God” (परमेश्वर का मेमना) कहा जाता है, क्योंकि वे मानवजाति के पापों के लिए बलिदान हुए माने जाते हैं।

[14] मसीह की सेवा में कार्य करने वाले

[15] बाइबिल में सिय्योन मुख्यतः यरूशलेम/परमेश्वर के नगर का प्रतीक है। इसलिएसिय्योन की बेटियाँ” का अर्थ है सिय्योन की स्त्रियाँ, अर्थात यरूशलेम की महिलाएँ या रूपक रूप में परमेश्वर के लोगों की स्त्रियाँ। बाइबिल में इसका अर्थ एक जैसा नहीं है।

[16] पुराने नियम के अनुसार एक नबी थे। यह बाइबिल की योना (Jonah) की कथा का संदर्भ है। योना नीनवे जाने के बाद एक पौधे/बेल की छाया में बैठा था। परमेश्वर ने वह पौधा उगाया, जिससे योना को धूप से राहत मिली।

[17] यह बाइबिल के उत्पत्ति ग्रंथ की घटना का संदर्भ है। एक रूपक/परंपरागत अभिव्यक्ति है, जिसका आशय है कि ओनान ने संभोग के दौरान वीर्य को बाहर गिराया ताकि उसके भाई के नाम से संतान उत्पन्न न हो।

[18] बाइबिल की कथाओं में threshing-floor कई बार महत्वपूर्ण स्थान के रूप में आता है, जैसे रूत और बोअज़ की कथा में।

[19] यह बाइबिल के पुराने नियम (Old Testament) की एक पुस्तक है।

[20] हाबिल भेड़-बकरियाँ चराता था, जबकि कैन खेती करता था। दोनों ने परमेश्वर को भेंट चढ़ाई। परमेश्वर ने हाबिल की भेंट को स्वीकार किया, जिससे कैन ईर्ष्यालु हो गया और उसने हाबिल की हत्या कर दी। इसी के बाद बाइबिल में परमेश्वर कैन से कहते हैं, तुम्हारे भाई के लहू की आवाज़ भूमि में से मेरी ओर पुकार रही है।”

 

[21] इस प्रसंग में holy fire से आशय उस ईश्वरीय आध्यात्मिक शक्ति, धार्मिक उन्माद या आत्मिक अनुभूति से है, जिसने उस व्यक्ति को पहले कभी गहराई से बदल दिया था।

[22] यह संदर्भ नए नियम की “प्रकाशितवाक्य” (Revelation) पुस्तक के आरंभ से है। यूहन्ना बताता है कि वह पतमुस द्वीप पर निर्वासित था और “प्रभु के दिन” आत्मा में था, तभी उसे दिव्य दर्शन प्राप्त हुआ।

[23] Pentecost (पिन्तेकुस्त) ईसाई धर्म का एक महत्वपूर्ण दिन है। बाइबल के प्रेरितों के काम (Acts), अध्याय 2 में बताया गया है कि इस दिन यीशु के शिष्यों पर पवित्र आत्मा उतरा और वे विभिन्न भाषाओं में बोलने लगे। इसे ईसाई परंपरा में पवित्र आत्मा के अवतरण/आगमन का दिन माना जाता है।

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